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राजनीतिबांग्लादेश

हसीना और उनके परिवार पर कसता शिकंजा

१० सितम्बर २०२६

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बेटी सायमा वाजेद ने डब्ल्यूएचओ से इस्तीफा दे दिया है. परिवार की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.

सायमा वाजेद (बाएं) जनवरी 2014 में ढाका में मीडिया को संबोधित करती तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री और अपनी मां शेख हसीना के साथ
सायमा वाजेद (बाएं) जनवरी 2014 में ढाका में मीडिया को संबोधित करती तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री और अपनी मां शेख हसीना के साथतस्वीर: Altaf Qadri/AP Photo/picture alliance

भ्रष्टाचार के कई आरोपों से घिरी हसीना की पुत्री सायमा वाजेद ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है. साइमा का कार्यकाल वर्ष 2029 तक था. भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद बीते साल जुलाई में ही उन्हें अवैतनिक अवकाश पर भेज दिया गया था.

सायमा के खिलाफ अपने पद के दुरुपयोग के अलावा आर्थिक भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं. हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ जांच शुरू की थी. उसमें साइमा के खिलाफ भी कथित भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए थे.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि हसीना के राजनीतिक प्रभाव के कारण ही साइमा को उनके पद पर चुना गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, सायमा ने इससे पहले सूचना फाउंडेशन नामक संगठन की प्रमुख रहते हुए विभिन्न बैंकों से करीब 28 मिलियन डालर का अनुदान हासिल किया था.

दूसरी ओर, सायमा ने अपने इस्तीफे में तमाम आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है. हालांकि डब्ल्यूएचओ के हवाले छपी खबरों में कहा गया है कि औपचारिक रूप से उनको बर्खास्त करने की योजना बनी थी. इसकी भनक मिलने के बाद ही साइमा ने इस्तीफा देने का फैसला किया.

हसीना सरकार के पतन के बाद से बढ़ा बेटी का संकट 

अगस्त, 2024 में सत्ता से बेदखल होने वाली हसीना उसी समय से भारत में रह रही हैं. उनकी गैरमौजूदगी में ही बांग्लादेश की एक अदालत ने सामूहिक हत्याओं का दोषी ठहराते हुए उनको फांसी की सजा सुनाई है. हसीना ने कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए बांग्लादेश लौटने की बात तो कही है. लेकिन यहां मीडिया में सार्वजनिक बयानबाजी ने जहां तारिक रहमान सरकार को नाराज कर दिया है वहीं इसका असर भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों पर भी नजर आने लगा है. हालांकि भारत ने यह कहते हुए इससे पल्ला झाड़ लिया है कि उसका हसीना के बयानों से कोई लेना-देना नहीं है और वो इसका समर्थन नहीं करता.

हसीना के प्रत्यर्पण के सवाल पर तनातनी के कारण प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा भी खटाई में है. राजनयिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश ने प्रत्यर्पण को ही इस दौरे की अहम शर्त बताया है.

शेख हसीना के बयानों से बढ़ी दोनों देशों में तल्खी

भारत में रहने के दौरान हसीना के सार्वजनिक बयानों से दोनों देशों के आपसी संबंधों में तल्खी लगातार बढ़ रही है. बांग्लादेश सरकार इस मुद्दे पर कई बार आधिकारिक तौर पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी है. लेकिन भारत हर बार यह कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता रहा है कि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है. हसीना के प्रत्यर्पण का सवाल भी आपसी संबंधों की राह में रोड़ा बना हुआ है.

हसीना ने बीते महीने दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब आफ साउथ एशिया के एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया था. उसमें उन्होंने तारिक रहमान की सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि वो कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए बांग्लादेश लौटने को तैयार हैं.

उसी कार्यक्रम में अमेरिका में रहने वाले हसीना के पुत्र सजीब वाजेद 'जॉय' ने कहा था, "बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान बन गया है और यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है."

सजीब फिलहाल अमेरिका में रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी में जुटे हैं. वो अवामी लीग सरकार में सूचना व तकनीक सलाहकार रहे हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुई जांच में उनके खिलाफ भी अपराध और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए गए हैं.

क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में रोड़ा बन रही हैं शेख हसीना?

इधर, बांग्लादेश की नाराजगी की परवाह किए बिना हसीना के मीडिया से बातचीत का सिलसिला जारी है. इसी सप्ताह उन्होंने कई संस्थानों को इंटरव्यू दिया है. 'द वॉल' के बांग्ला संस्करण के साथ फोन पर बातचीत में उन्होंने बांग्लादेश लौटने की बात तो दोहराई है. लेकिन वैसी स्थिति में एयरपोर्ट पर ही हत्या की आशंका भी जताई है.

इस इंटरव्यू में हसीना ने तारिक रहमान सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं. रहमान की आलोचना करते हुए उनका कहना था कि वो अपने भारत दौरे के लिए शर्तें रख कर बांग्लादेश सरकार की तौहीन कर रहे हैं.

दूसरी ओर, रहमान सरकार ने हसीना और उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.

भारत ने हसीना के बयानों से पल्ला झाड़ा

भारत सरकार हसीना के बयानों से पल्ला झाड़ती रही है. उनके ताजा इंटरव्यू के बाद पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सदस्य हर्षवर्धन श्रृंगला ने फिर कहा है कि हसीना के बयान से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं है और वह इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी.

पश्चिम बंगाल में कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले में बुधवार को एक कार्यक्रम में उनका कहना था, "हसीना जो कह रही हैं, वह उनके और बांग्लादेश के बीच का मामला है. भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि उनके बयानों में उसकी कोई भूमिका नहीं है."

श्रृंगला ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं. आम लोगों के हित में इसे और बेहतर बनाना जरूरी है.

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क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हसीना भारत में रहते हुए लगातार बयानबाजी कर भविष्य की राह और जटिल बना रही हैं. अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ और कोलकाता के एक विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, "हसीना और उनके परिजनों की मुसीबतें लगातार बढ़ रही हैं. हसीना के बयानों ने बांग्लादेश की नाराजगी और दोनों देशों के आपसी संबंधों में कड़वाहट और बढ़ा दी है."

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक सरकारी कॉलेज में पढ़ाने वाली साजिदा रहमान (बदला हुआ नाम) डीडब्ल्यू से कहती हैं, "हसीना और उनके परिजनों के लिए भविष्य की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है. शायद हसीना ने मान लिया है कि भारत सरकार उनको प्रत्यर्पित नहीं करेगी. इसके साथ ही बांग्लादेश वापसी की स्थिति में वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को पीड़िता के तौर पर पेश करने की रणनीति पर बढ़ रही हैं. यही वजह है कि वो भारत में लगातार इंटरव्यू दे रही हैं."

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