ऑस्ट्रेलिया में कुछ लोग कहते हैं कि उन पर देश का कानून लागू नहीं होता. वे खुद को संप्रभु नागरिक कहते हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. अमेरिका में पनपा यह आंदोलन फैल रहा है.
ऑस्ट्रेलिया तस्वीर: Mark Baker/AP Photo/picture alliance
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ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स प्रांत के मैजिस्ट्रेट मार्क डगलस ने कहा है कि कथित संप्रभु नागरिकों के कारण देश की अदालतों पर बोझ बढ़ रहा है. ये संप्रभु नागरिक ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया के संघीय, राज्य और स्थानीय कानून उन पर लागू नहीं होते क्योंकि वे मानते हैं कि ये कानून गलत हैं.
ये ऐसे लोग हैं जो अक्सर सरकार की शक्तियों, टैक्स और कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं. अक्सर ये लोग इन कानूनों को लेकर अदालतों में चले जाते हैं और अपने मुकदमे खुद ही लड़ते हैं.
स्थानीय सार्वजनिक प्रसारक एबीसी को दिए इंटरव्यू में मैजिस्ट्रेट डगलस ने कहा कि न्यू साउथ वेल्स न्यायिक आयोग में करीब आधी शिकायतें ऐसे लोगों द्वारा दायर की जाती हैं जो खुद अपने मुकदमे लड़ते हैं. पिछले छह महीने में इनमें 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है और बहुत से मामले ऐसे हैं जिनमें संप्रभु नागरिक कानूनों को चुनौती दे रहे हैं.
एबीसी रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा, "आप कोई फाइल उठाएं और पता चलेगा कि यह पार्किंग फाइन के बारे में है जिसमें 300 पेज हैं. और फिर आपको लगेगा कि इसमें वही कथित-कानूनी दलीलें होंगी.”
कोविड के बाद बढ़ते मुकदमे
कोविड महामारी के बाद कथित संप्रभु नागरिकों द्वारा दायर मुकदमों में खासी वृद्धि देखी जा रही है. अन्य कई जजों ने भी इस बात को उठाया है. मैजिस्ट्रेट डगलस बताते हैं कि पिछले छह महीने में 50 से ज्यादा स्थानीय जजों ने कथित संप्रभु नागरिकों द्वारा दायर मुकदमे देखे हैं, जो साफ दिखाता है कि ऐसे मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
इन मुकदमों में आमतौर पर छोटे-मोटे मामले होते हैं, जैसे पार्किंग फाइन, बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना, अवैध प्रवेश या नशीली दवाओं का सेवन आदि. लेकिन चूंकि इनमें कानूनों को ही चुनौती दी जाती है, इसलिए ऐसे मुकदमों में ज्यादा वक्त लगता है और व्यवस्था पर बोझ बढ़ता है.
पिछले दिनों एक मामला आया था जिसमें एक कथित संप्रभु नागरिक ने अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स को कहा कि वे वेस्ट ऑस्ट्रेलिया प्रांत के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर लें. इस व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज किया गया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया.
मैजिस्ट्रेट डगलस ने कहा कि ये लोग अमेरिकी कानूनों, बाइबल और यहां तक कि अमेरिका के स्वतंत्रता घोषणा पत्र तक का हवाला देते हैं और कई बार तो जजों पर ही मुकदमा दायर कर देने की बात कहते हैं. ये लोग कहते हैं कि संविधान अवैध है, इसलिए उन पर कोई कानून लागू नहीं होता. इसलिए वे जुर्माने या टैक्स नहीं देना चाहते. मैजिस्ट्रेट डगलस पर एक संप्रभु नागरिक ने एक करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी करीब 50 करोड़ रुपये का दावा कर रखा है.
इन लोगों ने कोविड के दौरान लागू किए गए नियमों को भी अवैध बताया था. नवंबर 2021 में इन लोगों ने मेलबर्न में एक रैली भी निकाली थी.
संप्रभु नागरिकता आंदोलन
ग्रिफिथ क्रिमिनोलॉजी इंस्टिट्यूट में सीनियर लेक्चरर डॉ. कीरन हार्डी ने इस आंदोलन पर शोध किया है. वह लिखते हैं, "इन लोगों में साझा सूत्र यह विश्वास है कि संप्रभु लोगों पर ऑस्ट्रेलिया का कानून लागू नहीं होता. इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हर व्यक्ति पर समान कानून लागू होते हैं. यही कानून के राज की मूल भावना है.”
संप्रभु नागरिकता आंदोलन एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन है. विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह एक देश संप्रभु होता है और उसके ऊपर किसी अन्य देश का नियंत्रण या प्रभाव नहीं होना चाहिए, उसी तरह ये लोग मानते हैं कि इन लोगों पर किसी सरकार या संविधान का नियंत्रण या प्रभाव नहीं हो सकता. यह आंदोलन ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं, कई अन्य देशों में भी प्रचलित है, जिनमें अमेरिका प्रमुख है.
2023 में घूमने के लिए शानदार जगहें
दुनिया में बहुत सारी जगहें हैं देखने और जानने के लिए. घूमने का कीड़ा काट रहा हो और प्रेरणा की जरूत हो तो हम आपके लिए कुछ ढूंढ कर लाये हैं, रोमांचक शहरों से लेकर शांत प्रकृति और बेहतरीन संस्कृति की मिसालों तक.
तस्वीर: Uk Antarctic Heritage Trust/PA Media/dpa/picture alliance
यूरोप की सांस्कृतिक राजधानीः तिमिसोआरा, रोमानिया
अगले साल तिमिसोआरा के माथे पर यूरोप की सांस्कृतिक राजधानी का तमगा होगा. रोमानिया का यह तीसरा सबसे बड़ा शहर इतिहास और बहुसंस्कृति के रंगों से सराबोर है. यह ऑटोमन साम्राज्य और बाद में हाब्सबुर्ग के शासन में सेना का गढ़ था. बारोक शैली के वास्तु ने इसको "लिटिल वियना" का भी नाम दिया है. तिमिसोआरा वही जगह है जहां से 1989 में रोमानियाई क्रांति शुरू हुई.
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स्मार्ट और टिकाऊः सेविया, स्पेन
स्पेन की गर्मी काफी तेज होती है, खासतौर से दक्षिण में. यही वह जगह है जहां धूप के चश्मे और छाता जरूरी है. आपको यहां ऐसी लकड़ी से बनी डिजाइनर छत मिलेंगे जो मध्य सेविया में बड़ी राहत देते हैं. आंदालुसिया का शहर टिकाऊ वास्तु, ट्रैफिक प्लानिंग और ऐसी कई चीजों में मिसाल है. यही वजह है कि इसे 2023 के लिए यूरोपियन कैपिटल ऑफ स्मार्ट टूरिज्म का खिताब मिला है.
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विषमताओं का शहरः ड्रेसडेन, जर्मनी
लोनली प्लेनेट ने हाल ही में पूर्वी जर्मनी के ड्रेसडेन शहर को 2023 में घूमने के लिए बेहतरीन शहरों में शामिल किया. इस सूची में दूसरे नाम लीमा, मैनचेस्टर और मार्सेय हैं. ड्रेसडेन के पुराने शहर में बारोक शैली की फिर से बनाई गई प्राचीन इमारतें देखने वालों की आखों में चमक भर देती हैं. इसके साथ ही एल्बे नदी के दूसरी तरफ बने आधुनिक अपार्टमेंट भी खुब लुभाते हैं.
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जश्न का सालः सिडनी, ऑस्ट्रेलिया
2023 में सिडनी का ओपेरा हाउस 50 साल का हो रहा है. इस खास मौके का जश्न मनाने के लिए इस जगह 230 कार्यक्रमों की योजना बनी है जिसमें ऑस्ट्रेलियाई और अंतरराष्ट्रीय सितारे हिस्सा लेंगे. इनमें से कई मुफ्त होंगे. इन कार्यक्रमों का समापन अक्टूबर 2023 में एक भव्य कंसर्ट के साथ होगा.
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पार्टी टाइमः लिवरपूल, ब्रिटेन
लिवरपूल इस साल यूक्रेन की तरफ से यूरोविजन सॉन्ग कंटेस्ट की मेजबानी कर रहा है. इसे यूक्रेन में होना था. संगीत का यह शानदार जलसा 13 मई, 2023 को होगा. लिवरपुल अपने जिंदादिल संगीत के लिए बढ़िया विकल्प था. आखिर यही वो जगह है जहां बीटल्स साथ आये और दुनिया को अपने संगीत के सुरों पर नचाया. लिवरपूल को 2015 में यूनेस्को सिटी ऑफ म्यूजिक का खिताब भी मिला था.
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द ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियमः काहिरा, मिस्र
राजधानी काहिरा के ठीक बाहर बने द ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम के दरवाजे 2023 में खुल जायेंगे. गीजा के पिरामिडों के कदमों तले बना ये विशाल म्यूजियम कांच के विशाल बाहरी हिस्से की वजह से और खास है. 90,000 वर्गमीटर की जगह में करीब 50,000 पुरातात्विक नमूनों की नुमाइश होगी. यह म्यूजियम अपनी तरह का सबसे विशाल म्यूजियम होगा.
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सच्चाई और जीवन का उत्साहः अक्रा, घाना
लोनली प्लेनेट ने पश्चिमी अफ्रीका के घाना को उसकी वास्तविकता और जिंदादिल माहौल के लिए निश्चित रूप से घूमी जाने वाली जगह माना है. खूब चहलपहल वाली कई सारी बेहतरीन सड़कों और बाजारों वाली घाना की राजधानी सचमुच किसी जादू जैसी दिखती है. इसका एक काला इतिहास भी है. औपनिवेशिक दौर में यह गुलामों के व्यापार का केंद्र था.
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फिर से खुला ट्रांस भूटान रेल, भूटान
करीब 60 साल के बाद ऐतिहासिक ट्रांस भूटान रेल फिर से खुल गया है. 400 किलोमीटर लंबा यह रूट पूर्व से लेकर पश्चिम भूटान तक की सैर कराता है. रास्ते में बौद्ध मंदिरों और हिमालय की मनोहारी छटा कई बार सांस लेना भी भुला देती है. हाइकरों के लिए यहां गाइड भी मिलते हैं और होमस्टे में बढ़िया सत्कार.
नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका ने स्लोवेनिया को कई बार दुनिया की 25 सबसे बेहतरीन घूमने वाली जगहों में शामिल किया है. पत्रिका ने स्लोवेनिया को उसकी शानदार प्रकृति के लिए सराहा है. सैलानी यहां ग्रीन गुरमे रूट पर बढ़िया लजीज खाने का मजा ले सकते हैं. करीब 473 किलोमीटर की साइकिल यात्रा आपको ना सिर्फ देश के बेहतरीन ग्रामीण इलाके बल्कि शानदार रेस्तराओं तक भी ले जाती है.
तस्वीर: Przemyslaw Iciak/Zoonar/picture alliance
सैलानियों का चुंबकः अमालफी कोस्ट, इटली
दुनिया में ऐसे असंख्य शहर और इलाके हैं जहां सैलानी उमड़े चले आते हैं. इनमें से एक है इटली का अमालफी कोस्ट, जो हर साल गर्मियों में छुट्टी मनाने वालों की भारी भीड़ बुलाता है. हालांकि अब एक नये नियम की वजह से सैलानियों की संख्या सीमित हो जायेगी. यहां भी दिल्ली की तरह ऑड और ईवन नंबर का सिस्टम चालू किया गया है.
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सैलानियों का स्वागत हैः जापान
कोविड की महामारी के भयानक दौर में जापान ने लगभग दो सालों के लिए अपनी सीमा बंद कर दी थी. अक्टूबर 2022 से विदेशी सैलानियों को फिर से यहां आने दिया जा रहा है. सैलानियों की संख्या यहां महामारी के पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंची है, इसलिए भीड़ बढ़ने से पहले टोक्यो के बौद्ध मठ ब्योडो इन टेंपल जैसी जगहें देखने का यह बढ़िया मौका है.
तस्वीर: Sanga Park/Zoonar/picture alliance
अपने प्यार को बचा कर रखियेः अंटार्कटिक
जलवायु परिवर्तन का असर यात्रा और पर्यटन पर भी हो रहा है. बढ़ता तापमान कभी ठंडे रहे इलाकों को आरामदेह बना रहा है जबकि कुछ इलाके इतने गर्म हो जा रहे हैं कि वहां जाया ही नहीं जा सकता. ह्यूस्टन की बजाय हेलसिंकी और अलास्का की बजाय आंदालुसिया के बारे में सोचना पड़ रहा है. अंटार्कटिक में पर्यटन बढ़ रहा है लेकिन अच्छा होगा कि वहां ना जायें ताकि इसके नाजुक इकोसिस्टम को खतरे से बचाया जा सके.
तस्वीर: Uk Antarctic Heritage Trust/PA Media/dpa/picture alliance
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यह आंदोलन अमेरिका में ही शुरू हुआ था. अपने आंदोलन को आधार देने के लिए ये लोग कई तरह के राजनीतिक सिद्धांतों का सहारा लेते हैं. उनमें रिडेंपशन थ्योरी एक है. रिडेंपशन का सिद्धांत 1933 में अमेरिका के दिवालिया होने से निकला है जब सरकार ने सोने को मुद्रा के आधार के रूप में त्याग दिया था. रिडेंपशन थ्योरी दावा करती है कि तब अमेरिकी सरकार ने सोने की जगह लोगों को अपनी संपत्ति बताया और अन्य देशों के साथ इस संपत्ति के आधार पर लेन देन करना शुरू कर दिया.
1970 के दशक में इस आंदोलन ने अमेरिका में खासा जोर पकड़ा. अमेरिका के सदर्न पावर्टी लॉ सेंटर ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि विलियम पोर्टर गेल नाम के एक व्यक्ति ने ‘पोसे कोमिटेटस' नाम का सरकार विरोधी संगठन बनाया, जिसकी बातें नस्लवाद और यहूदी विरोध से प्रेरित थीं. आने वाले दशकों में यह आंदोलन ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में फैल गया.
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बढ़ती संख्या का खतरा
ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कुछ अन्य देशों में इस आंदोलन के मानने वालों की अच्छी खासी संख्या है, जो खुद के बनाए पहचान पत्र लेकर चलते हैं और खुद को ही पुलिस मानते हैं. इस आधार पर ये देश के कानूनों को अमान्य कहते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य में 2021 में एक व्यक्ति को नशीली दवाओं के मामले में गिरफ्तार किया गया था. उस व्यक्ति ने अपने मुकदमे में तर्क दिया कि कानून उस पर लागू नहीं होते. तब जज ग्लेन कैश ने उस व्यक्ति और उसके तर्कों की तीखी निंदा करते हुए अपने फैसले में लिखा था, "सिर्फ तर्क सुनकर पता चल जाता है कि यह कोरी बकवास है. जाहिर है कि यह व्यक्ति उस अंतरराष्ट्रीय समूह का हिस्सा है जो पिछले कुछ सालों से कानून से बचने कि विफल कोशिश कर रहे हैं.”
हालांकि, व्यवहारिक रूप से ऐसा नहीं है कि कोई कानून देश के नागरिकों पर लागू ना हो, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड महामारी के बाद ऐसे लोगों संख्या में वृद्धि हुई है जो खुद को संप्रभु नागरिक कहने लगे हैं.
डॉ. हार्डी कहते हैं, "यह स्पष्ट है कि अगर इस पर प्रभावशाली रूप से नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके बढ़ जाने की गुंजाइश है.”