जानिए, अमेरिका में मध्यावधि चुनावों की प्रक्रिया और इनकी अहमियत
३० अक्टूबर २०२६
3 नंवबर 2026 को अमेरिकी मतदाता, मध्यावधि चुनाव के लिए वोट डालेंगे. इन चुनावों के नतीजे, राष्ट्रपति पद का फैसला नहीं करेंगे, लेकिन ये जरूर बताएंगे कि अमेरिकी नागरिक, राजधानी वॉशिंगटन की संसद में किन प्रतिनिधियों को देखना चाहते हैं.
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों की तरह मध्यावधि चुनाव भी हर चार साल में होते हैं. यह चुनाव, राष्ट्रपति के ठीक आधे कार्यकाल के दौरान होते हैं. मध्यावधि चुनावों के जरिए अमेरिकी मतदाता, कांग्रेस कही जाने वाली अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधि चुनते हैं. इन चुनावों के दौरान कुछ प्रांत अपने गर्वनर भी चुनते हैं. इन चेहरों के फैसला तो बैलेट बॉक्स से होगा, लेकिन मतदाताओं के जेहन में सिर्फ यही मुद्दे नहीं हैं.
जे मिलेस कोलमन, वर्जीनिया यूनवर्सिटी के सेंटर फॉर पॉलिटिक्स में चुनाव विश्लेषक है. मध्यावधि चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि ये "अक्सर राष्ट्रपति और सत्ताधारी पार्टी को लेकर जनमत संग्रह" जैसा है. अगर लोग खुश हैं तो राष्ट्रपति कार्यालय में पदासीन नेता बेहतर प्रदर्शन करता है. फिलहाल राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में रिकॉर्ड गिरावट दिख रही है.
मध्यावधि चुनावों में क्या चुनते हैं अमेरिकी?
अमेरिकी संसद के निचले सदन को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स कहा जाता है. दो साल के कार्यकाल वाले इन प्रतिनिधियों के लिए सभी 435 सीटों पर चुनाव होना है. हर सदस्य एक चुनावी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है. सीटें जनसंख्या के आधार पर तय की जाती हैं. इसी के चलते, व्योमिंग जैसे बड़े राज्य को कम आबादी के कारण निचले सदन में सिर्फ एक सीट मिली है. वहीं क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा होने के बावजूद न्यू जर्सी प्रांत के पास 12 रिप्रेजेंटेटिव्स हैं.
दूसरी तरफ अमेरिकी सीनेटर हैं, ऊपरी सदन के इन सांसदों का कार्यकाल छह साल का होता है. सीनेट में 100 सीटें हैं. हर प्रांत के लिए दो सीटें. इस तरह 50 प्रांतों की कुल 100 सीटें. जनसंख्या इन सीटों के निर्धारण में कोई भूमिका नहीं निभाती है. आम तौर पर 100 में से एक तिहाई सीटों के लिए दो साल में चुनाव होते हैं. 2026 के मध्यावधि चुनाव में सीनेट की 35 सीटों के लिए मतदान होना है. इस दौरान प्रत्येक राज्य में सीनेट के लिए मतदान नहीं होगा.
इनके अलावा, 36 प्रांतों में मतदाता अपना गर्वनर भी चुनेंगे. ज्यादातर राज्यों में गर्वनर का कार्यकाल चार साल का है. अमेरिका के संवैधानिक ढांचे के तहत, प्रांत कई अहम फैसले, जैसे गर्भपात कानून, शिक्षा और चुनावी प्रक्रिया पर अपने कानून बनाते हैं. प्रांत में डेमोक्रैट या रिपब्लिकन पार्टी की सरकार बनने का आम लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ता है.
अमेरिकी संसद में अभी बहुमत कैसा है?
फिलहाल राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल है. लेकिन अंतर काफी कम है. निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी के 218 सदस्य हैं और डेमोक्रैट्स के 214. एक निर्दलीय सदस्य आम तौर पर रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में वोट करता रहा है और दो सीटें खाली पड़ी हैं.
चुनाव विश्लेषकों को लग रहा है कि इन मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रैट्स, निचले सदन में बहुमत हासिल कर सकते हैं. अक्टूबर के आखिर में अमेरिकी न्यूज चैनल, सीबीएस से बातचीत में कोलमन ने कहा, "अगर डेमोक्रैट्स ने हाउस को नहीं लिया तो ये चौंकाने वाला होगा."
ऊपरी सदन, सीनेट में फिलहाल 53 रिपब्लिकन और 45 डेमोक्रैट सांसद हैं. दो स्वतंत्र सीनेटर अब तक डेमोक्रैट्स के पक्ष में ही मतदान करते आए हैं. अगर सीनेट में वोटिंग 50-50 होती है तब अमेरिकी उपराष्ट्रपति का वोट निर्णायक होता है. इसका मतलब है कि अगर ऐसी परिस्थितियां बनीं तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, निर्णायक भूमिका में आ जाएंगे.
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले, मध्यावधि चुनावों में मतदान का प्रतिशत कम रहता है. लेकिन इसके नतीजे, अगले कुछ बरसों की अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करते हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति के पास भले ही बहुत ज्यादा विशेषाधिकार हों, लेकिन संघीय स्तर की ज्यादातर नीतियों को अमेरिकी संसद की मंजूरी के बाद अमल में लाया जा सकता है.
अब तक संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत के चलते, ट्रंप की राह बहुत आसान रही है. लेकिन अगर डेमोक्रैट्स, दोनों सदनों या फिर किसी भी एक सदन में बहुमत हासिल कर सके तो ट्रंप के लिए घरेलू या विदेश नीति के मुद्दों में बदलाव करना मुश्किल होने लगेगा.
मध्यावधि चुनावों में क्या क्या दांव पर है?
निचले सदन में बहुमत हासिल करने के लिए विपक्षी दल, डेमोक्रैट्स को चार सीटें ज्यादा जीतनी हैं. ऐसा होते ही निचले सदन में उनके 218 नुमाइंदे हो जाएंगे. 435 में से कुछ ही सीटें ऐसी हैं जहां बेहद कड़े मुकाबले की संभावना है. इनमें आयोवा, वर्जीनिया और मोंटाना शामिल हैं.
दूसरी तरफ, टेक्सस प्रांत में सीनेट का चुनाव बेहद दिलचस्प हो चुका है. मौजूदा सर्वेक्षणों के मुताबिक, वहां डेमोक्रैट नेता जेम्स टैलेरिको, अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केन पैक्सटन के साथ कड़े मुकाबले में उलझे हैं. सीनेट में भी बहुमत के लिए डेमोक्रैट्स को, रिपब्लिकंस से चार सीटें ज्यादा जीतनी हैं. हो सकता है कि उनमें से एक टेक्सस हो. 1994 से अब तक वहां कोई डेमोक्रैट नेता नहीं जीता है. लेकिन इस बार टेक्सस में डेमोक्रैटिक उम्मीदवार टैलेरिको को, दिग्गज रिपब्लिकन बुश परिवार का समर्थन मिला है. अमेरिका के दो पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश, जॉर्ज बुश और उनके बेटे इसी परिवार से आते हैं.
गवर्नर चुनाव भी खासे दिलचस्प हैं. इस बार अमेरिका अपने इतिहास में पहली बार एक काली महिला को गर्वनर भी चुन सकता है. मिनीसोटा प्रांत में मुकाबला डेमोक्रैट नेता एमी क्लोबैशार और काली रिपब्लिकन उम्मीदवार लीजा डेमथ के बीच है. वहीं जॉर्जिया प्रांत में काली डेमोक्रैट उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम और रिपब्लिकन नेता रिक जैक्सन के सामने हैं.
मिनीसोटा में डेमथ की जीत मुश्किल लग रही है. क्लोबैशार वहां बीते दो दशकों से सीनेटर हैं. मतदाता, डेमथ के मुकाबले क्लोबैशार को ज्यादा जानते हैं. लेकिन जॉर्जिया में मुकाबला कांटे का दिख रहा है. ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक, वहां बॉटम के पास इतिहास रचने का अच्छा अवसर है.