संकट में बैंकों की भूमिका पर रिसर्च को इस साल का नोबेल
१० अक्टूबर २०२२
अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रमुख बेन बेरनैंकी, डगलस डायमंड और फिलिप डिबविग को इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है.
बैंकों की भूमिका पर रिसर्च के लिए इस साल का नोबेल पुरस्कार दिया गया हैतस्वीर: Anders Wiklund/AP/TT News Agency/dpa/picture alliance
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी फॉर साइंस ने सोमवार को नोबेल विजेताओं के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि "बैंकों और आर्थिक संकटों" पर किये उनके रिसर्च के लिए यह पुरस्कार दिया जायेगा.
अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार समिति के सदस्य जॉन हैसलर ने कहा, "बेन बेरनैंकी ने 1983 में सांख्यिकीय विश्लेषणों और ऐतिहासिक स्रोतों के साथ अपने पेपर में दिखाया कि बैंक चलाने के तौर तरीकों ने बैंक को नाकाम कर दिया और यही वो तरीका था जिसने एक मामूली मंदी को 30 के दशक में दुनिया की सबसे नाटकीय मंदी में बदल दिया जिसके बाद हमने आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा संकट देखा."
इन अर्थशास्त्रियों के रिसर्च ने दिखाया है कि किस तरह से बैंकों की नाकामी दुनिया के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट बन सकती है. इन तीनों अर्थशास्त्रियों 1989 की दशक के शुरुआती सालों में अपनी रिसर्च के जरिये यह बताया कि आर्थिक बाजारों को नियम कानूनों में बांध कर रखना कितना जरूरी है और साथ ही आर्थिक संकट से कैसे निबटा जाये.
एकेडमी ने यह भी कहा है, "बेन बेरनैंकी, डगलस डायमंड और फिलिप डिबविग ने अर्थव्यवस्था में खासतौर से आर्थिक संकट के दौर में बैंकों की भूमिका के बारे में हमारी समझ को बहुत बेहतर किया है. रिसर्च की एक अहम खोज यह रही है कि बैंकों को नाकाम होने से बचाना क्यों जरूरी है."
1901 से रसायन के लिए नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है. अक्सर कहा जाता है कि सिर्फ मुश्किल मुद्दों पर ही नोबेल मिलता है. लेकिन इन तस्वीरों को देखने के बाद निश्चित ही यह बात गलत साबित होगी.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
2022ः क्लिक केमिस्ट्री और बायोऑर्थोगोनल केमिस्ट्री के लिये नोबेल
रसायनविज्ञानी कैरोलिन आर बर्टोजी, के बैरी शार्पलेस और डेनमार्क की मॉर्टेन मेल्डल को 2022 का नोबेल पुरस्कार दिया जायेगा.
तस्वीर: TT NEWS AGENCY/REUTERS
2021ः एसिमेट्रिक ऑर्गेनकैटलिसिस के विकास के लिये नोबेल
021 में रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार जर्मन वैज्ञानिक बेंन्यामिन लिस्ट और स्कॉटलैंड में जन्मे डेविड मैकमिलन को मिला था.
तस्वीर: John Minchillo/Martin Meissner/AP Photo/picture alliance
2020ः जेनेटिक कैंचियों की खोज के लिए नोबेल
2020 में रसायान का नोबेल पुरस्कार इमानुएले शारपेंटियर और जेनिफर ए डुडना को जीनोम एडिटिंग की कैंची विकसित करने के लिए दिया गया.
तस्वीर: Youtube/nobelprize
2019ः लिथियम आयन बैट्री के लिए नोबेल
इस साल रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जॉन गुडएनफ, स्टैनली व्हिटिंगम और अकीरा योशिनो को दिया गया. लिथियम आयन बैटरी की खोज के लिए इन्हें पुरस्कार के लिए चुना गया है.
तस्वीर: AFP/TT News/N.H. Jama
2018ः प्रोटीनों के विकास पर नोबेल
2018 रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार दो अमेरिकी फ्रांसिस एच आर्नोल्ड और जॉर्ज स्मिथ और एक ब्रिटिश वैज्ञानिक ग्रेगरी पी विंटर को साझा तौर पर मिलेगा. उन्हें एक खास प्रोटीन विकसित करने के लिए यह पुरस्कार दिया गया.
तस्वीर: Reuters/TT News Agency/J. Ekstromer
2017 क्रायो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी
2017 का रसायन का नोबेल पुरस्कार जाक डुबोशे, योआखिम फ्रैंक और रिचर्ड हेंडरसन को संयुक्त रूप से दिया गया है. इन तीनों को क्रायो इल्केट्रॉन माइक्रोस्कोपी के विकास के लिए यह पुरस्कार दिया गया है.
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2016: मॉलिक्यूलर मशीन का डिजायन
2016 में रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार ज्यां पियरे सुआवेज, सर जे फ्रेजर स्टोडार्ट और बर्नार्ड एएल फेरिंगा को संयुक्त रूप से दिया गया. इन्हें यह पुरस्कार मॉलिक्यूलर मशीन का डिजायन तैयार करने के लिए दिया गया.
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2015: डीएनए रिपेयर
केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार स्वीडन के थोमास लिंडाल, अमेरिका के पॉल मॉडरिच और अमेरिकी तुर्क वैज्ञानिक अजीज सनकार को साझा रूप से मिला है. तीनों ने कोशिकाओं के डीएनए रिपेयर के बारे में अहम खोजें की. उनकी खोजों की मदद से कैंसर और बुढ़ापे की कुछ बीमारियों का इलाज मुमकिन हो सकता है.
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2014 रिजॉल्व्ड फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कॉपी
इस साल का रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जर्मनी के श्टेफान हेल और अमेरिका के एरिक बेत्जिग और विलियम मोएर्नर को सुपर रिजॉल्व्ड फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोपी के लिए दिया गया.
1902: मीठा रसायन
जर्मनी के हरमन एमिल फिशर को नोबेल पुरस्कार की मीठी बधाई मिली. उन्हें यह पुरस्कार चीनी पर काम करने के लिए दिया गया. उन्होंने चीनी के अणु की त्रिआयामी तस्वीर कागज पर बनाने की विधि विकसित की.
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1904: हीलियम के गुब्बारे
स्कॉटलैंड के सर विलियम रामसे ने निष्क्रिय गैसों का पता लगाया. ये गैसें हवा में मौजूद होती हैं लेकिन किसी से रिएक्ट नहीं करती. इनमें गुब्बारे उड़ाने वाली हीलियम भी शामिल है और नियॉन भी.
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1907: बीयर के लिए
जर्मनी के एडुआर्ड बुखनर ने पाया कि फर्मेंटेशन के लिए जीवित कोशिकाओं की जरूरत नहीं है. फर्मेंटेशन में खमीर की कोशिकाएं चीनी को अल्कोहल में तब्दील करती हैं. बूखनर ने बताया कि खमीर की मृत और तोड़ी हुई कोशिकाओं से भी यह संभव है.
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1911: रेडियम और पोलोनियम की खोज
मैरी क्यूरी को दो नोबेल पुरस्कार मिले. 1903 में भौतिकी के लिए और आठ साल बाद रसायन के लिए. उन्होंने रेडियम और पोलोनियम को खोजा. वह बहुत अस्थिर होते हैं और टूटते समय चमक छोड़ते हैं. जहरीला पोलोनियम यूरेनियम के खनिज में मिलता है.
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1915: रंगीन पौधे
जर्मन रसायनशास्त्री रिषर्ड विलश्टेटर को पेड़ पौधों में रंगों पर शोध के लिए नोबेल दिया गया. उन्होंने पता लगाया कि क्लोरोफिल से न केवल पेड़ों को हरा रंग मिलता है, बल्कि इसी के जरिए वह सूरज की रोशनी, पानी और कार्बन डाई ऑक्साइड से ग्लूकोस बनाते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
1918: दुनिया के लिए खाद
जर्मनी के फ्रिट्ज हाबेर ने पता लगाया कि कैसे अमोनिया पानी और नाइट्रोजन से बनाया जा सकता है. इसी कारण संभव हुआ खाद बनाना. और दुनिया की बढ़ती जनसंख्या के लिए ज्यादा अन्न पैदा करना. हालांकि अमोनिया के साथ ही विस्फोटकों के निर्माण की भी शुरुआत हुई.
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1927: प्राकृतिक पाचक
जर्मनी के हाइनरिष ओटो वीलांड को नोबेल पुरस्कार दिया गया क्योंकि उन्होंने पित्त अम्ल के कंपाउंड का पता लगाया. गॉल ब्लाडर में पाए जाने वाला अम्ल लीवर में बनता है. इनके कारण शरीर चर्बी पचा पाता है.
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1939: औरत, आदमी अलग क्यों
जर्मनी के ही अडोल्फ बूटेनआंट को यौन हारमोन पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया. लेकिन हिटलर ने उन्हें पुरस्कार लेने से रोक दिया. बूटेनआंट ने पहली बार उन हारमोन को अलग अलग किया जो स्त्रीत्व और पुरुषत्व के जिम्मेदार होते हैं.
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1944: परमाणु विघटन
ओटो हान न्यूक्लियर फ्यूजन करने में सफल हुए. इस प्रक्रिया में खूब ऊर्जा निकली और न्यूट्रॉन भी. इस कारण एक चेन रिएक्शन भी शुरू हुआ. हान ने इस तरह परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाए और परमाणु बम बनाने की संभावना भी पैदा की.
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1958: मधुमेह के रोगियों के लिए
ब्रिटेन के फ्रेडरिक सैंगर ने इंसुलिन की संरचना बताई. मधुमेह के रोगियों के शरीर में इंसुलिन कम या बिलकुल नहीं बन पाता इसलिए उन्हें रोज इंजेक्शन या गोली की जरूरत होती है. इस बीच जीन तकनीक के कारण इंसुलिन आसानी से बाजार में उपलब्ध है.
तस्वीर: Fotolia/Dmitry Lobanov
1963: प्लास्टिक की थैलियां
जर्मनी के कार्ल वाल्डेमार सीगलर को 1963 में इटली के गुइलियो नाटा के साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया. इन दोनों ने पोलिएथिलीन बनाने की प्रक्रिया खोजी. इनसे ही प्लास्टिक की थैलियां बनती हैं.
तस्वीर: picture alliance/WILDLIFE
1995: कैसे होता है ओजोन में छेद
पॉल क्रुट्जेन, मारियो मोलिना और फ्रैंक रोलैंड की टीम ने धरती के वातावरण पर शोध किया. इसमें खास था ओजोन का बनना और टूटना. उन्होंने यह बताया कि कैसे संवेदनशील ओजोन परत पर उत्सर्जन का असर होता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
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68 साल के बेरनैंकी 2006 से 2014 के बीच फेडरल रिजर्व के प्रमुख रहे हैं. डगलस डायमंड शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं जबकि डिबविग सेंट लुईस में वॉशिंगटन यूनवर्सिटी के प्रोफेसर हैं. 2008-09 की आर्थिक मंदी में भी इन्हीं अर्थशास्त्रियों के सिद्धांत पर चलते हुए अमेरिका में बैंकों को बचाने की कोशिश की गई थी जिससे कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके. हालांकि इस कदम की काफी आलोचना भी हुई और बहुत से आम लोगों को नुकसान हुआ.
अर्थशास्त्र में नोबेल विजेता ज्यादातर अमेरिका के ही रहे हैं. अब तक केवल दो महिलायें ही यह पुरस्कार जीत सकी हैं. इनमें से एलिनॉर ओस्ट्रोम ने 2009 में और एस्थर डुफ्लो को 2019 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था. पिछले साल यह पुरस्कार कनाडा के डेविड कार्ड, इस्रायली अमेरिकी जोशुआ एंग्रिस्ट और डच अमेरिकी गीडो इमबेंस को दिये गये थे.
अदृश्य किरणें, जला देने वाला सूरज और खुद विघटित होने वाला अणु, भौतिकी असामान्य बातों का विज्ञान है. ऐसी नई खोजें अक्सर नोबेल पुरस्कार के लायक होती है.
तस्वीर: Christine Olsson/TT News Agency via AP/picture alliance
मशीन लर्निंग के लिए दिया गया 2024 का फिजिक्स नोबेल
अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन होपफील्ड और ब्रिटिश-कनाडाई रिसर्चर जेफरी हिंटन को इस साल का फिजिक्स नोबेल पुरस्कार दिया गया है. इन्हें मशीन लर्निंग के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया है. फिजिक्स की नोबेल कमेटी की अध्यक्ष एलेन मून्स ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, "मशीन लर्निंग हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. मसलन, फेशिअल रिक्गनिशन और भाषाओं का अनुवाद."
तस्वीर: Christine Olsson/TT News Agency via AP/picture alliance
2022
क्वांटम मेकैनिक्स के क्षेत्र में काम करने के लिए एलेन एस्पेक्ट, जॉन क्लाउजर और एंटन जाइलिंगर को 2022 का नोबेल पुरस्कार मिला.
तस्वीर: Ren Pengfei/Xinhua/IMAGO
2021
2021 में डेविड कार्ड, जोशुआ डी एंग्रिस्ट और गीडो डब्ल्यू इम्बेंस को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया.
तस्वीर: Claudio Bresciani/TT/imago images
2020
ब्लैक होल से जुड़ी खोज के लिए ब्रिटेन के रोजर पैन्सर, जर्मनी के राइनहार्ड गेंजल और अमेरिका की आंद्रेया गेज को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा.
तस्वीर: Youtube/Nobel Prize
2019
2019ः ब्रह्मांड से जुड़ी खोज के लिए कनाडाई अमेरिकी जेम्स पीबल्स और स्विस वैज्ञानिकों मिषेल मेयर और डिडियर क्वेलोज को इस साल का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा.
तस्वीर: Imago Images/TT/C. Bresciani
2018
2018: अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के जेरा मुरू और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड को लेजर फिजिक्स में विशेष प्रगति के लिए दिया गया. इन वैज्ञानिकों ने सर्जरी और वैज्ञानिक अनुसंधानों में लेजर के इस्तेमाल के लिए बड़ी खोज की है.
तस्वीर: Reuters/TT News Agency
2017
2017: मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के राइनर वाइस को आधा और दूसरा आधा कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बैरी सी बैरिश और किप एस थोर्ने को को संयुक्त रूप से दिया गया. राइनर वाइस को गुरुत्वीय तरंगों जबकि बाकि दोनों वैज्ञानिकों को लिगो डिटेक्टर और गुरुत्वीय तरंगों के ऑब्जर्वेशन के लिए दिया गया.
तस्वीर: Reuters/TT News Agency/J. Gow
2016
ब्रिटेन में पैदा हुए तीन वैज्ञानिकों डेविड थोलेस, डंकन हैलडेने और माइकल कोस्टरलिट्स को भौतिक शास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया. इन्होंने अपना ज्यादातर शोध कार्य अमेरिका में किया. उनकी इन खोजों को "थियोरेटिकल डिस्कवरीज ऑफ टोपोलॉजिकल फेज ट्रांजिशन एंड टोपोलॉजिकल फेजिज ऑफ मैटर" नाम दिया गया है. उन्होंने अब तक अज्ञात रही पदार्थ की अनोखी अवस्थाओं के बारे में बताया है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/J. Nackstrand
2015
न्यूट्रिनो के वजूद, उनके स्पंदन और उनके द्रव्यमान को साबित करने वाले जापानी वैज्ञानिक तकाकी कातिजा और कनाडाई वैज्ञानिक ऑर्थर बी मैकडॉनल्ड को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनकी खोज से पहले न्यूट्रिनो के अस्तित्व का पक्के तौर पर पता नहीं था.
तस्वीर: Getty Images/AFP/J. Nackstrand
2014
जापानी वैज्ञानिकों इसामू आकासाकी और हिरोशी अमानो और अमेरिका के वैज्ञानिक शुजी नाकामुरा को ऊर्जा की कम खपत करने और पर्यावरण अनुकूल बिजली का स्रोत लाइट एमिटिंग डायोड या एलईडी का आविष्कार करने के लिए संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबल पुरस्कार मिला है.
2013
ब्रिटेन के 80 साल के वैज्ञानिक पीटर हिग्स और बेल्जियम के फ्रांसोआ आंगलेया को भौतिकी के लिए 2013 का नोबेल पुरस्कार दिया गया.
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1901: हड्डियों को दिखाने वाली किरण
भौतिकी का सबसे पहला नोबेल पुरस्कार जर्मनी के विल्हेल्म कोनराड रोएंटगेन को मिला. उन्होंने एक्स रे की खोज की. आज भी डॉक्टर उसका इस्तेमाल हड्डियों की चोट का पता लगाने के लिए करते हैं. लेकिन यह विकिरण कैंसर भी पैदा कर सकते हैं.
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1903: खुद विघटित होने वाले अणु
फ्रांस के आंत्वान आंरी बेकेरेल ने पता किया कि यूरेनियम जैसे कुछ भारी धातुओं के अणु अपने आप विघटित होते हैं. इस दौरान वे ऊर्जायुक्त विकिरण छोड़ते हैं. बेकेरेल ने इसके साथ रेडियोधर्मिता का पता लगाया. मारी क्यूरी और उनके पति पियेर ने और शोध किया. तीनों को नोबेल पुरस्कार दिया गया.
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1921: किरणों की ताकत
रोशनी की किरणें धातु के टुकड़े से न्यूट्रॉन और प्रोटॉन जैसे कण निकाल सकती हैं. इस फोटो इलेक्ट्रिक प्रभाव का अल्बर्ट आइनश्टाइन ने अध्ययन किया और बताया कि रोशनी और पदार्थ एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं और एक दूसरे में बदल सकते हैं. इसी सिद्धांत पर आज सौर ऊर्जा देने वाले पैनल बने हैं.
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1956: आधुनिक कम्प्यूटर की शुरुआत
स्मार्टफोन, लैपटॉप और आईपैड का श्रेय अमेरिका के विलियम शॉकली, जॉन बारडीन और वाल्टर ब्राटेन को जाता है. उन्होंने पहली बार ट्रांजिस्टर बनाया. ऐसे कंप्यूटर प्रोसेसर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट वाले इस तरह के लाखों प्रोसेसरों से बने हैं. यह सिक्का आकार की तुलना के लिए है.
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1964: इकट्ठा प्रकाश किरणें
एक ही दिशा में जाने वाली प्रकाश की बहुत सारी किरणें, यानि लेजर. ये हमें सिर्फ रंग बिरंगा लाइट शो ही नहीं देता बल्कि यह धातु को काट सकता है. इसके विकास के लिए अमेरिका के चार्ल्स टाउन्स और रूस के निकोलाई बासोव और अलेक्जांडर प्रोखोरोव को नोबेल पुरस्कार मिला.
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1967: सितारों की आग
श्ट्रासबुर्ग में जन्मे अमेरिकी हंस बेथे ने बताया कि सूरज जैसे हमारे सितारे इतने गर्म क्यों हैं. उन्होंने पाया कि सितारों के गर्भ में हाइड्रोजन के अणु गलकर हिलियम अणु पैदा करते हैं. नाभिकीय फ्यूजन से ऊर्जा पैदा होती है, जो किरणों के रूप में हम तक पहुंचती है.
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1971: त्रिआयामी तस्वीरें
होलोग्राम का श्रेय हंगरी के इंजीनियर डेनिस गाबोर को जाता है. उन्होंने पहली बार ऐसी त्रिआयामी चीजें बनाईं. ये कमरे में अपने आप डोलते हैं जहां से देखें अलग दिखते हैं. ये सिर्फ खेलने की चीज नहीं, नोटों में लगा होलोग्राम उन्हें जालसाजों से सुरक्षित बनाता है.
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1986: छोटी चीजों को देखना संभव
छोटी चीजों को देखने की संभावना हमें जर्मनी के ऐर्न्स्ट रुस्का ने दी. उन्होंने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप बनाया, जो लाइट माइक्रोस्कोप की तुलना में हजार गुना बेहतर तस्वीरें देता है. उससे कीड़े की ऐसी तस्वीरें लेना संभव है. इससे ऐसी चीजें देखी जा सकती हैं, जिन्हें वैसे देखना संभव नहीं.
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1988: अत्यंत हल्के प्राथमिक कण
हां, न्यूट्रीनो सचमुच होते हैं. इसकी पुष्टि अमेरिका के लियोन मैक्स लेडरमन, मेलविन श्वार्त्ज और जैक श्टाइनबर्गर ने यहां दिख रहे कोलाइडर पर प्रयोग कर की. न्यूट्रीनो अत्यंत हल्के तत्व होते हैं, लेकिन मुश्किल ये है कि वे हमारी धरती के तत्वों के साथ इंटरएक्ट नहीं करते.
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1989: सही समय का पता
एकदम सटीक समय मापने का आधार अमेरिका के नॉरमन रैमसे ने रखा. उन्होंने एक परमाणु घड़ी के विकास को संभव बनाया. साल में वह सही समय से सिर्फ अरब में 25 सेंकड पीछे चलती है. जर्मनी के ब्राउनश्वाइग शहर में चार परमाणु घड़ियां हैं.
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2007: सेव करने की क्षमता
लैपटॉप के हार्ड ड्राइव का आकार छोटा हो रहा है, लेकिन उस पर डाटा जमा करने की क्षमता बढ़ती जा रही है. इसकी वजह चुम्बकीय प्रतिरोध है, जो स्टोरेज मीडियम को खास तरह से बनाने से पैदा होता है. इसका पता जर्मनी के पेटर ग्रूनबर्ग और फ्रांस के अल्बेयर फैर ने किया.
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2009: तेज सर्फिंग
चीनी मूल के अमेरिकी भौतिकशास्त्री चार्ल्स कून काव ने फाइबर केबल का विकास किया. वह टेलिफोन बातचीत या वेबसाइट की सूचना को तेजी से और बिना किसी गलती के ट्रांसपोर्ट करता है. इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक डाटा को अल्ट्रा शॉर्ट लाइट पल्स में बदल दिया जाता है.
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2011: बढ़ता अंतरिक्ष
अमेरिकी वैज्ञानिक सॉल पर्लमुटर, ब्रायन श्मिट और ऐडम रीस ने बताया है कि ब्रह्मांड फैल रहा है. क्यों, यह किसी को पता नहीं. जो पता करेगा, उसे नोबेल पुरस्कार जरूर मिलेगा.
अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल नाम पर बने पांच पुरस्कारों में शामिल नहीं था. इसे बहुत बाद में स्वीडन की केंद्रीय बैंक ने शुरू किया. पहली बार 1969 में यह पुरस्कार दिये गये. इस पुरस्कार का पूरा नाम है स्वेरिजेस रिस्कबांक प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल. इसके लिए भी पुरस्कार की राशि उतनी ही यानी करीब 9 लाख डॉलर है इसके साथ मेडल भी दिया जाता है. सभी विजेताओं को स्टॉकहोम में 10 दिसंबर को पुरस्कार दिये जायेंगे.
इस घोषणा के साथ ही इस साल के सभी श्रेणी में नोबेल विजेताओं के नाम का एलान पूरा हो गया है. भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, साहित्य और शांति पुरस्कारों की घोषणा पिछले हफ्ते ही हो चुकी है.