मोसुल को आईएस के कब्जे से छुड़ाने के लिए अभियान शुरू
१७ अक्टूबर २०१६
इराक के प्रधानमंत्री ने मोसुल को तथाकथित इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की है. 2011 में अमेरिकी सेनाओं के इराक छोड़ने के बाद ये देश में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/A. Al-Rubaye
विज्ञापन
सोमवार को इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने सरकारी टीवी पर घोषणा की, "जीत का समय आ गया है और मोसुल को आजाद कराने के लिए अभियान शुरू हो गया है. आज मैं इस विजयी अभियान के शुरू होने की घोषणा करता हूं जो आपको दाएश (आईएस) की हिंसा और आतंकवाद से मुक्त करेगा.”
इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर 2014 से इस्लामिक स्टेट का नियंत्रण है. माना जाता है कि उसके पास छह हजार सैनिक हैं जो मोसुल में इराकी सेना का सामना करने को तैयार हैं. इराकी सेना ने रविवार को तड़के मोसुल में हजारों पर्चे गिराए जिनमें वहां रहने वाले लोगों से कहा गया कि शहर को फिर से हासिल करने के लिए अभियान की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. इनके मुताबिक सेना की टुकड़ियां और हवाई हमले आम लोगों को निशाना नहीं बनाएंगे.
देखिए, ऐसा होता है युद्ध
ऐसा होता है युद्ध
सीरिया का सबसे पुराना शहर अलेपो बर्बाद हो चुका है. खंडहरों में इतिहास सुबक रहा है. युद्ध ऐसा होता है.
तस्वीर: picture-alliance//ZUMA Press/J. Muhammad
अलेपो में युद्ध चल रहा है. 2012 की फरवरी में यह जंग शुरू हुई थी.
तस्वीर: Getty Images/AFP/A. Alhalbi
यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल इमारतें पहले ही कुछ महीनों में नष्ट हो गईं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Sputnik
सितंबर 2015 में रूस ने अलेपो पर हवाई हमले शुरू किए.
तस्वीर: GettyImages/AFP/A. Alhalbi
युद्ध शुरू होने से पहले अलेपो में 20 लाख लोग रहते थे.
तस्वीर: Reuters/A. Ismail
अब, युद्ध के चार साल बाद 5 लाख से ज्यादा लोग जा चुके हैं.
तस्वीर: Reuters/S. Kitaz
लाखों लोग शहर में कैद हैं. या तो वे भूख से मर रहे हैं या गोली से.
तस्वीर: Reuters/M. Rslan
छह साल से जारी सीरियाई गृह युद्ध ने कम से कम 47 लाख लोगों को बेघर कर दिया है.
तस्वीर: picture-alliance/AA/Abaca/M. Al Halebi
सीरिया के डेढ़ करोड़ लोग हर सुबह इस डर के साथ उठते हैं कि रात तक बचेंगे या नहीं.
तस्वीर: Reuters/K. Ashawi
20 लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं.
तस्वीर: Reuters/A. Ismail
अब तक इस लड़ाई में 3 लाख 85 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
तस्वीर: Reuters/A. Ismail
10 तस्वीरें1 | 10
इस अभियान की तैयारियां लगभग एक महीने से चल रही थीं. पिछले हफ्ते आईएस के गढ़ मोसुल को 60 हजार सैनिकों वाली सेना ने पूरी तरह घेर लिया. माना जा रहा है कि 2011 में इराक से अमेरिकी सैनिकों के चले जाने के बाद ये देश में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है. सरकार समर्थक इराकी कुर्द पेशमर्गा बल शहर के पूर्वी हिस्से से वहां पहुंचे रहे हैं जबकि अमेरिकी नेतृत्व वाला गठबंधन अभियान के लिए हवाई और जमीनी मदद मुहैया कराएगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ‘इराकी सेना, पेशमर्गा लड़ाके और इराकी लोगों' के साथ है.
तस्वीरों में देखिए, इराक में तार तार होती सभ्यता
इराक में तार तार होती सभ्यता
इराक में इस्लामिक स्टेट के उग्रवादी हजारों साल पुरानी मूर्तियों और कला के कीमती नमूनों को नष्ट कर रहे हैं. इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो रही है. सरकार ने इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार की है.
तस्वीर: Mohammad Kazemian
धरोहरों का नाश
इस्लामिक स्टेट के उग्रवादियों ने इराक के उत्तरी शहर मोसुल के संग्रहालय में हजारों साल पुरानी मूर्तियों को तोड़ दिया. ये मूर्तियां प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता का हिस्सा हैं. जिहादियों का कहना है कि इस्लाम धर्म मूर्तियां रखने की इजाजत नहीं देता. मुस्लिम विद्वानों ने उग्रवादियों की इस हरकत की आलोचना की.
यह तस्वीर 2000 साल पुराने शहर हातरा की है. रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने यहा भी बुलडोजर से काफी नुकसान किया. इराक के पर्यटन मंत्री आदेल शीरशाब के मुताबिक, "उनकी लड़ाई पहचान की लड़ाई है, वे खासकर इराक के इन इलाकों को पूरी तरह बर्बाद कर देना चाहते हैं."
इस्लामिक स्टेट के लड़ाके इराक के उत्तरी शहर निनेवे को भी बर्बाद करने पर तुले हुए हैं जिसे पश्चिमी पुरातत्वविद सभ्यता के इतिहास के लिहाज से बहुत अहम मानते हैं. शीरशाब के मुताबिक, "इस बात की आशंका थी कि वे इसे बर्बाद करेंगे." संयुक्त राष्ट्र ने इसे 'युद्ध अपराध' करार दिया है.
रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक स्टेट के उग्रवादी बड़ी मूर्तियों को तोड़ फोड़ रहे हैं जबकि छोटी कीमती मूर्तियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर उससे पैसे बना रहे हैं.
इतिहासकार इन घटनाओं की तुलना 2001 में अफगानिस्तान के शहर बामियान में बुद्ध की मूर्तियों को पहुंचाए गए नुकसान से कर रहे हैं. लेकिन कई मानते हैं कि इराक की मेसोपोटामिया सभ्यता को पहुंचाया जा रहा नुकसान उससे कहीं भारी है.
तस्वीर: Mohammad Kazemian
6 तस्वीरें1 | 6
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने मोसुल में रहने वाले आम लोगों को लेकर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता और आपात सेवाओं के लिए उप महासचिव स्टेफान ओ'ब्रायन ने कहा, "मैं मोसुल में रहने वाले 15 लाख लोगों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हूं, जो शहर को आईएसआईएस से वापस लेने के सेना के अभियान से प्रभावित होंगे.” इससे पहले, रविवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और उसके सहयोगी पूरी कोशिश करेंगे कि हमले में आम लोगों की मौतें न हों.