जर्मनी में क्यों नहीं होते एयर कंडीशनर?
२६ जून २०२६
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में जब गर्मियों के मौसम में तेज गर्मी और उमस लोगों का जीना मुश्किल कर देती है, तब एयर कंडीशनर से निकलने वाली ठंडी-ठंडी हवा बड़ी राहत देती है. दूसरी तरफ यूरोप के ज्यादातर देशों में लोग अकसर कम बिजली खपत करने वाले आसान तरीके अपनाते हैं. जैसे खिड़कियों के पर्दे बंद कर दिए या पंखा चला लिया और फिर भी बात ना बनी तो ठंडा पानी पी लिया.
अमेरिकी ऊर्जा विभाग की मानें तो अमेरिका के लगभग 90 फीसदी घरों में एसी लगा हुआ है. जबकि यूरोप में मुश्किल से 20 फीसदी घरों में एसी होगा. हालांकि, अलग-अलग देशों के हिसाब से इस आंकड़ा में थोड़ा कम ज्यादा का फर्क हो सकता है. जैसे स्पेन में लगभग 50 फीसदी घरों में एसी है और जर्मनी में सिर्फ करीब 6 फीसदी घरों में एयर कंडीशनिंग है.
इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कुछ साल पहले तक यूरोप में, खासकर उत्तरी यूरोपीय देशों में इतनी गर्मी नहीं पड़ती थी कि लोगों को एसी की जरूरत पड़ जाए.
गर्मियां तो हमेशा से गर्म थी - अब ऐसा क्या बदल गया?
यूरोप में गर्मियों का मौसम हमेशा से गर्म रहा है लेकिन अब हालात पहले से कई ज्यादा गंभीर हो गए हैं. भीषण हीटवेव यानी कई दिनों तक लगातार पड़ने वाली जानलेवा गर्मी, जो बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और लोगों की सेहत को काफी नुकसान पहुंचाती है, वह अब धीरे-धीरे आम होती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल रिपोर्ट बताती है कि भीषण गर्मी की घटनाएं वैज्ञानिकों के जलवायु मॉडलों के अनुमान से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर पश्चिमी यूरोप में.
यूरोप में मौसम पर रिसर्च करने वाले संगठन ‘क्लीमामीटर' की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहा. इस साल जून में तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. अगर 20वीं सदी के आखिरी सालों से इसकी तुलना करें, तो इस साल जून में पड़ी गर्मी पिछले दशक से कहीं ज्यादा रही. क्लीमामीटर में काम करने वाले इटली के शोधकर्ता टोमासो अल्बर्टी कहते हैं, "बढ़ती गर्मी की वजह से लोगों के बीच ठंडक के लिए ज्यादा बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है.”
साल 2019 से 2024 के बीच जर्मनी में एयर कंडीशनर और कूलिंग यूनिट्स की मांग 75 फीसदी बढ़ गई है, जो कि अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया था. हीटिंग, वेंटिलेशन, कूलिंग और रेफ्रिजरेशन उद्योग से जुड़े संगठन यूरोवेंट ने भी हाल के सालों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है.
यूरोवेंट के उप-महासचिव स्टाइन रेनेबोग ने कहा कि यूरोप में गर्मी बढ़ने के बावजूद कई लोग अभी भी एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करने से हिचक रहे हैं. उन्होंने ईमेल लिखकर डीडब्ल्यू को बताया, "सोशल मीडिया पर गर्मी से बचने के तरीकों में आज भी कई बार एसी का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है.” उनके अनुसार, "बहुत से लोग अभी भी ठंडक या कूलिंग को एक लग्जरी मानते हैं.” जबकि तेज गर्मी लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन रही है. उन्होंने कहा, "यूरोप में हर साल गर्मी के कारण हजारों लोगों की मौत होती है.”
यूरोप के घर गर्मी की मार सहने और एसी लगाने के काबिल नहीं
ज्यादातर यूरोपीय लोग मानते हैं कि उनके घर उन्हें गर्मियों में ठंडक देने के लिए नहीं बने हैं. जर्मनी और उत्तरी यूरोप के ज्यादातर घर और अपार्टमेंट ऐसे बनाए गए हैं कि सर्दियों में ज्यादा से ज्यादा गर्मी अंदर टिकी रहे. जबकि गर्मियों में ज्यादा तापमान बढ़ें पर ये घर ठंडक बनाए रखने में उतने मददगार नहीं होते हैं. एक हालिया अध्ययन से पता चलता है कि अध्ययन में भाग लेने वालों में से लगभग आधे लोग अब गर्मी से बचने के लिए बेहतर पर्दे, छाया और इन्सुलेशन का सहारा ले रहे हैं. साथ ही, अब कई लोग एयर कंडीशनर लगाने के बारे में भी सोच रहे हैं.
बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के उप-निदेशक हेल्गे ब्रिंकमन ने सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट में कहा, "यूरोप में अब एसी का इस्तेमाल ना करने वाले दिन खत्म हो रहे हैं.” यूरोप के पुराने घरों में एसी लगाना आसान नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, "नई इमारतों और नए घरों में एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाना आसान होता है. लेकिन पुराने घरों की बनावट में बदलाव करके एसी लगाना कई ज्यादा मुश्किल है.” हालांकि, बड़े स्तर पर मरम्मत करने पर ऐसा जा सकता है. लेकिन यूरोप के कई पुराने और ऐतिहासिक शहरों में "इमारतों में बदलाव करने के लिए कानूनी नियम और उनकी सुंदरता को बनाए रखने की कोशिश करते हुए एसी लगाना मुश्किल हो सकता है.”
इसके अलावा, कई किराएदारों को अपने किराए के घरों में एसी लगाने की इजाजत नहीं होती है. कई बार कुछ जगहों पर घर के मालिक के नियम इसकी इजाजत नहीं देते, तो कई बार कुछ किराएदार किसी और के घर में बड़ा खर्च नहीं करना चाहते. इस वजह से जर्मनी, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में, जहां लगभग आधी आबादी किराए के घरों में रहती है. वह गर्मी से बचने के लिए कम प्रभावी तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
ठंडक अब बस एक सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट
कई यूरोपीय लोग एसी लगाने से इसलिए भी बच रहे हैं क्योंकि इसकी कीमत ज्यादा है. बढ़ती बिजली की कीमतों की वजह से गर्मी में घर को ठंडा रखना अब काफी महंगा हो गया है. यूरोपीय संघ के एक सर्वे के अनुसार, 38 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अपने घर को ठंडा रखने के लिए होने वाला खर्च नहीं उठा सकते.
इटली के शोधकर्ताओं ने 2020 में एक अध्ययन किया था. इस अध्ययन में बताया गया कि जलवायु परिवर्तनकी वजह से फ्रांस, स्पेन, स्वीडन और नीदरलैंड्स जैसे देशों में एसी की जरूरत बढ़ रही है. शोधकर्ताओं ने कहा कि जब ठंडक जरूरत बन जाएगी, तो इसका सबसे ज्यादा असर कम आय वाले लोगों पर पड़ेगा.
रेनेबोग ने कहा कि सर्दियों में घर को गर्म रखना एक जरूरत माना जाता है, लेकिन गर्मियों में घर को ठंडा रखने को अभी भी उतनी अहमियत नहीं दी जा रही है. उन्होंने कहा कि अब यह मानने की जरूरत है कि गर्मियों में घर को अपनी सुरक्षा के लिहाज से ठंडा न रख पाना भी एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या है.
क्या एयर कंडीशनर ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा सकते हैं?
पर्यावरण को लेकर बढ़ी चिंता की वजह से भी यूरोप में एसी का इस्तेमाल काफी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. पिछले 10 सालों में यूरोपीय संघ में घरों और दूसरी जगहों को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली लगातार बढ़ी है. खासकर साल 2020 के बाद इसमें ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है. यूरोप के सांख्यिकी कार्यालय यूरोस्टैट के नए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इमारतों को गर्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा थोड़ी कम हुई, जबकि इमारतों को ठंड करने में इस्तेमाल होनी वाली बिजली में पिछले साल के मुकाबले लगभग 15.3 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
दुनिया भर में हर साल इस्तेमाल होने वाली बिजली का करीब 10 फीसदी हिस्सा कूलिंग के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन इस बिजली का एक बड़ा हिस्सा आज भी कोयला, तेल और गैस जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों से बनता है. कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि एसी के इस्तेमाल से बाहर का तापमान कुछ डिग्री तक बढ़ सकता है, यानी गर्मी से बचने के लिए एसी चलाना, जिससे और गर्मी बढ़ सकती है.
एयर कंडीशनर के बजाय क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?
एयर कंडीशनर के बेहतर विकल्प भी मौजूद हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कूलिंग दे सकते हैं. जुलाई 2025 में हीट वेव के दौरान यूरोपियन एनर्जी एंड क्लाइमेट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के जेन-सेबास्टियन ब्रोक ने कहा कि नई इमारतों को इस तरह बनाया जा सकता है कि उन्हें ठंडा रखने के लिए कम ऊर्जा की जरूरत पड़े.
इसका मतलब हुआ कि इमारतों को ऐसे डिजाइन किया जाए, जिससे उसमें हवा आसानी से अंदर और बाहर आ-जा सके. साथ ही, ऐसी निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाए, जो गर्मी को ज्यादा देर तक अंदर जमा न रखें और धूप से बचाने के लिए खिड़कियों में शटर, छज्जे और बालकनी बनाई जाए. हीट पंप भी एक विकल्प हो सकता है. यह आमतौर पर महंगा होता है, लेकिन इससे घर को सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रखा जा सकता है. इससे कुल ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिल सकती है.
पेड़-पौधे और पानी के फुहारे भी शहरों को ठंडा रखने में मदद करते हैं. ये शहरों में बढ़ती गर्मी यानी 'अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट' को कम करने में मदद करत सकते हैं. कई शहर गर्मी से बचने के लिए लोगों के लिए ऐसी सुविधाएं बना रहे हैं. जैसे पेरिस, स्टॉकहोम और कोपेनहेगन जैसे शहरों में डिस्ट्रिक्ट कूलिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसमें ठंडे पानी और जमीन के नीचे लगी पाइपों की मदद से कई इमारतों को एक साथ ठंडा किया जाता है.
नई तकनीक, जैसे कुछ खास तरह के सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नए एसी को ज्यादा कामगार बनाने में मदद कर सकते हैं. जिससे एसी लगभग 40 फीसदी तक ज्यादा ऊर्जा बचा सकते हैं और कार्बन उत्सर्जन भी घटाने में मदद कर सकते हैं.