मोजेल नदी की सैर
जर्मनी के खूबसूरत इलाके में बहती है शांत मोजेल नदी. पास में घाटियां, पहाड़ और अंगूर की खेती की बेहतरीन जगह. नाव पर सवार होकर मोजेल के किनारे सैर की बात ही कुछ और है.
जर्मनी के खूबसूरत इलाके में बहती है शांत मोजेल नदी. पास में घाटियां, पहाड़ और अंगूर की खेती की बेहतरीन जगह. नाव पर सवार होकर मोजेल के किनारे सैर की बात ही कुछ और है.
तस्वीर: picture-alliance/Fritz Ganzhübnerराइन नदी में जाने वाली सबसे बड़ी सहायक नदी है मोजेल. यह एक खास जहाजी रास्ता है और इस वजह से नदी में काफी जहाज भी दिखते हैं. नदी किनारे गांव हैं और इस वजह से छोटी नावें भी दिख जाती हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpaजर्मन शहर ट्रियर कोई 2000 साल पुराना है. पुरातत्वविदों का कहना है कि यहां काफी जमाने पहले लकड़ियों से नदी पर पुल बना है. यहां एक स्याह दरवाजा भी है, जो पर्यटकों को काफी पसंद आता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpaबैर्नकास्टेल कूस दरअसल दो शहर हैं, जिनके बीच नदी से बहती है. लेकिन वे एक पुल से जुड़े हैं. घरों में लकड़ियों का काम है और यह 15वीं सदी के मशहूर दर्शनशास्त्री और वैज्ञानिक निकोलाउस फॉन कूस का जन्मस्थल है.
तस्वीर: picture-alliance/akg-imagesकहा जाता है कि किसी जमाने में व्यापारियों ने उस बैरल को खरीदा, जिस पर एक बिल्ली बैठी थी और जो अपने पंजे दिखा रही थी. संकेत है कि बिल्ली कमरे की सबसे अच्छी शराब की हिफाजत कर रही थी.
तस्वीर: picture-alliance/dpaयही वजह है कि आज भी काली बिल्ली छाप शराब बहुत मशहूर है. यह काली बिल्ली पूरे गांव के लिए शुभंकर बन चुकी है.
तस्वीर: picture-alliance/DUMONT Bildarchivपतझड़ का वक्त यहां खेती के लिए मुफीद माना जाता है. दूर दराज के पर्यटक शराब चखने यहां नदी किनारे पहुंचते हैं. यहां की व्हाइट वाइन भी बहुत मशहूर है. पूरा इलाका ही अपनी खूबसूरती और शराब के लिए जाना जाता है.
तस्वीर: hagenvontroja/Fotoliaअंगूर को ढलान पर उगाना आसान काम नहीं. यहां यूरोप का सबसे ज्यादा ढलान वाला खेत है, जिसे देखने दूर दराज के लोग पहुंचते हैं. यहां छठी सदी से ही लोग अंगूर उगा रहे हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpaभले ही दिन के वक्त यहां सैलानियों और खरीदारों का जमावड़ा हो लेकिन शाम और सुबह ज्यादातर वक्त यह शांत पड़ा रहता है. अगर कुछ आवाज आती है, तो नदी के पानी के बहने की आवाज.
तस्वीर: picture-alliance/DUMONT Bildarchivकरीब 1000 साल पुराना किला सदियों तक सत्ता संघर्ष का प्रतीक बना रहा. 1689 में इसे आग लगा दी गई. बाद में 19वीं सदी में इसे दोबारा तैयार किया गया. अब यह सैलानियों के लिए खास जगह बन गया है.
तस्वीर: picture alliance/Arco Images GmbHकोबलेंस शहर में एक किनारे जर्मनी के राज्यों, यूरोपीय संघ और अमेरिका के झंडे लगे हैं. यहीं राइन और मोजेल नदियों का मिलन होता है.
तस्वीर: picture-alliance/Fritz Ganzhübner