थाईलैंड के पास समुद्र में फंसे 150 से ज्यादा रोहिंग्या
७ दिसम्बर २०२२
एक्टिविस्टों के एक समूह ने दावा किया है कि कम से कम 150 रोहिंग्या शरणार्थी थाईलैंड के पास समुद्र में एक खराब नाव में फंसे हुए हैं. आशंका व्यक्त की जा रही है कि संभवतः उनमें से कई मारे जा चुके हैं.
फाइल तस्वीरतस्वीर: Aditya Setiawan via REUTERS
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रोहिंग्या शरणार्थियों को लिए यह नाव नवंबर के अंत के दिनों में बांग्लादेश से निकली थी. मानवाधिकार समूह 'द अराकान प्रोजेक्ट' की निदेशक क्रिस लेवा ने कहा कि नाव जब दक्षिणी थाईलैंड के रानोंग के तट के पास से गुजर रही थी तब उसमें कहीं से पानी घुसने लगा.
यात्रियों के रिश्तेदारों से की गई बातचीत के आधार पर लेवा ने बताया, "उनके पास पानी और भोजन लगभग खत्म हो गया है." उन्होंने यह भी कहा कि नाव पर मौजूद लोग नाव से पानी निकालने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. उन लोगों ने थाईलैंड की नौसेना की एक नाव देखी थी लेकिन उसने उनकी मदद नहीं की.
नौसेना के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि नाव थाईलैंड की जल सीमा में दाखिल नहीं हुई थी और अभी भारत के क्षेत्र में थी. इस अधिकारी ने अपना नाम ना जाहिर करने को कहा क्योंकि वो मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं.
रोहिंग्या शरणार्थियों को अलग टापू पर बसाने का विरोध
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नाव पक्के तौर पर इस समय कहां है यह स्पष्ट नहीं हो पाया. थाईलैंड में रहने वाले रोहिंग्या एक्टिविस्ट सईद आलम ने भी यात्रियों के रिश्तेदारों से बातचीत के आधार पर बताया कि कुछ यात्रियों की मौत हो गई. रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं कर पाया.
उन्होंने कहा, "उनकी हालत बहुत खराब है...वो दुर्बल हो गए हैं और अगर उन्हें कोई मदद न मिली तो वो मर जाएंगे." शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था (यूएनएचसीआर) ने पिछले सप्ताह कहा था कि इस साल म्यांमार और बांग्लादेश के बीच अंडमान सागर को पार करने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या में "नाटकीय बढ़त" देखी गई है.
यह दुनिया की सबसे खतरनाक समुद्री यात्राओं में से है जिसे इस साल कम से कम 1,900 लोगों ने पूरा किया है. 2020 के मुकाबले यह संख्या छह गुना ज्यादा है. एजेंसी ने बताया कि सिर्फ इसी साल में इस यात्रा को पूरा करने की कोशिश में कम से कम 119 लोग मर गए हैं.
यूएनएचसीआर के एक प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसी "नाव की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद चिंतित" है और थाईलैंड की सरकार से अपील कर रही है कि वो उन्हें बचा ले और नाव से सुरक्षित उतरने में मदद करे. हर साल कई रोहिंग्या म्यांमार में दमन और हिंसा से और बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की गंदगी से भागने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर इस तरह की यात्रा करते हैं.
इनमें से कई मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं. हाल के दिनों में ऐसी यात्राएं करने वालों की संख्या बढ़ गई है. 2017 में 7,30,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में सेना के एक हिंसक अभियान से बचने के लिए वहां से भाग कर बांग्लादेश चले गए थे.
सीके/एए (रॉयटर्स)
करीब 100 रोहिंग्या शरणार्थियों का एक समूह चार महीनों की समुद्री यात्रा कर जब इंडोनेशिया पहुंचा, तो प्रशासन ने उन्हें उतारने से इंकार कर दिया. लेकिन स्थानीय लोगों ने सरकार से लड़ कर शरणार्थियों को बचाया और वहां शरण दी.
तस्वीर: Getty Images/AFP/R. Mirza
जोखिम भरी यात्रा
करीब 100 लोगों के इस समूह को इंडोनेशिया के मछुआरों ने 24 जून को देखा और अधिकारियों को सूचित किया. लेकिन प्रशासन ने कोविड-19 की चिंताओं को लेकर इन्हें उतारने की अनुमति नहीं दी.
तस्वीर: Reuters/Antara Foto/Rahmad
सरकार से लड़ कर बचाया
इंडोनेशिया के आचेह प्रांत के लोगों ने प्रशासन के आदेश का विरोध किया और इसके खिलाफ जाकर रोहिंग्याओं को खुद नाव से उतरा.
तस्वीर: Reuters/Antara Foto/Rahmad
चार महीनों बाद जमीन पर
शरणार्थियों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान तस्करों ने उन्हें बहुत मारा. अपना मूत्र पी कर वे जीवित रहे. रास्ते में कुछ की मृत्यु भी हो गई और उनके शव को मजबूरी में नाव से समुद्र में फेंकना पड़ा.
तस्वीर: Reuters/Antara Foto/Rahmad
बांग्लादेश में भी रह ना सके
ये सभी म्यांमार से अपनी जान बचा कर बांग्लादेश पहुंचे थे, लेकिन वहां के शरणार्थी शिविरों के अमानवीय हालात से भी भागने पर मजबूर हो गए.
तस्वीर: Reuters/Antara Foto/Rahmad
तस्करों की दया पर
इन रोहिंग्याओं का कहना है कि नाव पर खाना खत्म हो जाने के बाद तस्करों ने इन्हें एक दूसरी नाव में बिठा दिया और समुद्र में बहने के लिए छोड़ दिया. आचेह में आप्रवासियों के एक केंद्र पर इंटरनेशनल आर्गेनाईजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) की देख-रेख में पहचान पत्र के लिए इंडोनेशिया की पुलिस द्वारा तस्वीर खिंचवाता एक रोहिंग्या शरणार्थी.
तस्वीर: AFP/C. Mahyuddin
महिलाएं और बच्चे भी
समूह में 48 महिलाएं और 35 बच्चे भी हैं. एक महिला की रास्ते में मृत्यु हो गई और उसके बच्चे अकेले रह गए. तीन और बच्चे नाव पर बिना माता-पिता के आए थे. समूह में एक गर्भवती महिला भी है. तस्वीर में रोहिंग्या महिलाएं आप्रवासियों के केंद्र के बाहर पुलिस की पहचान प्रक्रिया से गुजरती हुईं.
तस्वीर: AFP/C. Mahyuddin
हर साल वही कहानी
आप्रवासियों के केंद्र के बाहर बैठा हुआ एक रोहिंग्या शरणार्थी. हर साल हजारों सताए हुए रोहिंग्या तस्करों को पैसे देकर पनाह की तलाश में समुद्र के जोखिम भरे सफर पर निकल पड़ते हैं. आईओएम के अनुसार इस साल अभी तक कम से कम 1400 रोहिंग्या समुद्र में फंसे मिले हैं.
तस्वीर: AFP/C. Mahyuddin
चैन की नींद, फिलहाल
म्यांमार में अपने घरों से और बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से हजारों मील दूर जान की बाजी लगा कर पहुंचे आचेह के आप्रवासी केंद्र में चैन की नींद लेते रोहिंग्या शरणार्थी. जाने इनके भविष्य में आगे क्या है.