एक साल से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष में नाटो और यूरोपीय संघ ने हथियार भेजने से लेकर क्षेत्रिय सुरक्षा को बरकरार रखने समेत कई तरह से यूक्रेन की मदद की है. अब इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए दोनों पक्षों ने एक ब्रसेल्स स्थित नाटो मुख्यालय में संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. इसमें मिलकर कहा है कि ऐसा सहयोग "पहले से कहीं ज्यादा अहम हो चुका है."
अमेरिका के नेतृत्व वाले 'नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन' (नाटो) के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, "हमें नाटो और यूरोपीय संघ के बीच अपनी साझेदारी को और मजबूत बनाना जारी रखना होगा. और यूक्रेन को दिए जा रहे हमारे सहयोग को भी."
नाटो और ईयू के देशों को मिलाकर देखें तो इसमें 21 सदस्य देश आते हैं. इन्होंने हमले की शुरुआत के समय से अब तक अरबों डॉलर के हथियार यूक्रेन भेजे हैं, जिससे रूसी सेनाओं को थामे रखने में काफी मदद मिली है.
अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस घोषणा कर चुके हैं कि वे यूक्रेन को हथियारबंद लड़ाकू वाहन भी सप्लाई करेंगे. वहीं यूक्रेन की गुजारिश है कि उसे आधुनिक भारी टैंक भेजे जाएं. यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला फॉन डेय लायन ने कहा, "यूक्रेन को सब जरूरी सैन्य उपकरण मिलने चाहिए जिनकी उसे जरूरत है और जिनसे वो अपने घर को सुरक्षित रख सकें."
उन्होंने साफ कहा कि "जाहिर है कि इसमें एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम शामिल होंगे और दूसरे कई तरह के एडवांस सैन्य उपकरण भी."
स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगी अगले हफ्ते यूक्रेन के रक्षा मंत्री से मिलेंगे और उनसे जानेंगे कि "उन्हें किस तरह के हथियार चाहिए और सहयोगी देश उन्हें वो सब कैसे मुहैया करा सकते हैं."
मॉस्को के हमले के समय से यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. कई जानकारों का मानना है कि पूरे महाद्वीप की रक्षा के लिए ईयू और नाटो को और ज्यादा करीबी सहयोग करने की जरूरत है. नाटो के पीछे पूरी अमेरिकी सैन्य शक्ति है जिस पर यूरोप भी अपनी सुरक्षा के लिए काफी हद तक निर्भर करता है. कई सालों से दोनों पक्ष आपसी सहयोग को और गहराने पर चर्चा करते आए हैं.
सन 2016 से लेकर अब तक यह तीसरा संयुक्त घोषणापत्र है. दोनों पक्ष साइबर सुरक्षा के मामले में अपने मूलभूत ढांचे को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दे रहे हैं. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर यूरोप के भीतर सेना को ज्यादा आसानी से एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए भी मजबूत ढांचा तैयार करने की मंशा है. इन्हें बनाने के अलावा, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए भी पहले से ही तैयारी की जाएगी.
आरपी/आरएस (एएफपी)
रूस कई फ्रंट से यूक्रेन पर हमला कर रहा है. हवाई बमबारियों के अलावा यूक्रेन पर क्रूज और बलिस्टिक मिसाइल भी दागे जाने की खबर है. पुतिन ने यूक्रेन की सेना से समर्पण करने को कहा है.
तस्वीर: Anatolii Stepanov/AFPराष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि दुनिया की प्रार्थना यूक्रेनी जनता के साथ है. उन्होंने रूस को चेताया, "राष्ट्रपति पुतिन ने जानबूझकर युद्ध शुरू किया है. इसके चलते होने वाली मौतों और बर्बादी का जिम्मेदार केवल रूस होगा. अमेरिका और साथी देश संगठित होकर मजबूती से इसका जवाब देंगे. पूरी दुनिया रूस को जिम्मेदार मानेगी."
तस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/picture alliance चांसलर ओलाफ शॉल्त्स ने कहा, "24 फरवरी की यह तारीख यूक्रेन के लिए भीषण और यूरोप के लिए मायूस करने वाली है. हम रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाएंगे, ताकि रूसी नेतृत्व के आगे साफ हो जाए कि उन्हें इस हमले की बड़ी कीमत चुकानी होगी. पुतिन ने यह युद्ध शुरू करके गंभीर चूक की है. जर्मनी नाटो की प्रतिबद्धताओं के साथ खड़ा है."
तस्वीर: Michael Kappeler/Pool via REUTERSप्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, "यूक्रेन में हो रही भीषण घटनाओं से मैं स्तब्ध हूं. आगे क्या करना है, इसपर मैंने राष्ट्रपति जेलेन्स्की से बात की है. बिना किसी उकसावे के यूक्रेन पर हमला करके राष्ट्रपति पुतिन ने खूनखराबे और बर्बादी का रास्ता चुना है. ब्रिटेन और हमारे सहयोगी डटकर इसका जवाब देंगे."
तस्वीर: Matt Dunham/AP Photo/picture allianceराष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद एक आपातकालीन बैठक बुलाई. इस मुद्दे पर राष्ट्र के नाम उनका एक संदेश टीवी पर भी प्रसारित हुआ. इसमें माक्रों ने कहा, "फ्रांस, यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा." फ्रेंच विदेश मंत्री जॉं ईव लु द्रियॉं ने भी कहा कि फ्रांस, हर तरह से यूक्रेन को समर्थन देगा.
तस्वीर: John Thys/AP/picture alliance चीन ने यूक्रेन पर किए गए रूसी हमले को 'आक्रमण' कहे जाने का विरोध किया है. विदेश मंत्री वांग यी ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को फोन भी किया. इसमें उन्होंने कहा कि चीन समझता है कि यूक्रेन मामले का अपना एक जटिल इतिहास है. उन्होंने लावरोव से यह भी कहा कि चीन सुरक्षा से जुड़ी रूस की जायज चिंताओं को भी समझता है.
तस्वीर: Keith Tsuji/ZUMA/picture alliance प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने रूसी हमले की निंदा की. उन्होंने कहा कि रूस को इस आक्रामकता की सजा मिलेगी. ट्रूडो बोले, "बिना किसी उकसावे के किया गया यह हमला यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है. हम रूस से अपील करते हैं कि वह अपनी सेना और प्रॉक्सी फोर्स को यूक्रेन से निकाल ले."
तस्वीर: Adrian Wyld/empics/picture alliance राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने हमले की निंदा की. टीवी पर प्रसारित अपने भाषण में एर्दोआन ने कहा, "हम यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करना जारी रखेंगे." एर्दोआन ने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन, दोनों से तुर्की के करीबी संबंध हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष देखकर उन्हें बहुत निराशा हो रही है.
तस्वीर: Irina Yakovleva/ITAR-TASS/imago imagesइस मामले पर अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान नहीं आया है. मगर यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने यूएनएससी में भारत का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने मौजूदा घटनाक्रम पर दुख जताते हुए तनाव को तत्काल घटाने की अपील की. यह भी कहा कि सभी संबंधित पक्षों की जायज सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
तस्वीर: Amit Dave/REUTERSराष्ट्रपति मून जे-इन ने कहा कि उनका देश रूस पर लगाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों का साथ देगा. राष्ट्रपति आवास ने एक बयान जारी कर कहा, "यूक्रेन की आजादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहनी चाहिए. ताकत का इस्तेमाल करके निर्दोषों को नुकसान पहुंचाने का किसी हाल में समर्थन नहीं किया जा सकता है."
तस्वीर: Yonhap/REUTERSविदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दोल्लाहियां ने एक ट्वीट में लिखा कि ईरान समस्या सुलझाने के लिए युद्ध का सहारा लेने में यकीन नहीं करता है. ईरान ने नाटो के उकसावे को यूक्रेन संकट की जड़ बताते हुए राजनैतिक और कूटनीतिक समाधान की अपील की.
तस्वीर: Michael Gruber/AP Photo/picture allianceइटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी ने कहा कि सारे सहयोगी एकजुट हैं. यूक्रेन की संप्रभुता, यूरोपीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और साझा मूल्य बनाए रखने के लिए जो भी करना पड़े, वे साथ मिलकर करेंगे. पीएम द्रागी ने यह भी कहा कि समय आ गया है कि यूरोपीय संघ रूस पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाए.
तस्वीर: ALBERTO PIZZOLI/AFPप्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने कहा कि यूरोपीय संघ और नाटो के अपने साथियों के साथ मिलकर हंगरी भी रूस के हमले की निंदा करता है. उन्होंने यह भी कहा कि हंगरी के लिए अपने लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. इसीलिए इस सैन्य संघर्ष से बाहर रहते हुए वह यूक्रेन को मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है.
तस्वीर: Tamas Kovacs/MTI via AP/picture allianceयूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ग्रीस ने अपनी सेना और एनर्जी स्टाफ की आपातकालीन बैठक बुलाई. इसमें प्रधानमंत्री किरयेकोस मित्सोताइकिस ने रूसी हमले की निंदा की. राष्ट्रपति कैटरीना सैकलारापुलू ने भी कहा कि एक आजाद देश पर किए गए रूसी हमले की वह कड़ी निंदा करती हैं.
तस्वीर: Ludovic Marin/AFP/AP/picture allianceइस्राएल ने रूसी हमले को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लंघन बताया. विदेश मंत्री याइर लैपिड ने रूस की निंदा करते हुए यह भी कहा कि इस्राएल के रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते हैं. उन्होंने दोनों देशों में रहने वाले यहूदियों की भी बात की. कहा कि उनकी सुरक्षा इस्राएल के लिए अहम है.
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