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अपराधभारत

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच के बाद भी क्यों उठे सवाल

समीरात्मज मिश्र
२५ जून २०२६

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी है. रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन रिपोर्ट के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं और खुद रिपोर्ट सवालों के घेरे में है.

अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान मोदी
बिना एफआईआर दर्ज किए ही एसआईटी जांच भी पूरी कर ली गई इसीलिए एसआईटी जांच पर भी सवाल उठ रहे हैंतस्वीर: Press Information Bureau/AP Photo/picture alliance

अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में राज्य सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने कई दिनों की जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है. राज्य के अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी गई यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन माना जा रहा है कि रिपोर्ट में कई तरह की खामियों का जिक्र किया गया है.

मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर में आ रहे चढ़ावे यानी दान में चोरी की बात कही है. इसके अलावा चंदे की राशि की गिनती और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं.  

यही नहीं, मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे की गिनती के लिए जिन कर्मचारियों का चयन किया गया उसकी प्रक्रिया और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ उनके संबंधों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. खबरों के मुताबिक, एसआईटी ने कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने की भी संस्तुति की है और मंदिर की आंतरिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.

इसके अलावा, एसआईटी ने विस्तृत जांच के लिए और अधिक समय और सहयोगी दिए जाने की मांग की है. एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट को लेकर अभी सूत्रों के हवाले से ही खबरें आ रही हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में एसआईटी टीम के सदस्य विजय विश्वास पंत ने कहा, "ये गोपनीय जांच हैं इसलिए अभी हम इस पर कुछ भी बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं. जो हमारी फाइंडिग्स थीं वो हमने उपलब्ध करा दी हैं.”

बीजेपी शासित कई राज्यों में सामने आते भ्रष्टाचार के गंभीर मामलेतस्वीर: India's Press Information Bureau/REUTERS

राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मामले में एसआईटी पर सवाल क्यों?

लेकिन एसआईटी के गठन और उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी कई सवाल उठ रहे हैं. एसआईटी टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त  विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण शिवकुमार और यूपी फाइनेंस एंड अकाउंट्स सर्विस के विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार शामिल हैं. श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर 14 जून को राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया और टीम ने छह दिनों तक राम मंदिर से जुड़े इस मामले की जांच की.

एसआईटी ने जांच पूरी करने के तीन दिन बाद रिपोर्ट सौंपी और वो भी मुख्यमंत्री को न सौंप कर, अपर मुख्य सचिव (गृह) को. चूंकि अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य हैं, इसलिए रिपोर्ट सौंपने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को नजदीक से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र त्रिपाठी कहते हैं एसआईटी का गठन किसी घोटाले की जांच के लिए नहीं बल्कि लोगों को बचाने के लिए किया गया था.

डीडब्ल्यू से बातचीत में महेंद्र त्रिपाठी कहते हैं, "एसआईटी सरकार की है और सरकार अपने लोगों को बचाने के लिए जांच करा रही है. अयोध्या में एक एक व्यक्ति को पता है कि किसके संरक्षण में यह घोटाला लंबे समय से हो रहा है. लेकिन चूंकि बड़े नाम इसमें शामिल हैं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम शामिल है, तो उनके खिलाफ कैसे कार्रवाई हो सकती है. चंपत राय मंदिर आंदोलन से जुड़े थे. ट्रस्ट में सर्वेसर्वा बना दिए गए. इनके खिलाफ कार्रवाई होती है तो पूरे आंदोलन को ही फ्रॉड बना दिया जाएगा. इसीलिए उन्हें बचाया जा रहा है.”

हालांकि महेंद्र त्रिपाठी यह भी कहते हैं कि अब बड़े लोगों का भी बच पाना मुश्किल है क्योंकि उन्हें बचाने के चक्कर में सरकार पर खतरा आ जाएगा. उनके मुताबिक, "ड्राइवर, नोट गिनने वाले छोटे कर्मचारी वगैरह को फंसाया जा रहा है, ताकि दिखाया जा सके कि कार्रवाई हो रही है, लेकिन देर-सबेर इन बड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, एफआईआर होगी. क्योंकि जब बात सरकार पर खतरे की आ जाएगी तो सरकार खुद को बचाने के लिए इन्हें लपेटेगी ही.”

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उधर अयोध्या के कुछ स्थानीय लोगों और संगठनों ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें कड़ी सजा देने की मांग की है. हालांकि अभी किसी की तरफ से कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है. यहां तक कि बिना एफआईआर दर्ज किए ही एसआईटी जांच भी पूरी कर ली गई, इसीलिए एसआईटी जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव भी होने हैंतस्वीर: Indian Press Information Bureau/AFP

चंपत राय पर कार्रवाई?

सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि चढ़ावा चोरी मामले में आरोपों में घिरे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ एक ओर तो कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, दूसरी ओर ये तीनों लोग मंगलवार को राम मंदिर परिसर में एक कार्यक्रम में अतिथि की भूमिका में नजर आए. इस पूरे मामले में न सिर्फ श्रद्धालुओं का बल्कि अयोध्या के स्थानीय लोगों का भी गुस्सा फूट पड़ा है.

अयोध्या के कारसेवक पुरम इलाके में एक छोटी सी दुकान चलाने वाली बुजुर्ग महिला सुषमा देवी कहती हैं कि अयोध्या में बाहर के लोगों ने पूरा माहौल बिगाड़ दिया है. डीडब्ल्यू से बातचीत में सुषमा देवी बताती हैं, "स्थानीय लोग तो जो छोटा मोटा रोजगार करते थे, वो भी खत्म हो गया. यहां के लोगों के पास ज्यादा पैसा था नहीं. बाहर के लोगों के पास पैसा था, उन्होंने पैसा लगाया और अब भी वही फायदा उठा रहे हैं. अयोध्या में ज्यादातर संत-महात्मा भी बाहर से आए थे और जमीन बेचकर अमीर बन गए. स्थानीय लोगों का तो हाल ये है कि वो अपना रोजी-रोजगार बंद करके बाहरी लोगों की दुकानों में नौकर बन गए हैं.”

यही नहीं, स्थानीय लोगों की नाराजगी इसलिए भी है कि जिस अयोध्या में वो पिछली कई पीढ़ियों से रहते आए हैं, उसी नगरी में वो बेगाने बन गए हैं. अयोध्या के रहने वाले दिलीप तिवारी नोएडा की एक फैक्ट्री में काम करते हैं. वह बताते हैं, "अयोध्या में हर चीज पर बाहरी लोगों का अधिकार हो गया है. यहां तक कि स्थानीय श्रद्धालु और भक्त तक श्रीराम मंदिर नहीं जा पा रहे हैं. स्थानीय लोग तो अब ये सोच रहे हैं कि हम अयोध्या में रह क्यों रहे हैं. वहां राम राज्य नहीं, बल्कि पुलिस राज्य चल रहा है.”

इस बीच, चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद बड़ी मात्रा में दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की पड़ताल भी शुरू हो गई है. विश्व सिंधी सेवा संगम संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर राजू मनवानी का दावा है कि 26 जनवरी 2021 को दुनिया भर के सिंधी समाज की ओर से एक-एक किलो चांदी की दो सौ ईंटें अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थी. सोशल मीडिया पोस्ट पर डॉक्टर मनवानी ने आरोप लगाया है कि दान की गई चांदी की ईंटों की न तो कोई रसीद दी गई और न ही बाद में यह जानकारी दी गई कि उनका उपयोग कहां किया गया.

अयोध्या के कई लोगों को कहना है कि मंदिर बनने के बाद से शहर का माहौल बदलातस्वीर: Goutam Hore/DW

राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में कुछ दिनों पहले मंदिर के फंड में कथित गड़बड़ी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है. इसी तरह की दो अन्य शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं लेकिन किसी भी शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है. संतोष दुबे कहते हैं कि मंदिर को दान में मिली चांदी की ईंटों के गायब होने की शिकायतें पहले भी की गई हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

डीडब्ल्यू से बातचीत में संतोष दुबे कहते हैं, "जब साल 2002 और 2003 के बीच राम शिलाएं गायब होने लगी थीं, तब भी हमने अयोध्या के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दी थी. और अधिकारियों को आगाह किया था.  1989 में ‘मंदिर वहीं बनाएंगे' अभियान के तहत अलग-अलग गांवों से राम शिलाएं यानी मंदिर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंटें आई थीं और उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. इस तरह की 1,250 राम शिलाएं थीं, जो सोने और चांदी से बनी थीं और उनमें हीरे जड़े हुए थे. 2002 के बाद ये शिलाएं गायब हो गईं.”

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 21 जून 2022 तक राम मंदिर ट्रस्ट को निर्माण कार्य के लिए 3,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का दान मिला था. यह जानकारी विश्व हिन्दू परिषद की ओर से जारी ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई थी. इसके अलावा फरवरी 2024 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि राम मंदिर ट्रस्ट को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के एक महीने बाद 25 करोड़ रुपये और 25 किलो सोना दान में मिला. पिछले साल सितंबर में ट्रस्ट ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 में 327 करोड़ रुपये की सालाना आय दर्ज की गई, जिसमें 153 करोड़ रुपये चढ़ावा यानी दान के जरिए आया था.

चढ़ावे में चोरी के आरोपों के बाद राम मंदिर के चढ़ावे में भारी कमीतस्वीर: Rajesh Kumar Singh/AP Photo/picture alliance

राम मंदिर की आय में आई कमी

चढ़ावा में चोरी की खबरों के बाद मंदिर को होने वाली आय में काफी कमी दर्ज की गई है. ट्रस्ट से जुड़े एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया कि मंदिर की दानपेटियों से मिलने वाली नगदी में आधे से ज्यादा की गिरावट आई है. उनके मुताबिक, "जब से यह मामला सामने आया है, दानपेटियों से हर दिन एक लाख रुपये से भी कम की राशि प्राप्त हो रही है, जबकि इससे पहले यह रकम दस से बारह लाख रुपये प्रतिदिन होती थी.”

वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र त्रिपाठी कहते हैं, "आप छिपाने की कितनी भी कोशिश कीजिए, मीडिया में सब कुछ तो आ ही जाता है. निश्चित तौर पर श्रद्धालुओं की आस्था से हो रहे इस खिलवाड़ की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या और उनकी ओर से होने वाली दान-दक्षिणा पर फर्क तो पड़ ही रहा है. लोगों को पता चल रहा है कि हम जो चढ़ावा दे रहे हैं वो चोरों के हाथ में जा रहा है. कई श्रद्धालु मिल रहे हैं जो बता रहे हैं कि या तो वो कम चढ़ावा दे रहे हैं या फिर चढ़ावा सीधे ऑनलाइन दे रहे हैं.”

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