जब जाबरीना को लिवर के आखिरी स्टेज के कैंसर का पता चला, तो उन्हें अपने छोटे बेटे एनो को सच्चाई बतानी पड़ी. माइंत्स की फ्लुस्टरपोस्ट एसोसिएशन की मदद से उन्होंने बीमारी पर खुलकर बात करना सीखा. उनकी कहानी दिखाती है कि मुश्किल वक्त में सच्चाई, सहारा और हिम्मत कितनी बड़ी ताकत बन सकते हैं.