जर्मनी में बचाई गई हम्पबैक व्हेल टिम्मी का शव डेनमार्क के अनहोल्ट द्वीप के पास मिला, जिससे उसके बचाव अभियान के बावजूद जीवित न रह पाने की पुष्टि हुई. अधिकारियों ने लोगों को शव से दूर रहने की चेतावनी दी है.
जर्मनी में बचाई गई व्हेल टिम्मी का शव डेनमार्क के पास मिला हैतस्वीर: Philip Dulian/dpa/picture alliance
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जर्मनी में कुछ सप्ताह पहले बचाई गई एक हम्पबैक व्हेल की डेनमार्क के पास मौत हो गई है. अधिकारियों ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मृत व्हेल वही है जिसे पहले जर्मनी के तट पर फंसे होने के बाद बचाने की कोशिश की गई थी. जर्मन मीडिया में इस व्हेल को टिम्मी नाम दिया गया था.
डेनिश पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की डिवीजन प्रमुख जेन हैंसन ने कहा कि आनहोल्ट द्वीप के पास फंसी यह व्हेल वही है, जिसे जर्मनी में बचाए जाने की प्रक्रिया के तहत समुद्र में छोड़ा गया था. उन्होंने बताया कि व्हेल के शरीर पर लगे ट्रैकिंग उपकरण की पहचान के आधार पर यह पुष्टि की गई है.
यह व्हेल पहली बार 23 मार्च को जर्मनी के बाल्टिक सागर तट पर ल्यूबेक शहर के पास एक रेत के टीलों पर फंसी हुई नजर आई थी. उस समय इसे निकालने के कई प्रयास किए गए, लेकिन शुरुआत में उन कोशिशों में सफलता नहीं मिली. कुछ समय के लिए यह खुद को मुक्त कराने में कामयाब हुई, लेकिन बाद में फिर कई बार अलग अलग स्थानों पर फंसती रही.
100 साल गायब रहने के बाद लौटी सेई व्हेल
अर्जेंटीना के पैटेगोनियाई तटों से करीब 100 साल तक लापता रहने के बाद पहली बार विशालकाय नीली भूरी सेई व्हेलें दिखाई पड़ी हैं. लुप्तप्राय व्हेलों को बचाने की कोशिशें रंग लाई हैं.
तस्वीर: Cristian Dimitrius/Jumara Films/REUTERS
व्हेलों की वापसी
धरती से लुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने की कोशिशें कैसे कामयाब हो सकती हैं यह सेई व्हेलों की वापसी ने दिखा दिया है. करीब 100 साल के बाद इन व्हेलों की वापसी हुई है. व्हेलों के शिकार पर वैश्विक रोक लगने के कई दशकों बाद यह संभव हुआ है.
तस्वीर: Cristian Dimitrius/Jumara Films/REUTERS
सेई व्हेल
सेई व्हेल पंखों वाली नीली बलीन व्हेलों की प्रजाति की तीसरी सबसे बड़ी व्हेल हैं. इनकी लंबाई 19.5 मीटर और वजन 28 टन तक हो सकता है. ये गहरे भूरे रंग की होती हैं और इनके शरीर के मध्य हिस्से में सफेद पट्टी होती है. सेई व्हेल की तैराकी सबसे तेज रफ्तार होती है. कम दूरी की यात्राओं में यह 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकती हैं.
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व्हेलों के प्रवास पर नजर
जीवविज्ञानियों की टीम ने पिछले महीने कुछ सेई व्हेलों पर सेटेलाइट ट्रैकर लगाए ताकि उनके प्रवास के मार्ग और इलाकों पर नजर रखी जा सके. नेशनल ज्यॉग्राफिक के लोगों ने नावों, ड्रोन से और पानी अंदर जा कर उनके वीडियो फुटेज जमा किए. इसके लिए फंड नेशनल ज्यॉग्राफिक के प्रिस्टीन सीज प्रोजेक्ट से मिला.
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आबादी में गिरावट
1920 से 1930 के दशक में अर्जेंटीना के तटों और उससे आगे जाने वाली व्हेल का शिकार करने वाले जहाजों ने व्हेलों की आबादी में गिरावट की ओर ध्यान खींचा. अधिकारियों और प्रशासन की तरफ इसका ध्यान दिलाने की कोशिश हुई. बीते 50 साल से वैश्विक स्तर पर इन व्हेलों के कारोबारी शिकार पर रोक लगी हुई है. इसका नतीजा अर्जेंटीना के पैटेगोनियाई तटों पर सेई व्हेलों और दूसरे जीवों की वापसी के रूप में नजर आया है.
तस्वीर: Cristian Dimitrius/Jumara Films/REUTERS
व्हेलों की वापसी में लगे कई दशक
व्हेलों की संख्या पर्याप्त रूप से बढ़ने में कई दशकों का समय लगा. बीते कुछ सालों से वे फिर लोगों को दिखाई देने लगी हैं. सेई व्हेल 2-3 साल पर बच्चे पैदा करती हैं. व्हेलों की संख्या बढ़ने में 80 साल से ज्यादा लगे और 100 साल के बाद इन व्हेलों की संख्या इतनी हुई है कि वे फिर से दिखाई देने लगी हैं. कई और प्रजाति के व्हेलों की संख्या भी काफी बढ़ी है. तस्वीर में नजर आ रही व्हेल सदर्न राइट प्रजाति की है.
तस्वीर: LUIS ROBAYO/AFP
व्हेलों का इलाका
अर्जेंटीना का यह इलाका व्हेलों की कम से कम चार प्रजातियों का बसेरा है. इनमें ओरका, हंपबैक, सदर्न राइट और ब्लू व्हेल शामिल हैं. विशालकाय व्हेलें यहां अकसर समुद्री किनारों के आस पास दिखाई देती हैं. सैलानी यहां व्हेलदर्शन यात्राएं भी कर सकते हैं.
तस्वीर: MAXI JONAS/AFP
व्हेलों पर खतरा
व्हेलों का जीवन हालांकि यहां भी कई तरह के खतरे झेल रहा है. अकसर मरी हुई व्हेलें किनारों पर दिखाई देती हैं. जहाजों की आवाजाही, प्रदूषण, बढ़ता तापमान जैसे कई खतरे उनके लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. पहले एक खतरा शिकार का भी था जो अब बंद हो गया है.
तस्वीर: LUIS ROBAYO/AFP/Getty Images
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लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद अधिकारियों ने इसे बचाने की कोशिश छोड़ने का भी फैसला कर लिया था. हालांकि बाद में दो निजी उद्यमियों, कारिन वॉल्टर मोमर्ट और वॉल्टर गुंज ने इस व्हेल को बचाने के लिए आर्थिक सहायता दी. इस अभियान पर लगभग 15 लाख यूरो खर्च होने का अनुमान लगाया गया था.
इन उद्यमियों ने एक योजना तैयार की, जिसे कई विशेषज्ञों ने जोखिम भरा बताया था. योजना के तहत व्हेल को धीरे-धीरे एक खास पानी से भरे अस्थायी स्विमिंग पूल में लाया गया और फिर उसे उसके प्राकृतिक आवास की ओर समुद्र में ले जाकर छोड़ा गया. आखिरकार 2 मई को व्हेल को डेनमार्क के पास उत्तरी सागर में छोड़ दिया गया था.
विस्फोट का खतरा
डेनमार्क के अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को कटेगाट जल क्षेत्र में अनहोल्ट द्वीप के पास इस व्हेल का शव पहली बार देखा गया. शुरुआत में इसकी पहचान को लेकर स्पष्टता नहीं थी, लेकिन बाद में ट्रैकिंग डिवाइस को निकालकर उसकी स्थिति और स्वरूप की जांच की गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह वही व्हेल है.
ये है सबसे दुर्लभ व्हेलों में से एक, आबादी केवल 384
नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल, सबसे दुर्लभ व्हेलों में से एक है. इनकी अनुमानित आबादी है, मात्र 384. अच्छी खबर ये है कि इनके संरक्षण की कोशिशें रंग ला रही हैं.
तस्वीर: Alex Dawson/UPY 2024
इस बरस कितनी आबादी बढ़ी?
यह एक बेहद दुर्लभ व्हेल प्रजाति है. साल 2024 तक दुनिया में नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल प्रजाति के केवल 376 सदस्य ही मौजूद थे. इस साल इनकी जनसंख्या में आठ नए सदस्यों की आमद हुई है और अब इनकी आबादी 384 हो गई है. 'नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल कंसोर्टियम' की एक नई रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है.
तस्वीर: Michael Dwyer/AP Photo/picture alliance
इसे अपना नाम कैसे मिला?
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फाउंडेशन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के मुताबिक, इस प्रजाति के नाम में जो "राइट" शब्द है, उसका अतीत शिकार से जुड़ा है. व्हेलों का शिकार करने वाले शुरुआती लोग उन्हें शिकार के लिए "सही और मुफीद" पसंद मानते थे. इस तरह प्रजाति के नाम में ही "राइट" जुड़ गया.
तस्वीर: JOSEPH PREZIOSO/AFP/Getty Images
नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल को कैसे पहचानें?
'नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल' प्रजाति के वयस्क की लंबाई 45 से 55 फीट और वजन लगभग 70 टन तक हो सकता है. शरीर गहरे सलेटी रंग का और सिर के ऊपर की त्वचा पर सफेद रंग का पैच (कैलेस) होता है. ये सफेद रंग इनकी सबसे खास पहचान है. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मुताबिक, विशाल व्हेलों की सबसे संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक हैं नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल.
तस्वीर: NOAA/AP Photo/picture alliance
तेजी से घटती गई आबादी
पिछले दशक में 'नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल' की जनसंख्या बहुत चिंताजनक तरीके से कम हुई. केवल साल 2010 से 2020 के बीच ही इनकी आबादी में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई. समुद्र में जहाजों से टकराना या मछली पकड़ने वाले उपकरणों में फंस जाना इन व्हेलों के लिए बड़ा खतरा है. मसलन, जाल अगर मुंह के पास लिपटा हो तो ये खाना नहीं खा सकेंगे या खाना खाने में दिक्कत होगी. या, सतह पर सांस नहीं ले पाएंगे.
तस्वीर: Georgia Department of Natural Resources/NOAA Permit/AP/picture alliance
कब शुरू हुआ संरक्षण?
मांस और तेल जैसी चीजों के लिए व्यावसायिक स्तर पर व्हेलों के शिकार (व्हेलिंग) से इस प्रजाति को बहुत नुकसान पहुंचा, जिससे वो विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मुताबिक, 1930 के दशक में इन व्हेलों को व्यावसायिक व्हेलिंग से सुरक्षा मिली. मगर दशकों तक इनकी स्थिति में सुधार नहीं आया. अब ये ज्यादातर उत्तरी अमेरिका के अटलांटिक तट के आसपास पाए जाते हैं.
तस्वीर: Alex Dawson/UPY 2024
आबादी बढ़ रही है, मगर धीरे-धीरे
अब इनके संरक्षण की नई कोशिशें थोड़ा असर दिखा रही हैं. इन विशालकाय जीवों की निगरानी करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि इन व्हेलों की जनसंख्या में हो रहा इजाफा उत्साह बढ़ाने वाला है. साल 2020 से अब तक इनकी जनसंख्या में सात प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है. खासतौर पर पिछले चार साल से इनकी आबादी में बढ़ोतरी का ट्रेंड नजर आ रहा है.
तस्वीर: Karen Bleier/AFP/Getty Images
समुद्र में बढ़ता ट्रैफिक भी एक परेशानी है
वैज्ञानिकों के मुताबिक, व्हेलों में प्रजनन पहले से काफी कम हुआ है. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. मसलन, समुद्र में जहाजों की आवाजाही बढ़ गई है. व्यस्त रास्तों पर आने-जाने में व्हेलों को दिक्कत होती है. इसके अलावा उनके आहार के स्रोतों की उपलब्धता भी घट रही है. पूरी खुराक ना मिलने या घायल होने की हालत में भी व्हेलों के प्रजनन की संभावना कम हो जाती है.
तस्वीर: Jonathan Nackstrand/AFP
समुद्र में बढ़ता शोर भी नुकसानदेह
समुद्र में जहाजों की आवाजाही से पानी के भीतर शोर पैदा होता है. 2012 में हुई एक स्टडी से संकेत मिला कि इसके कारण व्हेलों की संवाद करने की क्षमता में खलल पड़ रहा है. पता चला कि इस शोर के कारण एक-दूसरे को सुनने में व्हेलों को बहुत दिक्कत हो रही है. यह प्रजनन के लिए साथी खोजने, सुरक्षित आवाजाही करने, खाने की तलाश, शिकारियों से बचाव और बच्चों की देखभाल की उनकी क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है.
तस्वीर: Billy Schuerman/The Virginian-Pilot/Newscom World/IMAGO
... और क्लाइमेट चेंज तो खतरा है ही
दुनिया गर्म हो रही है, समुद्र और तेजी से गर्म हो रहा है. जलवायु परिवर्तन ने भी इन व्हेलों की प्रजनन दर को प्रभावित किया है. यह व्हेलों के आहार स्रोत को प्रभावित कर रहा है. क्लाइमेट चेंज ना केवल समुद्री पानी के तापमान को बदल रहा है, बल्कि हवाओं और समुद्री तरंगों पर भी असर डाल रहा है. इसके कारण ये जिन छोटे-छोटे पौधों और जीवों को खाकर जिंदा रहते हैं, वो अपनी जगह बदल सकते हैं या खत्म हो सकते हैं.
तस्वीर: IMAGO
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जेन हैंसन ने बताया कि फिलहाल व्हेल को उस स्थान से हटाने या उसका पोस्टमॉर्टम करने की कोई ठोस योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इसे आसपास के क्षेत्र के लिए किसी बड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा जा रहा है.
हालांकि एजेंसी ने लोगों को इस मृत व्हेल के पास जाने से सख्ती से मना किया है. अधिकारियों का कहना है कि व्हेल के शरीर से बीमारियां फैलने का खतरा हो सकता है. इसके अलावा, सड़ने की प्रक्रिया के दौरान गैस बनने से विस्फोट का भी खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.
टिम्मी व्हेल को बचाने की कोशिश नाकाम हो गईतस्वीर: Marcus Golejewski/dpa/picture alliance
जर्मनी में जब यह व्हेल पहली बार फंसी थी, तब इस घटना को जनता ने काफी करीब से देखा और इसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी. कई सप्ताह तक यह समाचारों में बनी रही और इसके बचाव अभियान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी. निजी स्तर पर बचाव अभियान को लेकर उस समय कुछ विशेषज्ञों ने आलोचना भी की थी. उनका मानना था कि इस तरह के प्रयास से व्हेल को और अधिक तनाव हो सकता है.
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दुखी हैं लोग
जर्मनी के मैकलेनबुर्ग वेस्ट पोमेरानिया क्षेत्र के पर्यावरणमंत्री टिल बाकहाउस ने व्हेल की मौत पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि इस घटना से हमें पता चलता है कि प्रकृति संरक्षण, प्रजातियों की रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को और गंभीरता से लेने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस मामले से सीख लेकर भविष्य में बेहतर उपाय किए जाने चाहिए.
व्हेल कैसे गाती है गीत
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बाकहाउस ने यह भी कहा कि वह डेनमार्क के अधिकारियों के साथ इस मामले पर बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें व्हेल के साथ आगे क्या किया जाएगा और निजी प्रयासों की भूमिका पर भी चर्चा शामिल होगी. उन्होंने इस घटना को एक महत्वपूर्ण अनुभव बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में समन्वित और वैज्ञानिक तरीकों की आवश्यकता होती है.
टिम्मी नाम की यह व्हेल अपने बचाव अभियान और उसके बाद की यात्रा के कारण यूरोप में चर्चा का विषय बन गई थी. हालांकि इसे समुद्र में वापस छोड़ने के बावजूद इसकी जान नहीं बचाई जा सकी. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र की सुरक्षा और लोगों को संभावित जोखिमों से दूर रखना है.