मॉनसून के बाद हर साल गौरी भिवड़े और उनके पति दसियों हजार लोगों के साथ गन्ने की कटाई का काम करने के लिए महाराष्ट्र के पश्चिमी जिलों में चले जाते हैं. और हर साल गौरी और उनके जैसी सैकड़ों महिलाओं का यौन शोषण होता है. गौरी बताती हैं कि हां, ऐसा तो हर साल होता है.
एक बार गौरी को प्रेग्नेंसी में बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ीं. इसके बाद डॉक्टर ने उनसे कहा कि गर्भाश्य निकाल देते हैं ताकि आइंदा दिक्कत ना हो.
महाराष्ट्र में गन्ने की कटाई के लिए जाने वालीं महिलाएं साल दर साल बलात्कार झेल रही हैं. खेतों के मालिकों से लेकर बिचौलिये तक, सब उनको अपना शिकार बनाते हैं. कार्यकर्ताओं के मुताबिक ऐसा कर्ज की वजह से होता है.
देखें, रेप के लिए कहां कितनी सजा होती है
हाल ही में जर्मनी ने अपने बलात्कार विरोधी कानून को और सख्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं. जानिए, जर्मनी में और बाकी देशों में रेप के लिए क्या कानून है.
तस्वीर: Fotolia/Artem Furmanजर्मन कानून में अब तक रेप की कोशिश का विरोध न करने पर मामला रेप का नहीं बनता था. अब इस परिभाषा में बदलाव किया गया है. अब छूने, अंगों को टटोलने और दबोचने को भी यौन हिंसा के दायरे में लाया गया है.
तस्वीर: dapdफ्रांस में रेप का मतलब है ऐसी कोई भी यौन गतिविधि जिसमें दोनों की सहमति ना हो. वहां 20 साल तक की सजा हो सकती है. गाली-गलौज पर भी दो साल तक की सजा का प्रावधान है.
तस्वीर: picture alliance/Denkou Images1996 में इटली के रेप विरोधी कानून में व्यापक बदलाव किए गए. इसके बाद पत्नी के साथ जबर्दस्ती को भी रेप के दायरे में लाया गया. इसके लिए 10 साल तक की सजा हो सकती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/M. Gambariniस्विट्जरलैंड में रेप तभी माना जाता है जब योनि संसर्ग हुआ हो. अन्य यौन हमलों को यौन हिंसा माना जाता है. इसके लिए 10 साल तक की जेल हो सकती है. 2014 के बाद शादी में भी रेप को अपराध माना गया है.
तस्वीर: Fotolia/Ambelripस्वीडन में जबरन किसी के कपड़े उतारने पर भी दो साल की कैद हो सकती है. मजबूर लोगों का यौन शोषण, मसलन सोते वक्त या नशे की हालत में या किसी तरह डरा कर सेक्स करने की कोशिश करना भी रेप है.
तस्वीर: Fotolia/Gerhard Seybertअमेरिका में अलग-अलग राज्यों में रेप की परिभाषा अलग-अलग है. लेकिन वहां सेक्स में सहमति पर जोर दिया गया है. सेक्स से पहले स्पष्ट सहमति जरूरी है.
तस्वीर: Fotolia/Yuri Arcursयहां रेप के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. हालांकि रेप को साबित करना बहुत मुश्किल है. जो महिलाएं रेप की शिकायत करती हैं अगर वे साबित ना कर पाईं तो उन्हें भी सजा हो सकती है.
तस्वीर: picture-alliance/Bildagentur-online/AGFनिर्भया कांड के बाद भारत में रेप विरोधी कानून में कई बदलाव किए गे हैं. अब रेप के लिए आमतौर पर सात साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. लेकिन विशेष परिस्थितियों में जैसे कि पुलिस हिरासत में रेप, रिश्तेदार या टीचर द्वारा रेप के मामले में 10 साल से उम्र कैद तक भी हो सकती है. अगर पीड़िता की मौत हो जाती है तो मौत की सजा भी हो सकती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/T.Topgyal
एक कार्यकर्ता बताते हैं कि महिलाओं को उनके परिवार वाले गर्भाश्य निकलवा देने को कहते हैं ताकि वे रेप से प्रेग्नेंट ना हो जाएं. बीड जिले में दर्जनों ऐसी महिलाओं से मिल चुकीं मुंबई में ऐक्शनएड की रीजनल मैनेजर नीरजा भटनागर कहती हैं, "यह एक ऐसा उल्लंघन है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. इससे ज्यादा क्रूर मानवाधिकार उल्लंघन नहीं हो सकता कि आपको अपना गर्भाश्य इसलिए निकलवा देना पड़े ताकि आप उस अर्थव्यस्था का हिस्सा बन सकें जिसे आपकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है."
वैसे, चीनी मिलों की को-ऑपरेटिव के प्रवक्ता ऐसी घटनाओं से साफ इनकार करते हैं. महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज फेडरेशन के उपाध्यक्ष श्रीरामजी शेते कहते हैं, "हमने ऐसी कोई घटना नहीं सुनी है. अगर वे तन्खवाह या हालात से नाखुश होते तो हर साल क्यों आते?"
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है और महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा. यहां के पांच लाख ग्रामीण बीड़, शोलापुर, कोल्हापुर, सांगली और सतारा जिलों में गन्ना काटने पहुंचते हैं. मजदूरों को जोड़ों में रखा जाता है. ज्यादातर ऐसे हैं जिनके सिर पर कर्ज है. उन्होंने खेत मालिकों से 50-60 हजार रुपये कर्ज लिया है जिसके बदले वे छह से आठ महीने तक काम करते हैं. और काम खत्म हो जाने के बाद भी साहूकार कहता है कि अभी कर्ज बाकी है इसलिए अगले सीजन फिर आना होगा.
बच्चाबाजी यानी लड़कों का यौन शोषण अफगानिस्तान में एक परंपरा जैसा है. लेकिन इसके चक्कर में सैकड़ों पुलिसवाले मारे जा चुके हैं. तालिबान इन बच्चों के हाथों ही उन अफसरों की हत्याएं करवा रहा है. तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं.
तस्वीर: DW/O. Didarअफगानिस्तान में ताकतवर राजनीतिज्ञ, सैन्य अफसर, कबीलाई सरदार और अन्य प्रभावशाली लोग बच्चों को दास की तरह रख सकते हैं. यह उनके प्रभाव का प्रतीक होता है.
तस्वीर: DW/O. Didarदास बनाए गए इन बच्चों को महिलाओं जैसे कपड़े पहनाकर पार्टियों में नचाया जाता है और इनका यौन शोषण भी किया जाता है.
तस्वीर: DW/H. Siratबच्चाबाजी को समलैंगिकता नहीं माना जाता. समलैंगिकता तो इस्लाम में हराम है लेकिन बच्चाबाजी को एक सांस्कृतिक परंपरा कहकर स्वीकार किया जाता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpaकई अफगान इलाकों में कहावत है कि औरतें बच्चे पैदा करने के लिए होती हैं और लड़के मजे करने के लिए.
तस्वीर: DW/N. Behzadबच्चाबाजी के लिए इस्तेमाल होने वाले बच्चे 10 से 18 साल के बीच के होते हैं. या तो वे गरीबी की वजह से इसमें फंसते हैं या फिर उन्हें अगवा करके इस पेशे में धकेल दिया जाता है. कई बार गरीब परिवार अपने लड़कों को बेच भी देते हैं.
तस्वीर: DW/A. Behradबच्चाबाजी झेलने के बाद जो लड़के बड़े होते हैं, देखा गया है कि वे हिंसक हो जाते हैं और तालिबान उन्हें उनके मालिकों के कत्ल के लिए इस्तेमाल करता है.
तस्वीर: DW/H. Siratअफगानिस्तान में जब (1996-2001) तालिबान का राज था तो इस परंपरा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. लेकिन हाल के सालों में इसने फिर जोर पकड़ लिया है. दक्षिणी और पूर्वी ग्रामीण इलाकों में इसका चलन काफी है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/N. Shirzadaअफगान समाज में महिलाओं पर बहुत ज्यादा पाबंदियां हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे पुरुषों और महिलाओं का संपर्क कम होता है और बच्चाबाजी बढ़ती है.
तस्वीर: DW/H. Siratअफगानिस्तान इंडेपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक देश में रेप के खिलाफ तो कड़े कानून हैं लेकिन बच्चाबाजी को लेकर यह कानून स्पष्ट नहीं है.
तस्वीर: DW/H. Sirat
ये लोग जिन हालात में रहते हैं, वे अमानवीय से भी बदतर कहे जा सकते हैं. फूस की झोपड़ियों में ना पानी होता है, ना बिजली. शौच की सुविधा तो सपनीली बात है. कई बार पति-पत्नी के साथ उनके बच्चे भी आते हैं. सुबह 4 बजे से शाम 4-5 बजे तक लगातार काम करते हैं.
कई जगह एक-आध डॉक्टर होता है जो कटाई के दौरान कट वगैरह लग जाने पर मरहम पट्टी कर देता है. लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि चोट अगर ज्यादा लग जाए, या कोई बीमारी हो जाए और कोई और प्रेग्नेंट हो जाए तो उन्हें उससे खुद निपटना होता है.
सतारा में काम करने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता अपना नाम नहीं बताना चाहतीं क्योंकि इससे वे मजदूर मुश्किल में फंस सकते हैं जिनके लिए वह काम करती हैं. वह बताती हैं, "यह बंधुआ मजदूरी का सबसे बुरा रूप है. और इसकी जलन सबसे ज्यादा औरतों को सहनी पड़ती है. वे लोग अपने परिवार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकतीं. वे बस भाग्य को दोष देती हैं. उन्हें पता है कि उनके साथ क्या होगा, फिर भी पेट भरना है तो काम करना ही होगा."
सेक्स वर्क की अंधेरी दुनिया में फंसीं बच्चियां
सामाजिक संस्थाओं का अनुमान है कि जर्मनी में चार लाख यौनकर्मियों में से 10 फीसदी नाबालिग हैं. कई बार अंजाने में तो कई बार जिद में वे अंधेरी दुनिया में प्रवेश कर जाती हैं.
तस्वीर: Fotolia/Pedro Nogueiraजर्मनी में यौनकर्मियों की सही संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है. यौनकर्मियों के लिए काम करने वाली बर्लिन की हाइड्रा संस्था के मुताबिक करीब चार लाख महिलाएं यौनकर्म से रोजी रोटी कमा रही हैं.
तस्वीर: picture alliance / Photoshotजर्मनी में पूर्वी यूरोप और अफ्रीका से आई कई महिलाएं इस काम में लिप्त हैं. लेकिन यौनकर्म में शामिल नाबालिग लड़कियां ज्यादातर जर्मन ही हैं. डॉर्टमुंड की राहत संस्था मिडनाइट मिशन के मुताबिक यौनकर्म करने वाली दो तिहाई नाबालिग लड़कियां जर्मन मूल की हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpaइन लड़कियों में कई स्कूली छात्राएं हैं. ये नशे की लती हैं. नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए ही ज्यादातर वे यह रास्ता अपनाती हैं. इनमें से ज्यादातर अपने घरों से भागी हुई हैं और उनके पास रहने का ठिकाना नहीं है.
तस्वीर: Fotolia/NatUlrichयौनकर्म को कमाई के लिए अपनाने के कई कारण हैं. कभी वे दोस्तों या रिश्तेदारों के बहकावे में आकर यह काम करने लगती हैं तो कभी वे धोखे का शिकार हो जाती हैं. कई बार पुरुष उनके बॉयफ्रेंड बनकर उन्हें इस काम में बहला फुसलाकर घसीट लेते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/ANP XTRAजर्मनी में लड़कियों को जबरन वैश्यावृति में धकेले जाने को रोकने के लिए कानून में सख्ती लाई जा रही है. भविष्य में लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें सेक्स वर्क में धकेलने वालों को 10 साल तक कैद की सजा होगी.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/R. Vennenberndबंधुआ सेक्स वर्करों से सेवा लेने वाले लोगों को भी भविष्य में जर्मनी में तीन महीने से पांच साल तक कैद हो सकती है. सजा से बचने के लिए जरूरी होगा कि वह बंधुआ सेक्स वर्करों के बारे में अधिकारियों को फौरन सूचना दे.
तस्वीर: picture-alliance/dpaयौनकर्म की दुनिया में प्रवेश के बाद इनका बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. अक्सर वे यह समझ ही नहीं पाती हैं कि वे अपने साथ क्या कर रही हैं. कम उम्र में उनमें लोगों के खिलाफ जाने की प्रवृत्ति होती है. वे यौनकर्म को सामाजिक मान्यताओं को तोड़ने के कदम की नजर से देखती हैं.
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