जर्मन गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों में नशीली दवाओं से जुड़े अपराध करने वाले बच्चों की संख्या जितनी अब है, उतनी पहले कभी नहीं थी.
मिसाल के तौर पर दक्षिण-पश्चिमी राज्य बाडेन-वुर्टेमबर्ग में 2011 से 2015 के बीच स्कूलों में ड्रग्स से जुड़े अपराध तीन गुना हो गए हैं. 2012 में ऐसे 348 मामले दर्ज हुए थे जबकि 2015 में ये बढ़कर 939 हो गए. यही हाल सैक्सनी राज्य का है जहां मामले 42 से बढ़कर 109 पर पहुंच गए. जर्मनी के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य नॉर्थराइन वेस्टफालिया में ऐसे अपराध 443 से बढ़कर 897 हो गये हैं. राइनलांड-पलैटिनेट, लोअर सेक्सनी और हेसे में भी ऐसे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है.
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अगर बिना किसी निरीक्षण के ये चीजों लेते हैं तो इनकी लत लगने और कुछ स्थितियों में इनसे जान तक जाने का खतरा हो सकता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/F. Leonhardtतंबाकू उत्पादों में निकोटीन की लत सबसे आसानी से लगती है. स्मोकिंग करने पर सिगरेट का निकोटीन तेजी से फेफड़ों से होता हुआ दिमाग तक पहुंचता है. अमेरिकी रिसर्च के मुताबिक स्मोकिंग को आजमाने वाले दो तिहाई लोग अंतत: सिगरेट के लती हो जाते हैं.
तस्वीर: Fotolia/pfheonixx22कोकेन दिमाग में डोपामीन हार्मोन के काम में बाधा डालता है, जिससे एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संदेश पहुंचने में गड़बड़ होती है. जानवरों पर हुई रिसर्च के मुताबिक शरीर में कोकेन जाने पर डोपामीन का स्तर सामान्य से तीन गुना बढ़ जाता है. कोकेन के क्रिस्टल कोकेन के पाउडर से ज्यादा लती बनाने वाले होते हैं.
तस्वीर: Fotolia/NatUlrichशराब के दिमाग पर कई तरह के असर होते हैं. शराब दिमाग में डोपामीन के असर को 40 से 360 फीसदी तक बढ़ा सकती है. अमेरिका में शराब को एक बार चखकर देखने वालों में से 22 फीसदी जीवन के किसी मोड़ पर शराब पर निर्भर पाए गए.
तस्वीर: Getty Imagesहेरोइन दिमाग में डोपामीन के स्तर को 200 फीसदी तक बढ़ा देती है. गंभीर लत के अलावा इसके भयानक खतरे भी हैं, इसकी ज्यादा मात्रा जान भी ले सकती है. दुर्भाग्यवश हेरोइन नशा करने वालों के बीच खासी लोकप्रिय है.
तस्वीर: fotolia/Thomas Nपारंपरिक तौर पर इनका इस्तेमाल व्यग्रता और नींद ना आने की समस्या से निपटने के लिए किया जाता था. यह दवा दिमाग के कुछ हिस्से को कुछ समय के लिए निष्क्रिय कर देती है. ज्यादा खुराक जान तक ले सकती है. खासकर अगर इसे शराब के साथ लिया जाता है.
तस्वीर: Fotolia/Eugen Wais ज्यादातर मामले नशीली दवाएं रखने या खरीदने के हैं. और ऐसे मामलों में शामिल ज्यादातर छात्र 14 वर्ष से ज्यादा के थे. संघीय ड्रग कमिश्नर मार्लेने मोर्टलर ने कहा कि इन अपराधों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण समाज में नशीली दवाओं को कम करके आंकना है.
बावेरिया राज्य का गृह मंत्रालय मानता है कि नशीली दवाओं के इस्तेमाल को समाज ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहा है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, "ये दवाएं ऐसे युवाओं के बीच फैलाई जा रही हैं जो इंटरनेट पर सक्रिय हैं. दवाओं को ऐसी मजेदार चीज के रूप में पेश किया जा रहा है जिसका कोई खतरा नहीं है." साथ ही, दवाओं को खरीदने में आसानी भी प्रसार की एक वजह है. इंटरनेट के नेटवर्क पर ऐसी दवाएं आसानी से खरीदी जा रही हैं.
जानिए, कानूनी ड्रग्स के क्या क्या खतरे हैं
जर्मनी में मादक द्रव्यों और नशे पर वैकल्पिक रिपोर्ट के एक लेखक हाइनो श्टोएफर का कहना है कि प्रतिबंधों से कोई मदद नहीं मिल रही है. वैकल्पिक रिपोर्ट की मुख्य मांग है अल्कोहल और सिगरेट जैसे वैध ड्रगों पर प्रतिबंध लगाना.
तस्वीर: Murali Krishnanमादक द्रव्यों पर दूसरी गैर सरकारी रिपोर्ट का मकसद है नशेबाजी और उसकी रोकथाम के सिलसिले में हो रहे रिसर्च के नतीजों को व्यवहार में लागू करना. जर्मनी में सिगरेट बेचने की 400,000 ऑटोमैटिक मशीनें हैं. इन मशीनों के मामले में वह विश्व में अव्वल है.
तस्वीर: picture-alliance / OKAPIA KG, Germanyजर्मनी में सिगरेट और तंबाकू के सेवन से हर साल 100,000 लोगों की मौत होती है, जबकि 40,000 अल्कोहल की वजह से होने वाली बीमारियों से मरते हैं. श्टोएफर कहते हैं, "शराब पीने की वजह से होनेवाली छोटी मोटी बीमारियों, दुर्घटनाओं और हिंसक बर्ताव की तो बात ही छोड़ दें."
तस्वीर: picture-alliance/CPA Media/Pictures From Historyजर्मन सरकार के अनुसार देश में ड्रग्स लेने के कारण होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है. वैकल्पिक रिपोर्ट के लेखक सरकार से नशे पर निर्भर लोगों का ड्रग से ही इलाज करने पर जोर दे रहे हैं. ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में ड्रगविरोधी दवा नैलोक्सोन का इस्तेमाल हो रहा है.
तस्वीर: Fotolia/lassedesignenखतरनाक ड्रग क्रिस्टल मेथ के इस्तेमाल में पिछले साल कोई बदलाव नहीं आया. रिपोर्ट का कहना है कि चेक गणतंत्र की सीमा से लगे जर्मनी के दक्षिणी इलाकों में इसका बहुत ज्यादा प्रसार है. इस सिंथेटिक ड्रग का प्रसार रोकने के लिए उपभोक्ताओं को रोकथाम के कार्यक्रम में शामिल करना होगा.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Matthias Hiekelसिंथेटिक ड्रग क्रिस्टल मेथ की मांग बढ़ रही है. यह सिर्फ शक्तिवर्द्धक और जगाए रखने वाला ही नहीं बल्कि भारी शारीरिक क्षति पहुंचाने वाला भी है. श्टोएफर ने बताया कि इस बीच यह समाज के ऊंचे तबके के लोगों के बीच भी फैल चुका है.
तस्वीर: Behrouz Mehri/AFP/Getty Imagesभांग को कानूनी बनाने की मांग पर भी विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है. वैकल्पिक रिपोर्ट के लेखक इसे कानूनी बनाकर अपराध के आंकड़े को कम करने की बात कहते हैं. उनका कहना है कि भांग का कई रोगों की चिकित्सा में भी इस्तेमाल हो सकता है.
वैकल्पिक रिपोर्ट के अनुसार बड़े संगठनों द्वारा किए जा रहे व्यावहारिक अनुभवों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो रहा है. जर्मनी उन देशों में शामिल है जहां अभी भी सिगरेट और अल्कोहल उत्पादों का विज्ञापन वैध है.
तस्वीर: picture-alliance/dpaअब इस तरह की मशीनें बन रही हैं जो शराब पिए ड्राइवर को गाड़ी चलाने नहीं देती. भारत की रिसर्चर ज्योति प्रिया एक अल्कोहल इग्निशन लॉक बनाया है जिसका इस्तेमाल मोटरसाइकिलों के लिए होता है. यदि ड्राइवर ने अनुमति से ज्यादा पी रखी हो तो वह गाड़ी स्टार्ट नहीं कर सकता.
तस्वीर: Murali Krishnan मोर्टलर कहती हैं, "खासकर युवा लोगों को इसके बारे में समझाना प्राथमिकता है." कई राज्यों ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किए हैं. साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा केंद्र भी 'क्विट द शिट' नाम से एक प्रोग्राम चला रहा है जिसमें बच्चों को ड्रग्स के बारे में जागरूक किया जाता है. म्यूनिख की लुडविग माक्सिमिलान यूनिवर्सिटी की एफा होख बताती हैं कि रोकथाम के लिये कई कदम उठाए हैं लेकिन उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि ये कदम कितने प्रभावशाली हैं. जर्मनी में भांग के इस्तेमाल पर रिसर्च कर रहीं होख कहती हैं, "स्कूलों में इस बारे में चर्चा हुई. लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि चर्चा के बाद बच्चों में ये भावना पनपी कि एक बार करके देखते हैं? इसका हमें पता नहीं है."
वीके/एके (डीपीए)