आग की घटनाओं के बाद ओला वापस बुलाएगी 1,441 ई-स्कूटर
२५ अप्रैल २०२२
सॉफ्टबैंक समर्थित ओला इलेक्ट्रिक ने रविवार को कहा कि वह अपने वाहनों में से एक में आग लगने के बाद 1,441 इलेक्ट्रिक स्कूटरों को वापस बुलाएगी.
ओला ई-स्कूटरतस्वीर: Aditi Shah/REUTERS
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भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ओकिनावा और प्योर ईवी के स्कूटरों में भी आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये घटनाएं भारत सरकार के कार्बन कटौती और जलवायु लक्ष्यों के लिए शुरुआती झटके हैं. भारत ने पिछले महीने ई-स्कूटरों में आग लगने की जांच शुरू की थी और उपचारात्मक कदमों पर सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया है. ओकिनावा ने इस महीने 3,215 ई-स्कूटरों को वापस बुला लिया है.
ओला इलेक्ट्रिक ने रविवार को एक बयान में कहा, "हम उस खास बैच के स्कूटरों की विस्तृत जांच करेंगे, इसलिए कंपनी 1,441 वाहनों की वापसी कर रही है."
ईवी बाइक पर जोर
भारत चाहता है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरबाइक 2030 तक कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री का 80 फीसदी हिस्सा हो जाएं. अभी यह लगभग 2 फीसदी ही है. केंद्र सरकार स्थानीय स्तर पर ईवी बनाने के लिए कंपनियों को अरबों डॉलर का प्रोत्साहन दे रही है. ओला ने कहा कि वह ईवी सुरक्षा नीति का समर्थन करता है और उसके एक स्कूटर में आग लगने के प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह अलग घटना थी. कंपनी ने कहा है कि स्कूटरों को वापस बुलाना एहतियाती उपाय है.
इससे पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी प्योर ईवी ने तेलंगाना के निजामाबाद और चेन्नई में अपने स्कूटरों में आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर ईट्रांस प्लस और ईप्लूटो 7 जी मॉडल के 2,000 स्कूटरों को वापस बुलाया था. निजामाबाद में 21 अप्रैल को कंपनी के एक ई-स्कूटर की बैट्री फटने से एक 80 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी.
भारी जुर्माना लगाएगी सरकार
ई-स्कूटरों में आग लगने की घटनाओं पर केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि जांच होगी और गलती करने वाली कंपनियों को सजा मिलेगी.गडकरी ने बीते दिनों इसे लेकर कई ट्वीट किए थे. उन्होंने कहा, "पिछले दो महीनों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं. यह दुखद है कि इन घटनाओं में कुछ लोगों की जान भी गई है और कई लोग घायल हुए हैं."
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गडकरी ने कहा, "अगर किसी कंपनी की प्रक्रिया में लापरवाही मिलती है तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा और सभी खराब वाहनों को वापस बुलाने के आदेश दिए जाएंगे."
हाल के हफ्तों में ई-स्कूटरों में करीब एक दर्जन आग लगने के मामले सामने आए हैं. आग की घटनाएं ओला के स्कूटरों में भी हुई हैं जिनसे ग्राहकों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हुई है.
एए/वीके (रॉयटर्स)
कितने ईको फ्रेंडली हैं इलेक्ट्रिक स्कूटर
इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग इको फ्रेंडली बताया जा रहा है. लोगों से इसका ज्यादा उपयोग करने की अपील की जा रही है. लेकिन क्या यह इतना इको फ्रेंडली और सुरक्षित है जितना बताया जा रहा है? इसके क्या-क्या खतरे हैं?
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स्कूल टाइम की याद दिलाती साइकिल
पहले जब भी घर के बाहर घूमने का मन होता, बस पैडल मारिए और साइकिल पर घूमिए. लेकिन आज इलेक्ट्रिक साइकिल जैसे विकल्प उपलब्ध हैं जिनमें पैडल मारने की जरूरत नहीं होती. लेकिन ये ई वाहन उतने ईको फ्रेंडली नहीं है जितने हमको लगते हैं. साथ ही इनसे दूसरी समस्याएं भी होती हैं.
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दुर्घटनाओं में वृद्धि
साधारण साइकिल और बाइक का सबसे बढ़िया विकल्प फिलहाल ई-बाइक है. बैटरी और मोटर तेज चलने और चढ़ाई आराम से चढ़ने में मदद करती हैं. लेकिन एक समस्या भी है. आज कल ई बाइक्स को बुजुर्ग लोग ज्यादा चलाते हैं जो साधारण ट्रैफिक में नहीं चल पाते. इससे दुर्घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है.
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बैटरी की समस्या
दूसरी समस्या है ई बाइक की बैटरी, इन बैटरियों का उत्पादन करने में बहुत सारे प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है. ई बाइक रिचार्ज की जा सकने वाली लीथियम बैटरी से चलती है. लीथियम को जमीन से खनन करके निकाला जाता है. बैटरियों के लिए लीथियम निकालने के लिए बड़ी खदानों की जरूरत पड़ती है. और यह एक सीमित संसाधन भी है. साल 2018 में संसार में बस 53.8 टन लीथियम बचे होने का अनुमान है.
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बढ़ती हुई ऊर्जा की जरूरत
इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता लेकिन इन्हें नियमित चार्ज करना होता है. सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है. और यह बिजली की आवश्यकता सिर्फ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी नहीं होगी.
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नए विचार और नई बैटरियां
चार्ज करने के लिए बैटरियों की संख्या बढ़ती जा रही है. हर रोज नए ई-गैजेट आ रहे हैं. हर नए गैजेट में नई बैटरी की जरूरत होती है चाहे वो ई-बाइक हो, ई-यूनीसाइकिल या ई-हॉवरबोर्ड.
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छोटी दूरी के स्कूटर
ई-स्कूटर कुछ-कुछ बच्चों के स्कूटरों जैसे लगते हैं. बस फर्क इतना है कि ये सिर्फ पैर के सहारे नहीं चलाने पड़ते, इनमें बैटरी भी लगी होती है. ये एक ईंधन से चलने वाले इंजन की तुलना में ईको फ्रेंडली है. लेकिन अधिकांश लोग इनका इस्तेमाल छोटी दूरी के लिए ही कर रहे हैं. जैसे घर से ऑफिस के पार्किंग तक कार से और पार्किंग से ऑफिस तक ई-स्कूटर से.
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कई जगह अभी गैर-कानूनी हैं ये
जर्मनी में ई-स्कूटर से घूमना आज तक गैर कानूनी है. वजह है इनका छोटा इंजन. इंजन लगा होने की वजह से कार की तरह इसका भी परमिट चाहिए लेकिन इतने छोटे इंजन का परमिट अभी उपलब्ध ही नहीं है. 2019 की गर्मियों से जर्मनी में 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ई-स्कूटर चलाने की अनुमति होगी. अमेरिका में फिलहाल इन्हें चलाने की अनुमति है.