केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पद्म पुरस्कार 2026 की आधिकारिक सूची जारी की है, जिसमें राष्ट्रपति ने कुल 131 पुरस्कारों को मंजूरी दी है. सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं.
तस्वीर: Sujit Jaiswal/AFP
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भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को पद्म पुरस्कार 2026 के लिए चुने गए लोगों की आधिकारिक सूची जारी की. मंत्रालय के मुताबिक, भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार के लिए कला, साहित्य, चिकित्सा, विज्ञान, खेल, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज पर स्थायी प्रभाव छोड़ने वाले व्यक्तियों को शामिल किया गया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी है. इस बार पद्म विभूषण के लिए 5, पद्म भूषण के लिए 13 और पद्म श्री के लिए 113 लोगों को चुना गया है.
पद्म विभूषण पुरस्कार
पद्म विभूषण के लिए जिन पांच लोगों का नाम सूची में है, उनमें दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देओल और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण मरणोपरांत दिए गए हैं. इसके अलावा प्रसिद्ध वायलिन वादक एन. राजम और वरिष्ठ न्यायविद के. टी. थॉमस को भी पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा. पद्म विभूषण की सूची में शिक्षाविद और साहित्यकार पी. नारायणन का नाम भी शामिल है.
मंत्रालय की सूची के अनुसार, पद्म भूषण पाने वालों में प्रसिद्ध गायिका अलका याग्निक और अभिनेता ममूटी शामिल हैं. इसके साथ ही व्यापार और उद्योग श्रेणी में उदय कोटक को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. कला श्रेणी में पीयूष पांडे को पद्म भूषण (मरणोपरांत) और खेल श्रेणी में टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को भी पद्म भूषण के लिए चुना गया है. पद्म भूषण की सूची में भगत सिंह कोश्यारी, कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी, डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु, एस के एम मैइलानंदन, शतावधानी आर गणेश, शिबू सोरेन, वी के मल्होत्रा, वेल्लापल्ली नटेसन जैसे नाम भी शामिल हैं.
113 पद्म श्री पुरस्कार
मंत्रालय ने कहा कि पद्म श्री पुरस्कारों में इस बार 113 लोग शामिल हैं. सूची में खेल और कला जगत के कुछ चर्चित नाम भी हैं. उदाहरण के तौर पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर भुल्लर, क्रिकेटर रोहित शर्मा, हॉकी खिलाड़ी सविता पुनिया और अभिनेता सतीश शाह को पद्म श्री के लिए चुना गया है. सतीश शाह का हाल ही में निधन हो गया था.
पद्म श्री सूची में 19 महिलाएं, 6 विदेशी नागरिक और 16 मरणोपरांत पुरस्कार शामिल हैं. इनमें जर्मनी के लार्स-क्रिस्टियान कॉख भी हैं, जो जर्मन संगीत विशेषज्ञ, संगीत विद्वान और संग्रहालय निदेशक हैं.
प्रित्जकर पुरस्कार को 'आर्किटेक्चर का नोबेल पुरस्कार' माना जाता है. यह बेहतरीन आर्किटेक्ट्स को दिया जाता है. हाल के विजेताओं के बेहतरीन काम देखिए.
तस्वीर: The Hyatt Foundation/The Pritzker Architecture Prize
2025: लिउ जियाकुन
लिउ जियाकुन के काम को उनकी अनोखी और साफ ज्योमेट्री के लिए पहचाना जाता है. 1956 में जन्मे इस चीनी आर्किटेक्ट ने विपरीत विचारों को अपने कार्यों में जोड़ा है, जैसे – आदर्श जीवन बनाम वास्तविक जीवन, इतिहास बनाम आधुनिकता, और सामूहिकता बनाम व्यक्तिवाद, यह बात प्रित्जकर पुरस्कार की ज्यूरी ने कही. यहां इंपीरियल किल्न ब्रिक म्यूजियम देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने सूझोउ में डिजाइन किया है.
तस्वीर: The Hyatt Foundation/The Pritzker Architecture Prize/Jiakun Architects
2024: रिकेन यामामोटो
रिकेन यामामोटो ने जापान के तंग होते शहरों से चिंतित होकर खुले आंगन और ऊंची छतों वाले घर बनाए. जूरी ने उनके डिजाइन को "नई आर्किटेक्चरल भाषा कहा, जो ना सिर्फ परिवारों के रहने के लिए घर बनाता है, बल्कि समुदायों को भी जोड़ता है.” यामामोटो, जापान से प्रित्जकर पुरस्कार जीतने वाले नौवें आर्किटेक्ट हैं.
तस्वीर: Shinkenchiku Sha
2023: डेविड चिपरफील्ड
जूरी ने ब्रिटिश आर्किटेक्ट डेविड चिपरफील्ड के काम को "सादगी में क्रांतिकारी" कहा. ये भी कहा कि उनके काम में इतिहास और संस्कृति के प्रति सम्मान दिखता है. जर्मनी में बर्लिन के म्यूजियम आइलैंड पर उनका बड़ा प्रभाव दिखता है. दुनिया भर में उन्होंने 100 से अधिक प्रोजेक्ट डिजाइन किए हैं. यहां म्यूजियम ऑफ मॉडर्न लिटरेचर देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने मारबाख में डिजाइन किया.
तस्वीर: Marijan Murat/lsw/dpa/picture-alliance
2022: फ्रांसिस केरे
फ्रांसिस केरे का जन्म 1965 में बुर्किना फासो में हुआ. लेकिन 1985 से वह जर्मनी में रह रहे हैं. बर्लिन में वह केरे आर्किटेक्चर कंपनी चलाते हैं. उनके डिजाइन में स्थानीय वस्तुओं और पारंपरिक कारीगरी का इस्तेमाल होता है. उन्होंने 2001 में अपने गांव गांडो में इस प्राथमिक स्कूल का निर्माण किया था.
तस्वीर: Erik-Jan Owerkerk
2021: ऐन लेकाटॉन और ज्यां-फिलिपे वसाल
यह दोनों 1970 के दशक में बोर्दो में पढ़ाई के दौरान मिले. बाद में उन्होंने नाइजर में काम किया, जिसने उनके काम करने के तरीके पर गहरा प्रभाव डाला. यहां पलाए दे टोक्यो प्रदर्शनी भवन देखा जा सकता है, जो 2002 में पेरिस में खुला, यह उनके पेरिस ऑफिस का सबसे प्रसिद्ध डिजाइन है.
तस्वीर: Philippe Ruault
2020: इवॉन फैरेल और शैली मैकनमारा
आयरिश आर्किटेक्ट इवॉन फैरेल और शैली मैकनमारा, यह पुरस्कार जीतने वाली चौथी और पांचवी महिलाएं थीं. उनकी कंपनी ग्राफ्टन आर्किटेक्ट्स अपने कंक्रीट और पत्थर के डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है. जूरी ने उनकी इमारतों को "मानवीय अनुभव और सहज वातावरण बनाने" के लिए सराहा. यहां बॉकोनी यूनिवर्सिटी को देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने मिलान में डिजाइन किया है.
1960 के दशक से इमारतें डिजाइन करने वाले जापानी आर्किटेक्ट अराता इसोजाकी अपने भविष्यवादी डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध थे. उन्होंने 100 से अधिक इमारतें बनाई, जिसमें कतर नेशनल कन्वेंशन सेंटर (चित्र) भी शामिल है. जूरी ने कहा, "अर्थपूर्ण कला की खोज में, उन्होंने ऐसी बेहतरीन इमारतें बनाई, जो आज भी किसी एक शैली में बांधी नहीं जा सकती है."
तस्वीर: Imago Images/P. Karatzas
2018: बालकृष्ण दोशी
आर्किटेक्चर के इस पुरस्कार से नवाजा गए एकलौते भारतीय दोशी का 2023 में निधन हुआ. इंदौर में उन्होंने अरण्य लो-कॉस्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट डिजाइन किया था. इसमें 80,000 से अधिक लोग रहते हैं, जिसमें घर, आंगन और आंतरिक रास्तों का सुंदर ढांचा है. 2018 में प्रित्जकर जूरी ने उनकी वास्तुकला की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम ने 1950 के दशक से “सभी सामाजिक और आर्थिक वर्गों के जीवन को प्रभावित किया है.”
2017: रफाएल अरांडा, कार्मे पिजेम और रामॉन विलाल्ता
जूरी ने कहा कि इनकी वास्तुकला “जड़ों से जुड़ी हुई है लेकिन दुनिया के लिए खुली भी है." 2017 में स्पैनिश आर्किटेक्ट तिकड़ी को प्रित्जकर पुरस्कार मिला. इनके प्रसिद्ध प्रोजेक्ट्स में ला लीरा थिएटर (रिपोल) का सार्वजनिक स्थान और अल पेतीत कोम्ते किंडरगार्टेन (फोटो में) शामिल हैं.
तस्वीर: Pritzker Architecture Prize/Hisao Suzuki
2016: आलेखांद्रों आरावेना
चिली के आर्किटेक्ट आलेखांद्रों आरावेना 2001 से एक "डू टैंक" चला रहे हैं, जो थिंक टैंक से ज्यादा सक्रिय है. वह अपने प्रोजेक्ट्स में लोगों और पर्यावरण को जोड़ते हैं. यहां इनोवेशन सेंटर देख सकते हैं, जो सैंटियागो डी चिली की कैथोलिक यूनिवर्सिटी में है. यह 14 मंजिला इमारत जलवायु के अनुसार ढल जाती है और सूरज व गर्मी से राहत देती है.
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2015: फ्राइ ओटो
फ्राइ ओटो की संरचना हल्के डिजाइन और टिकाऊ सामग्री का उदाहरण होती है. उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति म्यूनिख ओलंपिक स्टेडियम की जालीदार छत (चित्र) है. जर्मन आर्किटेक्ट को मरणोपरांत प्रित्जकर पुरस्कार मिला, लेकिन 2015 में निधन से पहले उन्हें इसकी खबर मिल गई थी. तब उन्होंने कहा था, "मैंने यह पुरस्कार पाने के लिए कुछ नहीं किया है."
तस्वीर: Marc Müller/dpa/picture alliance
2014: शिगेरू बान
शिगेरू का जन्म टोक्यो में हुआ था. उनकी मां फैशन डिजाइनर थी और पिता टोयोटा में इंजीनियर थे. वे सुंदरता और इंजीनियरिंग को जोड़ते है. उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के बाद अस्थायी घर बनाए, जिनमें कागज की ट्यूबों से बना शेल्टर भी शामिल है. यहां मेट्ज, फ्रांस में बना पोम्पीडू सेंटर देखा जा सकता है, जिसे उन्होंने डिजाइन किया था.
तस्वीर: Phil Bird/Zoonar/picture alliance
2013: टोयो ईतो
टोयो ईतो ने 2009 में बार्सिलोना के पस्सेग दे ग्रासिया में यह अपार्टमेंट बिल्डिंग बनाई थी. इसका लहरदार बाहरी डिजाइन अंतोनी गौदी की शैली की याद दिलाता है. जापानी आर्किटेक्ट टोयो ईतो अपने घुमावदार डिजाइन के लिए जाने जाते है. ये आकृतियां उनकी इमारतों को प्राकृतिक और जीवंत रूप देती है.
तस्वीर: Yuri Palmin/Arcaid/picture alliance
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2018 से कॉख बर्लिन के हुम्बोल्ट फोरम में एथ्नोलोजिकल म्यूजियम और म्यूजियम फ्योर एशियाटिशे कुंस्ट के निदेशक हैं. उनका काम बड़ा इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने 30 साल से ज्यादा समय तक भारत में संगीत पर शोध किया. उनके मुख्य शोध क्षेत्र उत्तर भारतीय संगीत के सिद्धांत और प्रैक्टिस, वाद्ययंत्रों का अध्ययन, सांस्कृतिक संदर्भों में ऑडियो विजुअल मीडिया, लोकप्रिय संगीत और शहरी संस्कृति, ऐतिहासिक संदर्भ में संगीत व्याख्याएं और संगीत को सहेजना हैं.
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'गुमनाम नायकों' का सम्मान
इस सूची में देश भर से 45 ´गुमनाम नायकों` को अलग अलग क्षेत्रों में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया है. यह सूची उन लोगों पर केंद्रित है जिन्होंने दशकों तक जमीनी स्तर पर चुपचाप काम किया. इन सम्मान पाने वालों में कई लोग हाशिये पर रहने वाले समुदायों से आते हैं. सूची में दलित और पिछड़े वर्गों, आदिम जनजातियों और दूर दराज या कठिन भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को जगह दी गई है. कई सम्मानित लोगों ने लंबे समय तक ऐसे काम किए जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन समाज की बुनियादी जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं.
जर्मनी में रिसर्च के मौके
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इस सूची में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रैकवार, भिकल्या लाडक्या धिंडा, ब्रिज लाल भट्ट, बुधरी ताती, चरन हेम्ब्रम, चिरंजी लाल यादव, धर्मिकलाल चुन्लीलाल पंड्या, गाफरुद्दीन मेवाती जोगी, इंदरजीत सिंह सिद्धू, कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा जी, कुमारसामी थंगराज, महेंद्र कुमार मिश्रा, मीर हाजीभाई कासंभाई, मोहन नागर, निलेश विनोदचंद्र मंडलेवाला, नुरुद्दीन अहमद, पद्मा गुरमेट, पोखिला लेकथेपी, रघुवीर तुकाराम खेडकर, राजस्तपाठी कालिअप्पा गाउंडर, रामा रेड्डी ममिडी, रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले, संग्युसंग एस पोंगेनर, शाफी शौक, श्रीरंग देवबा लाड, सिमांचल पात्रो, तगा राम भील, तेची गुबिन और युमनाम जत्रा सिंह शामिल हैं.
पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं. ये पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं. पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री. पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है. पद्म भूषण उच्च स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है जबकि पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है.