डॉनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की शर्त पर हमले रोकने की बात कही. इसके बाद ईरान की ओर से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट दो हफ्ते के लिए खुला रहेगा और शुक्रवार से इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होगी.
डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के लिए हमले को दो हफ्ते के लिए टालने की बात कही हैतस्वीर: Evelyn Hockstein/REUTERS
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फिलहाल दो हफ्तों के लिए ईरान पर हमले टालने की बात कही है. डॉनल्ड ट्रंप ने ये घोषणा तब की जब उनकी ओर से दी गई डेडलाइन में 2 घंटे का समय बाकी रह गया था. ट्रंप ने जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिका के सामने एक 10 सूत्री शांति योजना रखी है, जिससे इस जंग को खत्म करने में मदद मिल सकती है. ईरान की सुप्रीम नेशनल काउंसिल ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि उन्होंने दो हफ्तों के लिए युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.
इससे पहले डॉनल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान 7 अप्रैल को, वॉशिंगटन के समय के हिसाब से शाम 8 बजे तक होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजलीघरों, रेलवे और अन्य नागरिक ठिकानों पर हमले करेगा.
मध्य-पूर्व युद्ध की मार: दुबई की चमक पर पड़ा साया
खाड़ी देशों के दुबई जैसे शानदार शहर कभी लग्जरी और सुरक्षा की मिसाल हुआ करते थे. आज मध्य-पूर्व में युद्ध छिड़ने के बाद से वहां पर्यटन तो ठप हुआ ही है, इसकी साख भी दांव पर है.
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सब पड़ा है खाली
आम दिनों में दुबई के अल-सीफ बाजार में पर्यटकों का तांता लगा होता था लेकिन आज पूरा बाजार सुनसान है. अमेरिका-इस्राएल के ईरान पर हमला करने के बाद से बाजार का नजारा बिल्कुल उलट गया है.
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अमीरों की दुनिया
पिछले कई दशकों से दुबई के लिए एक बात कही जाती थी कि यह अमीरों की दुनिया है. दुनिया भर में कहीं किसी भी तरह का संघर्ष हो रहा हो, अमीरात की सीमाओं तक आते-आते सब थम जाता है. इस बार यह धारणा गलत साबित हुई. ईरान के जवाबी हमलों की चपेट में इस बार खाड़ी देश भी आ गए हैं, जिसने विदेशियों को यह क्षेत्र छोड़ के जाने के लिए मजबूर कर दिया है.
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हवाई अड्डे पर हमला
28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इस्राएल युद्ध शुरू होने के बाद से कई खाड़ी देशों ने लगातार अपने इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी है. इस हमले में दुबई हवाई अड्डे के आस-पास कई ईंधन डिपो, अमेरिकी दूतावास और होटलों जैसे नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया.
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हवाई उड़ानें रद्द
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दुबई हवाई अड्डा इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है लेकिन यात्री विमानों की उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं. ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के हमलों के बीच युद्ध की शुरुआत से ही इलाके के कई हवाई अड्डे आंशिक या सीमित क्षमता के साथ काम करने को मजबूर हैं.
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खाली पड़े समुद्री किनारे
दुबई के ब्रांड न्यू लग्जरी होटल जुमेराह मरसा अल अरब के समुद्री किनारे पर समुद्री पक्षियों के अलावा कोई नहीं है. विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार पर्यटन में आई भारी गिरावट के कारण खाड़ी देशों को कम से कम 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. साल 2025 में पर्यटन संयुक्त अरब अमीरात की जीडीपी का लगभग 12 फीसदी था.
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साख है दांव पर
दुबई के प्रमुख पर्यटन बाजार अल-सीफ के इस दुकानदार के लिए भी यह एक बड़ा झटका है. होटल, रेस्तरां और दुकान सभी इससे प्रभावित हुए हैं. ईरान के साथ छिड़ा युद्ध न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदायी है बल्कि क्षेत्र की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.
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कुछ सुरक्षित नहीं
अंतरराष्ट्रीय असमंजस के बीच पिछले कई सालों से खाड़ी देश खासकर दुबई खुद को निवेशकों और व्यवसायों के सामने एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर पेश कर रहा था. केवल 2025 में ही लगभग 9,800 करोड़पति संयुक्त अरब अमीरात में आकर बसे, जो कि दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे अधिक है.
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बंजर पड़े शहर
दुबई की गिनती दुनिया के सबसे अमीरों शहरों में की जाती है. टैक्स में भारी छूट, व्यवस्थित नौकरशाही और ‘गोल्डन वीजा प्रोग्राम’ ने इसे अमीरों और व्यवसायों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया था. कभी चहल-पहल से भरी रहने वाली जुमैरा बीच रेजिडेंस की सड़कें आज वीरान हैं.
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आर्थिक मॉडल संकट में
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध कितना लंबा चलता है, इस बार निर्भर करेगा कि देश की प्रतिष्ठा को कितना नुकसान पहुंचा है और निवेशक कितनी गति से पैसा खीचेंगे. राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टिट्यूट के जिम क्रेन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “दुबई का आर्थिक मॉडल कितना संकट में है, इसे कम आंकना मुश्किल है. युद्ध जितना लंबा चलेगा, वैकल्पिक स्थानों की खोज उतनी ही तेज होगी.”
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‘पर्यटकों की याददाश्त कमजोर’
कुछ लोगों का मानना है कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है. जर्मन सोसाइटी फॉर टूरिज्म स्टडीज के प्रेसिडेंट युरगन श्मुडे ने जेडडीएफ को बताया, “पर्यटकों की याददाश्त कमजोर होती है.” उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संघर्ष या युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलता है तो पर्यटन स्थल को अधिक नुकसान नहीं पहुंचता है.
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पाकिस्तान की मध्यस्थता की तारीफ
हमला रोकने की जानकारी देते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने पर राजी है तो वह दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी और हमले स्थगित कर देंगे. इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इन दो हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता खुला रहेगा और ईरानी सेना इसकी देखरेख करेगी. इस दौरान अमेरिका के साथ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत होगी.
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व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप से ईरान पर हमले की समयसीमा को दो हफ्ते बढ़ाने की अपील की ताकि मामले का कूटनीतिक हल निकाला जा सके. इसमें ईरान के अस्थायी तौर पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए सहमत होने की बात भी कही गई. वहीं ईरान की ओर से भी कहा गया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल ने युद्ध खत्म कराने के लिए बहुत मेहनत की और इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया गया.
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ईरान के साथ बातचीत का आधार बना: ट्रंप
डॉनल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान के साथ बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार बन गया है और विवादित रहे लगभग सभी मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन गई है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए दो हफ्ते की मोहलत जरूरी है. व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई है कि इस्राएल ने भी ईरान के सैन्य ढांचे, नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम पर हमले बंद करने की सहमति जताई है. हालांकि इस्राएल की ओर से कहा गया कि मंगलवार को भी ईरान की ओर से इस्राएल पर मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें हवा में ही नाकाम कर दिया गया.
इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने पोस्ट किया था कि अगर ईरान उनकी तय समयसीमा में समझौता नहीं करता तो ‘आज रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है'. युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप कई बार आखिरी समय पर हमले की डेडलाइन को बढ़ाते रहे हैं. हालांकि ईरान पर हमले की समयसीमा खत्म होने से पहले अमेरिका ने हवाई हमलों में दो पुलों और एक रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया. अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर भी हमला किया, जो ईरानी तेल उत्पादन का अहम केंद्र है.
इससे पहले ईरान ने मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की की मध्यस्थता में लाए गए 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और कहा था कि वह जंग का स्थायी अंत चाहता है.
हमले से पूर्व ईरान में हालात तनावपूर्ण बने रहे. आम लोगों में बिजली, पानी, गैस और इंटरनेट ठप होने की स्थिति को लेकर हालात खराब होने का डर और निराशा दिखी. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की धमकियों की आलोचना भी हुई. पोप लियो चौदहवें के साथ ही फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि नागरिक और ऊर्जा ढांचे पर हमले किसी भी सूरत में जायज नहीं हैं.