‘दुबई चॉकलेट’ के नए ट्रेंड की वजह से पिस्ते का दाम बढ़ रहा है और साथ ही उसकी पैदावार पर भी बुरा असर पर रहा है.
‘दुबई चॉकलेट’ के नए ट्रेंड की वजह से पिस्ते का दाम बढ़ रहा है और साथ ही उसकी पैदावार पर भी बुरा असर पर रहा है.तस्वीर: ABBfoto/picture alliance
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जिस देश में इतनी गर्मी थी कि वो आम फसल नहीं उगा पा रहा था, आज वो नमी और भरपूर पानी में उगने वाला कोको उगा भी रहा है और दुनिया में उसे बेच भी रहा है. संयुक्त अरब अमीरात में इस समय चॉकलेट मार्केट 73.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है. इसका बड़ा श्रेय दुबई चॉकलेट की बढ़ती लोकप्रियता को भी जाता है.
एक नरम मुलायम चॉकलेट, जो मुंह में रखते ही टूट जाए, और अंदर से निकले ढेर सारी हरे रंग की क्रीम, और कोई ऐसी वैसी क्रीम नहीं, बल्कि मखमली पिस्ते से बनी क्रीम. यही है वो ‘दुबई चॉकलेट' जिसकी लोकप्रियता आसमान छू रही है. हर इन्फ्लुएंसर इस पर रिव्यू देना चाहता है और हर इंस्टाग्राम शेफ रेसिपी. लेकिन इस चॉकलेट की वजह से दो असर देखने को मिल रहे हैं: एक तो मार्केट में पिस्ते का दाम बढ़ रहा है, और दूसरा यह कि इससे पिस्ते की पैदावार पर भी असर पड़ रहा है.
जर्मनी में क्यों "दुबई चॉकलेट" के दीवाने हैं लोग
एक चॉकलेट में ऐसी क्या खास बात हो सकती है कि मामला कोर्ट तक पहुंच जाए. कस्टम विभाग एयरपोर्ट पर इसकी जांच करे. जर्मनी में "दुबई चॉकलेट" को लेकर कुछ ऐसी ही दीवानगी नजर आ रही है.
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"सिर्फ दुबई से आ सकती है दुबई की चॉकलेट"
दुबई चॉकलेट का मामला जर्मनी के शहर कोलोन की एक अदालत में पहुंचा. दरअसल, जर्मन सुपरमार्केट आल्डी ने "आल्यान दुबई" नाम की चॉकलेट बेचनी शुरू की. ये चॉकलेट बिक रही थी जर्मन सुपरमार्केट में लेकिन इसे बनाया तुर्की में जा रहा था. आल्डी के खिलाफ मामला जर्मन कैंडी के आयातक आंद्रियाज विल्मर ने दर्ज कराया था.
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चॉकलेट कंपनी लिंट और सुपरमार्केट लिडल के खिलाफ भी केस
ऐसा ही मामला विल्मर ने एक और जर्मन सुपरमार्केट चेन लिडल और स्विस ब्रैंड लिंट के खिलाफ दर्ज करवाया था. हालांकि, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दुबई चॉकलेट सिर्फ दुबई से ही आनी चाहिए. लेकिन जर्मन सुरमार्केट का कहना है कि उन्होंने सिर्फ नाम इस्तेमाल किया है, चॉकलेट की रेसिपी उनकी अपनी है.
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ये दुबई चॉकलेट क्या बला है
2021 में दुबई की कंपनी फिक्स ने इसे एक लग्जरी चॉकलेट की तरह लॉन्च किया. इसे बनाया कंपनी की मालिक सारा हमूदा ने. इसके अंदर पिस्ता का पेस्ट भरा होता है. इसके बाद यह चॉकलेट बेहद वायरल हो गई. इसकी लोकप्रियता देखते हुए कंपनी ने इसके अलग अलग फ्लेवर लॉन्च किए. कई लोगों ने इसे घर पर बनाने की कोशिश की तो कई कंपनियों ने इसकी नकल करने की.
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सोशल मीडिया ने दुबई चॉकलेट को किया मशहूर
पिछले साल सोशल मीडिया पर लगभग हर इनफ्लुएंसर की फीड पर दुबई चॉकलेट का एक रिव्यू जरूर मौजूद था. इस चॉकलेट का रिव्यू करना एक ट्रेंड बन गया. देखा जाए तो सोशल मीडिया ट्रेंड से ही यह चॉकलेट दुनिया के अलग अलग कोनों में पहुंची.
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क्रिसमस मार्केट में दिखी दुबई चॉकलेट की धाक
जर्मनी अपने क्रिसमस मार्केट के लिए जाना जाता है. लेकिन इस बार के क्रिसमस मार्केट में भी दुबई चॉकलेट की एंट्री हुई. कई दुकानदारों ने बताया कि क्रिसमस मार्केट में उनकी सबसे ज्यादा बिकने वाली चीजों में ये चॉकलेट ही थी.
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चॉकलेट की "तस्करी"
पिछले साल दिसंबर में जर्मनी के हैमबर्ग एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने एक महिला के पास से 90 किलो दुबई चॉकलेट जब्त की थी. महिला तीन सूटकेसों में ये चॉकलेट भरकर लाई थी लेकिन उसने इन पर टैक्स नहीं चुकाया था. अधिकारियों के मुताबिक महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया लेकिन उस पर टैक्स चोरी का मामला जरूर दर्ज किया गया. चॉकलेट की तस्करी का यह मामला बताता है कि जर्मनी में लोग इसे कितना पसंद कर रहे हैं.
तस्वीर: DW
ट्रेंड की कीमत चुका रहे लोग?
अमूमन जर्मनों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक माना जाता है. लेकिन इस महंगे चॉकलेट की लोकप्रियता अपने आप में एक अजूबा है. असली दुबई चॉकलेट की कीमत करीब 69 यूरो है. लेकिन इसके चाहने वालों की तादाद देखते हुए ही इसके सस्ते वर्जन अलग अलग जर्मन सुपरमार्केट और चॉकलेट कंपनियां लॉन्च करने की होड़ में जुटी हुई हैं और अदालतों के चक्कर काट रही हैं.
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क्या ट्रेंड के साथ खत्म हो जाएगी दुबई चॉकलेट की लोकप्रियता
दुबई चॉकलेट की लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका अहम रही है. लेकिन सोशल मीडिया ट्रेंड हर दिन बदलते हैं. इसलिए दुबई चॉकलेट के चाहने वाले शायद सोशल मीडिया के साथ कम हो जाएं. जर्मनी के इंस्टिट्यूट फॉर जेनरेशन रिसर्च के मुताबिक 95 फीसदी से अधिक लोग अब मानते हैं कि इस चॉकलेट की कीमत बहुत ज्यादा है. वहीं, 60 फीसदी ने लोगों ने कहा कि इसे खरीदने की उनकी कोई योजना नहीं है.
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सिलसिले की शुरुआत
यह पिस्ता चॉकलेट सबसे पहले 2022 में संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी फिक्स (एफआईएक्स) डेजर्ट चॉकलेटियर ने बेचना शुरू की थी. उसके बाद से यह टिकटॉक पर काफी मशहूर हो गई और ऐसे ये चॉकलेट अनगिनत शॉर्ट वीडियो ऐपों पर चर्चा में आई.
अब इसके बाद से ही पिस्ता के दाम आसमान छूने लगे. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार व्यापारियों का कहना है कि आज के समय में साढ़े चारे सौ ग्राम खुले हुए (बगैर छिलके वाले) पिस्ते 10 से 11 अमेरिकी डॉलर में आ रहे हैं. जबकि एक साल पहले इनकी कीमत 7.65 अमेरिकी डॉलर थी.
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क्या है पिस्ता चॉकलेट और क्यों है ये सबके सिर पर सवार
साराह हमूदा दुबई की कंपनी एफआईएक्स (फिक्स) की संस्थापक हैं. उन्होंने अपनी चॉकलेटों में यह फ्लेवर 2021 में डाला था और इसका नाम रखा था - ‘कांट गेट इनफ ऑफ इट'. नाम से समझ आता है कि इसमें ‘इनफ' खाड़ी देशों में मशहूर मिठाई कुनाफा से आया है, जिसे वहां नफ्फह भी कहा जाता है. इसमें सेवई होती है या फिर पेस्ट्री शीट जिसमें मीठी क्रीम चीज भरी जाती है. और फिर उसे चाशनी में डुबो कर उसे पिस्तों से सजाया जाता है.
हमूदा ने भारतीय अखबार इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि उन्हें यह आइडिया तब आया जब वह गर्भवती थीं.
दुबई चॉकलेट बनाने वाली हमूदा ने भारतीय अखबार इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि उन्हें यह आइडिया तब आया जब वह गर्भवती थीं.तस्वीर: TOBIAS SCHWARZ/AFP
कितनी बढ़ी है इस चॉकलेट की दीवानगी
2024 में गूगल पर खाद्य और पीने की चीजों में दुबई चॉकलेट लोगों ने सबसे ज्यादा सर्च की. आज, यह ब्रांड सीमित मात्रा में यह चॉकलेट बनाती है. यूएई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी डेलीवरू के जरिए उस मार्केट में इसकी अच्छी पहुंच हो गई है. अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने जून 2024 में बताया था कि 200 ग्राम के चॉकलेट बार की खुदरा कीमत 20 डॉलर (1,707 रुपये) है, डेलीवरू रोजाना शाम 5 बजे तक लगभग 500 चॉकलेटों की बिक्री कर देती है.
चॉकलेट कैसे सबका मूड बना देती है?
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पिस्ता की पैदावार और उसके दामों पर असर
पिस्ता ऐतिहासिक रूप से ईरान और उसके आसपास उगाया जाता रहा है. फिर इसका व्यापार होने लगा और ये दक्षिणी यूरोप और खाड़ी देशों के अन्य भागों में फैल गए. ऐसा इसलिए भी हो पाया क्योंकि पिस्ते को उगने के लिए गर्म, शुष्क माहौल की जरूरत होती है. एफटी की रिपोर्ट को देखें तो पता चलेगा कि ईरान के कस्टम ऑफिस के अनुसार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक ईरान ने मार्च 2025 तक के छह महीनों में यूएई को 40 प्रतिशत अधिक पिस्ता निर्यात किया है. आज, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा पिस्ता उत्पादक है. पिस्ते की सबसे ज्यादा खेती (99 प्रतिशत) अमेरिकी प्रांत कैलिफोर्निया में होती है.
वायरल चॉकलेट के अलावा, इस साल अमेरिका में पिस्ते की पैदावार भी कम हुई है. एफटी की रिपोर्ट के अनुसार कैलिफोर्निया की सप्लाई 2023-24 में 1,400 मिलियन पाउंड से ज्यादा थी जो कि 2024-25 में 1,200 मिलियन पाउंड तक ही रह गई.
चॉकलेटी फैशन
मुंह में धीरे धीरे घुलती चॉकलेट का मजा ही कुछ और है. लेकिन कई लोगों के लिए चॉकलेट सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि फैशन और मेकअप का भी हिस्सा है. कुछ इसे पहनते हैं तो कुछ सुंदरता के लिए मास्क के तौर पर लगाते हैं.
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बस 10 मिनट
जर्मन बेकरी लाम्बैर्त्स की डिजाइनर चॉकलेट ड्रेस पहने आलेना गैर्बेर. सिर्फ 10 मिनट ही ये चॉकलेटी ड्रेस ऐसी रह सकती है. इसके बाद ये पिघलना शुरू हो जाती है.
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चॉको डिजाइन
ये ड्रेस तो चॉकलेट का बना हुआ नहीं है लेकिन इस पर सजावट बिस्किट और चॉकलेट से की गई है. कहीं बीच में भूख लगे तो...
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फ्रांस में
फ्रांस के चॉकलेट स्टाइलिस्ट जाँ पॉल एवां (दाएं) ने ये ड्रेस बनाया है. बीजिंग के चॉकलेट शो में ये ड्रेस दिखाई गई. एडीबल फैशन यानि खाए जा सकने वाला फैशन के नाम से ये ट्रेंड जाना जाता है.
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चॉकलेट ही चॉकलेट
यहां मॉडल युडिथ, दारिया, यानीने और सीना हाले के फैशन और डिजाइन स्कूल में अपनी पेशकश के साथ. खाने लायक चॉकलेट और चीनी वाले ये ड्रेस बनाए गए हैं.
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रंगीन
रंग बिरंगी इन पोशाकों में लगे हुए हैं चॉकलेट. लाल रंग की ड्रेस में कुल ढाई हजार टॉफियां लगी हैं. हरे रंग वाला ड्रेस भी चॉकलेट से भरा हुआ है. इन्हें पहने या खाएं...
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अफ्रीका
चॉकलेट लगे इस ड्रेस का नाम है, अफ्रीका. मॉडल सारा चॉकलेट के लालच से बच नहीं पाईं. उनकी ड्रेस पर बीटल के आकार वाली हरी चॉकलेटें लगी हैं.
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खाने की बजाए पीठ पर
जापान में पीठ पर चॉकलेट पैक लगवाती महिला. कीमत 50,000 येन यानि लगभग 30,000 रुपये. वैसे वैलेटाइंस डे पर जापानी महिलाएं तोहफे में चॉकलेट देती हैं. लेकिन कभी कभी इससे मसाज करवा लिया तो क्या.
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सुंदर त्वचा
कोको पावडर में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो त्वचा को युवा और सुंदर दिखने में मदद करते हैं. इसलिए भी महिलाएं चॉकलेट मास्क लगाना पसंद करती हैं.
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मूड ठीक
हॉन्ग कॉन्ग में बनाया 922 किलो का चॉकलेटी दिल. पांच मीटर ऊंचा. चॉकलेट शरीर में अच्छी भावनाएं पैदा करता है इसीलिए कहते हैं चॉकलेट खा कर गम खत्म किया जा सकता है.
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अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, मौजूदा फसल पिछले सीजन की तुलना में 26 प्रतिशत कम है, जो ‘एक साल छोड़कर एक साल में कम फसल' होने के इस कॉन्सेप्ट को दर्शाता है. दरअसल यह पौधों की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि अगर एक साल में औसत से अधिक फसल होती है (जो संभवतः वायरल चॉकलेट हुई) तो संभव है कि उसके बाद अगले साल औसत से कम फसल ही होगी. कैलिफोर्निया में पिछले दो दशकों में पिस्ते की खेती का रकबा लगभग पांच गुना बढ़ गया है, जिसमें 2018 में रिकॉर्ड तोड़ बढ़त देखी गई.