जर्मनी में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 67 प्रतिशत नागरिकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाद अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रमों का जर्मनी पर प्रभाव बढ़ गया है.
एक सर्व के मुताबिक जर्मनी में यह भावना बढ़ी है कि देश पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ रहा है.तस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance
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जर्मनी के लगभग दो-तिहाई नागरिकों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रमों का जर्मनी पर पहले की तुलना में अधिक प्रभाव पड़ रहा है. यह जानकारी फोर्सा शोध संस्थान द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आई है.
जर्मन भाषा की पत्रिका 'इंटरनेशनल पॉलिटिक्स' के लिए कराए गए इस सर्वेक्षण में शामिल 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अमेरिका में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों का जर्मनी पर प्रभाव अब पहले से अधिक है.
1776 में अमेरिका की स्थापना में जर्मनों और जर्मनी की बड़ी भूमिका रही है. आज भी अमेरिका में सबसे ज्यादा आबादी जर्मन मूल के लोगों की है. लेकिन आज 250 साल बाद दोनों देशों के मधुर रिश्ते तनाव से गुजर रहे हैं.
तस्वीर: DW
आजादी की लड़ाई में प्रशिया के अधिकारी
प्रशिया के अधिकारी फ्रीडरिष विल्हेम फॉन श्टॉइबेन ने ब्रिटेन के खिलाफ आजादी के लड़ाई के बाद बिखरी अमेरिकी सेना को फिर से नया आकार दिया. इस पेंटिंग में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बनने वाले जॉर्ज वॉशिंगटन (बिल्कुल बाएं) श्टॉइबेन (बाएं से तीसरे) और बाकी अधिकारियों के साथ हैं. 1957 से न्यूयॉर्क में हर साल एक परेड के जरिए श्टॉइबेन को याद किया जाता है.
19वीं शताब्दी और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में लाखों जर्मन आप्रवासी बनकर अमेरिका गए. 2022 के एक सर्वे के मुताबिक, करीब 5 करोड़ अमेरिकी नागरिक खुद को जर्मन विरासत वाला मानते हैं. जर्मन मूल के अमेरिकी आज भी संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़ा तबका बनाते हैं.
दूसरे विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी से लड़ते अमेरिकी सैनिक
दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिकियों ने जर्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इस युद्ध ने जर्मन-अमेरिकी रिश्ते पर खूब तनाव डाला. डी-डे यानी 6 जून 1944 को अमेरिकी सैनिक पहली बार फ्रांस के तट पर उतरे. तब फ्रांस पर नाजी जर्मनी का कब्जा था. मित्र सेनाओं के साथ अमेरिका ने यूरोप को आजाद कराया. नाजी शासन झेल रहे जर्मनों को भी यह आजादी मिली.
तस्वीर: Fox Photos/Hulton Archive/Getty Images
हट गई प्यार पर लगी बंदिश
विश्वयुद्ध के दौरान जब जर्मनी अमेरिका के अधीन था तो अमेरिका सैनिकों और जर्मन महिलाओं के रोमांटिक रिश्तों पर सख्त प्रतिबंध था. अक्टूबर 1945 यह बैन हटा दिया गया. विश्वयुद्ध के दौरान और उसके बाद करीब 15 हजार से 20 हजार जर्मन महिलाओं ने अमेरिका सैनिकों से शादी की. इन शादियों या रोमांटिक रिश्तों से पैदा हुए बच्चों की संख्या करीब एक लाख से 2,20,000 आंकी जाती है.
तस्वीर: TT/IMAGO
आकाश से मदद पहुंचाते अमेरिकी बॉम्बर विमान
दूसरा विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद बर्लिन समेत जर्मनी दो हिस्सों में बंट गया. एक हिस्सा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के नियंत्रण में था और दूसरा सोवियत संघ के. 1948 में सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन तक जमीनी पहुंच बिल्कुल काट दी. इससे हर चीज की किल्लत पैदा हो गई. मदद पहुंचाने के लिए अमेरिका और पश्चिमी साझेदारों ने कई महीनों तक बम बरसने वाले विमानों से लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई.
तस्वीर: -/dpa/picture-alliance
जर्मनी में रॉक एन रोल के किंग एल्विस प्रिस्ले
1958 में जर्मन सेना में अपनी सर्विस शुरू करने से पहले ही एल्विस प्रिस्ले एक इंटरनेशनल पॉप स्टार बन चुके थे. एल्विस एक पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. सैन्य सेवा के साथ ही वह एक तरह से जर्मनी के गैरआधिकारिक राजदूत से बन गए. फ्रीडबेर्ग में तैनाती के दौरान वह पड़ोसी कस्बे बाड नाउहाइम में रहते थे. आज वहां एल्विस की एक कांसे की प्रतिमा है और एक चौक उनके नाम है.
तस्वीर: AP
मैं एक बर्लिनवासी हूं: जॉन एफ केनेडी
1963 आते आते बर्लिन को विभाजित करने वाली दीवार खड़ी हो चुकी थी. ये दीवार सोवियत संघ के प्रभाव वाले पूर्वी सेक्टर को, पश्चिमी बर्लिन से अलग करती थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी इस दौरान पश्चिमी बर्लिन आए. उन्होंने पश्चिमी बर्लिन के मेयर विली ब्रांट (बीच में) और पहले जर्मन चांसलर कोनराड आडेनावर से मुलाकात की और फिर जनता को संबोधित करते हुए कहा, मैं एक बर्लिनवासी हूं.
तस्वीर: picture alliance/AP
अमेरिकी लाइफस्टाइल और जर्मन
रोजमर्रा की अमेरिकी जीवनशैली को जर्मनों ने भी खूब अपनाया. इसका एक उदाहरण जर्मनी में कोका कोला था. 1972 की इस तस्वीर में तत्कालीन जर्मन चांसलर विली ब्रांट, छुट्टियों के दौरान फ्लोरिडा के बीच पर कोका कोला पीते दिख रहे हैं.
तस्वीर: Horst Ossinger/dpa/picture alliance
अमेरिका में जर्मन लाइफस्टाइल
अमेरिका की नजर में जर्मनी की जो सबसे ट्रेडमार्क पहचान है, वो है जर्मन कारें. 1950 के दशक में फोल्क्सवागन की बीटल अमेरिका में खूब छायी रही. बाद में मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, आउडी और पोर्शे जैसे प्रीमियर जर्मन कार ब्रांडों ने अमेरिका को अपने मोह में बांध लिया.
तस्वीर: Rüdiger Wölk/IMAGO
फ्लोरिडा में ऑक्टोबरफेस्ट
विदेशों में म्यूनिख के ऑक्टोबरफेस्ट को जर्मन परंपरा की अहम पहचान के तौर पर देखा जाता है. लेकिन अमेरिका गए प्रवासी जर्मन अपने इस उत्सव को वहां भी ले गए. फ्लोरिडा प्रांत के लेक वर्थ में भी पारंपरिक जर्मन लिबास और खालिस जर्मन बीयर के साथ ऑक्टोबरफेस्ट मनाया जाता है.
तस्वीर: John Indiveri/SOPA Images/Sipa USA/picture alliance
बर्लिन में राष्ट्रपति रीगन: "मिस्टर गोर्बाचॉफ, इस दीवार को गिरा डालिए"
बर्लिन में अमेरिकी राष्ट्रपति का एक और ऐतिहासिक दौरा 1987 में हुआ. उस वक्त पश्चिम बर्लिन आए अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने ब्रांडनबुर्ग गेट में भाषण दिया. इसी गेट के दूसरी तरफ सोवियत प्रभाव वाला बर्लिन का बाकी हिस्सा था. अपने भाषण में रीगन ने तत्कालीन सोवियत राष्ट्रपति मिखाएल गोर्बाचॉफ को संबोधित करते हुए कहा, "इस गेट को खोल दीजिए! इस दीवार को गिरा डालिए!" दो साल बाद यह सपना हकीकत में बदल गया.
तस्वीर: Dieter Klar/dpa/picture alliance
श्रोएडर और बुश: इराक युद्ध को लेकर मतभेद
2001 में अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने नाटो देशों से सहयोग की मांग की. तत्कालीन जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर (तस्वीर में बाएं) इस दौरान कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे. लेकिन दो साल बाद जब बुश ने बड़े जनसंहार के हथियारों का हवाला देते हुए इराक युद्ध शुरू किया तो श्रोएडर ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.
1957 में पहले जर्मन चांसलर आडेनावर ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया था. उसके बाद 2009 में मैर्केल अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों को संबोधित करने वाली दूसरी जर्मन चांसलर बनीं. मैर्केल ने कहा, "हम जर्मन जानते हैं कि हम अपने अमेरिकी दोस्तो के कितने आभारी हैं. हम यह कभी नहीं भूलेंगे." मैर्केल के संबोधन के बाद अमेरिकी कांग्रेस में नौ मिनट तक तालियां गूंजती रहीं.
तस्वीर: Steffen Kugler/Bundesregierung/AFP
समान सोच वाली मैर्केल-ओबामा की जोड़ी
शायद दोनों देशों ने राजनेताओं के बीच सबसे बढ़िया दोस्ती का दौर, अंगेला मैर्केल और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान रहा. यह तस्वीर 2015 में जर्मनी की आप्ल्स पहाड़ियों में जी-7 के शिखर सम्मेलन के दौरान ली गई. पद छोड़ने के बाद भी दोनों निजी संपर्क में बने रहते हैं. हाल ही में जून 2026 में शिकागो में ओबामा सेंटर के उद्घाटन में मैर्केल शरीक हुईं, जबकि डॉनल्ड ट्रंप वहां नहीं गए.
तस्वीर: Michael Kappeler/AP Photo/picture alliance
डॉनल्ड ट्रंप और फ्रीडरिष मैर्त्स: तारीफों के बावजूद तनाव
2025 में ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका और अटलांटिक पार उसके यूरोपीय सहयोगियों के संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं. रिश्तों को रिपेयर करने के लिए जर्मन चासंलर फ्रीडरिष मैर्त्स तीन बार वॉशिंगटन जाकर ट्रंप को रिझाने की कोशिश भी कर चुके हैं, लेकिन मतभेद पट नहीं रहे हैं. सार्वजनिक तौर पर हाल ही में ईरान युद्ध को लेकर दोनों नेताओं में तल्ख बहस भी हुई.
अधर में लटका जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों का भविष्य
दूसरे विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद से ही जर्मनी में अमेरिकी सेना तैनात है. फिलहाल जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या करीब 37,000 है. वहीं सिविल कर्मचारी और परिवारजनों के साथ यह संख्या करीब 75,000 है. लेकिन ट्रंप, जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या में कम से कम 5,000 की कटौती करने का एलान कर चुके हैं.
तस्वीर: Nicolas Armer/dpa/picture alliance
कालश्टाड: ट्रंप के दादा की पैतृक विरासत
जर्मनी के राइनलैंड प्लैटिनेट का कालश्टाड कस्बा कई मायनों में दिलचस्प है. डॉनल्ड ट्रंप के दादा यहीं पैदा हुए. 1885 में 16 साल की उम्र में अमेरिका जाने से पहले वह यहीं रहते थे. ट्रंप अगर जर्मनी आएंगे तो क्या कालश्टाड भी जाएंगे? कालश्टाड के ज्यादा निवासी कहते हैं कि अगर वह ना ही आएं तो बेहतर है. जर्मनी में ट्रंप अब तक के सबसे अलोकप्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति बन चुके हैं.
तस्वीर: Michael Bermel/Eibner-Pressefoto/Imago
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इसके उलट 29 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका का प्रभाव पहले जैसा ही है या कम हुआ है. इनमें 18 प्रतिशत ने कहा कि प्रभाव में कोई खास बदलाव नहीं आया है, जबकि 11 प्रतिशत लोगों ने माना कि अमेरिकी घटनाओं का प्रभाव अब पहले की तुलना में कम है. इस साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि जर्मनी के लोगों की अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति सोच सकारात्मक नहीं है और वे अमेरिका को विश्व शांति के लिए खतरे के रूप में देखते हैं.
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पूर्वी जर्मनी में सोच अलग
फोर्सा ने 14 अगस्त को 1,004 लोगों के बीच यह सर्वेक्षण किया था. सर्वेक्षण की त्रुटि सीमा प्लस या माइनस तीन प्रतिशत अंक बताई गई है. इसके अनुसार जनवरी 2025 में डॉनल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को लेकर राय लगभग सभी सामाजिक, आयु और मतदाता समूहों में व्यापक रूप से बंटी हुई है.
हालांकि पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी के लोगों के विचारों में कुछ अंतर देखने को मिला. पूर्वी जर्मनी के 78 प्रतिशत लोगों ने माना कि अमेरिका का प्रभाव बढ़ा है, जबकि पश्चिमी जर्मनी में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत रहा. पूर्वी जर्मनी ही वह इलाका है जहां धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी का प्रभाव सबसे ज्यादा है.
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उम्र के आधार पर भी अलग-अलग रुझान सामने आए. 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के 18 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका का प्रभाव अब कुछ वर्ष पहले की तुलना में कम हो गया है.
युवा नहीं मानते, ट्रंप का असर
वहीं युवा वर्ग में यह धारणा काफी कमजोर रही. 18 से 29 वर्ष आयु समूह के केवल 2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अमेरिका का प्रभाव कम हुआ है, जबकि 30 से 44 वर्ष आयु वर्ग में ऐसा मानने वालों की संख्या 6 प्रतिशत रही.
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि जर्मनी में ज्यादातर लोग ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राजनीति के प्रभाव को पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं, खास तौर पर युवा और पूर्वी जर्मनी के नागरिकों के बीच यह धारणा अधिक मजबूत दिखाई देती है.
डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में जर्मनी और अमेरिका के रिश्तों में तनाव रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने जर्मनी पर तल्ख टिप्पणियां की हैं और कई ऐसे फैसले लिे हैं जो जर्मनी के आर्थिक हितों के खिलाफ थे. इसके अलावा अमेरिका ने जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या घटाने की बात भी कही थी.