भारत की ही तरह अफ्रीकी देश आइवरी कोस्ट में हर साल लाखों टन कृषि कचरा पैदा होता है. ऐसे जैविक कचरे से बायोगैस, कम्पोस्ट और यहां तक कि ग्रीन चारकोल तक बनाया जा सकता है. इसी क्रम में यहां कसावा पौधे के बेकार बचे हिस्सों से बायोएथेनॉल भी बनाया जा रहा है, जिसे कई जानकार भविष्य का ईंधन बताते हैं.