जोहानिसबर्ग शहर के नजदीक, सोने की खदानों के पास बसी एक टाउनशिप में यह गोलीबारी हुई है. इसमें नौ लोगों की मौत हुई, जबकि 10 लोग घायल हैं. इसी महीने दक्षिण अफ्रीका में यह दूसरी ऐसी घटना है.
दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अप्रैल से सितंबर महीने के बीच देश में हर दिन औसतन 63 लोग मारे गए हैं. ज्यादातर मौतें संगठित अपराध और गैंग संबंधी हिंसा में हुई हैंतस्वीर: Emmanuel Croset/AFP/Getty Images
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दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग के पास एक टाउनशिप में रविवार आधी रात को बंदूकधारियों ने गोलियां चलाकर कम-से-कम नौ लोगों को मार दिया. स्थानीय पुलिस के मुताबिक, "कुछ पीड़ितों पर अज्ञात हमलावरों ने गलियों में बेधड़क गोलियां मारीं." न्यूज एजेंसी एएफपी ने पुलिस के हवाले से बताया है कि गोलीबारी का मकसद अभी तक पता नहीं चला है. पुलिस ने शुरू में दस लोगों के मारे जाने की बात कही थी लेकिन बाद में संख्या घटाकर नौ बताई गई. इस मामले में 10 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
अब तक क्या पता चला?
गोलीबारी स्थानीय समय, रात के करीब 1 बजे बेकर्सडेल में एक स्थानीय बार के पास हुई. जोहानिसबर्ग से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित बेकर्सडाल, दक्षिण अफ्रीका की कुछ बड़ी सोने की खदानों के करीब बसा एक गरीब इलाका है. पुलिस ने बताया है कि एक सफेद मिनीबस और एक सेडान कार में सवार लगभग 12 हमलावरों ने "बार के ग्राहकों पर गोलियां चलाईं और वहां से भागते हुए लोगों पर बेधड़क फायरिंग जारी रखी." पुलिस प्रशासन ने हमलावरों की तलाश के लिए छापेमारी शुरू कर दी है.
गैर-कानूनी हथियारों की समस्या
दक्षिण अफ्रीका में हथियार रखने के कानून काफी सख्त हैं. बावजूद इसके, देश में बड़ी संख्या में गैरकानूनी बंदूकें हैं. दिसंबर महीने में ही मास शूटिंग की यह दूसरी घटना है.
यह तस्वीर 6 दिसंबर को राजधानी प्रिटोरिया में हुई 'मास शूटिंग' के घटनास्थल की हैतस्वीर: Alet Pretorius/REUTERS
इससे पहले 6 दिसंबर को राजधानी प्रिटोरिया में एक हथियारबंद हमलावर ने एक हॉस्टल के पास ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिसमें 3 साल के बच्चे समेत 12 लोगों की मौत हुई थी. पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर महीने के बीच देश में हर दिन औसतन 63 लोग मारे गए हैं. इन मौतों में की सबसे अहम वजह दक्षिण अफ्रीका में संगठित अपराध और गिरोहों की हिंसा रही है.
दक्षिण अफ्रीका की इस गुफा में हैं लाखों साल पुराने इंसानी कंकाल
दक्षिण अफ्रीका में स्टर्कफोंटेन गुफाएं लाखों साल पुराने इंसानों और जानवरों के जीवाश्मों को अपने अंदर संजो कर रखने के लिए मशहूर हैं. यूनेस्को की यह वर्ल्ड हेरिटेज साइट सैलानियों के लिए अब दोबारा खोल दी गई है.
तस्वीर: DENIS FARRELL/picture alliance
पहले प्रवेश द्वार ढूंढें
स्टर्कफोंटेन गुफाओं में जाने के लिए सबसे पहले उसका प्रवेश द्वार ढूंढें. यह गुफाएं दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग से ज्यादा दूर नहीं है. 1999 में इन गुफाओं को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया था. पुरातात्विक कलाकृतियों के अलावा, यहां ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस के जीवाश्म भी पाए गए. ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस होमिनिडे परिवार से आते हैं जो ना तो पूरे इंसान होते थे और ना ही बंदर.
तस्वीर: EMMANUEL CROSET/AFP via Getty Images
अंधेरे के बाद उजाला
वैसे तो गुफाओं में सीढ़ियां मौजूद हैं, लेकिन अंदर अंधेरा और नमी होने के कारण, आपको थोड़ी हिम्मत से काम लेना होगा. साथ ही स्वस्थ भी होना होगा. वो इसलिए क्योंकि अंदर काफी पतले पतले रास्ते हैं जहां से आपको शायद टेढ़ा होकर या फिर झुक कर निकलना होगा.
तस्वीर: Dominic Stratford/University of the Witwatersrand/picture alliance
प्रवेश द्वार में सावधानी
इस तस्वीर में टूर गाइड केनेथ मावेटे आपको प्रवेश द्वार से गुफाओं में जाते हुए दिख रहे हैं. "स्टर्कफोंटेन" नाम का मतलब अफ्रीकी भाषा में "भयंकर बहाव वाला झरना" होता है. अब यहां से ही पर्यटकों को आगे का रास्ता समझाया जाता है.
तस्वीर: EMMANUEL CROSET/AFP via Getty Images
मरने के बाद हुए मशहूर
इस तस्वीर में आप ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस की कॉपी देख रहे हैं. स्टर्कफोंटेन में जो जीवशम हैं, जब वो कभी जब जिंदा रहे होंगे तो कुछ ऐसे ही दिखते होंगे. तस्वीर में ‘लूसी’ है जिसे इथियोपिया के हदर में 1974 में खोजा गया था. माना जाता है कि लूसी लगभग 32 लाख साल पहले कभी रही होगी.
तस्वीर: Martin Meissner/AP/picture alliance
इसे कहते हैं ‘क्रेडल ऑफ ह्यूमनकाइंड’
इन गुफाओं को ‘क्रेडल ऑफ ह्यूमनकाइंड’ भी कहा गया है, जिसका मतलब है मानवजाति का पालना. वो इसलिए क्योंकि इन गुफाओं में आज के इंसानों के सबसे करीबी पूर्वज पाए गए थे. यहां पर एक कंकाल भी पाया गया था जिसका नाम बाद में ‘लिटिल फुट’ रखा गया. वो करीब 30 लाख साल पुराना बताया जाता है - यह कंकाल पुरामानवविज्ञान जगत में खासा मशहूर है.
तस्वीर: Yoav Lemmer/picture-alliance
‘लिटिल फुट प्रोजेक्ट’
ऑस्ट्रेलोपिथेकस प्रोमेथियस "लिटिल फुट" की प्रतिकृति को दक्षिण अफ्रीका के क्रियशदॅार्प के विजिटर सेंटर के संग्रहालय में देखा जा सकता है. इसकी खुदाई में 15 साल लग गए, क्योंकि हड्डियां बहुत कठोर डोलोमाइट चट्टान में धंसी हुई थीं और उन्हें इन पतली और कठिन पहुंच वाली गुफाओं में हाथों से तराशना था.
तस्वीर: EMMANUEL CROSET/AFP via Getty Images
कितनी बड़ी है गुफा
पूरी गुफा प्रणाली 47 किलोमीटर (29 मील) से ज्यादा लंबी है; लोग केवल एक छोटे से बंद क्षेत्र में ही प्रवेश कर सकते हैं. आज तक यहां कोई बड़ी दुर्घटना तो नहीं हुई, लेकिन खुदाई के दौरान ऐसा कई बार हुआ कि भूवैज्ञानिक या पुरामानवविज्ञानी यहां फंस गए हों या उन्हें बचने के लिए रस्सियों की जरूरत पड़ी हो.