नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने कहा है कि वो सभी लोगों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं. ये बात उन्होंने नेपाल के नए संविधान के बारे में कही है, जिसे लेकर भारत की आपत्तियां रही हैं.
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भारत से लगने वाले नेपाल के तराई क्षेत्र में रहने वाले मधेसी लोगों का कहना है कि संविधान में उनके हितों का पूरा ध्यान नहीं रखा गया है. इसे लेकर महीनों तक विरोध प्रदर्शन हुए और भारत पर नेपाल की नाकेबंदी करने के आरोप भी लगे. इसके कारण भारत और नेपाल के रिश्ते खासे तनावपूर्ण हो गए.
लेकिन प्रचंड ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद भारत को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुना है. इससे पता चलता है कि वो भारत से संबंध सुधारने को लेकर गंभीर हैं. वो गुरुवार को चार दिन के भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे. प्रचंड दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने हैं. इससे पहले नए संविधान को लेकर मधेसियों के विरोधी प्रदर्शनों के बीच जुलाई में केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया.
शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद प्रचंड ने कहा, "हम नेपाली समाज के सभी वर्गों के हितों में नए संविधान को लागू के चरण में दाखिल हो चुके हैं और आप जानते है कि मेरी सरकार ने सभी को साथ लेकर चलने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं. "वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेपाल को "विविधता वाले समाज के सभी वर्गों की उम्मीदों का ध्यान रखते हुए व्यापाक संवाद के जरिए सफलतापूर्वक संविधान को लागू किया जाना चाहिए."
देखिए, भूकंप के सालभर बाद कैसा हुआ नेपाल
25 अप्रैल 2015 की दोपहर, नेपाल में 7.8 तीव्रता वाले उस भूकंप ने करीब 9,000 लोगों की जिंदगी छीन ली. जो बच गए, वो आज भी स्तब्ध से हैं. ऐसा दिखता है नेपाल साल भर बाद.
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सिरहीन स्तूप
नेपाल की राजधानी काठमांडू का बुद्धनाथ विश्व सांस्कृतिक विरासत है. यहां का स्तूप हिमालय आने वाले बौद्धों के लिए धार्मिक आस्था से भरा है. अप्रैल 2015 में आए भूकंप ने स्तूप के सिरे को ध्वस्त कर दिया. अब इसके पुर्ननिर्माण का काम चल रहा है.
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मंदिर ध्वस्त
दरबार चौक भी यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर है. इस मंदिर को भी काफी नुकसान पहुंचा. ज्यादातर मंदिर ध्वस्त हो गए, जो बचे, उनकी हालत भी जर्जर है.
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अवशेषों के बीच जिंदगी
भूकंप के बाद से ही काठमांडू के लोग इस तरह के हालात में जी रहे हैं. फिलहाल अतिआवश्यक चीजों को ही ठीक किया जा रहा है.
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साल भर पहले का वो दिन
काठमांडू के पूर्व में बसे सिंधुपालचौक जिले ने खासतौर पर सबसे ज्यादा मार झेली. चौतारा के 15,000 लोगों को आज भी बहुत कम राहत मिली है, ऐसा लगता है जैसे भूकंप हाल ही में उनकी जिंदगी बर्बाद करके गया हो.
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टेंट में अस्पताल
चौतारा में यह अस्पताल का इमरजेंसी रूम है. डॉक्टरों को हमेशा टेंट में ही ऑपरेशन करने पड़ रहे हैं. अस्पताल की पुरानी इमारत को इतना ज्यादा नुकसान पहुंचा है कि बड़े पैमाने पर पुर्ननिर्माण करना पड़ेगा.
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शहर का यह मंजर
अब सिंधुपालचौक के ज्यादातर लोग ऐसे जीवन बिता रहे हैं. 80 फीसदी से ज्यादा घर भूकंप में तबाह हो गए. दूर दराज के इलाकों में भूचाल की मार झेलने वाले लोग भी यहीं आ गए हैं.
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संक्रामक बीमारियां
केबिन एक दूसरे से सटे हुए हैं. लोगों को बड़ी संख्या में तंग जगहों पर रहना पड़ रहा है. ऐसे में सक्रांमक बीमारियां भी काफी आसानी से फैलती है.
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खुद की मदद
भूकंप प्रभावित इलाकों के लोग सरकार से मायूस हो चुके हैं. अब वह खुद से जो कुछ बन रहा है, वह कर रहे हैं.
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बेखबर खंडहर
सिंधुपालचौक के करीब सभी स्कूल या तो पूरी तरह ध्वस्त हो गए या कभी भी ढहने की कगार पर हैं. इक्का दुक्का स्कूल ही ऐसे हैं जिनकी मरम्मत मुमकिन है.
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सर्दी और शोरगुल
पढ़ाई लिखाई का काम टिनशेडों या लोहे के केबिनों में हो रहा है. इनके भीतर कड़ाके की सर्दी और काफी ज्यादा शोरगुल बना रहता है.
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मलबा ही मलबा
चलते फिरते समय हर वक्त इस बात का अहसास होता है कि साल भर पहले यहां क्या हुआ था. मलबा उस विनाशकारी भूकंप की लगातार गवाही देता है. थुलोसिरुबाड़ी के स्कूल का मैदान बीते एक साल से ऐसा दिखता है.
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एवरेस्ट इलाके में कम नुकसान
खुम्बू इलाका भी भूकंप से प्रभावित तो हुआ लेकिन सिंधुपालचौक जैसी तबाही यहां नहीं हुई. इसके बावजूद इन इलाकों में बहुत कम सैलानी पहुंच रहे हैं.
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प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि नेपाल और भारत का भाग्य आपस में एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत ने नेपाल का हर कदम पर साथ दिया है. प्रचंड ने भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को जल्द नेपाल आने का न्यौता भी दिया है. इस मौके पर मोदी ने पिछले साल आए भूकंप के बाद नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान किया है.
नेपाल ने 2006 में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद देश का नया संविधान बनाने पर काम शुरू किया था, लंबे गतिरोध के बाद इस पर पिछले साल जाकर सांसदों की अंतिम सहमति बनी. लेकिन मधेसी लोगों का कहना है कि उन्हें संविधान में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है और ये मुद्दा अब भी अनसुलझा है. नेपाल की संसद ने जनवरी में संविधान में संशोधन किए, ताकि सरकारी संस्थाओं में मधेसियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके लेकिन उनका कहना है कि संविधान संशोधनों में उनकी मुख्य मांगों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया है.
एके/वीके (एएफपी, पीटीआई)
यह भी देखें, किन देशों में नहीं है वीसा की जरूरत
भारतीय पासपोर्ट धारकों को 24 देशों में वीजा की जरूरत नहीं पड़ती. इनके अलावा 27 दूसरे देश भी वीजा ऑन अराइवल देते हैं. एक नजर इनमें से कुछ अहम देशों पर.
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बोलिविया
90 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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केप वेर्डे
30 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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फिजी
4 महीने तक वीजा की जरूरत नहीं.
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इक्वाडोर
90 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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इथियोपिया
30 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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इंडोनेशिया
30 दिन के लिए वीजा की जरूरत नहीं, लेकिन यात्रा का मकसद पर्यटन होना चाहिए.
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जॉर्डन
वीजा ऑन अराइवल, दो हफ्ते की होटल बुकिंग और पर्याप्त बैंक बैलेंस का सबूत.
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केन्या
तीन महीने के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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मिक्रोनेशिया
30 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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मलेशिया
30 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल
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कतर
वीजा ऑन अराइवल, 30 दिन की अवधि के हिसाब से शुल्क.
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सर्बिया
वीजा का जरूरत नहीं.
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सूरीनाम
90 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल.
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यूक्रेन
15 दिन के लिए वीजा ऑन अराइवल, टूरिज्म या बिजनेस डॉक्यूमेंट्स के साथ.
'विजिटर्स परमिट' लेकर भारतीय यात्री सेशल्स में तीन महीने तक रह सकते हैं. सुंदर समुद्री किनारों के अलावा सेशल्स में ईको टूरिज्म भी जोर पकड़ रहा है.
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थाईलैंड
शॉपिंग के गढ़ के रूप में काफी मशहूर हो चुके थाईलैंड में खूबसूरत द्वीप, गुफाएं और साफ नीले रंग के समुद्र वाले तट भी हैं. थाईलैंड के एयर पोर्ट पर उतरने के बाद वीसा ले सकते हैं.
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भूटान
भारतीयों के अलावा बांग्लादेश और मालदीव के नागरिकों को भी भूटान जाने के लिए वीसा की कोई जरूरत नहीं है. हिमालय की ऊंचाईयों पर बसे इस छोटे से देश में कई हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित टाइगर्स नेस्ट बौद्ध मठ बहुत पवित्र स्थल माना जाता है.
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मालदीव
यहां के लिए भी भारतीयों को पहले से वीसा लेने की कोई जरूरत नहीं. अपना होटल बुक कीजिए, बैंक अकाउंट की कुछ जानकारी जमा कीजिए और बाकी काम हवाई जहाज में बैठने के बाद कर सकते हैं. सफेद रेतीले समुद्री किनारे आपका मन मोहने को तैयार मिलेंगे.
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मॉरिशस
हिंद महासागर में बसे इस ज्वालामुखी द्वीप देश के ट्रॉपिकल नजारों का आनंद उठाने पहुंचिए. बिना वीसा की चिंता किए तैयारी कीजिए सफेद रेत पर पीना कोलाडा पीते हुए सुस्ताने की.
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कंबोडिया
अंगकोरवाट के प्राचीन स्मारक या फिर टोन्ले सैप के तैरते हुए गांव - वीसा पाने के चक्करों में पड़े बिना ये आपको कंबोडिया में अपनी छुट्टियां बिताने का निमंत्रण देते हैं.
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मैडागास्कर
घने वर्षा वनों वाले इस देश में पहुंचने वाले भारतीयों को आसानी से वीसा मिल जाता है. दुनिया में केवल इसी विशाल द्वीप पर प्राइमेट प्रजाति लीमर मिलती है. कई अनोखे अनुभवों के लिए करें इस विदेश यात्रा की तैयारी.
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श्रीलंका
दो दिनों की ट्रिप के लिए भारतीयों को कोई वीसा फीस नहीं देनी पड़ती. सीधे हवाई जहाज से पहुंचिए और श्रीलंका के समृद्ध वन्य जीवन, खूबसूरत समुद्री तटों और बहुरंगी संस्कृति का लुत्फ उठाइए. लंबे समय तक घूमना चाहें तो कुछ वीसा फीस भरनी पड़ेगी.
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लाओस
यहां पहुंच कर वीसा लीजिए और अगले 30 दिनों तक लाओस के खूबसूरत नजारों का आनंद लीजिए. फ्रांसीसी उपनिवेश की याद दिलाने वाली वास्तुकला, पहाड़ी आदिवासी बस्तियां और बौद्ध मठों की सैर करें.
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कैरेबियन द्वीप समूह
क्रिकेट प्रेमियों के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा जरूरी है. यह वेस्ट इंडीज की टीम में शामिल प्रमुख देश है. इसके अलावा पास ही स्थित अल सल्वाडोर और सेंट लूसिया में भी भारतीयों को वीसा ऑन अराइवल की सुविधा है.
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नेपाल
हिमालय पर्वत की श्रृंखलाएं, बौद्ध मठ, मंदिर, घने जंगलों की सैर - हर तरह के टूरिस्ट के लिए यहां कुछ ना कुछ मिलेगा. वीसा की चिंता किए बिना भारतीय सीधे निकल सकते हैं नेपाल की यात्रा पर.