नेतन्याहू नहीं, गादी आइजेनकोट को मिला नई सरकार बनाने का न्योता
८ नवम्बर २०२६
इस्राएल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनावों में न तो मौजूदा प्रधानमंत्री नेतान्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिला और न ही आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को. ऐसे में, सबकी नजरें इस बात पर टिकी थीं कि राष्ट्रपति हेर्त्सोग पहले किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे.
हालांकि, आइजेनकोट को राष्ट्रपति की तरफ से न्योता मिलने से यह तय नहीं हो जाता कि वही देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे. रविवार को एक समारोह के बाद आइजेनकोट संभावित साझेदारों के साथ सरकार बनाने की बातचीत शुरू करेंगे. फिर उनके पास सरकार बनाने के लिए छह हफ्ते का समय होगा.
चुनाव में किसी को नहीं मिला स्पष्ट बहुमत
इस्राएल में जनता पार्टियों को वोट देती है, किसी एक उम्मीदवार को नहीं. और फिर पार्टियां आपस में गठबंधन बनाती हैं. 120 सदस्यों वाली इस्राएली संसद क्नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है. हालिया चुनावों में नेतन्याहू का गठबंधन 68 सीटों से घटकर 53 पर आ गया, जबकि आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं. वहीं अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 19 सीटें मिलीं.
पिछले हफ्ते हुई बातचीत के बाद, हेर्त्सोग ने तय किया कि गठबंधन बनाने के लिए आइजेनकोट के पास सबसे अच्छा मौका है क्योंकि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने उन्हें समर्थन देने की बात कही है. हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि आइजेनकोट उन्हें गठबंधन में शामिल करेंगे या नहीं, क्योंकि पिछले तीन सालों के गाजा युद्ध के बाद उनके लिए अरब पार्टियों के साथ काम करना राजनीतिक रूप से कठिन माना जा रहा है
आइजेनकोट के सामने खड़ी हैं चुनौतियां
आइजेनकोट के पास सरकार बनाने के तीन रास्ते हैं: नेतन्याहू के साथ सत्ता में आना, अरब पार्टियों का समर्थन लेना, या फिर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (कट्टरपंथी धार्मिक) पार्टियों के साथ समझौता करना. अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां अपने समुदाय के लिए सैन्य सेवा से छूट की मांग कर रही हैं. वहीं पूर्व सेना प्रमुख आइजेनकोट और उनके साथी सभी के लिए समान सैन्य सेवा के पक्ष में हैं और वे इस छूट को खत्म करना चाहते हैं.
राष्ट्रपति के फैसले के बाद आइजेनकोट ने कहा, "मैं जल्द से जल्द सरकार बनाने की कोशिश करूंगा." लेकिन इसके लिए उन्हें कई वादों से समझौता करना पड़ सकता है. दूसरी ओर, नेतन्याहू ने बिना किसी सबूत के दावा किया है कि अरब पार्टियों ने चुनाव "चुरा" लिया है. उन्होंने आइजेनकोट के साथ 'राष्ट्रीय एकता' का दावा कर सरकार बनाने की अपील भी की है, लेकिन दोनों के बीच समझौते की संभावना कम है.
सहयोगियों और धार्मिक पार्टियों का रुख
आइजेनकोट को दो अरब पार्टियों का समर्थन मिल सकता है. राम पार्टी ने समर्थन देने की बात कही है, जबकि जॉइंट लिस्ट पार्टी गठबंधन से बाहर रहकर समर्थन दे सकती है. लेकिन आइजेनकोट के एक सहयोगी दल, कंजरवेटिव 'इस्राएल बीतेनु' पार्टी ने साफ कह दिया है कि वे अरब पार्टियों वाले गठबंधन में शामिल नहीं होंगे.
इसके अलावा, आइजेनकोट की शर्त है कि गठबंधन में शामिल होने वाली हर पार्टी को सैन्य सेवा का समर्थन करना होगा. अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां अपनी छूट बनाए रखना चाहती हैं, लेकिन 'यूनाइटेड तोराह जुडाइस्म' पार्टी ने आइजेनकोट के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं.
अब रविवार को आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी मिलने के बाद आइजेनकोट के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे, जिसे राष्ट्रपति 14 दिन और बढ़ा सकते हैं. यदि आइजेनकोट सरकार नहीं बना पाते हैं, तो नेतन्याहू को मौका दिया जा सकता है. अगर वे भी नाकाम रहते हैं, तो देश में अगले साल की शुरुआत में फिर से चुनाव होंगे. इस बीच, नई संसद मंगलवार शाम को शपथ लेगी और नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे.