जर्मनी का "मध्य युगीन" रेप विरोधी कानून अब बदलने जा रहा है. अब तक तो पीड़ित की ना को कानून ना ही नहीं मानता था.
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क्रिस्टीना क्लेम के पास महिलाएं रेप के कितने ही मामले लेकर आती हैं. और क्लेम जानती हैं कि वे अदालत में जीत नहीं सकतीं. वह लड़की जिसे ट्रेन में यौन शोषण से गुजरना पड़ा. वह महिला जिसे भीड़ में लोगों ने दबोचा, नोचा-खसोटा. या फिर वह लड़की जिसने अपने दोस्त को रात की पार्टी के बाद घर में रुकने दिया क्योंकि उसकी आखिरी बस छूट गई थी. क्रिमिनल लॉयर क्लेम कहती हैं कि वह लड़की खुद भी थोड़ी नशे में थी और उसके दोस्त ने उसे दबोच लिया, लाख मना करने के बाद भी. क्लेम बताती हैं कि कोर्ट ने उसके केस को यह कहकर खारिज कर दिया कि उसने समुचित विरोध नहीं किया था.
क्लेम के जाने कितने ही क्लाइंट्स कोर्ट में केस इसी आधार पर नहीं जीत पाते. ऐसा इसलिए क्योंकि जर्मनी में कानून रेप तभी मानता था जबकि पीड़ित पूरा विरोध करे और लड़े और अपराधी डराए, धमकाए और सेक्स के लिए हिंसा करे. मौजूदा कानून कहता है कि अगर महिला सिर्फ रोती-चिल्लाती रही, मुंह से मना करती रही और हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगती रही तो वह रेप नहीं है. फिलहाल तो हद यह है कि अगर भीड़ में कोई व्यक्ति किसी महिला या पुरुष के शरीर को, उसके अंतरंग अंगों को छूता है तो इसके लिए कोई सजा ही नहीं है. इसलिए सामाजिक कार्यकर्ता अक्सर कहते हैं कि जर्मनी में कानून शरीर से ज्यादा जमीन की रक्षा करता है. लेकिन पीड़ित को यह बात समझ नहीं आती. वह तो क्लेम से पूछती है कि इस तरह की बेहूदगी के लिए सजा ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है.
देखें, कहां महिलाएं सबसे असुरक्षित हैं
एक नजर महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक 5 देशों पर जिनकी सूची थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने निकाली है.
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अफगानिस्तान
इस देश में बचपन से ही महिलाओं के लिए जीवन कठिनाइयों से भरा है. 87 फीसदी महिलाएं अशिक्षित हैं और 70 से 80 फीसदी की जबरन शादी कर दी जाती है. गर्भधारण के दौरान हजार में 4 महिलाएं जान गंवा देती हैं. यहां घरेलू हिंसा के मामले भी बेहद आम हैं.
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कांगो गणराज्य
दुनिया भर में सेक्स संबंधित हिंसा में कांगो सबसे आगे है. अमेरिकी जनस्वास्थ्य पत्रिका के मुताबिक कांगो में हर रोज 1,150 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है. महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति भी बहुत खराब है. 57 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही होती हैं.
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पाकिस्तान
पाकिस्तान में कई पारंपरिक रीति रिवाज महिलाओं के लिए काफी सख्त हैं. पाकिस्तान के मानव अधिकार आयोग के मुताबिक हर साल करीब 1000 महिलाओं और बच्चों को ऑनर किलिंग के कारण जान गंवानी पड़ती है. 90 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हैं.
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भारत
दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भारत में सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले आम हैं. भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों में गिना जाता है. रिसर्चरों के मुताबिक पिछले तीन दशकों में 5 करोड़ भ्रूण हत्या के मामले हुए हैं.
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सोमालिया
गर्भावस्था के दौरान होने वाली मौतें, बलात्कार, महिलाओं का खतना और जबरन शादी सोमालिया की महिलाओं के लिए बड़ी समस्या है. देश में कानूनों की कमी है. 4-11 साल की 95 फीसदी लड़कियों का खतना कर दिया जाता है. केवल 9 फीसदी मांए ही सही चिकित्सकीय मदद से बच्चे को जन्म दे पाती है.
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कानून में बदलाव की यह लड़ाई लंबे समय से चल रही है. लड़ने वाले कहते हैं कि जरूरी नहीं कि हर महिला यौन हमले के विरोध में लड़ पाए. कई महिलाएं उस वक्त सदमे में चली जाती हैं और चाहते हुए भी विरोध नहीं कर पातीं. कई महिलाओं को लगता है कि विरोध से हालात बस और खराब होंगे और इस डर से वे विरोध नहीं कर पातीं. कानून में बदलाव के लिए इंटरनेट पर अभियान चलाने वाली क्रिस्टीना लुंत्स कहती हैं हमारा कानून तो मध्य युगीन है. लुंत्स के अभियान का नाम है, नो मीन्स नो. यानी नहीं, मतलब नहीं. उनकी कई ऐसी दोस्त हैं जिनके साथ रेप हुआ लेकिन मुकदमा नहीं चला. वह बताती हैं, "उन्हें लगता है कि कोई मतलब ही नहीं है पुलिस के पास जाने का. उनसे एक सवाल पूछा जाएगा, जिसका कोई जवाब उनके पास नहीं है. वही सवाल कि विरोध क्यों नहीं किया."
लुंत्स कहती हैं कि जर्मनी ने इस्तांबुल कन्वेंशन पर दस्तखत किए हैं जिसके तहत बिना सहमति के किया गया हर तरह का यौन व्यवहार अपराध है. यानी कि नहीं, मतलब नहीं.
क्यों होते हैं बलात्कार?
भारत में रोजाना औसतन 92 महिलाओं का बलात्कार होता है. जब भी किसी महिला के साथ यह जघन्य अपराध होता है, कभी सवाल उसके कपड़ों तो कभी देर रात घर से बाहर रहने पर उठाए जाते हैं. क्या महिलाओं पर बंदिशें लगाना ही है उपाय?
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तन ढकने की जरूरत
मानव सभ्यता की शुरुआत से ही मौसम की मार से बचने के लिए शरीर को ढकने की जरूरत महसूस की गई. बीतते समय के साथ जानवरों की छाल पहनने से लेकर आज इतने तरह के कपड़े मौजूद हैं. जीवनशैली के आसान होने के साथ साथ कपड़ों के ढंग भी बदले हैं और अब यह अवसर, माहौल, पसंद और फैशन के हिसाब से पहने जाते हैं. फिर पूरे बदन को ढकने वाले कपड़ों पर जोर क्यों?
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अंग प्रदर्शन यानि बलात्कारियों को न्यौता
भारत में बलात्कार के ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि पीड़िता ने सलवार कमीज और साड़ी जैसे भारतीय कपड़े पहने हुए थे. उनपर हमला करने वाले पुरुषों ने अपनी सेक्स की भूख के कारण संतुलन खो दिया. ऑनर किलिंग के कई मामलों में किसी महिला को सबक सिखाने के मकसद से उस पर जबरन यौन हिंसा की गई और फिर जान से मार डाला गया. इन सबके बीच कपड़ों पर तो किसी का ध्यान नहीं गया.
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कानून का डर नहीं
संयुक्त राष्ट्र ने 2013 में एशिया प्रशांत क्षेत्र में किए अपने सर्वे में पाया गया कि सर्वे में शामिल हर चार में एक पुरुष ने अपने जीवन में कम से कम एक बार किसी महिला का बलात्कार किया है. इनमें से 72 से लेकर 97 फीसदी मामलों में इन पुरुषों को किसी कानूनी कार्यवाई का सामना नहीं करना पड़ा था.
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मनोरंजन का साधन हैं यौन अपराध
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ इतने ज्यादा यौन अपराधों का कारण प्रदेश की पुलिस ने वहां मोबाइल फोनों के बढ़ते इस्तेमाल, पश्चिमी देशों के बुरे असर और छोटे कपड़ों को ठहराया. लोगों को सुरक्षा देने की अपनी जिम्मेदारी में पूरी तरह विफल पुलिस का कहना है कि मनोरंजन के बहुत कम साधन होने के कारण पुरुष यौन अपराधों को अंजाम देने लगते हैं.
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महिलाओं से मिल रही है चुनौती
सड़कों, ऑफिसों या किसी सार्वजनिक स्थान पर कई बार महिलाओं के कपड़े नहीं बल्कि उनके चेहरे से झलकता आत्मविश्वास, स्वच्छंद रवैया और अब तक पुरुषों के कब्जे में रहे कई क्षेत्रों में उनकी पहुंच कई पुरुषों को बौखला रही है. सदियों से स्थापित पुरुषसत्तात्मक समाज के समर्थक ऐसी औरतों को सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने का जिम्मेदार मानते हैं और यौन हिंसा कर उन्हें समाज में उनकी सही जगह दिखाने की कोशिश करते हैं.
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महिलाओं को ज्यादा बड़ा खतरा किससे
दुनिया के सबसे युवा देश में आज बलात्कार महिलाओं के खिलाफ चौथा सबसे बड़ा अपराध बन चुका है. नेशनल क्राइम ब्यूरो की 2013 रिपोर्ट बताती है कि साल दर साल दर्ज होने वाले इन करीब 98 फीसदी मामलों में बलात्कारी पीड़ित का जानने वाला था. ज्यादातर मामले जो प्रकाश में आते हैं वे सार्वजनिक जगहों पर अनजान लोगों द्वारा किए गए होते हैं जिस कारण इस सच्चाई पर ध्यान नहीं जाता.
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एक कदम आगे, दो कदम पीछे
एक ओर पहले के मुकाबले ज्यादा लड़कियां पढ़लिख रही हैं और कार्यक्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं. दूसरी ओर इस कारण वे शादी और बच्चे देर से पैदा कर रही हैं. भारत में शादी के पहले शारीरिक संबंध बनाने के मामले समाज के लिए असहनीय और खतरा बताए जाते हैं. इस कारण बहुत से युवा पुरुष को अपनी यौन इच्छा पूरी करने का कोई स्वस्थ तरीका नहीं मिलता और कई बार यही यौन हिंसा का कारण बनता है.
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हिंसा का चक्र गर्भ से ही शुरु
भारत में अजन्मे बच्चे की लिंग जांच कर मादा भ्रूण को गर्भ में ही मार देने की घटनाएं आम हैं. जो लड़कियां जन्म ले पाती हैं वे संख्या में इतनी कम हैं कि समाज का संतुलन बिगड़ गया है. स्त्री-पुरुष अनुपात के मामले में भारत 1970 से भी नीचे आ गया है. इसके अलावा बाल विवाह, कम उम्र में मां बनना, प्रसव से जुड़ी मौतें और घरेलू हिंसा के लिए भी क्या छोटे कपड़ों को ही जिम्मेदार मानेंगे.
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पिछले साल जर्मनी के न्याय मंत्रालय ने एक कानून का मसौदा तैयार किया था लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई. राजनीतिक दल एसपीडी के संसदीय दल की उपाध्यक्ष एफा होएग्ल कहती हैं कि ज्यादातर सदस्यों को यह मसौदा पसंद नहीं आया. लेकिन 31 दिसंबर 2015 की रात कोलोन में हुए यौन हमले ने काफी लोगों को बदल दिया.
कोलोन में कुछ पुरुषों ने, जो विदेशी दिखते थे, नए साल का जश्न मनाती भीड़ में लड़कियों को नोंचा-खसोटा. जो आरोपी गिरफ्तार हुए, उनमें से दो के खिलाफ रेप का केस चलाया गया. उसके बाद चीजें तेजी से बदलीं. कानून का मसौदा न्याय मंत्रालय से मार्च में कैबिनेट में पहुंचा. काफी बहस के बाद अब यह कानून वोटिंग के लिए संसद में पहुंच चुका है. हालांकि कानून को बनकर लागू होने में अभी समय लगेगा लेकिन कार्यकर्ता खुश हैं कि बात आगे बढ़ रही है. वे इसे बहुत बड़ा बदलाव मान रहे हैं क्योंकि 1990 तक तो शादी में बलात्कार तक जर्मनी में सजा के दायरे में नहीं आता था.
यौन शोषण का शिकार हुए सितारे
इम्तियाज अली की फिल्म 'हाईवे' ने परिवार के अंदर बाल यौन शोषण जैसे नाजुक मुद्दे को उठाया. बॉलीवुड और हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां खुल कर अपने अनुभवों के बारे में बोल चुकी हैं.
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अनुष्का शंकर
पंडित रवि शंकर की बेटी और मशहूर सितार वादक अनुष्का शंकर ने महिलाओं के लिए हुए एक आयोजन में यह बात कही कि बचपन में उन्हें भी यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा. उन्होंने बताया कि बदसुलूकी करने वाला व्यक्ति उनके परिवार का करीबी था और इसीलिए वह लंबे वक्त तक किसी से इस बारे में कुछ कह नहीं सकीं.
कल्कि कोचलिन
महिला अधिकारों के लिए खुल कर बोलने वाली अभिनेत्री कल्कि कोचलिन ने भी अपने बचपन के दुखद हिस्से को बयान किया. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह अपनी कहानी सुना कर सुर्खियां नहीं बटोरना चाहती थीं, "यह मेरे जीवन की सच्चाई है और मैंने इसे लंबे वक्त तक जिया है.
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अनुराग कश्यप
कल्कि के पूर्व पति और मशहूर फिल्मकार अनुराग कश्यप ने भी इस बारे में बताया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बचपन में ग्यारह साल तक वे यौन शोषण से गुजरते रहे. अनुराग का कहना है कि वह अब उस व्यक्ति को माफ कर चुके हैं.
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ओपरा विनफ्री
टेलीविजन की मशहूर हस्ती ओपरा विनफ्री को भावुक इंटरव्यू लेने के लिए जाना जाता है. लेकिन डेविड लेटरमन के शो में जब वह पहुंची तो उनकी जिंदगी के बारे में जान कर लोगों की आंखें भर आईं. ओपरा का नौ साल की उम्र में एक रिश्तेदार ने बलात्कार किया. 10 से 14 की उम्र तक उनका शोषण होता रहा.
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मर्लिन मुनरो
माता पिता के शादीशुदा ना होने के कारण मशहूर हॉलीवुड स्टार मर्लिन मुनरो का बचपन अनाथालयों में बीता, जहां बार बार उनका शोषण हुआ. खुद को बचाने के लिए मर्लिन अनाथालय बदलती रहीं. बचपन में मन पर पड़े घाव हमेशा उनके साथ रहे.
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पैमेला एंडरसन
बेवॉच और प्लेबॉय के लिए मशहूर पैमेला एंडरसन का बचपन भी दुखद रहा है. अपने फाउंडेशन के लॉन्च पर उन्होंने बताया कि छह से दस साल की उम्र तक उनके बेबी सिटर ने उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया. वह 12 वर्ष की थीं जब एक दोस्त के भाई ने उनका बलात्कार किया.
बिग बॉस सीजन 7 से भारत में घर घर का नाम बनीं ब्रिटेन की सोफिया हयात का दस साल की उम्र में उनके एक रिश्तेदार ने शोषण किया.
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नया कानून अमल में आ जाने पर जो व्यक्ति पार्टनर की इच्छा को नजरअंदाज करके सेक्स करेगा, उसे पांच साल तक की कैद का प्रावधान होगा. अगर पार्टनर एक बार बोल भी दे, नहीं. तो इसका मतलब स्पष्ट ना माना जाएगा और फिर भी संबंध बनते हैं तो वे जबरदस्ती के दायरे में होंगे. छूना, नोचना, दबोचना आदि भी यौन हिंसा माने जाएंगे. डागमार फ्रॉयडेनबैर्ग कहती हैं कि यह ऐतिहासिक बदलाव है. सरकारी वकील के तौर पर लंबा अनुभव रखने वाली फ्रॉयडेनबैर्ग कहती हैं कि अब ज्यादा अपराधियों को सजा हो पाएगी. फिलहाल सिर्फ छह फीसदी यौन अपराधों की शिकायत होती है. नए कानून से यह आंकड़ा बढ़ने की भी उम्मीद है.