ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा राज्य न्यू साउथ वेल्स एक बार फिर बाढ़ ग्रस्त है. इस साल ऐसा दूसरी बार हुआ है और 18 महीने में चौथी बार. ऑस्ट्रेलिया में बार-बार बाढ़ क्यों आ रही है?
ऑस्ट्रेलिया में बाढ़तस्वीर: Mark Baker/AP Photo/picture alliance
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ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा राज्य एक बार फिर बाढ़ झेल रहा है. न्यू साउथ वेल्स की राजधानी सिडनी और उसके आसपास के इलाके करीब चार दिन से जारी भारी बारिश के बाद लबालब भर गए और हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई. बड़ी संख्यों में लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा.
सिडनी से लगते पैरामाटा शहर के बीचोबीच एक परिवार के पांच लोगों को डूबने से बचाया गया जबकि एक व्यक्ति की बाढ़ के पानी में बह जाने से मृत्यु हो गई. केंद्रीय आपदा प्रबंधन मंत्री मर्रे वॉट ने कि कम से कम पांच क्षेत्रों की 23 नगरपालिकाओं में हजारों लोगों को राहत आपदा के लिए मदद राशि उपलब्ध कराने का ऐलान किया है. वॉट ने कहा, "इस भुगतान की कोई सीमा नहीं है. जहां जितनी मांग होगी और जो इसका हकदार होगा उसे उपलब्ध कराई जाएगी."
देश के मौसम विभाग ने कहा कि कई जगहों पर तो चार दिन में 800 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है. विभाग की अधिकारी जेन गोल्डिंग ने मीडिया को बताया, "इस वक्त जमीन पानी सोखने की स्थिति में नहीं है और सूखने में कुछ समय लगेगा. आज कुछ इलाकों में 100 मिलीमीटर तक बारिश होने की आशंका है."
इस साल की दूसरी बाढ़
दो हफ्ते भी नहीं बीते हैं जब न्यू साउथ वेल्स के शहर लिजमोर में उन सड़कों की मरम्मत पूरी हुई थी जो मार्च में आई भयानक बाढ़ से टूट गई थीं. मार्च की शुरुआत में लिजमोर और उसके आसपास के इलाकों में दो दिन में 670 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा था जिसके बाद पूरा शहर डूब गया था.
इस बारिश के बाद लिजमोर में जो बाढ़ आई थी वह अब तक के इतिहास की सबसे खतरनाक बाढ़ साबित हुई थी. कई जल स्रोतों में तो पानी 14 मीटर से भी ज्यादा भर गया था. तब हजारों लोग बेघर हो गए थे और उनमें से बहुत से तो अब तक वापस अपने घरों को नहीं जा पाए हैं. कई लोग आज भी अस्थायी निवासों में रह रहे हैं.
इससे पहले 2020 में भी न्यू साउथ वेल्स में कई जगह एक से दो बार बाढ़ आई थी और लोगों को घर छोड़ छोड़ जाना पड़ा था. तब भी सैकड़ों लोगों के घर बर्बाद हो गए थे. जाहिर है, लगातार दूसरे साल बाढ़ झेलने के बाद लोगों की सहनशक्ति भी सीमाएं तोड़ रही है और राजनेता भी इस बात पर गौर कर रहे हैं.
न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर (मुख्यमंत्री) ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि राज्य में बाढ़ की बारंबारता बढ़ ही है. राज्य की आपदा सेवा और बाढ़ राहत मंत्री स्टेफ कुक ने कहा, "कुछ समुदायों के लिए तो यह 18 महीने में दूसरी बाढ़ है. कई तस्वीरें, लोगों के घरों को देखना और उनकी जिंदगियों को उलट-पुलट देखना दिल तोड़ने वाला है."
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क्यों आ रही इतनी बाढ़?
लगातार चौथी बाढ़ झेलने के बाद न्यू साउथ वेल्स राज्य में यह सवाल आम तौर पर पूछा जा रहा है कि आखिर क्यों इतनी ज्यादा बाढ़ आ रही है. विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि जलवायु परिवर्तन ही इसके लिए जिम्मेदार है. मंत्री मर्रे वॉट ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा, "सच्चाई यह है कि हम बदलती जलवायु को जी रहे हैं और यदि कोई इस भ्रम में रहना चाहता है कि जलवायु परिवर्तन असलियत नहीं है वो जाहिर है इस वक्त आपका कार्यक्रम नहीं देख रहा है. ये ऐसी आपदाएं हैं जो बार-बार आ रही हैं और दिखाती हैं कि हमें क्यों जलवायु परिवर्तन को ज्यादा गंभीरता से लेना चाहिए और क्यों राज्य व केंद्र के स्तर पर इसके लिए ज्यादा निवेश की जरूरत है."
ऑस्ट्रेलिया की इन 7 चीजों ने बदल दी दुनिया
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के केंद्र से दूर एक अलग-थलग देश है. लेकिन वहां जो खोजें हुई हैं, उन्होंने दुनिया के केंद्र को भी बदलकर रख दिया. जानिए, वे 7 चीजें जो ऑस्ट्रेलिया ने खोजीं...
तस्वीर: imago/PHOTOMAX
वाई-फाई
आज दुनियाभर में लोग जिस वाई-फाई की तलाश में भटकते हैं, उस तकनीक को ऑस्ट्रेलिया ने ही दुनिया को दिया. 1992 में CSIRO ने जॉन ओ सलिवन के साथ मिलकर इस तकनीक को विकसित किया था.
तस्वीर: imago/PHOTOMAX
गूगल मैप्स
मूलतः डेनमार्क के रहने वाले भाइयों लार्स और येन्स रासमुसेन ने गूगल मैप का प्लैटफॉर्म ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ही बनाया था. उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई दोस्तों नील गॉर्डन और स्टीफन मा के साथ मिलकर 2003 में एक छोटी सी कंपनी बनाई जिसने मैप्स जैसी तकनीक बनाकर तहलका मचा दिया. गूगल ने 2004 में इस कंपनी को खरीद लिया और चारों को नौकरी पर भी रख लिया.
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ब्लैक बॉक्स फ्लाइट रिकॉर्डर
विमान के भीतर की सारी गतिविधियां रिकॉर्ड करने वाला ब्लैक बॉक्स ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डॉ. डेविड वॉरेन ने ईजाद किया था. 1934 में उनके पिता की मौत के विमान हादसे में हुई थी. 1950 के दशक में हुई यह खोज आज हर विमान के लिए अत्यावश्यक है.
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इलेक्ट्रॉनिक पेसमेकर
डॉ. मार्क लिडविल और भौतिकविज्ञानी एजगर बूथ ने 1920 के दशक में कृत्रिम पेसमेकर बनाया था. आज दुनियाभर के तीस लाख से ज्यादा लोगों के दिल इलेक्ट्रॉनिक पेसमेकर की वजह से धड़क रहे हैं.
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प्लास्टिक के नोट
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और देश की प्रमुख वैज्ञानिक शोध संस्था CSIRO ने मिलकर 1980 के दशक में दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट बनाया था. 1988 में सबसे पहले 10 डॉलर का नोट जारी किया गया. 1996 तक ऑस्ट्रेलिया में सारे करंसी नोट प्लास्टिक के हो गए थे.
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इलेक्ट्रिक ड्रिल
इस औजार के बिना दुनिया की शायद ही कोई फैक्ट्री चलती हो. 1889 में एक इंजीनियर आर्थर जेम्स आर्नोट ने अपने सहयोगी विलियम ब्रायन के साथ मिलकर इसे बनाया था.
तस्वीर: djama - Fotolia.com
स्थायी क्रीज वाले कपड़े
कपड़ों पर क्रीज टूटे ना, इसके लिए कितनी जद्दोजहद की जाती है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के CSIRO ने 1957 में एक ऐसी तकनीक ईजाद की थी जिसके जरिए ऊनी कपड़ों को भी स्थायी क्रीज दी जा सकती है. इस तकनीक ने फैशन डिजाइनरों के हाथ खोल दिए और वे प्लेट्स वाली पैंट्स और स्कर्ट बनाने लगे
तस्वीर: Fotolia/GoodMood Photo
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कुछ विशेषज्ञ अन्य कारणों को भी बार-बार आ रही बाढ़ के लिए जिम्मेदार मानते हैं. वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में फंक्शनल इकोलॉजी पढ़ाने वाले जानेमाने पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. इयान राइट कहते हैं कि यह बाढ़ इतनी भी असामान्य नहीं है.
डॉयचे वेले से बातचीत करते हुए डॉ. राइट ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया नया देश है. हमारे पास 1799 के बाद की ही जानकारी है लेकिन ऐसी बाढ़ उससे पहले भी आती रही हैं. बीच-बीच मे ऐसे दौर आते रहते हैं जबकि इस तरह लगातार बाढ़ आती हैं. 1816 से 1899 के बीच चार बार बाढ़ आई थी. फिर 1864 से 1870 के बीच भी एक के बाद एक करके कई बार बाढ़ आई. और फिर ऐसे लंबे दौर आते हैं."
डॉ. राइट ध्यान दिलाते हैं कि पश्चिमी सिडनी में 2020 की बाढ़ से पहले 1990 में बाढ़ आई थी और 31 साल तक एक लंबा दौर बाढ़ रहित था. वह कहते हैं, "1904 से 1960 तक कोई बड़ी बाढ़ दर्ज नहीं की गई थी."
साथ ही डॉ. राइट कहते हैं कि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि जलवायु परिवर्तन को खारिज किया जा सकता है. वह कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण जो मौसमी बदलाव आ रहे हैं वे निश्चित तौर पर एक अहम भूमिका निभा रहे हैं. वर्तमान बाढ़ की वजह वह कथित रेन बम को बताते हैं. वह कहते हैं, "इस वक्त जमीन समुद्र के मुकाबले ज्यादा ठंडी है इसलिए ईस्ट कोस्ट लो नाम का क्षेत्र बनता है जो एक साथ भारी से बहुत भारी बारिश लेकर आता है. हाल में वही हुआ है जिस कारण तीन-चार दिन में आठ सौ मिलीमीटर से ज्यादा पानी एक ही जगह पर बरस गया."
सिडनी यूनिवर्सिटी में हैजर्ड्स एंड डिजास्टर रिस्क साइंसेज के ऑनरेरी प्रोफेसर डेल डॉमिनी-हॉव्स ने एक लेख में इसका विश्लेषण किया है. ‘द कनवर्सेशन' वेबसाइट पर छपे इस लेख में उन्होंने लिखा है, "इस आपदा के पहले कारक हैं कुदरत और भूगोल. कई महीनों से न्यू साउथ वेल्स में बहुत ज्यादा बारिश और उसके कारण बाढ़ से परेशान है."
डॉमिनी हॉव्स कहते हैं कि इसके लिए इस इलाके का भूगोल भी जिम्मेदार है. वह कहते हैं, "हॉक्सबरी-नेपियन और लिजमोर में बाढ़ की वजह है भूगोल. दोनों ही इलाके कटोरे जैसे इलाकों में हैं. लिजमोर ऐसी जगह पर है जहां बहुत सारी नदियां मिलती हैं और बड़ी बाढ़ की वजह बन सकती हैं."
ऑस्ट्रेलिया ने लौटाईं चुराई गईं कलाकृतियां
ऑस्ट्रेलिया ने चुराई गईं 14 कलाकृतियां भारत को लौटाने का फैसला किया है. जानिए, क्या है इन कलाकृतियों की कहानी...
तस्वीर: The National Gallery of Australia
गुजराती परिवार
यह है गुरुदास स्टूडियो द्वारा बनाया गया गुजराती परिवार का पोट्रेट. पिछले 12 साल से यह बेशकीमती पेंटिंग ऑस्ट्रेलिया नैशनल गैलरी में थी. इसे भारत से चुराया गया था और गैलरी ने एक डीलर से खरीदा था. अब गैलरी इसे और ऐसी ही 13 और कलाकृतियां भारत को लौटा रही है.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
बाल संत संबन्दार, तमिलनाडु (12वीं सदी)
नैशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने इसे 1989 में खरीदा था. कुछ साल पहले गैलरी ने एक प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसके तहत चुराई गईं कलाकृतियों के असल स्थान का पता लगाना था. दो मैजिस्ट्रेट के देखरेख में यह जांच शुरू हुई.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
नर्तक बाल संत संबन्दार, तमिलनाडु (12वीं सदी)
यह मूर्ति खरीदी गई थी 2005 में. गैलरी ने ऐसी दर्जनों मूर्तियों, चित्रों और अन्य कलाकृतियों का पता लगाया कि वे कहां से चुराई गई थीं.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
अलम, तेलंगाना (1851)
इस अलम को 2008 में खरीदा गया था. ऑस्ट्रेलिया की गैलरी अब 14 ऐसी कलाकृतियां भारत को लौटा रही है.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
जैन स्वामी, माउंट आबू, राजस्थान (11वीं-12वीं सदी)
2003 में खरीदी गई जैन स्वमी की यह मूर्ति दो अलग अलग हिस्सों में खरीदी गई थी. गैलरी का कहना है कि उसके पास अब एक भी भारतीय कलाकृति नहीं बची है.
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लक्ष्मी नारायण, राजस्थान या उत्तर प्रदेश (10वीं-11वीं सदी)
यह मूर्ति राजस्थान या उत्तर प्रदेश से रही होगी. इसे 2006 में खरीदा गया था. नैशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया 2014, 2017 और 2019 में भी भारत से चुराई गईं कई कलाकृतियां लौटा चुकी है.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
दुर्गा महिषासुरमर्दिनी, गुजरात, (12वीं-13वीं सदी)
इस मूर्ति को गैलरी ने 2002 में खरीदा था. गैलरी ने कहा है कि सालों की रिसर्च, सोच-विचार और कानूनी व नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इन कलाकृतियों को लौटाने का फैसला किया गया है.
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विज्ञप्तिपत्र, राजस्थान (1835)
जैन साधुओं को भेजा जाने वाला यह निमंत्रण पत्र 2009 में गैलरी ने आर्ट डीलर से खरीदा था. गैलरी की रिसर्च में यह देखा जाता है कि कोई कलाकृति वहां तक कैसे पहुंची. अगर उसे चुराया गया, अवैध रूप से खनन करके निकाला गया, तस्करी करके लाया गया या अनैतिक रूप से हासिल किया गया तो गैलरी उसे लौटाने की कोशिश करेगी.
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महाराज सर किशन प्रशाद यमीन, लाला डी. दयाल (1903)
2010 में यह पोर्ट्रेट खरीदा गया था.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
मनोरथ, उदयपुर
इस पेंटिंग को गैलरी ने 2009 में खरीदा था.
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हीरालाल ए गांधी, (1941)
शांति सी शाह द्वारा बनाया गया हीरा लाल गांधी का यह चित्र 2009 से ऑस्ट्रेलिया की गैलरी में था.
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अनाम पोट्रेट, 1954
वीनस स्टूडियो द्वारा बना यह पोट्रेट 2009 में खरीदा गया था.
तस्वीर: The National Gallery of Australia
अनाम पोर्ट्रेट, उदयपुर
एक महिला का यह अनाम पोर्ट्रेट कब बनाया गया, यह पता नहीं चल पाया. इसे 2009 में खरीदा गया था.