जर्मनी के पूर्वी राज्यों में क्यों सफल हो रही है एएफडी
१८ सितम्बर २०२६
जैसे-जैसे 20 सितंबर के राज्य चुनाव की तारीख करीब आ रही है, जर्मन राजधानी बर्लिन में वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके' और जर्मन चांसलर की पार्टी ‘सीडीयू' के बीच मुकाबला कड़ा होता जा रहा है. 18 सितंबर को दर्ज हुए चुनावी सर्वेक्षणों के मुताबिक, दोनों पार्टीयों में 0.3 पॉइट्स का अंतर है. इससे पहले हुए चुनावों के बाद अपना जनाधार बढ़ाती दिख रही ‘एएफडी' वहां तीसरे स्थान पर है.
लेकिन 16 लाख की आबादी वाला मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया सैक्सनी-अनहाल्ट के नक्शे कदम पर चलता दिख रहा है. वहां सबसे आगे जर्मनी दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर डॉयचलैंड (एएफडी) है और चार पॉइंट पीछे है, एसपीडी यानी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी. यह पार्टी केंद्र में चांसलर मैर्त्स के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का हिस्सा है.
1998 से एसपीडी इस राज्य की सत्ता में है. लेकिन 27 साल के शासन के बाद, मानुएला श्वेसिग के नेतृत्व वाली एसपीडी की स्थिति इस बार डगमगाती दिख रही है. यदि सर्वेक्षण सही साबित होते हैं, तो एसपीडी को सत्ता में बने रहने के लिए दो अन्य दलों के साथ गठबंधन करना पड़ेगा.
दूसरी ओर, एएफडी के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होगा क्योंकि मुख्यधारा की 'सेंट्रिस्ट' पार्टियों, हर बार की तरह इस बार भी एएफडी के साथ किसी भी गठबंधन से साफ इनकार कर रही हैं.
लेकिन हो सकता है कि वामपंथी पार्टी बीएसडब्ल्यू अलग रुख अपनाए, जैसा कि उसने सैक्सनी अनहाल्ट में किया. लेकिन इसके लिए बीएसडब्ल्यू को कम से कम पांच फीसदी वोट चाहिए होंगे.
सैक्सनी अनहाल्ट और मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी के रुख में अंतर क्यों
रॉस्टॉक यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर वोल्फगांग मूनो, दुनियाभर में दक्षिण पंथ के बढ़ते प्रभाव व उभार पर शोध करते हैं. वह जर्मन चुनाव को भी करीबी से देख रहे हैं. मूनो के मुताबिक, जहां सैक्सनी अनहाल्ट में एएफडी ने उग्र रुख अपनाया था, वहीं मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी की नीति "रूढ़िवादी और उदारवादी” है.
उन्होंने कहा, "केंद्रीय स्तर और सैक्सनी अनहाल्ट की एएफडी ब्रांच में कई लोग लाखों प्रवासियों को डिपोर्ट करना चाहते हैं, लेकिन यहां मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी सिर्फ ‘गैरकानूनी एलियन्स' को डिपोर्ट करना चाहती है.”
प्रोफेसर मूनो ने कहा, "लेकिन वे (एएफडी) इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना रहे हैं; वे अवैध प्रवासियों को अपराध और असुरक्षा से जोड़कर पेश करते हैं, इसलिए इस मामले में बहुत से लोग एएफडी का समर्थन करते हैं.”
एएफडी के 'रीमाइग्रेशन' पॉलीसी पर जर्मन राजनीतिक विशेषज्ञ मिषाएला कोए्फनर कहती हैं, "सिविल सोसाइटी ग्रुप्स को चिंता है कि इससे (रीमाइग्रेशन) ऐसा माहौल बनेगा जिसमें अलग दिखने वाले और विदेशी पृष्ठभूमि वाले लोगों को शक की नजर से देखा जाएगा. इसलिए, जब हम लोगों की चिंताओं की बात करते हैं, तो असल मुद्दा सिर्फ प्रोग्राम या अधिकारियों के बयानों का नहीं है, बल्कि माहौल बदलने का है. एएफडी ने उन लोगों का भी खुलकर स्वागत किया है जिनकी सोच कट्टर दक्षिणपंथी है. असल में, उनके एक क्षेत्रीय नेता, थुरिंजिया राज्य के नेता को कानूनी तौर पर 'नाजी' कहा जा सकता है.”
किसके समर्थन से बढ़ रही है एएफडी
जर्मनी के ज्यादातर पूर्वी राज्यों की तरह मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया ऐतिहासिक रूप से कभी विकसित नहीं था. यहां ज्यादातर खेती होती थी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, सोवियत संघ ने यहां कुछ फैक्टरियां तो बनाई, लेकिन 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ-साथ फैक्टरियां भी बिखर गईं और लोगों का रोजगार भी.
तब से लेकर अब तक, इस राज्य में कोई बड़ा उद्योग नहीं है. यहां के ज्यादातर लोग या तो टूरिज्म सेक्टर में हैं या खेती में, और दोनों ही क्षेत्रों में आय कम है.
प्रोफेसर मूनो ने बताया कि चीजें बदल रहीं हैं. हाल के सालों में यहां जर्मन नौसेना के लिए हथियारों का निर्माण शुरू हुआ है. लेकिन यह बस शुरू ही हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि यहां की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, लेकिन अब भी पिछड़ी हुई ही है.
एएफडी का वादा है कि वह मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया की इस स्थिति को बदलेगी.
प्रोफेसर मूनो के मुताबिक, आमतौर पर एएफडी के मुख्य समर्थकों में अधेड़ उम्र, कम या मध्यम शिक्षा वाले और किसी धर्म से ना जुड़े हुए पुरुष और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग शामिल हैं. लेकिन वक्त के साथ एएफडी ने अपनी पहुंच महिलाओं और बुजुर्गों तक भी बढ़ाई है.
"पहले उन्होंने (एएफडी) चरमपंथी लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया, फिर उन्होंने उन लोगों तक अपनी पहुंच बनाई जो आप्रवासन के खिलाफ हैं या जो नस्लवादी या ऐसे लोग हैं जो अप्रवासियों से डरते हैं. अब एएफडी उन लोगों को भी इकट्ठा कर रही है जो ग्रामीण इलाकों में रहते हैं और उपेक्षित महसूस करते हैं.”
इसके अलावा एक और तबका है जो एएफडी का समर्थन करता है. ये वे लोग हैं जो फ्रीडरिष मैर्त्स की मौजूदा सरकार से नाखुश हैं और उनपर भरोसा नहीं करते.
कुल मिलाकर मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में 20 सितंबर को होने वाले चुनाव एएफडी की बढ़ती लोकप्रियता और चांसलर मैर्त्स पर घटते भरोसे का एक और रिपोर्टकार्ड होगा. यह कार्ड बताएगा कि मैर्त्स 2029 के चुनावों तक अपना कार्यकाल पूरा कर सकेंगे या नहीं.