वेनेजुएला और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने की संभावनाओं के बीच एक अमेरिकी दल शुक्रवार को काराकस पहुंचा था. वहीं, ट्रंप अमेरिकी तेल कंपनियों पर वेनेजुएला में कम से कम 100 अरब डॉलर निवेश करने का दबाव बना रहे हैं
मादुरो के बाद डेल्सी रोद्रिगेज देश की अंतरिम राष्ट्रपति बनी हैंतस्वीर: Mandel Ngan/Yuri Cortez/AFP
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जनवरी की शुरूआत में नाटकीय सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका और वेनेजुएला के बीच कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने की दिशा में शुरुआती कदम उठाए गए हैं. 3 जनवरी को अमेरिका, वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर न्यूयॉर्क ले आया था. अमेरिका ने मादुरो पर नशा तस्करी गिरोह का सरगना होने का आरोप लगाया है.
शुक्रवार, 9 जनवरी को वेनेजुएला ने कहा कि रिश्ते फिर से कायम करने की दिशा में उसने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इस बातचीत के लिए अमेरिकी राजनयिकों का एक दल और एक सुरक्षा दस्ता राजधानी काराकस आया हुआ था. अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला की राजधानी में अमेरिकी दूतावास को फिर से खोलने की संभावनाओं का शुरूआती जायजा लेने के लिए कराकस में था.
ट्रंप से कूटनीतिक बातचीत चाहती हैं अंतरिम राष्ट्रपति
मादुरो के दौर में वेनेजुएला की उप-राष्ट्रपति रहीं डेल्सी रोद्रिगेज अब अंतरिम राष्ट्रपति हैं. उनकी सरकार के मुताबिक, वेनेजुएला ने अमेरिकी सरकार के साथ "एक संभावित राजनयिक प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है," जिसका मकसद "दोनों देशों में राजनयिक मिशनों को फिर से स्थापित करना है." वेनेजुएला ने कहा कि वह भी अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना बना रहा है, हालांकि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई. वेनेजुएला के किसी भी अधिकारी को वॉशिंगटन दौरे के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय से प्रतिबंधों में छूट की जरूरत होगी.
शुक्रवार को रोद्रिगेज ने कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर ब्राजील, कोलंबिया और स्पेन के नेताओं के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी. रोद्रिगेज ने अमेरिकी कार्रवाई को "गंभीर, आपराधिक, गैर-कानूनी और अवैध आक्रामकता" करार दिया. हालांकि, उन्होंने बाद में यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ राजनयिक स्तर की बातचीत ही वेनेजुएला की रक्षा करने और "राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और प्रथम महिला सिलिया फ्लोरेस की वापसी सुनिश्चित करने" का सबसे बेहतर तरीका है. वेनेजुएला का कहना है कि अमेरिकी सैन्य हमले में 100 लोग मारे गए हैं. शुक्रवार को हुए ताजा विरोध प्रदर्शनों में, प्रदर्शनकारियों ने कराकस की सड़कों पर रैली निकाली और मादुरो की रिहाई की मांग की.
वेनेजुएला के बाद अब किसका नंबर
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ट्रंप का अमेरिकी तेल कंपनियों पर दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार कहा है कि दक्षिण अमेरिकी देश में अमेरिकी हस्तक्षेप के पीछे बड़ी वजहों में से एक, वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों तक पहुंच बनाना है. शुक्रवार को व्हाइट हाउस में आयोजित एक बैठक में ट्रंप ने बड़ी तेल कंपनियों से वेनेजुएला में निवेश बढ़ाने की बात कही.
चर्चा शुरू होते ही ट्रंप ने तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे चाहते हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के तेल उत्पादन को बढ़ाने के लिए कम से कम 100 अरब डॉलर निवेश करने के वादा करें. ट्रंप ने आगे कहा,"अगर आप लोग इसमें शामिल नहीं होना चाहते, तो बस मुझे बता दें, क्योंकि मेरे पास 25 लोग ऐसे हैं जो आज यहां नहीं हैं लेकिन आपकी जगह लेने के लिए तैयार हैं."
ट्रंप ने बताया है कि यूएस, निकोलस मादुरो को पकड़कर वेनेजुएला से बाहर ले आया. हूगो चावेज के निधन के बाद 2013 में मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने. माना जा रहा था कि मौजूदा कार्यकाल में वह कम-से-कम 2031 तक पद पर रहेंगे.
निकोलस मादुरो की पेशेवर जिंदगी मानो राजनीति के साथ-साथ शुरू हुई. साल 1962 में वह वेनेजुएला की राजधानी काराकस में पैदा हुए. उनके पिता एक यूनियन लीडर थे. स्कूली दौर में मादुरो का भी छात्र राजनीति से ताल्लुक रहा. वह हाई स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष थे.
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बस ड्राइवर और यूनियन लीडर
करियर के शुरुआती दिनों में मादुरो ड्राइवर थे. वह काराकस में बस चलाया करते थे. साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला की तत्कालीन पार्टी 'सोशलिस्ट लीग' भी जॉइन की. ब्रिटिश अखबार 'गार्डियन' के आर्काइव्स के मुताबिक, मादुरो जिस 'काराकस मेट्रो कंपनी' में बस चालक थे वहां यूनियन बनाना प्रतिबंधित था. यहां मादुरो ने एक अनौपचारिक यूनियन बनाया, जो कंपनी के शुरुआती लेबर सिंडिकेट्स में से एक था.
तस्वीर: Java
हूगो चावेज और उनका एमवीआर-200
रिवॉल्यूशनरी बोलीवेरियन मूवमेंट-200, हूगो चावेज के शुरू किए गए सैन्य अभियान का नागरिक रूप था. हूगो और उनके साथी सैन्य अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से एमवीआर-200 ग्रुप बनाया. फरवरी 1992 में, चावेज के नेतृत्व में ग्रुप ने तख्तापलट की नाकाम कोशिश की. चावेज को जेल हुई, लेकिन वह लोकप्रिय होते गए.
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एमवीआर-200 और मादुरो
हूगो चावेज की मुहिम 'बोलीवारियानिजम' भी लोकप्रिय होती गई. यह दक्षिणी अमेरिकी स्वतंत्रता अभियान में मुख्य भूमिका निभाने वाले सिमोन बोलीवर से प्रेरित थी. 1990 के दशक के शुरुआती सालों में मादुरो भी एमवीआर-200 के सदस्य बन गए. ये लोग हूगो को जेल से छुड़वाने के लिए अभियान चलाया करते थे.
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मूवमेंट ऑफ दी फिफ्थ रिपब्लिक
जेल से छूटकर, साल 1997 में हूगो चावेज ने 'फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट' (एमवीआर) नाम की एक पार्टी बनाई. इसमें मादुरो ने भी सहयोग दिया. हूगो ने 1998 के चुनाव में हिस्सा लिया और 56 फीसदी वोट जीतकर राष्ट्रपति बन गए. साल 1999 में मादुरो को संविधान सभा में चुना गया. इस असेंबली पर देश के लिए नया संविधान बनाने का दायित्व था.
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हूगो चावेज ने मादुरो को बनाया विदेश मंत्री
साल 2000 में मादुरो नेशनल असेंबली में चुने गए. इसके स्पीकर भी रहे. फिर 2006 में हूगो ने उन्हें विदेश मंत्री बनाया. खबरों के मुताबिक, विदेश मंत्री रहते हुए मादुरो ने एक सम्मेलन के दौरान तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री कोडोंलिजा राइस को 'हिपोक्रैट' बताया था. साल 2012 में हूगो ने उन्हें उपराष्ट्रपति भी चुना. उन दिनों हूगो की सेहत ठीक नहीं थी, उन्हें कैंसर था.
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हूगो ने बढ़ाया मादुरो का नाम
कैंसर के अपने ऑपरेशन के बाद, दिसंबर 2012 में हूगो ने अगले राष्ट्रपति के तौर पर मादुरो के नाम की अनुशंसा की. टीवी पर प्रसारित अपने भाषण में हूगो ने जनता से कहा कि वे निकोलस मादुरो को अपना राष्ट्रपति चुनें. फिर 5 मार्च 2013 को मादुरो ही थे, जो हूगो के निधन की सूचना जनता को देने आए. हूगो के देहांत के बाद फौरी तौर पर मादुरो को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया.
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अप्रैल 2013 में चुनाव जीतकर बने राष्ट्रपति
अप्रैल 2013 में चुनावी जीत के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने. हालांकि, जीत का अंतर बहुत मामूली था. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हेनरिके केप्रिलेस रादोंस्की ने फिर से वोटों की गिनती कराने की मांग की. मगर, देश की मुख्य न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि मतों की हाथ से दोबारा गिनती मुमकिन नहीं है.