अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जबकि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं.
11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही थीतस्वीर: Qamar Zaman/dpa/picture alliance
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सोमवार को पाकिस्तान पहुंचेंगे और ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत फिर से शुरू करेंगे. उन्होंने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर की.
ट्रंप ने लिखा कि उनके प्रतिनिधि इस्लामाबाद में होंगे और वहां बातचीत करेंगे. इससे पहले 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आमने सामने की बातचीत हुई थी, लेकिन वह बिना किसी समझौते के समाप्त हुई थी.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत ने कहा कि सोमवार को पाकिस्तान जा रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वैंस करेंगे. हालांकि रविवार को एक इंटरव्यू में ईरानी संसद के अध्यक्ष कलीबाफ ने कहा था कि दोनों देश समझौते से अभी काफी दूर हैं.
इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को रविवार को और कड़ा कर दिया गया. अमेरिका के वार्ताकारों के सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचने की घोषणा के बाद शहर के अहम इलाकों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है. यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति और गंभीर हो गई है.
पाकिस्तान की अगुवाई में कैसा सीजफायर
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शांति वार्ता से पहले इस्लामाबाद और उसके निकटवर्ती शहर रावलपिंडी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन ने कई सड़कों को बंद कर दिया है और यातायात पर पाबंदियां लगाई गई हैं. शहर के सबसे सुरक्षित होटलों के आसपास हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. इनमें मैरियट और सेरेना होटल शामिल हैं, जहां पिछली बार अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत हुई थी.
सेरेना होटल की ओर जाने वाले अधिकतर रास्तों को रविवार को बंद कर दिया गया था. कांटेदार तार, बैरिकेड्स, भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी और यातायात को मोड़ने के जरिए पूरे क्षेत्र को सील किया गया. एक नगर अधिकारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए नागरिकों से सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की.
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ट्रंप ने दी चेतावनी
इसी दौरान वॉशिंगटन से भी अमेरिकी राष्ट्रपति की आक्रामक टिप्पणियां सामने आई हैं. डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने समझौता स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को तबाह कर देगा. उन्होंने ईरान पर दोनों देशों के बीच घोषित दो सप्ताह के संघर्षविराम का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया और कहा कि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमले इसका सबूत हैं.
मध्य-पूर्व युद्ध की मार: दुबई की चमक पर पड़ा साया
खाड़ी देशों के दुबई जैसे शानदार शहर कभी लग्जरी और सुरक्षा की मिसाल हुआ करते थे. आज मध्य-पूर्व में युद्ध छिड़ने के बाद से वहां पर्यटन तो ठप हुआ ही है, इसकी साख भी दांव पर है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
सब पड़ा है खाली
आम दिनों में दुबई के अल-सीफ बाजार में पर्यटकों का तांता लगा होता था लेकिन आज पूरा बाजार सुनसान है. अमेरिका-इस्राएल के ईरान पर हमला करने के बाद से बाजार का नजारा बिल्कुल उलट गया है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
अमीरों की दुनिया
पिछले कई दशकों से दुबई के लिए एक बात कही जाती थी कि यह अमीरों की दुनिया है. दुनिया भर में कहीं किसी भी तरह का संघर्ष हो रहा हो, अमीरात की सीमाओं तक आते-आते सब थम जाता है. इस बार यह धारणा गलत साबित हुई. ईरान के जवाबी हमलों की चपेट में इस बार खाड़ी देश भी आ गए हैं, जिसने विदेशियों को यह क्षेत्र छोड़ के जाने के लिए मजबूर कर दिया है.
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हवाई अड्डे पर हमला
28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इस्राएल युद्ध शुरू होने के बाद से कई खाड़ी देशों ने लगातार अपने इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी है. इस हमले में दुबई हवाई अड्डे के आस-पास कई ईंधन डिपो, अमेरिकी दूतावास और होटलों जैसे नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया.
तस्वीर: AFP
हवाई उड़ानें रद्द
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दुबई हवाई अड्डा इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है लेकिन यात्री विमानों की उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं. ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के हमलों के बीच युद्ध की शुरुआत से ही इलाके के कई हवाई अड्डे आंशिक या सीमित क्षमता के साथ काम करने को मजबूर हैं.
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खाली पड़े समुद्री किनारे
दुबई के ब्रांड न्यू लग्जरी होटल जुमेराह मरसा अल अरब के समुद्री किनारे पर समुद्री पक्षियों के अलावा कोई नहीं है. विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार पर्यटन में आई भारी गिरावट के कारण खाड़ी देशों को कम से कम 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. साल 2025 में पर्यटन संयुक्त अरब अमीरात की जीडीपी का लगभग 12 फीसदी था.
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साख है दांव पर
दुबई के प्रमुख पर्यटन बाजार अल-सीफ के इस दुकानदार के लिए भी यह एक बड़ा झटका है. होटल, रेस्तरां और दुकान सभी इससे प्रभावित हुए हैं. ईरान के साथ छिड़ा युद्ध न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदायी है बल्कि क्षेत्र की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
कुछ सुरक्षित नहीं
अंतरराष्ट्रीय असमंजस के बीच पिछले कई सालों से खाड़ी देश खासकर दुबई खुद को निवेशकों और व्यवसायों के सामने एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर पेश कर रहा था. केवल 2025 में ही लगभग 9,800 करोड़पति संयुक्त अरब अमीरात में आकर बसे, जो कि दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे अधिक है.
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बंजर पड़े शहर
दुबई की गिनती दुनिया के सबसे अमीरों शहरों में की जाती है. टैक्स में भारी छूट, व्यवस्थित नौकरशाही और ‘गोल्डन वीजा प्रोग्राम’ ने इसे अमीरों और व्यवसायों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया था. कभी चहल-पहल से भरी रहने वाली जुमैरा बीच रेजिडेंस की सड़कें आज वीरान हैं.
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आर्थिक मॉडल संकट में
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध कितना लंबा चलता है, इस बार निर्भर करेगा कि देश की प्रतिष्ठा को कितना नुकसान पहुंचा है और निवेशक कितनी गति से पैसा खीचेंगे. राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टिट्यूट के जिम क्रेन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “दुबई का आर्थिक मॉडल कितना संकट में है, इसे कम आंकना मुश्किल है. युद्ध जितना लंबा चलेगा, वैकल्पिक स्थानों की खोज उतनी ही तेज होगी.”
तस्वीर: Fatima Shbair/AP Photo/picture alliance
‘पर्यटकों की याददाश्त कमजोर’
कुछ लोगों का मानना है कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है. जर्मन सोसाइटी फॉर टूरिज्म स्टडीज के प्रेसिडेंट युरगन श्मुडे ने जेडडीएफ को बताया, “पर्यटकों की याददाश्त कमजोर होती है.” उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संघर्ष या युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलता है तो पर्यटन स्थल को अधिक नुकसान नहीं पहुंचता है.
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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह ईरान को एक उचित समझौता पेश कर रहे हैं, लेकिन यदि तेहरान ने इनकार किया तो अमेरिका ईरान के सभी बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर देगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह काम तेज और आसानी से किया जाएगा और यदि समझौता नहीं हुआ तो ऐसा करना उनके लिए सम्मान की बात होगी.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य रविवार को भी बंद रहा. ईरान ने शनिवार को फिर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद घोषित कर दिया था, जबकि उसने एक दिन पहले इसे फिर से खोलने की घोषणा की थी. जलडमरूमध्य के दोबारा बंद होने की खबर से वैश्विक बाजारों में चिंता फैल गई है.
ईरान का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लागू की गई नाकेबंदी को खत्म नहीं करता. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने जाने वाले जहाजों पर पूर्ण समुद्री रोक लागू की हुई है. अमेरिका के अनुसार, यह कदम ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम है क्योंकि दुनिया के तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में इसके बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस तनातनी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की करीबी नजर है.