समुद्र की गहराई से लेकर पहाड़ की चोटियों तक इंसान ने प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़ों से ग्रह को पाट दिया है. अब यह माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में भी दाखिल हो रहा है.
तस्वीर: Marine Megafauna Foundation, Andrea Marshall
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प्लास्टिक प्रदूषण की ये तस्वीरें परिचित हो गई हैं: एक शॉपिंग बैग से दम घुटने वाला कछुआ, समुद्र तटों पर पानी की खाली बोतलें और खाने की तलाश में प्लास्टिक चबाते जानवर. हर साल लाखों टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है और वह छोटे-छोटे कणों में पर्यावरण में फैल जाता है. फ्रांस में माइक्रोबियल ओशेनोग्राफी की प्रयोगशाला में शोधकर्ता जॉं फ्रांसिस घिग्लियोन कहते हैं, "हमने 10 साल पहले कल्पना नहीं की थी कि इतने छोटे माइक्रोप्लास्टिक हो सकते हैं, जो नग्न आंखों के लिए अदृश्य हैं और वे हमारे चारों ओर हर जगह हैं. हम अभी तक उन्हें मानव शरीर में खोजने की कल्पना नहीं कर सके."
घिग्लियोन कहते हैं अब वैज्ञानिक अध्ययन कुछ मानव अंगों में माइक्रोप्लास्टिक्स का पता लगा रहे हैं - जिनमें "फेफड़े, प्लीहा, गुर्दे और यहां तक कि प्लेसेंटा भी शामिल हैं." यही नहीं सिंथेटिक कपड़ों में मौजूद माइक्रोफाइबर हमारे शरीर में सांस के जरिए दाखिल हो रहा है.
इंग्लैंड स्थित हल यॉर्क मेडिकल स्कूल की लौरा सैडोफ्स्की कहती हैं, "हम जानते हैं कि हवा में माइक्रोप्लास्टिक है और हम यह भी जानते हैं कि यह हमारे चारों ओर है."
प्लास्टिक के खिलौने खतरनाक हैं
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उनकी टीम ने फेफड़े के ऊतकों में पॉलीप्रोपाइलीन और पीईटी (पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट) पाया. उन्होंने कहा, "हमारे लिए आश्चर्य की बात यह थी कि यह फेफड़ों के कितने अंदर तक था और उन कणों का आकार कितना बड़ा था."
मार्च में एक अन्य शोध ने खून में पीईटी के पहले निशान पाए जाने की सूचना दी थी. वॉलंटियरों के छोटे नमूने को देखते हुए, कुछ वैज्ञानिकों का कहना था कि निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन चिंताएं हैं कि अगर प्लास्टिक रक्तप्रवाह में है तो वह सभी अंगों तक पहुंचा सकता है.
साल 2021 में शोधकर्ताओं ने अजन्मे बच्चे के गर्भनाल में माइक्रोप्लास्टिक पाया था और भ्रूण के विकास पर संभावित परिणामों पर "बड़ी चिंता" व्यक्त की थी. लेकिन चिंता एक सिद्ध जोखिम के समान नहीं है.
वैगनिंगन यूनिवर्सिटी में एक्वाटिक इकोलॉजी एंड वाटर क्वालिटी के प्रोफेसर बार्ट कोएलमैन कहते हैं, "अगर आप किसी वैज्ञानिक से पूछते हैं कि क्या कोई नकारात्मक प्रभाव है, तो वह कहेगा कि मुझे नहीं पता."
उन्होंने कहा, "यह संभावित रूप से एक बड़ी समस्या है, लेकिन हमारे पास सकारात्मक रूप से पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि प्रभाव क्या है. अगर कोई हो."
कोका कोला के सामने बोतलों का ढेर
अर्जन्टीना के ब्यूनस एयर्स में कोका कोला के मुख्यालय के सामने हजारों खाली बोतलों का ढेर नजर आया तो तमाशबीन भी जुड़ गए, जानने के लिए कि मामला क्या है. देखिए...
तस्वीर: Agustin Marcarian/REUTERS
कहां से आया बोतलों का ढेर
ब्यूनस एयर्स में कोका कोला के मुख्यालय के सामने कोक की खाली बोतलों का एक विशाल ढेर लग गया था.
तस्वीर: Agustin Marcarian/REUTERS
क्यों हुआ प्रदर्शन
लोग कोका कोला विरोधी नारे लगा रहे थे और बोतल बजा रहे थे. ये लोग प्रदर्शनकारी थे जिन्होंने यह जगह काफी सोच-समझकर चुनी थी.
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क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी
दरअसल, ये प्रदर्शनकारी पैकेजिंग पर एक नया कानून लाने की मांग कर रहे थे जिसके तहत उत्पादक पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली जाएगा.
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कंपनी संभाले जिम्मेदारी
एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, “यह कंपनी जो पर्यावरण में फेंकती है, सिर्फ हम ही हैं जो उसे कचरे में हाथ डालकर बीनते हैं. अब वक्त आ गया है कि वे अपनी उन बोतलों की जिम्मेदारी लें, जो पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं.”
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कहां जाती हैं हैं अरबों बोतल
हैबिट्स ऑफ वेस्ट नामक एक सामाजिक संस्था के मुताबिक दुनिया में हर साल लगभग 500 अरब प्लास्टिक बोतल इस्तेमाल की जाती हैं, जिनमें से मुश्किल से 10 प्रतिशत ही रीसाइकल हो पाती हैं.
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कौन बीनता है बोतल
ये प्रदर्शनकारी प्लास्टिक का रीसाइकलिंग करने वाले समूहों से जुडे थे. उन्होंने कहा कि देशभर में डेढ़ लाख रीसाइकलर हैं जो कचरे में से प्लास्टिक बोतलें चुनते हैं ताकि प्रदूषण रोका जा सके.
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जबकि वैज्ञानिकों ने हाल ही में शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी की पहचान की है, संभावना है कि इंसान वर्षों से प्लास्टिक के छोटे कण को खा रहे हैं, पी रहे हैं या सांस के जरिए शरीर में ले रहे हैं.
हालांकि मनुष्यों पर स्वास्थ्य अध्ययन अभी तक विकसित नहीं हुए हैं, कुछ जानवरों में विषाक्तता चिंताओं को पुष्ट करती है.
घिग्लियोन कहते हैं, "नंगी आंखों के लिए अदृश्य छोटे माइक्रोप्लास्टिक्स का उन सभी जानवरों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जिनका हमने समुद्री वातावरण या जमीन पर अध्ययन किया है."
पर्यावरण चैरिटी डब्ल्यूडब्ल्यूएएफ इंटरनेशनल की 2019 में आई एक स्टडी में बताया गया कि हमारे वातावरण में प्लास्टिक का इतना प्रदूषण है जिसके कारण इंसान हर हफ्ते में करीब पांच ग्राम प्लास्टिक को अपने अंदर ले रहा है जो हर हफ्ते एक क्रेडिट कार्ड खाने के बराबर होगा.
एए/सीके (एएफपी)
दम घोंट रहा है माइक्रोप्लास्टिक
इंसान प्लास्टिक से बुरी तरह घिर चुका है. वह प्लास्टिक खा रहा है, पी भी रहा है और पहन भी रहा है. देखिये कहां कहां मौजूद है अतिसूक्ष्म यानि माइक्रोप्लास्टिक.
तस्वीर: picture alliance/JOKER/A. Stein
रोज सुबह मुंह में
पांच मिलीमीटर से कम परिधि वाले प्लास्टिक के कणों को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है. प्लास्टिक के ये बारीक कण हर जगह मौजूद हैं. सुबह सुबह टूथपेस्ट के साथ ही माइक्रोप्लास्टिक सीधे इंसान के मुंह में पहुंचता है.
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कॉस्मेटिक्स में
मेकअप के सामान, क्रीम, क्लीनजिंग मिल्क और टोनर में भी माइक्रोप्लास्टिक मौजूद होता है. घर के सीवेज सिस्टम से बहता हुआ यह माइक्रोप्लास्टिक नदियों और सागरों तक पहुंचता है.
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मछलियों में
पानी में घुला माइक्रोप्लास्टिक मछलियों के पेट तक पहुंचता है. मछलियों के साथ ही दूसरे सी खाने में भी माइक्रोप्लास्टिक मिल रहा है. 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया और कैलिफोर्निया की 25 फीसदी समुद्री मछलियों में प्लास्टिक मिला. आहार चक्र के जरिए यह इंसान तक पहुंचता है.
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नमक में
दुनिया में ज्यादातर नमक की सप्लाई समुद्री पानी से होती है. समुद्रों में बुरी तरह प्लास्टिक घुल चुका है. हर साल 1.2 करोड़ टन प्लास्टिक महासागरों तक पहुंच रहा है. नमक के साथ यह माइक्रोप्लास्टिक हर किसी की रसोई तक पहुंचता है.
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पीने के पानी में
दुनिया भर में नल के जरिए सप्लाई होने वाले पीने के पानी के 80 फीसदी नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक मिला है. वैज्ञानिकों के मुताबिक नल के पानी में प्लास्टिक का इस कदर मिलना बताता है कि प्लास्टिक हर जगह घुस चुका है. इसी पानी का इस्तेमाल खाना बनाने और मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए भी किया जाता है.
तस्वीर: Imago/Westend61
कपड़ों में
सिथेंटिक टेक्सटाइल से बने कपड़ों को जब भी धोया जाता है, तब उनसे काफी ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक निकलता है. रिसर्च में पता चला है कि छह किलोग्राम कपड़ों को धोने पर 7,00,000 से ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक फाइबर निकलते हैं. महासागरों में 35 फीसदी माइक्रोप्लास्टिक सिथेंटिक टेक्साटाइल से ही पहुंचता है.
तस्वीर: Imago/Mint Images
शहद में भी
पानी और जलीय जीवों के साथ ही वैज्ञानिकों को शहद जैसी चीजों में भी माइक्रोप्लास्टिक मिला है. हाल ही यूरोपीय संघ के प्लास्टिक के खिलाफ बनाई गई रणनीति में यह बात साफ कही गई कि शहद में माइक्रोप्लास्टिक की अच्छी खासी मात्रा मौजूद है.
तस्वीर: Colourbox
टायर बने मुसीबत
पर्यावरण में सबसे ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक टायरों के जरिये घुलता है. सड़क पर घिसते टायर बहुत ही बारीक माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं. पानी और हवा के संपर्क में आते ही यह हर जगह पहुंच जाता है. (रिपोर्ट: इरेने बानोस रुइज/ओएसजे)