अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किरबी ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की एकता और अखंडता का समर्थन करता है. जॉन किरबी से पूछा गया कि “बलूचिस्तान पर अमेरिका का क्या रुख है?”
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अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, “सरकार की नीति ये है कि हम पाकिस्तान की एकता और अखंडता का समर्थन करते हैं और बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन नहीं करते हैं.” वो बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों और वहां आजादी के लिए उठ रही आवाजों से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे.
भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तानी कश्मीर, गिलगित बल्तिस्तान और बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया था. मोदी ने कहा कि बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने के लिए उन्हें वहां के लोगों ने उन्हें धन्यवाद दिया है. क्षेत्रफल के हिसाब से बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और वहां भरपूर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन हैं. लेकिन इस प्रांत के लोग अपने साथ भेदभाव होने का आरोप लगाते हैं.
मोदी ने लाल किले से उठाया बलूचिस्तान का मुद्दातस्वीर: picture-alliance/dpa/EPA/H. Tyagi
बलूचिस्तान में कई अलगाववादी समूह सक्रिय है जबकि कई अलगगावादी विदेशों से बलूचिस्तान के आजादी के लिए आवाज उठा रहे हैं. पाकिस्तान अकसर भारत को बलूचिस्तान के हालात के लिए जिम्मेदार ठहराता है और उस पर बलोच अलगगावादियों को आर्थिक और हथियारों की मदद देने का आरोप भी लगाता है. भारत इन आरोपों से इनकार करता है. लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि मोदी के भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाए जाने के इसकी पुष्टि होती है.
चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना का भी बलूचिस्तान में विरोध हो रहा है. इस परियोजना के तहत चीन के शिनचियागं प्रांत को बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से छोड़ा जाएगा. 45 अरब डॉलर से भी ज्यादा लागत वाली इस परियोजना को पाकिस्तान अपने लिए गेम चेंजर मान रहा है, लेकिन बलूचिस्तान में अशांति को देखते हुए इसकी सुरक्षा पर सवाल हैं.
भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी शांति वार्ता की कोशिशें होती हैं, तभी कुछ ऐसा होता है कि माहौल बिगड़ जाता है. एक नजर उन घटनाओं पर जिन्होंने दोनों देशों को बार बार बातचीत की मेज से युद्ध के उन्माद तक पहुंचाया.
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कारगिल युद्ध
अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ की अगुवाई में भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती नए मुकाम पर थी. बसें चल रही थीं, आम लोग आसानी से इधर उधर आ रहे थे. तभी मई 1999 में भारत प्रशासित कश्मीर की चोटियों पर पाकिस्तानी सैनिकों का कब्जा हुआ. इसके बाद नवाज शरीफ का तख्तापलट हुआ और कारगिल के मास्टरमाइंड जनरल परवेज मुशर्रफ सत्ता में आए.
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आगरा सम्मेलन
जून 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की आगरा में शिखर बैठक हुई. माना जाता है कि दोनों नेता कश्मीर विवाद को हल करने के काफी करीब पहुंच चुके थे. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि एक झटके में सारी वार्ता विफल हो गई. इसे ऐतिहासिक चूक कहा जा सकता है.
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संसद पर हमला
13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला हुआ. हमले में छह पुलिसकर्मी, दो सुरक्षाकर्मी, एक बागवान और पांच आतंकवादी मारे गए. इस हमले के बाद भारतीय सेनाएं पाकिस्तान सीमा पर तैनात कर दी गई. पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड रोक दी गई. अमेरिका के दखल से युद्ध टला.
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समझौता एक्सप्रेस
भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती की प्रतीक बनी रेल सेवा भी आतंकवादी हमले का शिकार बनी. फरवरी 2007 में दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में धमाके हुए. 68 लोगों की मौत हुई. पाकिस्तान का आरोप है कि धमाके हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों ने किए.
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हमलों की बाढ़
2008 में भारत के कई शहरों में आतंकवादी हमलों की बाढ़ सी आई. रामपुर, जयपुर, अहमदाबाद, बेंगलुरू, दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत में कई हमले हुए. तत्कालीन यूपीए सरकार लाचार सी दिखने लगी. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उपजने लगा.
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मुंबई हमले
और 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले ने नई दिल्ली के सब्र का बांध तोड़ दिया. विदेशी एजेंसियों की मदद से बहुत जल्दी यह साफ हो गया कि आतंकी हमले के दौरान कराची से निर्देश ले रहे हैं. तब से अब तक नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शांति वार्ता पुराने रूप में बहाल नहीं हो सकी है.
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पास आकर दूर हुए
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच एक बार शांति वार्ता की कोशिशें शुरू हुई. शुरुआत सकारात्मक हुई लेकिन कश्मीरी अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात के बाद वार्ता की कोशिशें फीकी पड़ने लगी. जम्मू कश्मीर में सरहद पर दोनों देशों के बीच समय समय पर गोली बारी होने लगी.
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गुरदासपुर और ऊधमपुर हमला
जुलाई 2015 में पंजाब के गुरुदासपुर में हुए आतंकवादी हमले और उसके हफ्ते भर बाद जम्मू के ऊधमपुर में भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले हुए. हमलों में आतंकवादियों से ज्यादा सुरक्षाबल के जवान मारे गए. इन हमलों का असर भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में होने वाली बातचीत पर पड़ना तय है.
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बारूद का ढेर
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल इस्लामाबाद जाकर पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने वाले हैं. भारत का मानना है कि पाकिस्तान भारत पर हमलों के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल कर रहा है. भारतीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान भारत के सब्र का इम्तिहान ले रहा है.