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मानवाधिकारअफगानिस्तान

बुर्का पर आदेश से नाराज और डरी हुईं अफगान महिलाएं

१० मई २०२२

अफगानिस्तान में कई महिलाएं बुर्का अनिवार्य करने के तालिबान के फैसले से नाराज हैं. विश्लेषकों के मुताबिक इस बीच यह तालिबान के बीच विभाजन का स्पष्ट संकेत है.

फाइल तस्वीर
फाइल तस्वीरतस्वीर: ALI KHARA/REUTERS

तालिबान ने अफगानिस्तान में सभी महिलाओं के लिए बुर्का अनिवार्य कर दिया है. देश के बड़े शहरों में महिलाएं इस फैसले से नाखुश हैं. 7 मई को तालिबान के सर्वोच्च नेता ने महिलाओं को सार्वजनिक रूप से बुर्का पहनने का आदेश सुनाया था.

तालिबान के नए आदेश के बाद काबुल में गणित की शिक्षिका आरूजा अगले दिन अपनी दोस्त के साथ शॉपिंग करने निकली तो वह डरी हुई नजर आई. वह तालिबान के डर से अपने शरीर पर कसकर चादर लपेटे हुए थी. चादर के ऊपर उन्होंने एक कोट पहन रखा था. लेकिन उन्हें चिंता इस बात की थी कि सिर्फ चादर लपेट लेने से तालिबान संतुष्ट नहीं होगा. उनकी आंखें दिख रहीं थीं और चेहरा नजर आ रहा था.

जब वे बाजार से गुजर रही थी तो उनकी नजर तालिबान के लड़ाकों पर थी, उन्हें डर था कि कहीं लड़ाके उन्हें इस तरह से ना देख ले.

महिलाओं की आजादी पर पहरा

अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा जारी आदेश यहां तक कहता है कि महिलाओं को जब तक आवश्यक न हो वह घर से बाहर न निकलें और इसका उल्लंघन होने पर महिलाओं के पुरुष रिश्तेदारों के लिए भी सजा हो सकती है.

शबाना नाम की एक महिला तालिबान के नए आदेश पर कहती हैं, "अफगानिस्तान में महिलाएं हिजाब और बुर्का भी पहनती हैं. लेकिन तालिबान के इस फैसले का मकसद महिलाओं को गायब करना है, ताकि वे दिखाई न दें."

आरूजा का कहना है कि तालिबान महिलाओं को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है. आरूजा कहती हैं, "अगर वे हमें अधिकार देने के लिए तैयार नहीं हैं तो मैं यहां क्यों रुकूं. हम भी इंसान हैं."

एक अन्य महिला जिसका नाम परवीन वह कहती हैं, "हम जेल में नहीं रहना चाहते हैं."

अखुंदजादा ने 7 मई को जो आदेश जारी किया, उसमें कहा गया कि देश की सभी महिलाओं को बुर्का पहनने की आवश्यकता है. आदेश के मुताबिक, "महिलाओं को चादर पहननी चाहिए, जो परंपरा के अनुसार है. शरीयत में जैसा कहा गया है उसके मुताबिक शरीर को ढका जाना चाहिए. इससे अनजान पुरुषों से मिलते समय उन पुरुषों के मन में गलत विचार नहीं आएंगे."

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महिलाओं के लिए कठोर फैसला

आदेश के विवरण के बारे में बताते हुए संबंधित तालिबान मंत्रालय ने कहा कि इसका पालन न करने की स्थिति में महिला के पिता या करीबी रिश्तेदार को गिरफ्तार किया जा सकता है और कैद किया जा सकता है. अगर वे सरकारी सेवा में हैं तो उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है. तालिबान द्वारा महिलाओं के खिलाफ उठाया गया यह अब तक का सबसे कठोर कदम है.

तालिबान ने पहले 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया था. उस दौरान भी सख्त इस्लामी कानून लागू थे. अफगानिस्तान में मौजूदा समय में अधिकांश महिलाएं अपने धार्मिक विश्वासों के आधार पर सिर पर स्कार्फ और बुर्का पहनती हैं. लेकिन बड़े शहरों में महिलाएं अपना चेहरा नहीं छिपाती हैं.

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दो गुट में बंटा तालिबान!

फिलहाल तालिबान दो गुटों में बंटा हुआ है. एक ओर चरमपंथी समूह है जो पिछले शासन के तरीकों का समर्थन करता है तो वहीं दूसरी तरफ अपेक्षाकृत उदारवादी समूह है. इस विभाजन के कारण तालिबान सभी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक नियमित सरकार नहीं बना पाया है.

अफगान सरकार के सलाहकार के रूप में काम कर चुके एक विश्लेषक तारिक फरहादी का मानना ​​है कि तालिबानी नेता जमीनी स्तर पर मतभेद नहीं ला रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने से उनकी शासन करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. फरहादी के मुताबिक, "कई मुद्दों पर नेतृत्व में मतभेद हैं, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि अगर वे एकजुट नहीं रहे, तो सब कुछ बिखर सकता है."

एए/सीके (एपी)

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