ब्रिटेन की लेबर सरकार ने शरणार्थी कानूनों को कड़ा बनाने का फैसला किया है. देश में बढ़ते धुर-दक्षिणपंथी प्रभाव और शरणार्थियों के खिलाफ लगातार जारी प्रदर्शनों के बीच यह फैसला लिया गया है.
छोटी-छोटी नावों पर सवार होकर कई शरणार्थी अपनी जान जोखिम में डालकर ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश करते हैंतस्वीर: Sameer Al-Doumy/AFP
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ब्रिटेन की लेबर सरकार ने देश की शरणार्थी नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है. नई नीति के तहत किसी भी व्यक्ति को मिलने वाला शरणार्थी का दर्जा तुरंत स्थायी नहीं होगा, बल्कि यह अस्थायी रहेगा. पाकिस्तानी मूल की ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि समय-समय पर शरणार्थियों के शरणार्थी दर्जे की समीक्षा भी की जाएगी. उन्होंने यह भी साफ किया है कि किसी व्यक्ति को ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसने की अनुमति मिलने में अब 20 साल तक लग सकते हैं, यानी यह इंतजार अभी के मुकाबले चार गुना बढ़ सकता है.
ये बदलाव ऐसे समय में किए गए हैं जब ब्रिटेन में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और शरणार्थी लोगों की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं. लेबर सरकार पर दबाव है कि वह छोटी नावों के जरिए ब्रिटेन में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल होने वाले लोगों और उन्हें शरण देने की वर्तमान प्रणाली पर सख्ती दिखाए.
शरणार्थियों के लिए आर्थिक मदद पर भी कड़ाई
नई नीति में यह भी शामिल है कि जो लोग काम कर सकते हैं लेकिन काम नहीं कर रहे या कानून तोड़ते हैं, उनकी सरकारी मदद कम या बंद की जा सकती है. इसके तहत रहने के लिए मिलने वाले पैसे और साप्ताहिक भत्ते जैसी सुविधाएं में भी कटौती की जा सकती है. सरकार का कहना है कि टैक्स चुकाने का पैसा उन लोगों पर खर्च होना चाहिए जो काम कर रहे हैं और समाज में योगदान दे रहे हैं.
2022 में 5.6 लाख लोगों ने छोड़ा भारत, अपनाया अमीर देशों को
भारत आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के सदस्य देशों की तरफ आप्रवासन का सबसे बड़ा स्रोत बन कर उभरा है. जानिए कितने भारतीय लोगों ने अपना देश छोड़ कर किन किन देशों को अपनाया.
तस्वीर: Janelle Dumalaon/DW
लाखों लोग छोड़ रहे भारत
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने अपनी ताजा अंतरराष्ट्रीय आप्रवासन आउटलुक रिपोर्ट जारी की है जिसमें अमीर देशों की तरफ आप्रवासन के वैश्विक ट्रेंड के बारे में विस्तार से बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में भारत इस आप्रवासन का सबसे बड़ा मूल स्रोत बना.
तस्वीर: Francois Mori/AP Photo/picture alliance
एक साल में 30 प्रतिशत की उछाल
2022 में 5.6 लाख भारतीय नागरिकों ने अमीर देशों की तरफ आप्रवासन किया. यह 2021 के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा संख्या है. यह अमीर देशों की तरफ होने वाले कुल आप्रवासन का करीब आठ प्रतिशत है.
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ब्रिटेन का आकर्षण बढ़ा
इनमें से 1,25,000 भारतीय नागरिकों ने अमेरिका, 1,18,000 ने कनाडा और 1,12,000 ने ब्रिटेन को चुना. 2021 के मुकाबले ब्रिटेन चले जाने वालों की संख्या में दोगुना उछाल आया, अमेरिका जाने वालों की संख्या 35 प्रतिशत बढ़ी जबकि कनाडा जाने वालों को संख्या आठ प्रतिशत गिर गई.
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नागरिकता लेने में भी आगे
2022 में 1.9 लाख से भी ज्यादा भारतीय नागरिकों ने किसी न किसी ओईसीडी देश की नागरिकता भी ले ली. यह 2021 के मुकाबले 40 प्रतिशत उछाल है. यानी ओईसीडी देशों की नागरिकता लेने में भारतीय सबसे आगे रहे.
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दूसरे नंबर पर चीन
भारत के बाद आप्रवासन की दौड़ में दूसरा नंबर चीन का है. 2022 में चीन से 3.26 लाख लोग किसी न ओईसीडी देश चले गए. रूस से आप्रवासन में आश्चर्यजनक उछाल आया. 2.68 लाख रूसी नागरिकों ने अपना देश छोड़ कर अमीर देशों को अपनाया, जिसकी वजह से इस सूची में रूस 18वें स्थान से उठ कर तीसरे नंबर पर आ गया.
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रूसियों ने तुर्की, इस्राएल और जर्मनी को चुना
रूसी आप्रवासियों ने सबसे ज्यादा तुर्की, इस्राएल और जर्मनी को चुना. चौथे नंबर पर रोमानिया के नागरिक हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा जर्मनी, स्पेन और इटली को चुना.
तस्वीर: VGVMEDIA/Pond5/IMAGO
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सरकार ने कहा है कि अगर किसी शरणार्थी का देश यानी जहां से वह आया है, वह बाद में सुरक्षित मान लिया गया, तो उससे शरणार्थी दर्जा वापस भी लिया जा सकता है. इसलिए हर ढाई साल में शरणार्थियों की स्थिति की समीक्षा होगी, ताकि तय किया जा सके कि वे ब्रिटेन में रह सकते हैं या नहीं.
डेनमार्क की नीति पर आधारित
इस नीति का मॉडल डेनमार्क की से लिया गया है, जहां शरणार्थियों को अस्थायी तौर पर रहने दिया जाता है और हर दो साल में उनकी जांच होती है. डेनमार्क ने इन नीतियों के बाद शरणार्थी दर्जे की मांग में बड़ी कमी देखी है. अब ब्रिटिश सरकार का कहना है कि ब्रिटेन भी इसी दिशा में जाना चाहता है.
वे देश जहां वर्क वीजा मिलना आसान है
बहुत से भारतीय काम के लिए विदेश जाना चाहते हैं. ये उन देशों की सूची है, जहां का वर्क वीजा मिलना अन्य देशों की तुलना में आसान है.
तस्वीर: DW
कनाडा
इमिग्रेशन नीतियों के मामले में कनाडा दुनिया के सबसे लचीले देशों में से एक है. वहां हर साल बड़े पैमाने पर कुशल प्रवासी कामगारों को वर्क वीजा दिया जाता है. इनमें बहुत से भारतीय होते हैं.
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ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया का जनरल स्किल्ड माइग्रेशन प्रोग्राम विदेशों से कुशल कामगारों को आकर्षित करने के लिए ही बनाया गया है. हर साल करीब दो लाख लोगों को वर्क और फैमिली वीजा दिया जाता है. हाल के सालों में भारतीयों को मिलने वाले वीजा अन्य देशों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं.
तस्वीर: Dan Himbrechts/AAP/dpa
जर्मनी
जर्मनी में कुशल कामगारों की मांग बहुत ज्यादा है. आईटी, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुशल लोगों के लिए यहां बहुत मौके हैं और कई तरह के वीजा उपलब्ध हैं. साथ ही अत्यधिक होनहार लोगों के लिए ईयू ब्लूकार्ड भी है.
तस्वीर: Jörg Carstensen/dpa/picture alliance
न्यूजीलैंड
ऑस्ट्रेलिया की तरह न्यूजीलैंड में भी हर साल उन स्किल्स की सूची जारी होती है, जिनकी देश की अर्थव्यवस्था को जरूरत है. इस आधार पर सालाना वर्क वीजा दिए जाते हैं. बड़ी संख्या में भारतीयों के ये वीजा मिलते हैं.
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सिंगापुर
अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था और विदेशियों के लिए अच्छे माहौल के लिए जाना जाने वाला सिंगापुर कई तरह के वर्क वीजा देता है जिनमें इंपलॉयमेंट पास, एस पास, वर्क हॉलीडे पास और ट्रेनिंग इंपलॉयमेंट पास शामिल हैं.
तस्वीर: Caroline Chia/REUTERS
आयरलैंड
आयरलैंड में क्रिटिकल स्किल्स इंपलॉयमेंट परमिट दिया जाता है, जिसका मकसद स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए विदेशों से कुशल कारीगरों को आकर्षित करना है. इसके जरिए स्थायी नागरिकता भी हासिल की जा सकती है.
तस्वीर: Paul Faith/AFP/Getty Images
संयुक्त अरब अमीरात
यूएई भारतीयों के लिए काफी समय से एक आकर्षक विकल्प रहा है. वहां के आसान वीजा नियम भारतीयों के लिए दुबई जाना और काम करना आसान बनाते हैं.
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नीदरलैंड्स
विदेशों में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीयों के लिए नीदरलैंड्स भी एक विकल्प है जो वर्क या बिजनस वीजा देता है.
तस्वीर: DW
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हालांकि, ब्रिटेन में 100 से ज्यादा चैरिटी और अधिकार समूहों ने इन कदमों की आलोचना की है. उनका कहना है कि इन फैसलों से शरणार्थियों को डर और अनिश्चितता में धकेला जा रहा है और समाज में गुस्सा और हिंसा बढ़ रही है. चैरिटी समूहों ने सरकार पर "शरणार्थियों को निशाना बनाने” का आरोप लगाया है.
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ब्रिटेन में हुए कई शरणार्थी विरोधी प्रदर्शन
मार्च 2025 से पहले के एक साल में ब्रिटेन में 1 लाख से ज्यादा लोगों ने शरण के लिए आवेदन किया, जो इससे एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 17% ज्यादा था. पिछले दिनों ब्रिटेन में कई जगहों पर ऐसे होटलों के बाहर प्रदर्शन भी हुए हैं, जहां शरणार्थियों को सरकारी खर्च पर ठहराया गया है.
सरकार का कहना है कि वह आगे "सुरक्षित और कानूनी" रास्तों से आने वाले लोगों के लिए अधिक विकल्प खोलेगी, लेकिन जो लोग गैर-कानूनी तरीकों से आ रहे हैं, उनके लिए नियम और भी सख्त किए जाएंगे.