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हिमयुग के रहस्य: आखिर क्यों विलुप्त गुफा शेर थे सबसे अनोखे?

निखिल रंजन रॉयटर्स
५ जून २०२६

आधुनिक शेरों की तुलना में काफी विशाल और मजबूत शरीर वाला गुफा शेर हिमयुग खत्म होने के साथ ही लुप्त हो गया. वैज्ञानिकों ने इसके जीनोम का अध्ययन कर इन शेरों के बारे में अहम जानकारियां निकाली हैं.

साइबेरिया में मिले शेर के बच्चे स्पार्टा का अवशेष
गुफा शेर के जीनोम का अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने अहम जानकारियां निकाली हैं तस्वीर: Love Dalen/Handout/REUTERS

पृथ्वी पर जीने वाले सबसे बड़ी बिल्लियों में एक नाम गुफा शेर का है. पश्चिमी यूरोप से लेकर पूरे साइबेरिया और फिर उत्तरी अमेरिका तक के इलाके में बड़े जीवों और संभवतया इंसानों तक का शिकार करने वाला यह जीव हिमयुग का अंत होने तक लुप्त हो गया. मुख्य रूप से इनके जीवाश्म गुफाओं में ही मिले हैं, शायद इसलिए इन्हें यह नाम मिला हालांकि ये सिर्फ गुफा में नहीं रहते थे.

आधुनिक शेरों की तुलना में गुफा शेर काफी ज्यादा बड़ा और मजबूत शरीर वाला था. ये ठंडे इलाकों में रहे और उत्तरी यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका के पश्चिमोत्तर में खुले घास के मैदानों और टुंड्रा को अपना घर बनाया. मैमथ स्टेप्पे के नाम से जाना जाने वाला यह इकोसिस्टम भी अब खत्म हो चुका है. इनका प्रमुख आवास यहीं था. यह आज के अफ्रीकी सवाना जैसा था लेकिन काफी कम तापमान के साथ.

जीनोम पर रिसर्च से मिली जानकारी

इसके जीनोम पर नई रिसर्च से पता चला है कि गुफा शेर आधुनिक शेरों से कैसे अलग था और इनमें अनोखी बात क्या थी. गुफा शेर का वैज्ञानिक नाम है पैंथेरा स्पेलाए. यह 14,000 साल पहले धरती से लुप्त हो गया. रिसर्चरों ने 12 गुफा शेरों के जीनोम पर रिसर्च किया है, यह सभी 17,000 साल से 148,000 साल पहले तक रूस, ऑस्ट्रिया और कनाडा के यूकॉन इलाके में रहे थे. रिसर्च में इनके जीनोम की 20 आधुनिक शेरों के जीनोम से तुलना की गई है. 

बर्फ में ढंके होने की वजह से साइबेरिया में मिले जीवाश्म काफी अच्छी तरह संरक्षित हैं तस्वीर: Love Dalen/Handout/REUTERS

गुफा शेरों के डीएनए मोटे तौर पर हड्डियों और दांतों से निकाले गए हैं हालांकि साइबेरिया में बर्फ में दबे कुछ शेर के बच्चों के नर्म ऊतक से भी डीएनए निकाल कर रिसर्च किया गया है. साइबेरिया की ठंडी जलवायु ने इन प्राचीन जीवों के अवशेष को सुरक्षित रखा. इनमें से एक मादा है स्पार्टा. हिमयुग के जो बेहतरीन जीवाश्म मिले हैं उनमें एक यह भी है.

आधुनिक शेरों से एकदम अलग

यह रिसर्च स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और स्वीडिश म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के रिसर्चरों के सहयोग से बने सेंटर फॉर पैलेयोजेनेटिक्स ने किया है. सेंटर से जुड़े इवॉल्यूशनरी जेनेटिसिस्ट लोव डेलेन का कहना है, "हम दिखाते हैं कि गुफा शेर आधुनिक शेरों के हिमयुग संस्करण भर नहीं थे, बल्कि एक बिल्कुल अलग विकासवादी वंश का प्रतिनिधित्व करते थे." लोव डेलेन इस रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखक हैं जो सेल जर्नल में छपी है.

रिसर्च ने दिखाया है कि दोनों प्रजातियों का विकासवादी वंश करीब 17 लाख साल पहले हिमयुग काल के दौरान ही अलग हो गया. हर प्रजाति के जेनेटिक गुण अलग थे और उसने उन्हें अलग आवासों और व्यवहारों के लिए तैयार किया. ये जेनेटिक अंतर उनके विकास, दृष्टि, दिमाग की गतिविधि और परिसंचरण के विकास से जुड़े थे. 

वेल्स की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के इवॉल्यूशनरी जेनेटिसिस्ट डेविड स्टैन्टन भी रिसर्च रिपोर्ट के प्रमुख लेखकों में हैं. उनका कहना है, "गुफा शेर पूरी तरह से शीर्ष शिकारी था, और इस तरह से उसकी काफी अहम और असरदार इकोलॉजिकल भूमिका थी. वे सबसे ज्यादा विस्तृत इलाके में फैले मांसाहारी थे."

वैज्ञानिकों ने लिए हड्डियों और दांतों के साथ ही नर्म त्वचा से भी डीएनए के नमूने निकाले हैं तस्वीर: STR/Reuters

उनके संभावित शिकारों में रोएंदार मैमथ के साथ ही रोएंदार गैंडे, हिरण, रेंडियर, घोड़े और भैंसे थे. मैमथ में संभवतया वे बच्चों और बूढ़ों का शिकार करते थे. आधुनिक शेर उत्तर की तरफ इतना आगे के इलाकों में नहीं गया जो गुफा शेर की जागीर थी. हालांकि रिसर्च ने दिखाया है कि दोनों प्रजातियां एक दूसरे के संपर्क में आई थीं. खासतौर से हिमयुग के ठंडे हिस्से में जब महाद्वीपीय बर्फ की चादर फैल रही थी और स्टेप्पे टुंड्रा के विस्तार की वजह से गुफा शेर दक्षिण की ओर आए और उनके आवास एक दूसरे की सीमा के पार चले गए.

स्टैंटन का कहना है, "इन प्रजातियों के बीच अंतरप्रजनन में जलवायु ने अहम भूमिका निभाई." रिसर्चरों का कहना है कि यह अंतरप्रजनन मुमकिन है कि आधुनिक ईरान जैसे इलाकों में हुआ होगा. इस इलाके में कभी शेरों की बड़ी आबादी थी लेकिन अब यह मोटे तौर पर अफ्रीका में सिमट गए हैं.

इंसानों का शिकार

हिमयुग के बाद के दौर में इन इलाकों में इंसान भी पहुंचा था. डेलेन का कहना है, "भले ही इस बात के स्पष्ट सबूत नहीं हैं कि गुफा शेरों ने इंसानों का शिकार किया लेकिन इस बात कि प्रबल संभावना है कि वे कभी कभी उनका शिकार करते थे. गुफा चित्रों में देखा जा सकता है कि हिमयुग के मानव इन शेरों को अच्छे से जानते थे. उन्हें बड़ी सटीकता से दिखाया गया है और उनके गर्दन पर आधुनिक शेरों की तरह बाल नहीं थे." इन इलाकों में रहने वाले उस समय के दूसरे शिकारी जीवों में भेड़िया, गुफा लकड़बग्घा, भूरे भालू, गुफा भालू और तलवार जैसे दांतों वाली बिल्ली होमोथेरियम शामिल हैं.

कुत्ते बिल्ली की तरह पलते शेर

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हिमयुग के आखिर में बढ़ने तापमान ने इन शेरों के लुप्त होने में भूमिका निभाई. उसी वक्त इंसानों के शिकार या दखल ने इन जीवों या वनस्पतियों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं. स्टैंटन के मुताबिकस "हिमयुग के आखिर में दूसरे जीवों की तरह ही गुफा शेर भी जलवायु बदलने और इंसानी आबादी का घनत्व बढ़ने से दबाव में थे. उस वक्त बड़े पैमाने पर वहां जीव लुप्त हुए और गुफा शेर भी उसी पैटर्न में शामिल थे. हालांकि इसकी क्या वजह थी यह हम पूरी तरह से नहीं समझ सके हैं."

निखिल रंजन निखिल रंजन एक दशक से डॉयचे वेले के लिए काम कर रहे हैं और मुख्य रूप से राजनैतिक विषयों पर लिखते हैं.
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