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‘नीले तोते’ ले आए वनतारा को शक के घेरे में

साहिबा खान रॉयटर्स
१९ सितम्बर २०२५

वनतारा को अदालत ने क्लीन चिट तो दे दी लेकिन यूरोप और ब्राजील के अधिकारियों ने कहा है कि वनतारा पर खास नजर रखेंगे.

स्पिक्स मैकॉ तोते
तस्वीर: Patrick Pleul/AP Photo/picture alliance

साल 2019 में द इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने चमकीले नीले रंग के तोतों को विलुप्त घोषित कर दिए था. लेकिन ब्राजील के जंगलों में रहने वाले ये विलुप्त तोते फिर 2023 में भारत में कैसे आ पहुंचे? इसी सवाल ने आज एशिया के सबसे अमीर परिवार, अंबानी को शक के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है. और इस मामले में अब सिर्फ भारत नहीं बल्कि जर्मनी और ब्राजील भी शामिल हो गए हैं.

स्पिक्स मैकॉ तोते क्या होते हैं?

स्पिक्स मैकॉ तोता एक बेहद दुर्लभ और सुंदर पक्षी है. इसका रंग हल्का और गहरा नीला होता है, इसलिए इसे "नीला तोता" भी कहा जाता है. यह तोता दक्षिण अमेरिका के ब्राजील के जंगलों में पाया जाता था.

स्पिक्स मैकॉ अपनी खास प्रणय क्रियाओं और सामाजिक व्यवहार के लिए जाना जाता है. नर और मादा एक-दूसरे के साथ खास तरह के नृत्य जैसे हावभाव करते हैं और जीवनभर के लिए साथ रहते हैं. जानवरों की दुनिया में ऐसा कम ही देखने को मिलता है.

ब्राजील के जंगलों में इनकी संख्या लगातार कम होती गई क्योंकि इनके रहने की जगह नष्ट हो रही थी और इनका शिकार भी किया जाता था. इसी कारण सन 2000 के बाद से ये जंगलों से लगभग गायब हो गए और साल 2019 में इन्हें "जंगलों से विलुप्त” घोषित कर दिया गया.

फिलहाल स्पिक्स मैकॉ तोते सिर्फ संरक्षण केंद्रों और प्रजनन प्रोग्रामों में पाए जाते हैं. इन्हें दोबारा ब्राजील के जंगलों में बसाने की कोशिशें की जा रही हैं. लेकिन अब खबरें हैं कि ऐसे 26 तोते भारत पहुंच गए हैं. और वो भी गुजरात के जामनगर में बने वनतारा नाम के एक विशाल पशु अभयारण्य में.

क्या है वनतारा?

वनतारा  एक विशाल पशु अभयारण्य है जो 3,500 एकड़ में फैला है और इसे मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी चलाते हैं. यह एशिया के सबसे अमीर कारोबारी परिवार अंबानी परिवार की परोपकारी शाखा का हिस्सा है. वहां करीब 2,000 अलग अलग प्रजातियों के जानवर रहते हैं.

एक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि साल 2022 से अब तक वनतारा ने 40 देशों से हजारों दुर्लभ और विदेशी जीव मंगवाए हैं. आंकड़े चौंकाने वाले हैं. यहां हजारों सांप, हजार से अधिक कछुए, 200 से ज्यादा बाघ, सैकड़ों चीते और जिराफ, साथ ही चिंपांजी और गैंडे लाए गए हैं. इनके अलावा गिरगिट, छिपकलियां और कई दुर्लभ पक्षी भी मौजूद हैं. इन सबकी कुल कीमत नौ करोड़ अमेरिकी डॉलर के करीब बताई गई है.

ब्राजील के जंगलों में इनकी संख्या लगातार कम होती गई क्योंकि इनके रहने की जगह नष्ट हो रही थी और इनका शिकार भी किया जाता था.तस्वीर: Patrick Pleul/EPA/picture alliance

वनतारा का कहना है कि ये सौदे किसी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं किए गए. उनके प्रवक्ता ने कहा, "ये जानवरों का व्यावसायिक लेनदेन नहीं है. वनतारा में किसी भी जानवर को लाने के लिए कभी कोई व्यावसायिक भुगतान नहीं किया गया है.”

शक के घेरे में वनतारा

इतनी बड़ी संख्या में विलुप्त और दुर्लभ प्रजातियों का आयात सवाल खड़े करता है. अगस्त 2025 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जांच हो कि वनतारा के ये सौदे भारतीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संधि सीआईटीईएस यानी लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार संबंधी समझौते के नियमों के तहत सही हैं या नहीं. जांच के बाद अदालत ने बताया कि उन्हें इसमें कोई गड़बड़ या कानून का उल्लंघन नजर नहीं आया है. लेकिन यूरोप और ब्राजील के अधिकारी अब भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं.

तोता कैसे कर लेता है आवाज की नकल

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असल विवाद उन्हीं नीले तोतों को लेकर है. ये पक्षी जर्मनी की एक संस्था एसीटीपी से वनतारा पहुंचे. ब्राजील का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना यह स्थानांतरण हुआ. ब्राजील की सरकारी संस्था चिको मेंडेस संस्थान ने साफ कहा, "वनतारा चिड़ियाघर अभी तक स्पिक्स मैकॉ जनसंख्या प्रबंधन कार्यक्रम से नहीं जुड़ा है. यह इस प्रजाति के संरक्षण प्रयास में किसी भी संस्था की आधिकारिक भागीदारी की मूल शर्त है.”

उनका कहना है कि ना तो भारत इस कार्यक्रम का हिस्सा है और ना ही एसीटीपी को ब्राजील ने यह अधिकार दिया कि वह इन तोतों को भारत भेजे. वहीं वनतारा का जवाब है, "तोतों का स्थानांतरण पूरी तरह कानूनी था. यह गैर व्यावसायिक था और एसीटीपी के साथ संरक्षण प्रजनन व्यवस्था के तहत किया गया था.”

जर्मन संस्था पर भी सवाल

जर्मनी ने 2023 में इन तोतों को भारत भेजने की अनुमति "सद्भावना" में दी थी. लेकिन बाद में जब ब्राजील से बात की गई तो उन्होंने उसकी इजाजत नहीं दी. ब्राजील ने यह भी बताया कि पिछली बार भी उनसे बगैर पूछे यह स्थानांतरण हुआ था. अब यह मामला अदालतों में है और सीआईटीईएस की अगली बैठक में फिर से उठने वाला है. इस बीच यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भारत और वनतारा को होने वाले किसी भी निर्यात पर खास नजर रखी जाएगी.

लेकिन वनतारा की कहानी सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं है. यह अंबानी परिवार की चमक दमक का भी हिस्सा बन चुका है. अनंत अंबानी की सगाई और शादी से जुड़े कार्यक्रमों में इवांका ट्रंप से लेकर मार्क जकरबर्ग तक शामिल थे. खुद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2025 में यहां आकर शेर के बच्चों के साथ खेला, गैंडे और हाथियों को खाना देने वाले वीडियो भी खूब चर्चा में रहे और एक तस्वीर में तो मोदी ने इसी विवादित तोते को अपने हाथ पर बैठा रखा है.

अब क्या है स्थिति?

सुप्रीम कोर्ट की जांच ने फिलहाल वनतारा को ‘क्लीन चिट' दे दी है. लेकिन ब्राजील का कहना है कि भारत को अभी भी स्पिक्स मैकॉ संरक्षण कार्यक्रम से आधिकारिक तौर पर जुड़ना होगा. रॉयटर्स के अनुसार, अंबानी परिवार ब्राजील में अधिकारियों से बातचीत कर रहा है.

इतना तय है कि यह पक्षी, जो कभी विलुप्त घोषित हो चुका था, अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कानून और अरबों रुपये के साम्राज्य की कहानी का हिस्सा बन चुका है.

 

साहिबा खान साहिबा 2023 से DW हिन्दी के लिए आप्रवासन, मानव-पशु संघर्ष, मानवाधिकार और भू-राजनीति पर लिखती हैं.https://x.com/jhansiserani
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