जापान में अगर नियम नहीं बदले गए तो 500 साल में पूरे देश के लोगों का एक ही उपनाम होगा. अब देश में आंदोलन छिड़ा है कि कानूनों में बदलाव किया जाए.
जापान में शादी के बाद एक ही उपनाम अपनाने का कानून हैतस्वीर: Richard A. Brooks/AFP/Getty Images
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जापान के एक प्रोफेसर ने शोध के बाद दावा किया है कि साल 2531 तक देश के हर व्यक्ति का उपनाम सातो हो जाएगा. ऐसा देश में शादी से जुड़े एक कानून के कारण है. इस कानून के तहत शादी के बाद पति और पत्नी के लिए एक ही उपनाम अपनाना अनिवार्य है. जापान दुनिया का एकमात्र देश है, जहां आज भी ऐसा कानून लागू है.
तोहोकू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हिरोशी योशिदा ने एक अध्ययन के बाद अनुमान लगाया है कि अगर जापान अपने यहां शादीशुदा जोड़ों को एक ही नाम रखने की अनिवार्यता खत्म नहीं करता है, तो 2531 तक हरेक जापानी ‘सातो-सान' नाम से जाना जाएगा.
योशिदा ने माना है कि उनका अनुमान कई धारणाओं पर आधारित है. उन्होंने कहा कि इस अध्ययन का मकसद मौजूदा व्यवस्था की खामियां उजागर कर उसके बारे में जागरूकता फैलाना है.
सब सातो कहलाएंगे
एक स्थानीय अखबार को दिए एक इंटरव्यू में योशिदा ने कहा, "अगर हर कोई सातो बन जाएगा, तो हो सकता है हमें लोगों को उनके पहले नाम या फिर नंबरों से बुलाना पड़े. मुझे नहीं लगता कि वह रहने के लिए कोई अच्छी दुनिया होगी.”
जापान की राजधानी टोक्यो में अब पर्यटक टॉयलेट भी देख रहे हैं. लेकिन सवाल है कि विदेशी पर्यटक ऐसा क्यों कर रहे हैं.
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टॉयलेट में ऐसा क्या है खास?
टोक्यो में 17 मॉर्डन पब्लिक टॉयलेट्स का निर्माण 2020 में शुरू हुआ. गैर-लाभकारी निप्पॉन फाउंडेशन द्वारा फंडेड शौचालयों को प्रित्जकर पुरस्कार विजेता वास्तुकार टाडाओ एंडो ने डिजाइन किया था.
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टॉयलेट देखने के लिए टिकट
भारी खर्च कर टॉयलेट बनाने के बाद शिबुया जिला अधिकारियों ने क्षेत्र के नौ शौचालयों को दिखाने के लिए एक खास टूअर शुरू किया. एक टिकट के लिए 4,950 येन यानी 2,600 रुपये देकर नौ टॉयलेट देख सकते हैं.
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दो घंटे की खुशी!
इन टॉयलेट्स को देखने के लिए खास शटल चलती हैं और करीब दो घंटे के समय में पर्यटकों को एक-एक कर नौ टॉयलेट्स दिखाए जाते हैं.
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साफ-सफाई से खुश हैं पर्यटक
टॉयलेट देखने वाली एक विदेशी पर्यटक पेनेलोप पैनजुक ने दो घंटे के टूअर के बाद कहा कि वे कई बार पब्लिक टॉयलेट नहीं जाती. पैनजुक ने बताया, "टोक्यो के ये खास टॉयलेट बेहद साफ और सुरक्षित हैं. हर टॉयलेट एक दूसरे से अलग हैं."
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टॉयलेट में संगीत का आनंद
इन टॉयलेट्स में म्यूजिक की सुविधा है. टॉयलेट सीट में स्प्रे लगे हैं. गर्म होने वाली सीट भी लगी हैं.
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स्थानीय लोगों को भी पसंद आ रहे हैं
ना सिर्फ विदेशी पर्यटकों को ये टॉयलेट पसंद आ रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों को भी ये भा रहे हैं. 69 साल की कारिनो ने दौरे के बारे में कहा, "जापान में ऐसा कुछ और नहीं है. यह असामान्य है, यह अद्वितीय है, यह ईमानदारी से शानदार है."
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पिछले साल मार्च में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक सातो जापान का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उपनाम है. देश की 1.5 फीसदी आबादी का उपनाम सातो है. दूसरे नंबर पर सुजूकी है. सातो की गणनाओं के मुताबिक 2022 से 2023 के बीच सातो नाम वाले लोगों की संख्या 1.0083 फीसदी बढ़ी है. अगर यही वृद्धि दर रहती है और कानून में कोई बदलाव नहीं होता है तो 2446 तक आधे जापान और 2531 तक पूरे जापान का यही नाम हो जाएगा.
जापानी कानून में प्रावधान है कि शादी के बाद पति और पत्नी का एक ही उपनाम होना चाहिए. हालांकि वे यह नाम चुन सकते हैं लेकिन 95 फीसदी मामलों में महिलाएं ही अपना नाम बदलती हैं और पति का नाम अपना लेती हैं.
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बंटी हुई है राय
पारंपरिक और रूढ़िवादी माने जाने वाले जापान में इस कानून को लेकर एकराय नहीं है. 2022 में जापानी ट्रेड यूनियन कॉनफेडरेशन ने एक सर्वे किया था. 1,000 लोगों के बीच किए गए इस सर्वे में 20 से 59 साल के बीच के 39.3 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने जीवन-साथी वाला ही उपनाम चाहेंगे, भले ही उनके पास अलग नाम रखने का विकल्प हो.
इसके बावजूद कई संगठन नाम संबंधी कानून बदलने की मांग कर रहे हैं. इसके पीछे एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि सुजूकी, वातनबीज और योशिदा जैसे उपनाम पूरी तरह खत्म हो सकते हैं. योशिदा देश का 11वां सबसे आम उपनाम है.
जापान के चेरी ब्लॉसम दुनिया भर में मशहूर हैं. राजधानी टोक्यो आजकल इन्हीं फूलों से सजी है. हालांकि सर्द मौसम की वजह से इस बार फूल थोड़ी देरी से खिले हैं. पर्यटक इस अनुभव का खूब मजा ले रहे हैं.
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गुलाबी हुआ जापान
जापान के मशहूर चेरी ब्लॉसम सीजन में वसंत का अनोखा और अनूठा दृश्य है. ये गुलाबी-सफेद फूल हर साल की तरह दुनिया भर से बड़ी संख्या में पर्यटकों को टोक्यो की ओर आकर्षित करते हैं.
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चेरी ब्लॉसम के शौकीन
जापान में लंबे समय तक ठंडे मौसम के रहने के कारण इस साल चेरी ब्लॉसम का मौसम देर से शुरू हुआ. टोक्यो शहर असाधारण संख्या में चेरी ब्लॉसम के शौकीनों से भरा हुआ है.
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जापान के सकुरा
चेरी ब्लॉसम को जापानी भाषा में "सकुरा" कहा जाता है. सकुरा पेड़ की छाया और इन फूलों की मनमोहक खुशबू का आनंद लेने के लिए लोग अक्सर इन पेड़ों के नीचे पार्टियां आयोजित करते हैं.
तस्वीर: Stanislav Kogiku/picturedesk.com/picture alliance
पेड़ के नीचे पिकनिक
इन फूलों की गिरती पंखुड़ियां और फूलों की खुशबू पिकनिक मनाने और शराब पीने वालों को मौज मस्ती का बहाना दे देती है.
तस्वीर: Issei Kato/REUTERS
दूर-दूर से आते हैं पर्यटक
कनाडा से आए 36 साल के विद्युत लक्ष्मण ने कहा कि उन्होंने अपने देश में भी चेरी ब्लॉसम का नजारा देखा है, लेकिन इस पैमाने पर इनका इस तरह खिलना निश्चित ही अनोखा और शानदार है.
तस्वीर: Stanislav Kogiku/ZUMA/IMAGO
नई शुरूआत
चेरी ब्लॉसम आमतौर पर मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत तक चरम पर होता है और तभी जापान में एक नया शैक्षणिक और व्यावसायिक वर्ष शुरू होता है.
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सिर्फ चेरी के फूल के लिए
जापान में इस मौसम में कई ऐसे पर्यटक आते हैं जो सिर्फ चेरी ब्लॉसम को देखना चाहते हैं. फूल खिलने में देरी की वजह से कई पर्यटक निराश थे कि उन्हें चेरी के फूल नहीं दिख पाएंगे.
तस्वीर: Tomohiro Ohsumi/Getty Images
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सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को रूढ़िवादी विचारों का समर्थक माना जाता है. वह इस कानून को बदलने के पक्ष में नहीं है. उसका कहना है कि ऐसा करने से परिवार नामक संस्था की अहमियत घटेगी और बच्चों के बीच उलझन पैदा होगी.
मार्च में छह लोगों ने सरकार के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया है और शादी के सर्टिफिकेट में अलग-अलग नाम रखने की आजादी मांगी है. उनकी दलील है कि मौजूदा व्यवस्था असंवैधानिक है. हालांकि यह एक लंबी कानूनी लड़ाई है और मुकदमे की सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है.