यह पुरानी मान्यता है कि मौसम बदलने पर जोड़ों या मांसपेशियों का दर्द बढ़ जाता है. बहुत से लोग कहते हैं कि गठिये का दर्द भी मौसम के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है. लेकिन एक ताजा अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने इस समझ को चुनौती दी है.
ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं को जोड़ों के दर्द और मौसम में कोई संबंध नहीं मिला. शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक तापमान और कम उमस में गाउट का खतरा दोगुना हो सकता है. अपने शोध में उन्होंने पाया कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से गाउट के मरीजों में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ गई.
तापमान से संबंध नहीं
दुनियाभर में बड़े पैमाने पर लोग जोड़ों के दर्द से पीड़ित रहते हैं. ऑस्ट्रेलिया में ही इनकी संख्या एक चौथाई आबादी के करीब है. वैज्ञानिकों ने अपने शोध के जरिए इस आम समझ को चुनौती दी है कि मौसम का असर इस दर्द पर होता है. उन्होंने कहा कि जोड़ों के दर्द को लेकर बहुत सी गलतफहमियां हैं और इसके इलाज के विकल्प बहुत कम हैं.
अमेरिकी दवा कंपनी एली लिली ने कहा है कि कुछ परीक्षणों में पाया गया कि वजन घटाने की उसकी दवा जेपबाउंड ने फैटी लिवर बीमारी के लक्षणों को कम करने में मदद की है. इस तरह की कई दवाओं के दूसरे संभावित फायदों पर शोध चल रहा है.
तस्वीर: Riccardo Antimiani/ANSA/picture allianceएली लिली की मोंजारो हो, जेपबाउंड हो या उसकी प्रतिद्वंदी कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की दवाएं ओजेम्पिक और वेगोवि, वजन कम करने के अलावा इनके और भी फायदे हैं या नहीं यह जाने के लिए इनका अध्ययन किया जा रहा है.
तस्वीर: Cristian Mihaila/Novo Nordisk/AP/picture alliance एली लिली का कहना है कि एक ट्रायल में सामने आया है कि उसकी जेपबाउंड दवा ने फैटी लिवर बीमारी के लक्षण कम करने में मदद की है. यह ट्रायल अभी चल ही रहा है. इसमें देखा गया कि 52 हफ्तों के बाद 73.9 प्रतिशत मरीजों में बीमारी गायब हो गई. इसके मुकाबले प्लेसिबो लेने वाले मरीजों में से सिर्फ 13 प्रतिशत मरीजों में बीमारी गायब हुई.
तस्वीर: Pixelchaos/Panthermedia/IMAGOकोपेनहेगेन विश्वविद्यालय का मनोरोग विभाग एक अध्ययन के जरिए यह जानने की कोशिश कर रहा है कि वेगोवि और ओजेम्पिक के रूप में बिकने वाली दवा "सेमाग्लूटाइड" शराब की लत कम कर सकती है या नहीं. यह परीक्षण 108 ऐसे रोगियों पर किया जा रहा है जिन्हें शराब के सेवन की बीमारी और ओबेसिटी है.
तस्वीर: metodej/Pond5 Images/IMAGOनोवो नॉर्डिस्क ने अल्जाइमर्स के शुरुआती लक्षणों वाले मरीजों पर सेमाग्लूटाइड का परीक्षण शुरू किया है. इसमें 1,840 मरीजों को शामिल किया जाएगा और इसका प्राथमिक चरण 2025 में ही पूरा हो जाने की उम्मीद है.
तस्वीर: DAVID HERRAEZ CALZADA/Zoonar/picture allianceएली लिली मोंजारो और जेपबाउंड के रूप में बिकने वाली दवा 'तिरजेपटाइड' का हृदयाघात और ओबेसिटी वाले मरीजों पर परीक्षण कर रही है. लिली की योजना इस अध्ययन में करीब 700 लोगों को शामिल करने की है. उम्मीद की जा रही है कि अध्ययन जुलाई, 2024 तक पूरा हो जाएगा.
तस्वीर: Magicmine/Zoonar/picture allianceहांग कांग के चीनी विश्वविद्यालय में शोधकर्ता हृदयाघात के ऐसे मरीजों पर सेमाग्लूटाइड का परीक्षण कर रहे हैं जिन्हें मस्तिष्क तक जाने वाली बड़ी रक्त धमनियों में ब्लॉकेज की वजह से दिल का दौरा पड़ा. इसमें दवा के साथ साथ क्लॉट को मशीनी तरीके से हटाया भी जा रहा है. इस प्रक्रिया की तुलना साधारण इलाज से की जाएगी. इस अध्ययन में करीब 140 मरीजों को शामिल करने की योजना है.
तस्वीर: Carmat/dpa/picture allianceएली लिली की तिरजेपटाइड का गुर्दों की पुरानी बीमारी और ओबेसिटी वाले मरीजों पर परीक्षण किया जा रहा है. यह अध्ययन अभी चल रहा है और इसमें 140 मरीजों को शामिल करने की योजना है.
तस्वीर: Berit Kessler/Zoonar/picture allianceनोवो सेमाग्लूटाइड का परीक्षण नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस नाम की एक आम फैटी लिवर बीमारी के मरीजों पर किया जा रहा है. परीक्षण में करीब 1,200 मरीजों को शामिल किया जाएगा. इसके 2028 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है. लिली की तिरजेपटाइड का भी इसी बीमारी से पीड़ित 200 मरीजों पर परीक्षण किया जा रहा है.
तस्वीर: magicmine/Zoonar/picture allianceडेनिश हेडेक सेंटर में शोधकर्ता सेमाग्लूटाइड का परीक्षण ओबेसिटी से जुड़ी एक ऐसी बीमारी के इलाज के लिए कर रहे हैं जिसमें सिर के अंदर रक्तचाप बढ़ जाता है. इसमें दवा के साथ काफी कम कैलोरी वाले भोजन का भी प्रयोग किया जा रहा है. इस अध्ययन में 50 लोगों को शामिल करने की और अध्ययन को 2025 तक पूरा कर लेने की योजना है.
तस्वीर: ersin arslan/Zoonar/picture allianceलिली की तिरजेपटाइड का ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और ओबेसिटी के मरीजों पर असर का भी अध्ययन किया जा रहा है. मरीजों में दोनों तरह के लोग शामिल हैं - वो जो सोते समय अपने एयरवेज को खुला रखने के लिए सांस लेने के उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं और वो भी जो ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करते. इस अध्ययन में 469 लोगों को शामिल की जाने की उम्मीद की जा रही है. सीके/एए (रॉयटर्स)
तस्वीर: Sergiy Tryapitsyn/PantherMedia/IMAGO सिडनी यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एक बयान में शोधकर्ता प्रोफेसर मानुएला फरेरा ने कहा, "आमतौर पर लोग मानते हैं कि किसी खास मौसम में कमर, कूल्हे या जोड़ों के दर्द और गठिये के दर्द में वृद्धि हो जाती है. हमारा शोध इस समझ को चुनौती देता है और दिखाता है कि बारिश हो या धूप, मौसम का हमारे अधिकतर दर्दों से कोई संबंध नहीं है.”
सिडनी के कोलिंग इंस्टिट्यूट की प्रोफेसर फरेरा और उनकी टीम ने मांसपेशियों और हड्डियों (मस्कोस्केलटल) के दर्द को लेकर अब तक हुए तमाम अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया. लगभग 15 हजार मरीजों के इस डेटा में दर्द के बढ़ने के 28 हजार से ज्यादा मामले शामिल थे. इनमें सबसे ज्यादा मामले घुटने या कूल्हे के गठिये के थे. उसके बाद कमर के निचले हिस्से का दर्द सबसे ज्यादा पाया गया.
मौसम के भरोसे ना रहें
विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि हवा के तापमान, नमी या दबाव में बदलाव या बारिश से दर्द में बढ़ने के मामलों में कोई बदलाव नहीं हुआ था. यानी ऐसा नहीं हुआ कि जब मौसम बदला तो मरीजों का दर्द के इलाज के लिए आना बढ़ गया या कम हो गया. उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ.
वैज्ञानिक कहते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद अगर जीवन में छह बदलाव किए जाएं तो मरने का खतरा बहुत हद तक कम हो सकता है. क्या हैं ये छह बदलाव?
तस्वीर: Kzenon/PantherMedia/picture alliance2011 से 2019 के बीच 40 से 99 साल तक के सात लाख से ज्यादा पूर्व अमेरिकी सैनिकों पर किए गए एक अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने वे छह बदलाव बताए, जो मरने का खतरा कम करते हैं. अगर ये छह के छह बदलाव अपना लिए जाएं तो खतरा 71 फीसदी तक कम हो सकता है.
तस्वीर: YAY/IMAGOसबसे बड़ा असर तो शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से होता है. शोध कहता है कि अगर 40 के बाद व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय रहे, एक्सरसाइज करे तो उसकी मृत्यु का खतरा 46 फीसदी तक कम हो सकता है.
तस्वीर: Christin Klose/dpa/picture alliance धूम्रपान को एकदम बंद कर देने से मृत्यु का खतरा 30 फीसदी तक कम होने की बात कही गई है.
तस्वीर: R. Ben-Ari/abaca/picture allianceजरूरी बदलावों में सेहतमंद खाना खाना तीसरे नंबर पर है. इसमें पौधों से मिले भोजन शामिल करने की बात कही गई है. शोध के मुताबिक ऐसा ना करने वालों के लिए मृत्यु का खतरा 21 फीसदी ज्यादा होता है.
तस्वीर: Olena Yeromenko/Zoonar/picture alliance एक ही बार में बहुत ज्यादा शराब पीना चौथा सबसे बड़ा खतरा है, जो मृत्यु के खतरे को 19 फीसदी तक बढ़ा सकता है. यानी ऐसा ना करने वाले के लिए मृत्यु का खतरा 19 फीसदी कम होता है.
तस्वीर: metodej/Pond5 Images/IMAGOवैज्ञानिक कहते हैं कि रोजाना सात से नौ घंटे की भरपूर नींद लेने से भी मरने का खतरा कम होता है. जो लोग भरपूर नींद लेते हैं उनके लिए मृत्यु का खतरा 18 फीसदी कम होगा.
तस्वीर: Daniel Dash/Zoonar/picture allianceअगर आप सकारात्मक लोगों से मिलते-जुलते हैं और स्वस्थ बातचीत करते हैं तो मृत्यु का खतरा 5 फीसदी कम होगा.
तस्वीर: Kzenon/PantherMedia/picture alliance यह पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें जोड़ों या मांसपेशियों के दर्द का मौसम से संबंध होने पर खोज की गई. शोधकर्ता कहते हैं कि उनके नतीजे उस समझ को एक भ्रांति साबित करते हैं. साथ ही वे मरीजों को भी चेताते हैं कि मौसम के असर के इंतजार में अपने दर्द को नजरअंदाज ना करें.
प्रोफेसर फरेरा कहती हैं, "दर्द में राहत के लिए मरीजों और डॉक्टरों को वजन में कमी और व्यायाम जैसी चीजों पर ध्यान देना चाहिए ना कि इस इंतजार में रहना चाहिए कि मौसम बदलेगा तो दर्द कम हो जाएगा.”