अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में आयोजित समारोह को संबोधित किया. राष्ट्रीय गौरव के संदेश के साथ उन्होंने कई राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भाषण को बहुत से लोगों ने चुनाव प्रचार करार दियातस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/dpa/picture alliance
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव पर जोर दिया, लेकिन बहुत से विशेषज्ञों ने कहा कि उनका भाषण चुनाव प्रचार करता एक राजनीतिक भाषण था. ट्रंप ने इस अवसर को इतिहास के सबसे आनंदपूर्ण और गौरवशाली मील के पत्थरों में से एक बताया. अमेरिका ने 250 साल में स्वतंत्रता हासिल करने से लेकर वैश्विक महाशक्ति बनने तक का सफर तय किया है.
वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान खराब मौसम और तूफान की आशंका के कारण नेशनल मॉल से लोगों को करीब दो घंटे के लिए हटाना पड़ा. इसके बाद ट्रंप ने समारोह को संबोधित किया और अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिकों का सम्मान किया. इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के कई दिग्गज सैनिक और वियतनाम युद्ध में युद्धक अभियान का नेतृत्व करने वाले शुरुआती ब्लैक स्पेशल फोर्सेस अधिकारियों में से एक भी शामिल थे.
समारोह में अमेरिकी इतिहास के विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों का प्रतिनिधित्व करने वाले झंडे प्रदर्शित किए गए. इनमें वह ध्वज भी शामिल था जो अब्राहम लिंकन के पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया गया था. इसके साथ ही ध्वज भी जो राइट बंधुओं द्वारा उड़ाए गए विमान पर लगाया गया था.
1776 में अमेरिका की स्थापना में जर्मनों और जर्मनी की बड़ी भूमिका रही है. आज भी अमेरिका में सबसे ज्यादा आबादी जर्मन मूल के लोगों की है. लेकिन आज 250 साल बाद दोनों देशों के मधुर रिश्ते तनाव से गुजर रहे हैं.
तस्वीर: DW
आजादी की लड़ाई में प्रशिया के अधिकारी
प्रशिया के अधिकारी फ्रीडरिष विल्हेम फॉन श्टॉइबेन ने ब्रिटेन के खिलाफ आजादी के लड़ाई के बाद बिखरी अमेरिकी सेना को फिर से नया आकार दिया. इस पेंटिंग में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बनने वाले जॉर्ज वॉशिंगटन (बिल्कुल बाएं) श्टॉइबेन (बाएं से तीसरे) और बाकी अधिकारियों के साथ हैं. 1957 से न्यूयॉर्क में हर साल एक परेड के जरिए श्टॉइबेन को याद किया जाता है.
19वीं शताब्दी और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में लाखों जर्मन आप्रवासी बनकर अमेरिका गए. 2022 के एक सर्वे के मुताबिक, करीब 5 करोड़ अमेरिकी नागरिक खुद को जर्मन विरासत वाला मानते हैं. जर्मन मूल के अमेरिकी आज भी संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़ा तबका बनाते हैं.
दूसरे विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी से लड़ते अमेरिकी सैनिक
दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिकियों ने जर्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. इस युद्ध ने जर्मन-अमेरिकी रिश्ते पर खूब तनाव डाला. डी-डे यानी 6 जून 1944 को अमेरिकी सैनिक पहली बार फ्रांस के तट पर उतरे. तब फ्रांस पर नाजी जर्मनी का कब्जा था. मित्र सेनाओं के साथ अमेरिका ने यूरोप को आजाद कराया. नाजी शासन झेल रहे जर्मनों को भी यह आजादी मिली.
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हट गई प्यार पर लगी बंदिश
विश्वयुद्ध के दौरान जब जर्मनी अमेरिका के अधीन था तो अमेरिका सैनिकों और जर्मन महिलाओं के रोमांटिक रिश्तों पर सख्त प्रतिबंध था. अक्टूबर 1945 यह बैन हटा दिया गया. विश्वयुद्ध के दौरान और उसके बाद करीब 15 हजार से 20 हजार जर्मन महिलाओं ने अमेरिका सैनिकों से शादी की. इन शादियों या रोमांटिक रिश्तों से पैदा हुए बच्चों की संख्या करीब एक लाख से 2,20,000 आंकी जाती है.
तस्वीर: TT/IMAGO
आकाश से मदद पहुंचाते अमेरिकी बॉम्बर विमान
दूसरा विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद बर्लिन समेत जर्मनी दो हिस्सों में बंट गया. एक हिस्सा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के नियंत्रण में था और दूसरा सोवियत संघ के. 1948 में सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन तक जमीनी पहुंच बिल्कुल काट दी. इससे हर चीज की किल्लत पैदा हो गई. मदद पहुंचाने के लिए अमेरिका और पश्चिमी साझेदारों ने कई महीनों तक बम बरसने वाले विमानों से लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई.
तस्वीर: -/dpa/picture-alliance
जर्मनी में रॉक एन रोल के किंग एल्विस प्रिस्ले
1958 में जर्मन सेना में अपनी सर्विस शुरू करने से पहले ही एल्विस प्रिस्ले एक इंटरनेशनल पॉप स्टार बन चुके थे. एल्विस एक पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. सैन्य सेवा के साथ ही वह एक तरह से जर्मनी के गैरआधिकारिक राजदूत से बन गए. फ्रीडबेर्ग में तैनाती के दौरान वह पड़ोसी कस्बे बाड नाउहाइम में रहते थे. आज वहां एल्विस की एक कांसे की प्रतिमा है और एक चौक उनके नाम है.
तस्वीर: AP
मैं एक बर्लिनवासी हूं: जॉन एफ केनेडी
1963 आते आते बर्लिन को विभाजित करने वाली दीवार खड़ी हो चुकी थी. ये दीवार सोवियत संघ के प्रभाव वाले पूर्वी सेक्टर को, पश्चिमी बर्लिन से अलग करती थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी इस दौरान पश्चिमी बर्लिन आए. उन्होंने पश्चिमी बर्लिन के मेयर विली ब्रांट (बीच में) और पहले जर्मन चांसलर कोनराड आडेनावर से मुलाकात की और फिर जनता को संबोधित करते हुए कहा, मैं एक बर्लिनवासी हूं.
तस्वीर: picture alliance/AP
अमेरिकी लाइफस्टाइल और जर्मन
रोजमर्रा की अमेरिकी जीवनशैली को जर्मनों ने भी खूब अपनाया. इसका एक उदाहरण जर्मनी में कोका कोला था. 1972 की इस तस्वीर में तत्कालीन जर्मन चांसलर विली ब्रांट, छुट्टियों के दौरान फ्लोरिडा के बीच पर कोका कोला पीते दिख रहे हैं.
तस्वीर: Horst Ossinger/dpa/picture alliance
अमेरिका में जर्मन लाइफस्टाइल
अमेरिका की नजर में जर्मनी की जो सबसे ट्रेडमार्क पहचान है, वो है जर्मन कारें. 1950 के दशक में फोल्क्सवागन की बीटल अमेरिका में खूब छायी रही. बाद में मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, आउडी और पोर्शे जैसे प्रीमियर जर्मन कार ब्रांडों ने अमेरिका को अपने मोह में बांध लिया.
तस्वीर: Rüdiger Wölk/IMAGO
फ्लोरिडा में ऑक्टोबरफेस्ट
विदेशों में म्यूनिख के ऑक्टोबरफेस्ट को जर्मन परंपरा की अहम पहचान के तौर पर देखा जाता है. लेकिन अमेरिका गए प्रवासी जर्मन अपने इस उत्सव को वहां भी ले गए. फ्लोरिडा प्रांत के लेक वर्थ में भी पारंपरिक जर्मन लिबास और खालिस जर्मन बीयर के साथ ऑक्टोबरफेस्ट मनाया जाता है.
तस्वीर: John Indiveri/SOPA Images/Sipa USA/picture alliance
बर्लिन में राष्ट्रपति रीगन: "मिस्टर गोर्बाचॉफ, इस दीवार को गिरा डालिए"
बर्लिन में अमेरिकी राष्ट्रपति का एक और ऐतिहासिक दौरा 1987 में हुआ. उस वक्त पश्चिम बर्लिन आए अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने ब्रांडनबुर्ग गेट में भाषण दिया. इसी गेट के दूसरी तरफ सोवियत प्रभाव वाला बर्लिन का बाकी हिस्सा था. अपने भाषण में रीगन ने तत्कालीन सोवियत राष्ट्रपति मिखाएल गोर्बाचॉफ को संबोधित करते हुए कहा, "इस गेट को खोल दीजिए! इस दीवार को गिरा डालिए!" दो साल बाद यह सपना हकीकत में बदल गया.
तस्वीर: Dieter Klar/dpa/picture alliance
श्रोएडर और बुश: इराक युद्ध को लेकर मतभेद
2001 में अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने नाटो देशों से सहयोग की मांग की. तत्कालीन जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर (तस्वीर में बाएं) इस दौरान कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे. लेकिन दो साल बाद जब बुश ने बड़े जनसंहार के हथियारों का हवाला देते हुए इराक युद्ध शुरू किया तो श्रोएडर ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.
1957 में पहले जर्मन चांसलर आडेनावर ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया था. उसके बाद 2009 में मैर्केल अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों को संबोधित करने वाली दूसरी जर्मन चांसलर बनीं. मैर्केल ने कहा, "हम जर्मन जानते हैं कि हम अपने अमेरिकी दोस्तो के कितने आभारी हैं. हम यह कभी नहीं भूलेंगे." मैर्केल के संबोधन के बाद अमेरिकी कांग्रेस में नौ मिनट तक तालियां गूंजती रहीं.
तस्वीर: Steffen Kugler/Bundesregierung/AFP
समान सोच वाली मैर्केल-ओबामा की जोड़ी
शायद दोनों देशों ने राजनेताओं के बीच सबसे बढ़िया दोस्ती का दौर, अंगेला मैर्केल और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान रहा. यह तस्वीर 2015 में जर्मनी की आप्ल्स पहाड़ियों में जी-7 के शिखर सम्मेलन के दौरान ली गई. पद छोड़ने के बाद भी दोनों निजी संपर्क में बने रहते हैं. हाल ही में जून 2026 में शिकागो में ओबामा सेंटर के उद्घाटन में मैर्केल शरीक हुईं, जबकि डॉनल्ड ट्रंप वहां नहीं गए.
तस्वीर: Michael Kappeler/AP Photo/picture alliance
डॉनल्ड ट्रंप और फ्रीडरिष मैर्त्स: तारीफों के बावजूद तनाव
2025 में ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका और अटलांटिक पार उसके यूरोपीय सहयोगियों के संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं. रिश्तों को रिपेयर करने के लिए जर्मन चासंलर फ्रीडरिष मैर्त्स तीन बार वॉशिंगटन जाकर ट्रंप को रिझाने की कोशिश भी कर चुके हैं, लेकिन मतभेद पट नहीं रहे हैं. सार्वजनिक तौर पर हाल ही में ईरान युद्ध को लेकर दोनों नेताओं में तल्ख बहस भी हुई.
अधर में लटका जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों का भविष्य
दूसरे विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद से ही जर्मनी में अमेरिकी सेना तैनात है. फिलहाल जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या करीब 37,000 है. वहीं सिविल कर्मचारी और परिवारजनों के साथ यह संख्या करीब 75,000 है. लेकिन ट्रंप, जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या में कम से कम 5,000 की कटौती करने का एलान कर चुके हैं.
तस्वीर: Nicolas Armer/dpa/picture alliance
कालश्टाड: ट्रंप के दादा की पैतृक विरासत
जर्मनी के राइनलैंड प्लैटिनेट का कालश्टाड कस्बा कई मायनों में दिलचस्प है. डॉनल्ड ट्रंप के दादा यहीं पैदा हुए. 1885 में 16 साल की उम्र में अमेरिका जाने से पहले वह यहीं रहते थे. ट्रंप अगर जर्मनी आएंगे तो क्या कालश्टाड भी जाएंगे? कालश्टाड के ज्यादा निवासी कहते हैं कि अगर वह ना ही आएं तो बेहतर है. जर्मनी में ट्रंप अब तक के सबसे अलोकप्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति बन चुके हैं.
तस्वीर: Michael Bermel/Eibner-Pressefoto/Imago
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हालांकि, अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपतियों के संबोधन आमतौर पर राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित होते हैं, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में कई राजनीतिक विषयों को भी शामिल किया. उन्होंने एक बार फिर "सेव अमेरिका एक्ट" के समर्थन में बात की. यह चुनाव संबंधी विधेयक है, जिसका अमेरिकी कांग्रेस में कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी विरोध किया है.
ट्रंप ने अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया. इसके अलावा उन्होंने साम्यवाद की आलोचना की और इसे अपने राजनीतिक संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. हाल के महीनों में यह विषय उनके सार्वजनिक अभियानों में लगातार प्रमुखता से उभरता रहा है. उन्होंने कहा, "आप या तो कार्ल मार्क्स के प्रति वफादार हो सकते हैं, या अमेरिका के प्रति. आप या तो कम्युनिस्ट हो सकते हैं, या देशभक्त. आप दोनों एक साथ नहीं हो सकते.”
ट्रंप ने कहा, "हम हमेशा शीर्ष पर रहेंगे. हम अपने देश को कभी गिरने नहीं देंगे. हम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहेंगे."
मौसम की मार के बीच मनाई गई वर्षगांठ
स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ को लेकर पूरे वर्ष उत्साह बना रहा. यह अवसर अमेरिकियों के लिए अपने इतिहास पर विचार करने का मौका भी बना, जिसमें एक उपनिवेश से वैश्विक शक्ति बनने तक की यात्रा शामिल है.
इस बीच अमेरिका के पूर्वी हिस्से में अत्यधिक गर्मी और खराब मौसम ने कई समारोहों को प्रभावित किया. कनेक्टिकट के हार्टफर्ड और पेनसिल्वेनिया के हैरिसबर्ग और विल्क्स-बारे में कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. बोस्टन में आतिशबाजी और संगीत समारोह के दौरान लोगों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया, जबकि फिलाडेल्फिया में भी ऐसे ही निर्देश जारी किए गए.
न्यूयॉर्क में स्वतंत्रता दिवस आतिशबाजी के साथ मनाया गयातस्वीर: Angelina Katsanis/REUTERS
न्यूयॉर्क और पिट्सबर्ग में आतिशबाजी कार्यक्रम आयोजित किए गए, हालांकि मौसम को देखते हुए उनके समय में बदलाव किया गया. वॉशिंगटन में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही. ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर में शाम को लोगों से क्षेत्र खाली करने की अपील की गई. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग संग्रहालयों, मेट्रो स्टेशनों और संघीय इमारतों में पहुंचे. कई लोगों ने एयर कंडीशनिंग वाले भवनों में शरण लेकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश की.
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देशभर में उत्साह
समारोह शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग नेशनल मॉल क्षेत्र में जुट चुके थे. न्यूयॉर्क की टीना हेल अपने तीन पोते-पोतियों के साथ कार्यक्रम में पहुंची थीं. इस दौरान सैन्य विमानों की उड़ान भी आकर्षण का केंद्र रही. पेनसिल्वेनिया के डेविड कोश्को और उनकी पत्नी जेनिफर कोश्को भी समारोह देखने वॉशिंगटन पहुंचे थे. डेविड कोश्को मरीन कोर रिजर्व के पूर्व सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का हिस्सा बनना अपने आप में एक विशेष अनुभव है.
फिलाडेल्फिया में, जहां स्वतंत्रता घोषणापत्र को अपनाया गया था, दोपहर से ही उत्सव का माहौल दिखाई दिया. इंडिपेंडेंस हॉल के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. उसी दिन फिलाडेल्फिया स्टेडियम में फ्रांस और पराग्वे के बीच विश्व कप फुटबॉल का नॉकआउट मुकाबला भी खेला गया, जिसकी शुरुआत स्वतंत्रता दिवस से जुड़े आयोजनों के साथ हुई.
इस मामले में अमेरिका को नहीं छू सका है चीन
06:26
न्यूयॉर्क में 43 बड़े नौकायन जहाजों का काफिला स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और हडसन नदी के आसपास निकला. इसके बाद हवाई प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें स्टेल्थ बॉम्बर, नौसेना की ब्लू एंजेल्स टीम और फ्रांसीसी वायुसेना की पैट्रूई द फ्रांस एरोबेटिक टीम ने हिस्सा लिया. वर्जीनिया स्थित जॉर्ज वॉशिंगटन के माउंट वर्नन परिसर में कई लोगों ने अमेरिकी नागरिकता ग्रहण करने की शपथ ली. राष्ट्रीय गान के दौरान उन्होंने आंखें बंद कर अपने दिल पर हाथ रखा.
एरिजोना के फीनिक्स शहर में भी लोग स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जमा हुए. वहां मौजूद जयलन डोर्च ने कहा कि अमेरिका के युवाओं की स्वतंत्र सोच उन्हें भविष्य के प्रति आशान्वित बनाती है. उन्होंने कहा कि देश को उन मेहनतकश लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जो रोजमर्रा के काम से अमेरिका को आगे बढ़ाते हैं.
दुनियाभर से बधाई
भारत समेत दुनिया के कई नेताओं ने इस मौके पर अमेरिका को बधाई दी है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, "भारत और अमेरिका के बीच केवल एक रणनीतिक साझेदारी ही नहीं है. लोकतंत्र, कानून के शासन और अपने लोगों की असीम संभावनाओं में हमारी साझा आस्था हमारी दोस्ती को वैश्विक कल्याण की एक सशक्त शक्ति बनाती है. मैं कामना करता हूं कि अगले 250 वर्ष अमेरिका के लिए और अधिक समृद्धि, शांति तथा प्रगति लेकर आएं, और भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं.”
1776 से पहले अमेरिका के बड़े हिस्से पर ब्रिटेन का शासन था. 4 जुलाई 1776 को फिलाडेल्फिया में 'कॉन्टिनेंटल कांग्रेस' यानी अमेरिकी प्रतिनिधियों की सभा ने आधिकारिक तौर पर स्वतंत्रता के घोषणापत्र को मंजूरी दी. इस ऐतिहासिक दस्तावेज को मुख्य रूप से थॉमस जेफरसन ने तैयार किया था. इसके जरिए अमेरिका ने खुद को ब्रिटिश साम्राज्य से पूरी तरह आजाद और एक संप्रभु राष्ट्र घोषित कर दिया. इसीलिए हर साल 4 जुलाई को अमेरिका का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है.