अबू धाबी में रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई. हालांकि दोनों पक्षों ने जल्दी दोबारा मिलने की बात कही है.
दोनों पक्षों ने अगले हफ्ते दोबारा मिलने की बात कही हैतस्वीर: Ryan Carter/UAE Presidential Court/REUTERS
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यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच यूएई की राजधानी अबू धाबी चल रही त्रिपक्षीय बातचीत का दूसरा दौर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गया. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास ने बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा कि इस हफ्ते बातचीत जारी रखने की कोई योजना नहीं है. अब तक किसी ठोस नतीजे की घोषणा नहीं की गई है.
ये बातचीत उस युद्ध को खत्म करने का रास्ता तलाशने के लिए है, जिसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन के खिलाफ शुरू किया था. रूस की मांग है कि यूक्रेन कुछ क्षेत्रों को छोड़ दे, नाटो सदस्यता की उम्मीद त्याग दे और अपनी शक्तिशाली सेना को भी छोड़ दे. रूस ने साफ कहा है कि इन मांगों के माने जाने पर ही युद्ध खत्म हो सकता है.
यूक्रेन ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि वह उन इलाकों से और पीछे नहीं हटेगा, जिन पर रूसी सैन्य बलों का कब्जा नहीं है. अमेरिकी पक्ष मध्यस्थ की भूमिका में है और दोनों पक्षों को समझौते के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है.
अबू धाबी में क्या हुआ
बातचीत से जुड़ी जानकारी के कुछ हिस्से बाहर आने के बाद कहा गया है कि दोनों युद्धरत पक्षों ने अब तक हुई प्रगति को लेकर सामान्य तौर पर संतोष जताया है. तास ने रूसी वार्ताकार प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य के हवाले से कहा, "नतीजे हैं, लेकिन उनकी घोषणा हमारे यहां जिम्मेदार लोग करेंगे.” वहीं यूक्रेनी पक्ष ने भी बातचीत को "सकारात्मक” और "रचनात्मक” बताया है और बातचीत अगले हफ्ते जितनी जल्दी हो सके, फिर से शुरू हो सकती है.
यूक्रेन में खाली होते जा रहे हैं मैटरनिटी वॉर्ड
यूक्रेन में युद्ध शुरू हुए अब चार साल होने को हैं. युद्ध के इन सालों में यहां आबादी का संकट घनघोर हो गया है. जन्मदर बहुत कम है, मौतों की संख्या बहुत ज्यादा.
तस्वीर: Narciso Contreras/AA/picture alliance
अस्पताल भरे हैं, मैटरनिटी वॉर्ड खाली
यूक्रेन के बहुत से अस्पतालों में मरीजों की कोई कमी नहीं. बल्कि, घायलों की संख्या अस्पतालों की क्षमता से कहीं ज्यादा है. मगर, इन भरे हुए अस्पतालों का एक हिस्सा ऐसा है जो दिनोदिन ज्यादा वीरान होता जा जा रहा है. कई यूक्रेनी अस्पतालों के मैटरनिटी वॉर्ड आमतौर पर खाली रहते हैं. जैसे कि पश्चिमी यूक्रेन के होश्चा में अस्पताल का यह मैटरनिटी वॉर्ड.
तस्वीर: Thomas Peter/REUTERS
दिसंबर आ गया, पूरे साल में यहां बस 139 बच्चे जन्मे
होश्चा हॉस्पिटल के मैटरनिटी वॉर्ड में इस साल अब तक बस 139 बच्चे पैदा हुए हैं. बीते साल यह संख्या 164 थी. एक दशक पहले इसी मैटरनिटी वॉर्ड में हर साल 400 से ज्यादा बच्चे जन्म लेते थे. यवहेन हेक्केल इसी अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट हैं. वह बताती हैं, "बहुत सारे युवाओं की मौत हो चुकी है. सीधे से कहूं, तो ऐसे युवा जिन्हें यूक्रेन के जीन पूल की भरपाई करनी थी, मर चुके हैं." (फाइल फोटो)
तस्वीर: Marko Djurica/REUTERS
जब युद्ध खत्म होगा, तो कैसे खड़े होंगे?
युद्ध खुद ही भीषण विपत्ति है. महीनों-सालों तक चलने वाले युद्ध, लोगों के लिए और बड़ी आपदा साबित होते हैं. युद्ध में बेतहाशा संसाधन खपते हैं, मगर जंग खत्म होते ही चुनौतियां खत्म नहीं होंगी. फिर खड़े होने का संघर्ष शुरू होगा. कम होती आबादी और घटती जन्मदर के कारण यूक्रेन के आगे एक त्रासद सवाल खड़ा है. जब युद्ध खत्म होगा, तो बची-खुची ताकत समेटकर खड़ा होने और बर्बाद हुए को फिर संवारने के लिए कौन बचेगा?
तस्वीर: Anatolii Stepanov/REUTERS
मोर्चे पर ही नहीं, दूर के शहरों का भी बुरा हाल
युद्ध शुरू हुए चार साल होने ही वाले हैं. मारे गए और घायल हुए लोगों की संख्या लाखों में है. कई लाख यूक्रेनी देश छोड़कर जा चुके हैं. लगभग 5,000 की आबादी वाला होश्चा एक छोटा सा शहर है. सबसे नजदीकी मोर्चे से भी सैकड़ों किलोमीटर दूर, फिर भी यहां आबादी का संकट बहुत गहरा है.
तस्वीर: Thomas Peter/REUTERS
बच्चे नहीं, तो स्कूल क्यों खुलेगा?
नजदीक ही सदोवे नाम का गांव है. यहां के स्कूल में पहले 200 से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे, अब स्कूल बंद हो चुका है. होश्चा टाउन काउंसिल के प्रमुख, मेकोला पानचुक इसकी वजह बताते हैं, "दो साल पहले हमें मजबूर होकर स्कूल बंद करना पड़ा. क्यों? क्योंकि, बस नौ बच्चे ही रह गए थे." (सांकेतिक तस्वीर)
तस्वीर: Hanna Sokolova-Stekh/DW
देश को फिर से खड़ा करने के लिए कितने लोग चाहिए?
एक छोटे से घर, या कमरे को रेनोवेट करना भी कई दिन का काम है. फिर यहां तो समूचे देश को दोबारा तकरीबन दोबारा बनाने का जिम्मा होगा. फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने से पहले यूक्रेन की जनसंख्या करीब 4.2 करोड़ थी.
तस्वीर: Daniel Carde/ZUMA Wire/IMAGO
युद्ध की बर्बादी
युद्ध के इन सालों में आबादी घटकर 3.6 करोड़ से भी कम हो गई है. इनमें उन इलाकों के लोग भी हैं, जिनपर रूस ने कब्जा कर लिया है. ये यूक्रेन की नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज के डेमोग्रैफी इंस्टिट्यूट का आंकड़ा है.
तस्वीर: AP Photo/picture alliance
कम बच्चों का जन्म लेना भविष्य में संकट बढ़ाएगा
औद्योगिक देशों में जब जन्मदर, आबादी की भरपाई के स्तर से नीचे चली जाती है, तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू होती है. यानी, कुल प्रजनन दर (प्रति महिला) लगभग 2.1 बच्चों से नीचे चली जाए.
तस्वीर: Marko Djurica/REUTERS
यूक्रेन में 'रीप्लेसमेंट लेवल' क्या है?
इस आंकड़े को 'रीप्लेसमेंट लेवल' कहते हैं. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी पर बढ़ते हुए किसी आबादी को जाने वाले लोगों की भरपाई के लिए इतनी संख्या में बच्चों की जरूरत पड़ती है. श्पीगल ने एक डेमोग्राफर के हवाले से बताया कि यूक्रेन में यह जन्मदर एक से नीचे चली गई है.
तस्वीर: Jose Colon/Anadolu/picture alliance
बस जन्म ही कम नहीं, मौतों की दर भी बहुत ज्यादा है
'वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू' के मुताबिक, 2020-2025 के बीच दुनिया के जिन 10 देशों में मृत्युदर सबसे ज्यादा पाई गई, उनमें यूक्रेन दूसरे नंबर पर है. प्रति 1,000 लोगों पर यह दर 15.2 है. ऊंची मृत्युदर जनसंख्या संकट को और विकट बना रही है. 2051 तक जनसंख्या कम होकर ढाई करोड़ तक पहुंच सकती है.
तस्वीर: Hanna Sokolova-Stekh/DW
लोगों की जिंदगी छोटी हो रही है
सरकारी आकलन के मुताबिक, यूक्रेन में पुरुषों की औसत जीवन अवधि युद्ध से पहले 65.2 साल थी. साल 2024 तक यह घटकर 57.3 रह गई है. महिलाओं के मामले में आंकड़ा युद्ध से पहले 74.4 था, अब 70.9 रह गया है.
तस्वीर: Anatolii Stepanov/SIPA/picture alliance
कामगारों की भारी कमी होगी
युद्ध के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यूक्रेन को काम करने वाले लाखों हाथों की जरूरत होगी. इतना ही नहीं बल्कि रूस कहीं फिर हमला ना कर दे, इन आशंकाओं के कारण देश की सुरक्षा के लिए भी लोग चाहिए. अनुमान है कि अगले एक दशक में यूक्रेन के पास करीब 45 लाख कामगारों की कमी हो सकती है.
तस्वीर: Evgeniy Maloletka/AP/picture alliance
युद्ध ना होता, तो जिंदगी कितनी अलग हो सकती थी
होश्चा के टाउन हॉल के रास्ते में कई सैनिकों की तस्वीरें हैं. ये वो लोग हैं, जो युद्ध में मारे गए. कई बार कोई तस्वीरों पर फूल चढ़ाता, अपने आंसू पोंछता दिख जाता है. यूक्रेन के पास लड़ने वालों की कमी है. (सांकेतिक तस्वीर)
तस्वीर: Nadine Schmidt
लड़ने की उम्र क्या है?
अनिवार्य सैन्य सेवा की न्यूनतम उम्र 27 थी, जिसे पिछले साल घटाकर 25 कर दिया गया. तब भी कमी बनी हुई है. जंग छिड़ने के बाद 18 से 60 आयुवर्ग के पुरुषों के देश से बाहर जाने पर पाबंदी थी. पिछले अगस्त में यह आयुसीमा बढ़ाकर 22 कर दी गई. अब कई परिवार 18 साल का होने से पहले ही अपने बेटों को देश से बाहर भेज देते हैं.
तस्वीर: DW
खाली गांव, वीरान घर
होश्चा के आसपास बसे गांव खाली हो रहे हैं और वहां रहने वाले होश्चा आ रहे हैं. वजह ये कि उन गांवों में स्कूल, क्लिनिक और जरूरी सेवाएं बंद हो रही हैं. डलबी गांव होश्चा से बस 10 ही किलोमीटर दूर है. वहां बहुत सारे घर अब खाली पड़े हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
तस्वीर: Anatolii Stepanov/REUTERS
लड़ने गए, लौटकर नहीं आए
डलबी की एक निवासी ओकसाना ने बताया कि गांव में 200 से भी कम लोग बचे हैं, और इतने छोटे गांव से भी नौ पुरुष युद्ध में लड़ने गए हैं. इन पुरुषों में एक ओकसाना के पति भी हैं. वह मोर्चे पर गए थे और जुलाई से ही उनकी कोई खबर नहीं. (फाइल फोटो)
तस्वीर: Daniel Carde/ZUMA Wire/IMAGO
भविष्य का डर
अब ओकसाना को डर है कि उनके दो वयस्क हो चुके बेटों को भी सेना में जाना होगा. वह कहती हैं, "अगर उनको भी ले जाया गया, तो? उनके बिना मैं क्या करूंगी?" भविष्य की अनिश्चितता के कारण लोग परिवार शुरू करने से हिचक रहे हैं. वॉर्ड प्रमुख इन्ना अनटोनियुक बताती हैं कि यहां आने वाली करीब एक तिहाई महिलाओं के पति सेना में हैं, उनमें से कुछ मर चुके हैं या लापता हैं.
तस्वीर: Thomas Peter/REUTERS
"आंखों में आंसू थे, जब वह गया"
टाउन काउंसिल की उप-प्रमुख ताबेकोवा आपबीती बताती हैं, "जब मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं, उसके कुछ ही दिन बाद मेरे पति को सेना में भेज दिया गया. बच्चे के जन्म पर घर आने की छुट्टी दी गई. जब वो गए, तो उनकी आंखों में आंसू थे."
तस्वीर: Thomas Peter/REUTERS
बच्चे बनेंगे भविष्य की उम्मीद!
ताबेकोवा का मानना है कि बच्चे भविष्य की उम्मीद दे सकते हैं. वह बताती हैं, "मैं कई पत्नियों को जानती हूं, जिनके पति लड़ रहे हैं. कई महिलाओं को जानती हूं, जिनके पति अब दुर्भाग्य से हमारे साथ नहीं. उनमें से कुछ के लिए उनके बच्चे खुशी का एक पल हैं, उम्मीद ना हारने की एक वजह हैं." तस्वीर में नजर आ रही हैं होश्चा जनरल हॉस्पिटल के मैटरनिटी वॉर्ड की प्रमुख डॉक्टर इन्ना अंतोनियुक.
तस्वीर: Thomas Peter/REUTERS
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अबू धाबी में होने वाली बैठकों को लेकर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह वार्ता "संवाद को बढ़ावा देने और संकट के राजनीतिक समाधान तलाशने” के प्रयासों का हिस्सा है. व्हाइट हाउस ने शुक्रवार के पहले दिन की बातचीत को सकारात्मक बताया. यह बातचीत एक ऐसा पहला मौका है जब ट्रंप सरकार के अधिकारी यूक्रेन और रूस, दोनों के साथ बैठकों में शामिल हुए हैं. ऐसा महीनों बाद है जब दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत हुई है.
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बातचीत के वक्त हमले
इन कूटनीतिक प्रयासों के बीच, यूक्रेन ने कहा कि शुक्रवार को रात भर हुए रूसी हमले हाल के हफ्तों में सबसे भारी हमलों में शामिल थे. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को टेलीग्राम पर कहा, "रूस ने रात के दौरान हमारे क्षेत्रों पर बड़ा हमला किया और 370 लड़ाकू ड्रोन व अलग-अलग प्रकार की 21 मिसाइलें दागीं.”
जेलेंस्की ने कहा कि ऊर्जा ढांचे पर ऐसे हमले यह साबित करते हैं कि वायु रक्षा प्रणालियों की सप्लाई में कोई देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "इन हमलों पर आंख नहीं मूंदी जा सकती.”
कीव और आसपास के इलाकों के अलावा खारकीव, सूमी और चेरनिहिव क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया, जो रूस की सीमा के करीब हैं. जेलेंस्की ने एक व्यक्ति की मौत के साथ-साथ दर्जनों लोगों के घायल होने और ऊर्जा आपूर्ति ढांचे को भारी नुकसान की जानकारी दी.
स्थानीय अधिकारियों ने रात में हमलों और नुकसान की रिपोर्ट पहले ही दी थी. यूक्रेनी वायु सेना और द कीव इंडिपेंडेंट अखबार ने आधी रात के तुरंत बाद कहा कि शहर पर भारी हमला हो रहा है. अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन और मिसाइलों ने कई जिलों को निशाना बनाया.
कौन छोड़ेगा डोनबास, पुतिन या जेलेंस्की?
03:02
रूस की सीमा के नजदीक स्थित खारकीव शहर के मेयर इहोर तेरेखोव ने कहा कि कम से कम 19 लोग घायल हुए. कई अस्पतालों और रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा, जबकि कुछ लोग मलबे के नीचे फंस गए. खारकीव क्षेत्र के गवर्नर ओलेह सिनियेहुबोव ने कहा कि घायलों में एक गर्भवती महिला और एक बच्चा भी शामिल है.
ताजा हमलों के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रे सिबिहा ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन पर तीखा हमला बोला. सिबिहा ने एक्स पर लिखा, "विडंबना यह है कि पुतिन ने यूक्रेन पर एक क्रूर, बड़ा मिसाइल हमला ठीक उसी वक्त करने का आदेश दिया जब प्रतिनिधिमंडल अबू धाबी में अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मिल रहे हैं.” उन्होंने कहा, "उनकी मिसाइलों ने सिर्फ हमारे लोगों को नहीं, बल्कि बातचीत की मेज को भी निशाना बनाया.”
पिछले कुछ दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं और स्विट्जरलैंड से लेकर क्रेमलिन तक बातचीत और मुलाकातें हुई हैं. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं. वोलोदिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि संभावित शांति समझौता "लगभग तैयार” है, लेकिन कुछ संवेदनशील अड़चनें अब भी हल नहीं हुई हैं.