पहली बार जीबीयू-43 बम का इस्तेमाल किया गया है जिसे "मदर ऑफ ऑल बम" भी कहा जाता है. अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सेना ने एक बयान में कहा है कि नंगरहार प्रांत में गुरुवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम 7.32 बजे सुरंगों वाले एक परिसर पर इस बम को गिराया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस अभियान को "बहुत बहुत सफल" बताया है. पेंटागन ने बताया कि यह पहला मौका है जब जीबीयू-43 बी/मैसिव ऑर्डेनेंस एयर ब्लास्ट बम को कहीं गिराया गया है. जीपीएस निर्देशित इस बम में 11 टन विस्फोटक है.
यह बम पूर्वी अफगान नंगरहार प्रांत के आचिन जिले में गिरा. यह इलाका पाकिस्तान सीमा के बहुत करीब है. जिले के गवर्नर इस्माइल शिनवारी ने बताया कि बम मोमांड डेरा इलाके में गिरा. उनके मुताबिक, "मैंने आज तक इतना बड़ा धमाका नहीं देखा. पूरा इलाका ऊंची ऊंची लपटों में घिरा था."
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कड़े प्रतिबंध के बावजूद कुछ देशों पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने के आरोप लगते हैं. आखिर कौन से हैं ये घातक रासायनिक हथियार.
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VX
VX बेहद जहरीला रासायनिक मिश्रण है. ऑर्गनोफॉस्फेट क्लास का यह कंपाउंड रंगहीन और गंधहीन द्रव होता है. यह सीधा इंसान के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है. इसका असर सेकेंडों के भीतर होता है. इसकी छोटी सी डोज भी जान लेने के लिये काफी है. VX के शिकार इंसान दम घुटने या हृदय नाकाम होने से मारे जाते हैं.
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सारीन
सारीन बेहद विषैला रसायन है. इसकी एक बूंद भी एक व्यस्क इंसान को तुरंत मार सकती है. VX की तरह सारीन भी तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है. सारीन के संपर्क में आने वाले की मांसपेशियां नाकाम हो जाती है और आखिरकार मौत हो जाती है.
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मस्टर्ड गैस
इसका असर धीमा लेकिन घातक होता है. मस्टर्ड गैस आंखों, श्वसन तंत्र, त्वचा और कोशिकाओं पर हमला करती है. पहली बार त्वचा से इसका संपर्क होने पर ऐसा लगता है जैसे जला हो. लेकिन कुछ देर बाद बेहद तेज दर्द होने लगता है. यह गैस इंसान को अंधा भी कर सकती है.
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फॉसजेन
फॉसजेन को अब तक के सबसे घातक रासायनिक हथियारों में गिना जाता है. प्लास्टिक और कीटनाशक बनाने में इस्तेमाल होने वाली फॉसजेन गैस रंगहीन होती है. फॉसजेन से संपर्क में आते ही इंसान की सांस फूल जाती है, कफ बनने लगता है, नाक बहने लगती है.
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क्लोरीन
क्लोरीन का इस्तेमाल आम तौर पर सफाई, कीटनाशक बनाने, रबर बनाने या फिर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है. लेकिन अगर क्लोरीन को ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो ये जानलेवा साबित होती है. यह गैस सीधे फेफड़ों पर हमला करती है और जान लेकर ही छोड़ती है.
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हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस बम के कारण कितना नुकसान हुआ है. अमेरिकी सेना हालात का जायजा ले रही है. शिनवारी का कहना है कि इस धमाके के कारण बहुत से लोगों की जानें गयी होंगी. उनके मुताबिक, "अभी तक हमें हताहत होने वाले लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन चूंकि यह दाएश (आईएस) का गढ़ है तो हम समझते हैं कि दाएश के बहुत से लड़ाके मारे गए होंगे."
अफगानिस्तान में आईएस के लड़ाकों की संख्या 600 से 800 बतायी जाती है, जो मुख्यतः नंगरहार प्रांत में ही मौजूद हैं. आईएस के अलावा अमेरिकी सेना अफगान सरकार के साथ मिलकर तालिबान से भी लोहा ले रही है.
एके/आरपी (एएफपी,एपी,डीपीए)
कई देश एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में वार करने वाली मिसाइल बनाना चाहते हैं. एक नजर सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों पर.
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R-36M (16,000 किलोमीटर)
रूस की R-36M दुनिया की सबसे लंबी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल है. 8.8 टन वजन वाली यह सबसे भारी मिसाइल भी है. एक से छह मॉडलों वाली इस मिसाइल की क्रूजिंग स्पीड 28,440 किलोमीटर प्रति घंटा है.
चीन की इस इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल को नाटो CSS-4 भी कहता है. इस मिसाइल की जद में अमेरिका भी आता है. मिसाइल छह रि-एंट्री व्हिकल भी ढो सकती है.
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R-29RMU सिनेवा (11,547 किमी)
यह रूस की तीसरी पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है. 2007 में सेना में शामिल यह मिसाइल 2030 तक इस्तेमाल की जा सकेगी. इसे बेहद सटीक मिसाइल भी माना जाता है.
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UGM-133 ट्राइटेंड (11,300 किमी)
UGM-133 ट्राइटेंड अमेरिकी मिसाइल है. इसे पनडुब्बी से छोड़ा जाता है. माना जाता है कि ये मिसाइलें 2042 तक सैन्य सेवा में रहेंगी. यह एक साथ आठ परमाणु बम ले जा सकती है. यह मिसाइल करीब 21,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर सकती है.
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डॉन्गफेंग 31A (11,200 किमी)
1,000 किलोग्राम वजनी थर्मल न्यूक्लियर बम को ढोने वाली यह चीनी मिसाइल 2006 में सेना में शामिल की गई. पनडुब्बी से लॉन्च करने के लिए इसे एक वर्जन जुलांग-2 भी बनाया गया.
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RT-2UTTKh टोपोल-M, (11,000 किमी)
यह रूसी मिसाइल टोपोल आईसीबीएम की एडवांस वर्जन है. यह बैलेस्टिक मिसाइल परमाणु विकिरण और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स के दौरान भी काम कर सकती है. इसकी अधिकतम क्रूजिंग स्पीड 26.280 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जाती है.
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मिनटमैन-3 (10,000 किमी)
यह मिसाइल जून 1970 से अमेरिकी सेना में शामिल है. एक साथ कई हथियार ले जाने और फिर से धरती की कक्षा में दाखिल होने की क्षमता वाली यह दुनिया की पहली इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल है. इसकी क्रूजिंग स्पीड 24,140 किमी प्रति घंटा बतायी जाती है.
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M51 ICBM, (10,000 किमी)
2010 में फ्रांसीसी सेना में शामिल की गई यह मिसाइल पनडुब्बी से छोड़ी जाती है. यह भी धरती की कक्षा में वापस लौटकर छह अलग अलग जगहों पर हमला कर सकती है.
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UR-100N (10,000 किमी)
रूस की यह मिसाइल बहुत ही पुरानी है. तत्कालीन सोवियत संघ ने यह मिसाइल शीतयुद्ध के दौरान 1975 में सेना में शामिल की. इसकी भार ढोने की क्षमता बहुत ज्यादा है.
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RSM-56 बुलावा (10,000 किलोमीटर)
रूसी नौसेना ने इस मिसाइल को परमाणु पनडुब्बी पर तैनात किया है. यह मिसाइल 500 मीटर दूर हुए परमाणु हमले में भी सुरक्षित रह सकती है.