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विवादएशिया

क्षेत्रीय तनाव के बीच पकिस्तान बढ़ा सकता है रक्षा खर्च

शकूर रहीम
२४ जून २०२६

रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी से पता चलता है कि पाकिस्तान ने भारत के साथ हालिया संघर्षों से सबक सीखे हैं .आईएमएफ की आर्थिक पाबंदियों के बावजूद वह युद्ध की नई तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है.

इस्लामाबाद में पाकिस्तानी सेना शाहीन-3 मिसाइल के साथ
पाकिस्तान की सैन्य तैयारियां पूरी तरह भारत केंद्रित रही हैंतस्वीर: Anjum Naveed/AP Photo/picture alliance

जून 2026 में पाकिस्तान की सरकार ने सांसदों के सामने बजट का ड्राफ्ट पेश किया. बजट प्रस्ताव के अनुसार, पाकिस्तान रक्षा क्षेत्र पर अपना खर्च 18 प्रतिशत बढ़ाकर 3000 अरब रुपये (3 ट्रिलियन) करने जा रहा है.

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि यह बढ़ोतरी क्षेत्र में मौजूद अनिश्चितताओं के कारण देश को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई है. विश्लेषक मानते हैं कि इस फैसले के पीछे दक्षिण एशिया में तेजी से बदलती सैन्य तकनीकें और उभरते सुरक्षा खतरे, प्रमुख कारण हैं.

इस्लामाबाद स्थित रक्षा विश्लेषक मारिया सुल्तान डीडब्ल्यू से कहती हैं, "भविष्य के संघर्ष अब केवल दो विरोधियों के बीच सीमित नहीं रहेंगे. ये कई देशों से आने वाले हथियारों और तकनीकों से तय होंगे, जो जमीन, हवा, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे."

मई 2025 में चले संघर्ष के दौरान भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे पर कई मिसाइलें दागीतस्वीर: picture alliance / ASSOCIATED PRESS

कैसे बदल रहे हैं दक्षिण एशिया में सुरक्षा के समीकरण

मारिया सुल्तान ने डीडब्ल्यू को बताया कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के साथ ही पिछले साल परमाणु हथियार से लैस पड़ोसी देशों भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव ने सैन्य योजनाकारों के सोचने के तरीके में बदलाव किया है.

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नई दिल्ली ने भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए जानलेवा हमले का जबाव, मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' से दिया. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर भारतीय हिंदू पर्यटक थे.

भारत ने दावा किया था कि पाकिस्तान स्थित संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया. संयुक्त राष्ट्र ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. नई दिल्ली ने इस समूह को समर्थन देने का आरोप भी इस्लामाबाद पर लगाया. हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस आरोप से इनकार किया.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं. हालांकि दोनों देशों का नियंत्रण इसके कुछ हिस्से पर ही है. इसी वजह से मुस्लिम-बहुल यह इलाका भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक टकराव का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है.

पहलगाम हमले के बाद हुई झड़पों ने दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं और परमाणु हथियार रखने वाले विरोधी देशों के बीच परमाणु प्रतिरोध (न्यूक्लियर डेटरेंस) की सीमाओं पर बहस छेड़ दी.

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सनोबर इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक कमर चीमा कहते हैं, "इस टकराव से यह साबित हो गया कि परमाणु हथियार जरूरी नहीं कि परमाणु युद्ध की नौबत आने से पहले होने वाले पारंपरिक संघर्ष को रोक सकें."

1947 से अब तक कश्मीर भारत और पाकिस्तान के लिए विवाद का मुख्य विषय हैतस्वीर: Firdous Nazir/NurPhoto/IMAGO

कई मोर्चों पर युद्ध का जोखिम

चीमा के अनुसार भारत के लगातार सैन्य आधुनिकीकरण और आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर क्षमताओं तथा सटीक निशाना साधने वाले हथियारों (प्रिसिजन-गाइडेड वेपंस) की क्षमता से पाकिस्तान के सैन्य योजनाकारों को अपनी सुरक्षा रणनीति और सैन्य तैयारियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ रहा है.

यह चुनौती केवल भारत के साथ पाकिस्तान की पूर्वी सीमा तक ही सीमित नहीं है. इस्लामाबाद पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ भी संघर्ष में उलझा हुआ है, खासकर उसके पश्चिमी प्रांतों खैबर पख्तूनख्वाह और बलोचिस्तान में.

फरवरी में इस्लामाबाद ने काबुल के साथ ‘खुली जंग' का एलान किया. यह घोषणा पाकिस्तान के भीतर आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर उग्रवादी हमलों में बढ़ोतरी के बाद की गई थी. पाकिस्तान ने कई बार काबुल पर आरोप लगाया है कि वह अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान पर हमला करने वाले उग्रवादी समूहों को रोकने में नाकाम रहा है. हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता आया है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच समय समय पर हो रही हैं कई तीखी सैन्य झड़पेंतस्वीर: Wakil Kohsar/AFP/Getty Images

भारत की तुलना में पाकिस्तान का रक्षा बजट कितना कम

खर्च में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम की शर्तों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है. इस प्रोग्राम ने पाकिस्तान को 2022-23 के आर्थिक संकट के बाद डिफॉल्ट से बचने और मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता बहाल करने में मदद की थी.

सरकार का मकसद टैक्स में सुधार, टैरिफ रेशनलाइजेशन और एक्सपोर्ट व निवेश को बढ़ावा देने वाले उपायों के जरिए पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को स्थिरता से विकास की ओर ले जाना है. आईएमएफ ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ परामर्श बैठकें की थीं. इन चर्चाओं में देश की राजकोषीय रूपरेखा (फिस्कल फ्रेमवर्क) और राजस्व संबंधी अनुमान (रेवेन्यू असम्प्शन्स) कार्यक्रम से संबंधित बातचीत केंद्र में रहीं.

जून में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान की इकोनॉमी बढ़कर लगभग 452 अरब डॉलर हो गई. वहीं, भारत की आबादी, पाकिस्तान की तुलना में लगभग 5.7 गुना अधिक है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के नौ गुना से भी अधिक बड़ी है. भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है.

दोनों एटमी देशों के रक्षा बजट में भी इसी तरह का बड़ा अंतर देखा जा सकता है. भारत का सालाना रक्षा खर्च लगभग 86 अरब डॉलर है, जो पाकिस्तान के खर्च से लगभग आठ गुना अधिक है. 

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी इसे स्वीकार करते हैं. उन्होंने पिछले साल अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा, "हमारे पास खर्च करने के लिए असीमित पैसा नहीं है. पाकिस्तान का रक्षा बजट उसके पड़ोसी देश के बजट का बहुत छोटा हिस्सा है."

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आर्थिक दबाव और सुरक्षा प्राथमिकताओं के बीच संतुलन चुनौती

कॉलमनिस्ट और आर्थिक मामलों के जानकार खुर्रम हुसैन ने बताया कि पाकिस्तान ने हमेशा से ही रक्षा खर्च को प्राथमिकता दी है, यहां तक कि आर्थिक तंगी के समय में भी. वह कहते हैं, "मौजूदा आईएमएफ प्रोग्राम के तहत सरकार के लिए संतुलन बनाना एक नाजुक काम है. मगर आईएमएफ भी जमीनी हकीकत को समझता है. मुझे लगता है कि वे जानते हैं कि रक्षा खर्च पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है इसलिए वे दूसरे सेक्टर में ज्यादा सुधारों पर जोर देते हैं."

कुछ अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर राज्यों से वित्तीय बोझ का ज्यादा हिस्सा उठाने की उम्मीद की जाती है, तो विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर इसका दबाव पड़ सकता है.

इस्लामाबाद स्थित अर्थशास्त्री फारूख सलीम कहते हैं, "पाकिस्तान ने हमेशा उन सुरक्षा जरूरतों के लिए धन का इंतजाम किया है जिन्हें वह बहुत जरूरी मानता है. ज्यादा मुश्किल सवाल यह है कि क्या उन फैसलों को बनाए रखने के लिए महत्तवपूर्ण राजनीतिक सहमति तब भी बनी रहेगी, जब प्रांतों को इसके नतीजों या 'ट्रेड-ऑफ' का असर सीधे तौर पर महसूस होने लगेगा."

पाकिस्तान सांसदों को इस महीने के अंत तक रक्षा बजट में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मतदान करना है.  एक जुलाई से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत होनी है. सरकार चाहती है इसके पहले इस प्रस्ताव को संसद की मंजूरी मिल जाए.

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