छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर के रहने वाले एक छात्र ने ऐसी मिर्ची की खोज की है, जो मधुमेह और कैंसर दोनों के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकती है.
पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली तीखी जईया मिर्चीतस्वीर: IANS
विज्ञापन
रायपुर के नागार्जुन कॉलेज ऑफ साइंस में बायोटेक्नोलॉजी के छात्र रामलाल लहरे ने इस मिर्ची की खोज की है. लहरे सरगुजा के वाड्रफनगर में इस मिर्ची की खेती कर रहे हैं. इस मिर्ची की एक खासियत यह भी है कि यह ठंडे क्षेत्र में पैदा होती है और कई सालों तक इसकी पैदावार होती है. छत्तीसगढ़ के जिला बलरामपुर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर केआर साहू ने लहरे को शोध में तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया है.
लहरे ने एक साक्षात्कार में कहा कि पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली तीखी मिर्ची को सरगुजा क्षेत्र में जईया मिर्ची के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि इस मिर्ची में प्रचुर मात्रा में कैप्सेसीन नामक एल्कॉइड यौगिक पाया जाता है, जो शुगर लेवल को कम करने में सहायक हो सकता है. इस मिर्ची का गुण एन्टी बैक्टेरियल और कैंसर के प्रति लाभकारी होने की भी संभावना है. इसमें विटामिन ए, बी और सी भी पाए जाते हैं. इसके सभी स्वास्थ्यवर्धक गुणों को लेकर रिसर्च की जा रही है.
मिर्च के जबरदस्त फायदे
क्या मिर्च मसाले आपको भी पसंद हैं? यह अच्छा संकेत है. रिसर्चरों के मुताबिक इनके ढेरों स्वास्थ्य संबंधी फायदे हैं...
तस्वीर: picture alliance/landov/D. Treeger
वजन में कमी
न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक तेज मिर्च मसालों वाले भेजन के बाद मेटाबॉलिज्म 8 फीसदी तक बढ़ जाता है और कैलोरी तेजी से जलती है. लेकिन ध्यान रहे मिर्च इतनी भी ना हो कि पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाए और सीने व पेट में जलन पैदा करे.
तस्वीर: Colourbox
दिल के लिए
शिमला मिर्च, हैलापीनो और लाल गोल मिर्च कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं. इससे दिल को फायदा होता है. अमेरिकन रिसर्च सोसाइटी में प्रस्तुत रिसर्च पेपर के मुताबिक इनसे रक्त संचार भी बेहतर होता है.
तस्वीर: picture alliance/blickwinkel/G. Franz
पोषक तत्व
यूएसडीए नेशनल न्यूट्रिएंट डाटाबेस के मुताबिक हरी और लाल मिर्च में कई प्रकार के महत्वपूर्ण मिनरल और विटामिन सी होते हैं. विटामिन सी फ्लू की संभावना भी घटाता है. इससे कैंसर और दिल की बीमारियों का खतरा भी घटता है.
तस्वीर: picture alliance/blickwinkel/McPhoto
कैंसर के खिलाफ
मिर्च ना सिर्फ पसीना बहाने में मदद करती है, कुछ मिर्च ऐसी होती हैं जिनमें कैंसर के खिलाफ लड़ने वाले तत्व होते हैं. ये ट्यूमर के विकास को भी बाधित करती हैं. अमेरिकी कैंसर सोसायटी के मुताबिक मिर्च प्रोस्टेट कैंसर के विकास को धीमा करती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
जुकाम से दूरी
मिर्च के कारण नाक बहने से नाक साफ रहती है और सांस लेने में ज्यादा आसानी रहती है. नाक बंद होना, सायनस और फ्लू जैसी समस्याएं भी मिर्च के इस्तेमाल के कारण दूर रहती हैं.
तस्वीर: Colourbox
5 तस्वीरें1 | 5
लहरे ने कहा कि इस मिर्ची के पौधे की उंचाई दो से तीन मीटर होती है. साथ ही इसके स्वाद में सामान्य से ज्यादा तीखापन होता है. इसका रंग हल्का पीला होता है और आकार 1.5 से 2 सेंटीमीटर तक होता है. इसके फल ऊपरी दिशा में साल भर लगते रहते हैं. यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर संजना भगत ने कहा कि जब तक मिर्ची पर रिसर्च पूरी नहीं हो जाती, कैंसर के प्रति इसके लाभकारी होने का दावा नहीं किया जा सकता. अभी मिर्ची पर रिसर्च जारी है.
वहीं लहरे ने कहा कि इस मिर्ची के तीखेपन को चखकर ही जाना जा सकता है कि यह सामान्य मिर्ची से अलग है. इसकी पैदावार के लिए शुष्क और ठंडे वातावरण की जरूरत होती है. इस मिर्ची में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है. मानसून की वर्षा इसके लिए पर्याप्त रहती है. केवल नमी में यह पौधा सालों जीवित रहता है और फलता है. कई क्षेत्रों में यह धन मिर्ची के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन प्राकृतिक कारणों से यह विलुप्त हो रहा है. पहले गौरैया-चिरैया बहुतायत में रहती थी और मिर्ची चुनकर खाती और मिर्ची लेकर उड़ जाती थीं. जहां-जहां चिड़िया उड़ती, वहां-वहां मिर्ची के बीज फैल जाते और मिर्ची के पौधे उग जाते थे. अब ये लुप्त होने की कागार पर हैं, जिसके कारण यह मिर्ची कम पैदा हो रही है. इसलिए अब इसे व्यावसायिक रूप से पैदा करने की जरूरत है.
कृष्ण कुमार निगम/आईबी
कैंसर में इनसे होगा फायदा
भारतीय खाने में तरह तरह के मसालों का इस्तेमाल होता है. ये मसाले सिर्फ खाने का जायका ही नहीं बढ़ाते, बल्कि दवा की तरह काम भी करते हैं. जो लोग कैंसर का इलाज करवा रहे हों, उनके लिए ये मसाले अतिरिक्त लाभ पहुंचा सकते हैं.
तस्वीर: Imago/Science Photo Library
अदरक
सर्दी जुकाम, पेट दर्द और उल्टी होने पर अदरक का इस्तेमाल किया जाता है. अदरक को आप ताजा भी ले सकते हैं और सुखा कर पाउडर के रूप में भी. कैंसर की दवा में इतने रसायन होते हैं कि पेट पर उनका बुरा असर होता है. ऐसे में अदरक लेने से फायदा मिलता है.
तस्वीर: Fotolia/kostrez
हल्दी
आयुर्वेद में हल्दी के कई फायदे बताए गए हैं. हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. इसीलिए चोट लगने पर उस पर तेल में हल्दी मिला कर लगाई जाती है और दूध में हल्दी मिला कर पी जाती है. नए शोध में पेट के कैंसर से लड़ने में इसे फायदेमंद बताया गया है.
तस्वीर: picture-alliance/Arco Images GmbH
लाल मिर्च
हालांकि मिर्च का इस्तेमाल डॉक्टर से पूछे बिना नहीं करना चाहिए लेकिन लाल मिर्च को थोड़ी थोड़ी मात्रा में लेने से दर्द में कमी आती है. दरअसल मिर्च में एक ऐसा तत्व होता है, जो दर्द के एहसास को कम कर देता है.
तस्वीर: Colourbox
लहसुन
शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने में लहसुन योगदान देता है. इसमें सल्फर की बड़ी मात्रा होती है जो कई तरह के कैंसर से लड़ सकता है. लहसुन पर कई शोध हुए हैं जिनसे पता चलता है कि वह अंडाशय, पेट, पैंक्रिया और ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने में सहायक होता है.
तस्वीर: Colourbox/Nataliya Hora
पोदीना
अक्सर खाने के साथ धनिया पोदीना की चटनी खाई जाती है. लेकिन बिना किसी भी मसाले का इस्तेमाल किए हुए, सिर्फ उबले हुए पानी में डाल कर भी पोदीना लिया जा सकता है. इससे कैंसर की दवाओं से पेट में होने वाली जलन से राहत मिलती है.
तस्वीर: Fotolia/Heike Rau
बबूने का फूल
कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के कई साइड इफेक्ट होते हैं. कई लोगों के मुंह में छाले पड़ जाते हैं, गले में जख्म हो जाते हैं. ऐसे में बबूने के फूल को पानी में उबाल कर गरारा करने से फायदा मिलता है. इसे पीने से नींद भी अच्छी आती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/P. Pleul
रोजमेरी
भारतीय खाने में इसका इस्तेमाल कम ही होता है लेकिन बड़े सुपरमार्केट में इसे खरीदा जा सकता है. दवाओं के कारण मुंह का बिगड़ा स्वाद इससे ठीक होता है, पाचन बेहतर होता है और भूख भी ठीक से लगती है.