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विवादइस्राएल

डॉनल्ड ट्रंप के गाजा शांति समझौते पर सवाल बरकरार

काथरीन शेयर
१५ अक्टूबर २०२५

गाजा में युद्ध विराम कराने वाले शांति समझौते के बारे में मिली जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं. वार्ताकार कहते हैं, ऐसा जानबूझकर भी किया गया है. अभी भी कई सवाल बाकी हैं, जिनके जवाब तय करेंगे कि शांति बरकरार रहेगी या नहीं.

गाजा में एक शख्स फलस्तीन का झंड़ा लहराते हुए
गाजा में खुशियां मनाई जा रही हैं लेकिन जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि यह शांति समझौते का सिर्फ पहला चरण हैतस्वीर: Doaa Albaz/Anadolu/picture alliance

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका की ओर से हमास और इस्राएल पर दबाव डालकर कराया गया गाजा का युद्ध विराम समझौता अस्पष्ट और अधूरा है. हालांकि, कुछ जानकारों का कहना है कि इस योजना को जानबूझकर थोड़ा अस्पष्ट रखा गया. ताकि दोनों विरोधी पक्ष, गाजा और इस्राएल किसी ना किसी तरह समझौते पर राजी हो जाएं.

लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्पष्टता ही आगे चलकर फिर से युद्ध शुरू होने का कारण बन सकती है. यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रमों के सीनियर पॉलिसी फेलो, ह्यू लवेट ने कहा, "सबसे अहम बात यह है कि इस्राएल और हमास दोनों ने युद्ध विराम के पहले चरण पर सहमति जताई है. यह शांति की ओर पहला कदम है. हालांकि, इसे शांति कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि कई अहम मुद्दे सुलझना अब भी बाकी हैं. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष इस समझौते को पूरी तरह से लागू करेंगे और अपने वादों पर टिके रहेंगे.”

गाजा में दो साल युद्ध के बाद इस्राएल को क्या मिला?

क्या पूरी तरह पीछे हट जाएगा इस्राएल ?

गाजा लगभग 41 किलोमीटर लंबा और 10 किलोमीटर चौड़ा इलाका है. दो साल के संघर्ष के बाद, इस्राएली सेना इसके ज्यादातर हिस्से पर नियंत्रण का दावा करती है.

डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में बने शांति समझौते में साफ किया गया है कि इस्राएल ना तो गाजा पर नियंत्रण करेगा और ना ही उसे इस्राएल में मिलायेगा. अगर सभी इस्राएली बंधकों को रिहा कर दिया जाता है, तो वह इस्राएली सैनिकों को वापस बुला लेगा. पिछले कुछ दिनों में इस्राएली सैनिकों की वापसी भी हुई है.

हालांकि, यह पहली सैन्य वापसी केवल "पीली रेखा” तक ही हुई है. जो कि गाजा के अंदर की ही एक सीमा है. इस रेखा पर रहते हुए इस्राएली सेना अभी भी गाजा पट्टी के लगभग आधे हिस्से पर नियंत्रण रखे हुए है.

लेकिन शांति समझौते के अनुसार, जैसे ही बाकी शर्तें पूरी हो जाएंगी. इस्राएली सेना को पीछे हटना होगा. ऐसे में "अंतरराष्ट्रीय स्थिरता सेना” की तैनाती के बाद वह "लाल रेखा” तक हट जाएंगे. और जब गाजा की जिम्मेदारी एक नई प्रशासनिक सरकार को सौंपी जाएगी, तो इस्राएली सेना और पीछे हटेगी. हालांकि समझौते में इसके लिए कोई तय समय सीमा नहीं दी गई है. जिस कारण यह साफ नहीं है कि आखिर यह कब तक संभव हो पायेगा.

जबकि अंतिम चरण में इस्राएली सैनिक केवल उस "बफर जोन” (यानी सुरक्षा क्षेत्र) की निगरानी करेंगे, जो इस्राएल और गाजा के बीच 21वीं सदी की शुरुआत से मौजूद है. इस्राएल का कहना है कि यह बफर जोन उसकी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. जिसे बीते 20 वर्षों में उसने धीरे-धीरे बढ़ाया है.

फलस्तीनियों का आजादी से आवागमन सुनिश्चित करने के लिए काम करने वाले इस्राएली संगठन ‘गीशा' ने मार्च में बताया कि पहले यह बफर जोन सीमा से 300 मीटर चौड़ा तक था. लेकिन जनवरी 2025 के युद्ध विराम समझौते में इसे गाजा के अंदर 700 से 1,100 मीटर तक बताया गया है.

संगठन के अनुसार यह जोन, गाजा के लगभग 17 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लेगा. जिसका मतलब होगा कि कई बस्तियां स्थायी रूप से नष्ट हो जाएंगी और कृषि भूमि तक लोगों की पहुंच खत्म हो जाएगी. 

क्या है अंतरराष्ट्रीय स्थिरता सेना?

अंतरराष्ट्रीय स्थिरता सेना एक बहुराष्ट्रीय बल होगा, जिसे गाजा में तैनात करने की योजना बनाई गई है. शांति योजना के बिंदु 15 के अनुसार, अमेरिका, अरब और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस सेना का निर्माण करेगा. जिसका काम गाजा की सीमाओं की रक्षा करना होगा. साथ ही यह नई पुलिस को प्रशिक्षण व सहयोग भी देगा.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बल को बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि जमीन पर फलस्तीनी गुटों (जिनमें हमास भी शामिल है) की सहमति के बिना अरब देशों की सेनाएं वहां तैनात नहीं होंगी.

फ्रांस ने भी इस बल में योगदान देने की इच्छा जताई है. जबकि जर्मनी इसमें केवल आर्थिक मदद देगा. मिस्र का कहना है कि इसमें अमेरिकी सैनिक भी शामिल होने चाहिए. लगभग 200 अमेरिकी सैनिक पहले से ही इस्राएल पहुंचे हुए हैं. लेकिन रिपोर्टों की माने, तो वह गाजा में नहीं जाएंगे. 

क्या होगा हमास का भविष्य?

रिपोर्टों के अनुसार, हमास गाजा में फिर से सुरक्षा का कार्यभार संभाल रहा है. हमास के लड़ाके वहां प्रतिद्वंद्वी समूहों से भिड़ रहे हैं. जिनमें से कुछ पर राहत सामग्री लूटने के भी आरोप लगे हैं. कुछ अन्य को इस्राएल का समर्थन भी मिला हुआ है.

ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने हमास को सीमित समय के लिए ऐसा करने की अनुमति दी है ताकि गाजा की सामाजिक स्थिति और खराब ना हो.

अन्य जानकार कहते हैं कि चूंकि, हमास सिर्फ एक आतंकवादी संगठन नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक पार्टी भी है. यह फलस्तीन क्षेत्र पर इस्राएली कब्जे का विरोध करती है. जिस कारण राजनीतिक रूप में उसके बने रहने की काफी संभावना है.

शांति योजना में फलस्तीन को राज्य का दर्जा देने और आत्मनिर्णय लेने के अधिकार की बात कही गई है. लेकिन यह होगा कैसे इस पर कुछ भी साफ नहीं किया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए इस्राएल को गाजा से पीछे हटना होगा और असल मायने में शांति वार्ता करनी होगी.

कौन सुनिश्चित करेगा शांति समझौते का पालन?

ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि 20-बिंदुओं वाली इस शांति योजना में बहुत कम स्पष्टता है. इसलिए किसी ना किसी को तो इसे ठोस बनाने की जिम्मेदारी उठानी ही होगी.

अंतरराष्ट्रीय संकट समूह और सेंट्रल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विशेषज्ञों ने कहा कि "अपनी राजनीतिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए, नेतन्याहू बंधकों की रिहाई के बाद हमास पर फिर से हमला कर सकते हैं. ऐसी स्थिति से बचने के लिए अमेरिका को लगातार इस्राएल पर दबाव बनाए रखना होगा.”

लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान के वरिष्ठ शोधकर्ता, ईमाइल होकायेम ने यूके के एक अखबार से कहा कि अगर अमेरिका थक जाता है या उसका ध्यान भटक जाता है या फिर अगर इस्राएली कट्टरपंथियों के प्रभाव में आ जाता है, तो यह योजना ठप हो सकती है. 

फलस्तीन और इस्राएल का विवाद कैसे सुलझेगा

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