अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने इस बात की पुष्टि की है कि उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का ही परीक्षण किया. इस परीक्षण से क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ गया है.
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टिलरसन ने एक बयान जारी कर कहा है, "अमेरिका उत्तर कोरिया के इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा करता है. आईसीबीएम का परीक्षण अमरीका, इलाके में हमारे सहयोगी और दुनिया के लिए खतरे को और बढ़ाएगा."
इस मामले में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बुधवार को बैठक बुलायी जा सकती है. टिलरसन ने ये भी कहा है, "वैश्विक खतरे को रोकने के लिए वैश्विक कार्रवाई जरूरी है. कोई भी देश जो उत्तर कोरियाई कामगारों को बुलाता है, उसे आर्थिक या सैन्य सहायता देता है या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पूरी तरह से पालन करने में नाकाम रहता है वह एक खतरनाक सत्ता को मदद और उकसावा दे रहा है."
चीन उत्तर कोरिया का सबसे नजदीकी सहयोगी है. उत्तर कोरिया का यह परीक्षण ऐसे समय में सामने आया जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग मॉस्को के दौरे पर थे. मॉस्को के बाद वे जर्मनी पहुंचे हैं जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर और चांसलर अंगेला मैर्केल से हो रही है. इसके बाद वे शुक्रवार से हैम्बर्ग में हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे.
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के करीब 2000 सैनिकों ने साझा सैन्य अभ्यास किया. अभ्यास इतने व्यापक स्तर पर हुआ कि उत्तर कोरिया का घबराना लाजमी है.
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बॉर्डर कंट्रोल
उत्तर कोरिया की सीमा से सटे इलाके में अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने लाइव फायर ड्रिल की. अभ्यास के दौरान बिल्कुल युद्ध जैसे हालात पैदा किये गए.
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नकली लक्ष्य
पोचेयोन में हुए इस युद्धाभ्यास के दौरान एक्स्ट्रा कैलिबर फुली ऑटोमैटिक मशीनगनों और रॉकेट लॉन्चरों से नकली लक्ष्यों को निशाना बनाया गया.
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युद्ध के लिए तैयारी
दक्षिण कोरिया के K1A2 टैंकों का भी इस्तेमाल किया गया. युद्ध के दौरान सुरक्षित तरीके से टैंकों के काफिले को आगे बढ़ाने का अभ्यास हुआ. इस दौरान उन्हें सुरक्षा देने के लिए 50 विमानों का भी इस्तेमाल किया गया.
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मिसाइल डिफेंस
अमेरिका अपने अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम (THAAD) को भी दक्षिण कोरिया में तैनात कर रहा है. THAAD सिस्टम मध्यम दूरी की मिसाइल को हवा में इंटरसेप्ट कर नष्ट कर देता है. उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम से निपटने के लिए THAAD सिस्टम लगाया जा रहा है.
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उत्तर कोरिया भी तैयार
सीमा के दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन सबसे बड़ी सैन्य तैयारियों में जुटे हैं. सैन्य स्थापना दिवस के मौके पर उत्तर कोरिया ने कई किस्म के हथियार प्रदर्शित किये और चेतावनी भी दी.
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क्या है मामला
माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण करने की फिराक में है. अगर ऐसा कोई परीक्षण हुआ तो कोरियाई प्रायद्वीप में जारी तनाव और बढ़ सकता है. (रिपोर्ट: नदीन बेर्गहाउजन/ओएसजे)
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उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के परीक्षण पर ट्वीट कर वहां के नेता किम जोंग उन पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा है कि क्या इस आदमी के पास और कुछ करने को नहीं है. साथ ही उन्होंने चीन से उत्तर कोरिया पर और दबाव डालने को कहा है ताकि यह पूरा विवाद हमेशा के लिए खत्म हो सके.
अमेरिकी सेना ने शुरुआती आकलन में उत्तर कोरिया के परीक्षण को इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइल माना था. बाद में इसके दो चरणों वाली आईबीएम होने की पुष्टि की गई. आईसीबीएम का परीक्षण उत्तर कोरिया के लिए एक बड़ी कामयाबी का संकेत है लेकिन इसके साथ ही इसकी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगियों में तनाव बढ़ने की आशंका है. इस बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैनिकों ने सटीकता के साथ निशाना लगाने वाली मिसाइलों का अभ्यास किया जिनमें आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम और ह्यूनमू मिसाइल-द्वितीय को शामिल किया गया.
सालों तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय उत्तर कोरिया की सैन्य शक्ति को कम करके आंकता रहा. आईसीबीएम का परीक्षण कर उत्तर कोरिया ने जता दिया है कि उसकी क्षमता ताकतवर देशों के अनुमान से कहीं ज्यादा है.
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आईसीबीएम दूसरी बार
उत्तर कोरिया के सरकारी टीवी पर प्रसारित एक बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया ने एक नयी तरह की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का परीक्षण किया है जिसका नाम ह्वासोंग-15 है. उत्तर कोरिया का दावा है कि वह अमेरिका के किसी भी हिस्से में मार कर सकता है.
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बड़ी कामयाबी
इस साल जुलाई में उत्तर कोरिया ने पहली बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम का परीक्षण किया. अमेरिका ने भी इसकी पुष्टि की. आईसीबीएम का परीक्षण उत्तर कोरिया के लिए बड़ी कामयाबी है. इसका एक मतलब ये भी है कि इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ उत्तर कोरिया का तनाव बढ़ेगा खासतौर से जापान और दक्षिण कोरिया के साथ.
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आईसीबीएम का दम
रक्षा मामलों के जानकार कह रहे हैं कि उत्तर कोरिया ने जिस आइसीबीएम का परीक्षण किया है वो अलास्का और हवाई द्वीप तक जा सकता है. हालांकि ये सवाल अब भी है कि क्या उत्तर कोरिया परमाणु ताकत से लैस आईसीबीएम को तैनात कर सकता है. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने यह जरूर कहा है कि जिस आईसीबीएम का परीक्षण किया गया वह "भारी और विशाल परमाणु हथियार" ले जाने में सक्षम है.
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उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण
आईसीबीएम को उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की दिशा में बढ़ा एक और कदम कहा जा रहा है. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण के साथ ही उत्तर कोरिया ने पांच बार परमाणु परीक्षण किये हैं. 2016 में ही दो बार परमाणु परीक्षण हुआ. उत्तर कोरिया का दावा है कि आखिरी बार जिसका परीक्षण हुआ उसे रॉकेट से जोड़ा जा सकता है.
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सेना की ताकत
तकरीबन सात लाख लोगों के सक्रिय दल के अतिरिक्त इसके पास 45 लाख लोगों की रिजर्व फोर्स भी है. इसके अलावा शासन कभी भी इसकी एक तिहाई आबादी को सेना में सेवाएं देने के लिये बुला सकती है. देश के हर पुरूष के लिए किसी न किसी तरह का सैन्य प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है और उन्हें किसी भी वक्त बुलाया जा सकता है.
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हथियारों का भंडार
साल 2016 के ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के मुताबिक उत्तर कोरिया के पास शस्त्रों की कोई कमी नहीं है. इसके भंडार में 76 पनडुब्बी, 458 फाइटर एयरक्राफ्ट और 5025 लड़ाकू विमान और 50 लाख से अधिक सेना अधिकारी हैं. साल 2013 की इस तस्वीर में कोरियाई नेता किम जोंग उन रणनीतिक बलों को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ तैयार रहने के आदेश देते हुये नजर आ रहे हैं.
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शक्तिप्रदर्शन में नहीं पीछे
हर साल राजधानी प्योंगयांग में होने वाली सैन्य परेड में सैकड़ों-हजारों की संख्या में सैनिक और आम नागरिक हिस्सा लेते हैं. इस परेड या अन्य किसी ऐसी रैली की तैयारी महीनों पहले शुरू कर दी जाती है. आमतौर पर ये परेड किम जोंग उन के परिवार या पार्टी के किसी सदस्य की सालगिरह के मौके पर होती है.
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नहीं किसी की परवाह
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दवाब और विरोध के बावजूद प्योंगयांग ने कभी परमाणु हथियारों को लेकर अपनी मंशाओं और महत्वाकांक्षाओं को नहीं छुपाया. बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण के अलावा उत्तर कोरिया ने पांच बार परमाणु परीक्षण भी किया है. इनमें से दो परीक्षण 2016 में किये. उत्तर कोरिया का दावा है कि उसने जिस आखिरी मिसाइल का परीक्षण किया है उसे रॉकेट के जरिये भी दागा जा सकता है.
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दुश्मन बना जमाना
अमेरिका और उत्तर कोरिया की शत्रुता किसी से नहीं छिपी. लेकिन पड़ोस में भी इसके शत्रु कुछ कम नहीं. प्योंगयांग अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया और जापान को भी अपना बड़ा दुश्मन मानता है. उत्तर कोरियाई शासन इस क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य अभ्यास को उसके खिलाफ एक साजिश बताता है. इसका दावा है कि अमेरिका, उत्तर कोरिया को निशाना बनाना चाहता है.
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धीरज खोता अमेरिका
अमेरिका ने भी अपने कार्ल विल्सन विमान वाहक पोत को कोरियाई प्रायद्वीप में भेज कर संदेश दे दिया है कि वह उत्तर कोरिया के प्रति सावधानी बरत रहा है. जवाब में उत्तर कोरिया ने कहा कि वह अमेरिका के किसी भी तरह के हमले का जवाब देने को तैयार है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक उत्तर कोरिया अगले दो सालों में अमेरिका पर हमला करने की हालत में हो सकता है.
एए/आरपी
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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन यूं तो उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का समर्थन करते हैं लेकिन उस पर दबाव बनाने के लिए प्रतिबंध लगाने की वकालत भी करते हैं. उनका कहना है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने होंगे, सिर्फ "बयान जारी कर देने भर से काम नहीं चलेगा".
वहीं दक्षिण कोरिया में कम्बाइंड फोर्सेस के कमांडर अमेरिकी जनरल विंसेंट ब्रूक्स ने कहा कि साझा तौर पर सैन्य अभ्यास से पता चलता है कि "हमारे गठबंधन के राष्ट्रीय नेताओं की तरफ से आदेश मिलने पर हम अपनी पसंद बदलने में सक्षम हैं." उन्होंने कहा, "आत्मसंयम, जो हमारी पसंद है, वहीं युद्धविराम और युद्ध को एक दूसरे से अलग करते हैं."