ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने विमानवाही युद्धपोत समेत बड़ा सैन्य बेड़ा ईरान के लिए भेज दिया है. ब्रिटेन ने भी वहां कतर के साथ अपने लड़ाकू विमानों का दस्ता तैनात कर दिया है.
तस्वीर: Canadian Armed Forces/ZUMA/picture alliance
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गुरुवार को दावोस से वापस अमेरिका लौटते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने एयरफोर्स वन विमान में अमेरिकी सेना के ताजा मूवमेंट का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना का बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ रहा है.
इसके बाद गोपनीयता की शर्त पर अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने भी समाचार एजेंसी एपी से कहा, यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाही युद्धपोत अपने बेड़े के साथ हिंद महासागर में पहुंच चुका है. उसके साथ कई और युद्धपोत भी हैं.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने भी शुक्रवार को एक बयान में कहा कि कतर के साथ उसके यूरोफाइटर टायफून लड़ाकू विमानों के दस्ते, "स्थानीय तनाव को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से (फारस) खाड़ी में तैनात कर दिए गए हैं. "
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तनाव के बीच इस्राएल को ईरान की चेतावनी
शुक्रवार को ईरान ने अपने अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के सम्मान में "द डे ऑफ द गार्डियन" मनाया. इस सैन्य आयोजन के दौरान ईरान ने हमले के लिए तैयार ड्रोन और शाहिद मिसाइलें दिखाईं. टेलिविजन पर प्रसारित किए गए आयोजन के दौरान सर्जिकल मास्क और सनग्लासेस पहने एक शख्स ने हिब्रू भाषा में इस्राएल को चेतावनी देते हुए कहा, "हम सोच से भी ज्यादा तुम्हारे करीब हैं."
जून 2025 में 12 दिन के इस्राएल-ईरान युद्ध और फिर ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी के बाद, अब फिर से मध्य पूर्व में हालात बेहद नाजुक हैं.
13 जून शुक्रवार, सुबह ईरान पर इस्राएल ने हमला किया. हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत हुई है साथ ही परमाणु केंद्रों और हथियार बनाने वाली जगहों को निशाना बनाया गया है.
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शुक्रवार की सुबह हुआ हमला
इस्राएल ने लड़ाकू विमानों और मिसाइलों से ईरान पर हमला बोला. 1980 में इराक के साथ युद्ध के बाद ईरान पर यह सबसे बड़ा हमला है. अब तक मिली खबरों के मुताबिक, इस्राएल के 200 लड़ाकू जहाजों ने इस हमले में हिस्सा लिया और ईरान के 100 ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इस्राएल का कहना है कि यह हमले जारी रहेंगे.
ईरान के विदेश मंत्री ने इसे देश के खिलाफ 'युद्ध का आगाज' कहा है. ईरान सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खामेनेई ने इस्राएल को "कड़ी सजा" देने की बात कही है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेचेश्कियान ने टीवी पर प्रसारित संदेश में कहा है कि उनका देश इस्राएल के खिलाफ "कठोर कार्रवाई" करेगा. ईरान और इराक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले पर तुरंत चर्चा की मांग भी की है.
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ईरान का ड्रोन हमला
इस्राएल का कहना है कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में करीब 100 ड्रोनों से हमला किया है लेकिन इस्राएली सुरक्षा तंत्र ने लगभग सभी ड्रोनों को बीच रास्ते में ही खत्म कर दिया. इस्राएल ने और हमलों की आशंका जताई है और लोगों से अपने घरों में ही रहने को कहा है.
तस्वीर: Daraa Province Telegram Account/AFP
परमाणु केंद्र को नुकसान
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने एक बयान में कहा है कि नतांज के नाभिकीय संवर्धन केंद्र को कुछ इस्राएली हमले में कुछ नुकसान पहुंचा है. हालांकि इसके नतीजे में किसी रासायनिक या फिर रेडियोधर्मी रिसाव की खबर नहीं है. इस्राएल का कहना है कि उसने ईरान के मिसाइल तंत्र को निशाना बनाया है.
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सैन्य अधिकारियों की मौत
ईरान की सशस्त्र सेना के शीर्ष कमांडर और रेवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडर की मौत के अलावा सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खमेनेई के वरिष्ठ सलाहकार इसमें घायल हुए हैं. ईरान में मारे गए अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है. जनरल अब्दुलरहीम मुसावी सशस्त्र सेना के नए प्रमुख होंगे जबकि मोहम्मद पाकपुर को रेवॉल्यूशनरी गार्ड का कमांडर बनाया गया है.
तस्वीर: Iranian Army Office/picture alliance
तस्करी से ले जाए गए हथियार
इस्राएली अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने हमले से पहले ही ईरान में तस्करी के जरिए हथियार पहुंचा दिए थे. इस्राएल के मुताबिक इन हथियारों का इस्तेमाल सुरक्षा ठिकानों और मिसाइलों की तैनाती वाली जगहों को निशाना बनाने में किया गया है.
हमले के बाद ईरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन भी दिखाई पड़ा. लोग सैन्य प्रमुख जनरल मोहम्मद बाघेरी की मौत पर विरोध जता रहे थे. इस्राएली हमले में जिन अधिकारियों की मौत हुई है उनमें रेवॉल्यूशनरी गार्ड के मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख अमीर अली हाजीजादेह भी शामिल हैं. इस्राएल का कहना है कि हाजीजादेह ने कई मौकों पर इस्राएल को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी.
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ प्रस्ताव
गुरुवार को 20वर्षों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान के खिलाप प्रस्ताव पारित किया. एजेंसी के निदेशकों की बोर्ड का कहना है कि ईरान निरीक्षकों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है. 35 सदस्यों वाले बोर्ड में 19 सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया. इसके तुरंत बाद ईरान ने तीसरा नाभिकीय संवर्धन केंद्र बनाने की घोषणा की.
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अल अक्सा मस्जिद बंद
यरुशलम की अल अक्सा मस्जिद को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है. इस्राएली पुलिस ने फिलहाल वहां सिर्फ गार्ड और मस्जिद के कर्मचारियों को जाने की अनुमति दी है. अल अक्सा मस्जिद मुसलमानों के लिए तीसरी सबसे पवित्र जगह है. यहां अजान होगी लेकिन फिलहाल आमलोग नमाज नहीं पढ़ सकेंगे.
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इस्राएल में सन्नाटा
यरुशलम की ओल्ड सिटी में सन्नाटा पसरा है. लोगों से कहा गया है कि वह सिर्फ बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें. ज्यादा लोगों की भीड़ जुटाने पर रोक लगा दी गई है. उधर ईरान में लोग गाड़ियों में तेल भरवा रहे हैं और अपने घरों में ही सिमटे हुए हैं.
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ट्रंप ने कहा "शानदार हमला"
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर इस्राएली हमले को शानदार कहा और यह भी कि अभी और हमले होंगे. शुक्रवार सुबह अमेरिकी चैनल एबीसी से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "मेरा ख्याल है कि वह शानदार था. हमने उन्हें मौका दिया लेकिन उन्होंने उसे नहीं लिया." ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान के सामने दूसरा मौका है वह समझौता कर ले.
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रिहायशी इमारतों को नुकसान
इस्राएल के हमले में तेहरान की कई रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है. मीडिया में आई तस्वीरों में कई जगहों पर हमले में ध्वस्त हुई इमारतें दिख रही हैं. घायलों के बारे में पक्के तौर पर जानकारी नहीं मिली है लेकिन अपुष्ट खबरों में 90 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात कही गई है.
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तेल की कीमतों में तेजी
ईरान पर इस्राएली हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है. हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में यह तेजी तात्कालिक रहने की उम्मीद है. अगर यह युद्ध तेलों की ढुलाई पर असर नहीं डालता तो कीमतें नीचे आ जाएंगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत शुक्रवार को करीब 7.8 फीसदी बढ़ कर 74.89 डॉलर प्रति बैरल हो गई.
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मध्यपूर्व में एयर स्पेस बंद
इन हमलों के बाद जॉर्डन, इराक, इस्राएल और ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. एयर इंडिया की यूरोप और अमेरिका जाने वाले कम से कम 16 उड़ानों पर इसका असर हुआ है. कुछ उड़ानें वापस भारत ले जाई गईं तो कुछ का रास्ता बदला गया है. इलाके में ऑपरेट करने वाली ज्यादातर एयरलाइनों के उड़ान पर असर पड़ा है.
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ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के बाद तनाव
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई के आदेश पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ही हाल के सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बर्बरता से कुचला. अमेरिका स्थित मानवाधिकार एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी का आरोप है कि देशव्यापी दमन में कम से कम 5002 लोग मारे जा चुके हैं. इनमें 4,716 प्रदर्शनकारी हैं और 203 सरकार से जुड़े लोग. देश भर में दो हफ्ते से भी ज्यादा समय से इंटरनेट बंद है. आशंकाएं हैं कि मृतकों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है. मानवाधिकार एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी का दावा है कि ईरान में अब भी 26,800 से ज्यादा लोगों को हिरासत में रखा गया है.
ईरान की सरकार ने बुधवार को पहली बार दंगों में मारे गए लोगों के बारे में जानकारी दी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद से अब तक 3,117 लोग मारे जा चुके हैं. इनमें प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. ईरान ने 8 जनवरी से इंटरनेट बंद कर रखा है. इस वजह से भी स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से मृतकों की संख्या का सही पता नहीं लग पा रहा है.
इस बीच शुक्रवार को ईरान के उच्च अधिकारियों ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि उनके दखल से ईरान ने 800 लोगों को मारने का फैसला रद्द कर दिया. ईरान सरकार का आरोप है कि उनके देश में ये उग्र प्रदर्शन दुश्मनों के इशारे पर हो रहे हैं. 8 और 9 जनवरी को ईरान के कई बड़े शहरों में हुए प्रदर्शनों के चंद दिन बाद ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि ईरान के दुश्मनों ने "आतंकियों को भीतर पहुंचा दिया है, जो मस्जिदों में आग लगाते हैं, बैंकों और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमला करते हैं."
वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई ने उनका जीना मुहाल कर दिया है और इसीलिए वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं. प्रदर्शनों से पहले ही अगस्त 2025 में ईरान में एक रोटी का दाम 40 से 50 फीसदी बढ़ चुका था. यह बात खुद सरकारी आंकड़ों में कही गई थी.
तेहरान में 9 जनवरी को हुए प्रदर्शन की एक तस्वीरतस्वीर: UGC
ईरान पर हमले की बढ़ती संभावनाएं
डॉनल्ड ट्रंप, पहले ही ईरान को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और बड़े पैमाने पर मृत्युदंड न देने चेतावनी दे चुके हैं. इन चेतावनियों के बाद ही ईरान में हजारों लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के आस पास पहुंच रहा अमेरिकी सैन्य बेड़ा, राष्ट्रपति ट्रंप को तेहरान पर हमला करने की संभावनाएं दे रहा है. ट्रंप अब तक तेहरान को चेतावनी ही देते आ रहे हैं और तेहरान पर इसका बहुत असर नहीं दिखाई दिया है.
न्यूयॉर्क स्थित थिंकटैंक सौफान सेंटर के एक समीक्षक कहते हैं, "लगने लगा था कि राष्ट्रपति ट्रंप पैर पीछे खींच रहे हैं, लेकिन स्थानीय नेता और जानकार, उन पर दबाव डाल रहे हैं कि हवाई हमले ईरानी सत्ता को बर्बाद करने के लिए काफी होंगे. इलाके में बढ़ती सैन्य गतिविधियां इशारा कर रही हैं कि एक तेज धारदार कार्रवाई हो सकती है."
ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के बी-2 बॉम्बर विमानों के हमले के बाद दुनिया भर के देशों ने क्या कहा.
तस्वीर: Yasin Akgul/AFP
तुर्की
नाटो के सदस्य तुर्की ने अपने बयान में अमेरिका या वॉशिंगटन शब्द का जिक्र तक नहीं किया. अंकारा में तुर्की विदेश मंत्रालय ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमले पर चिंता जताते हुए कहा कि, "यह क्षेत्रीय विवाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भड़क सकता है."
तस्वीर: Yasin Akgul/AFP
कतर
"कतर का विदेश मंत्रालय चेतावनी देता है कि क्षेत्र में अभी जो खतरनाक तनाव हम देख रहे हैं, वो इस इलाके और दुनिया को त्रासदी भरे नतीजों की तरफ ले जाएगा."
तस्वीर: Alex Brandon/AP/picture alliance
सऊदी अरब
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, "इस संवेदनशील हालातों में हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वे दोगुनी कोशिश कर, इस सकंट को खत्म करने वाले समाधान का नेतृत्व करे, ताकि इलाके में सुरक्षा और स्थिरता का एक नया अध्याय खुल सके."
तस्वीर: Win McNamee/Getty Images
रूस
रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के उपाध्यक्ष दिमित्री मेद्वेदेव के मुताबिक, अमेरिका का यह हमला ईरान में अयातोल्लाह अली खामेनेई की सत्ता को और मजबूत करेगा. मेद्वदेव ने कहा, "जो लोग ईरान के धार्मिक नेतृत्व से सहानुभूति नहीं रखते थे, अब वे भी दूसरे लोगों की तरह उसके साथ जुड़ रहे हैं."
तस्वीर: Ekaterina Shtukina, Sputnik Pool Photo via AP/picture alliance
भारत
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्स पर लिखा, "ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर पेजेश्कियान से बात की. हमने मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की. तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता जताई." मोदी ने शांति और स्थिरता के लिए तनाव घटाने, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों पर भी जोर दिया.
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने अमेरिकी हमलों के बाद रविवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट मीटिंग बुलाई. इस बैठक के बाद जारी किए गए बयान के मुताबिक, "चांसलर मैर्त्स ने ईरान से तुरंत अमेरिका और इस्राएल के साथ वार्ता शुरू करने की अपील की है ताकि इस विवाद का कूटनीतिक हल निकाला जा सके."
तस्वीर: IMAGO/dts Nachrichtenagentur
यूरोपीय संघ
एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री और फिलहाल यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी काया कलास ने एक्स पर लिखा, "हम सभी पक्षों से पीछे हटने, बातचीत की मेज पर लौटने और तनाव घटाने की अपील करते हैं."
तस्वीर: Frederick Florin/AFP/Getty Images
संयुक्त राष्ट्र
यूएन महासचिव अंटोनियो गुटेरेष नेअमेरिकी हमलों को तनाव बढ़ाने वाला एक खतरनाक कदम बताते हुए कहा, "जोखिम भरी इस घड़ी में, ये बहुत ही जरूरी है कि अफरा तफरी को फैलने से रोका जाए. सैन्य हल कोई चीज नहीं होती. आगे का अकेला रास्ता कूटनीतिक ही है."
तस्वीर: Manon Cruz/REUTERS
ब्रिटेन
ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने अमेरिकी हमलों को जायज ठहराते हुए कहा, "ईरान को कभी परमाणु बम बनाने नहीं दिया जा सकता और अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को खत्म कर दिया है." स्टारमर ने ईरान से बातचीत की मेज पर लौटने और इस संकट को खत्म करने के लिए कूटनीतिक समाधान तक पहुंचने की अपील भी की .
तस्वीर: Justin Ng/Avalon/picture alliance
जापान
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने पत्रकारों से कहा, "इस विवाद को जल्द से जल्द ठंडा करना बहुत जरूरी हो चुका है. हम गहरी चिंता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए हैं."