21 जनवरी को सड़कों पर होंगी भारत और अमेरिका की महिलाएं
१० जनवरी २०१७
बेंगलुरु में नए साल के जश्न के दौरान और उसके बाद महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं का विरोध करने के लिए 21 जनवरी को देशभर में प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है.
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द इंडिया प्रोटेस्ट नाम का यह आंदोलन सोशल मीडिया पर #IWillGoOut नाम से प्रचारित किया जा रहा है. इसी दिन यानी 21 जनवरी को वॉशिंगटन में मिलेनियम विमिन मार्च भी है. 20 जनवरी को अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे और 21 जनवरी को महिलाएं विरोध मार्च करेंगी. ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान कई महिला विरोधी टिप्पणियां की थीं.
देखिए, औरतों के लिए सबसे खतरनाक भारतीय शहर
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2015 के आंकड़े दिखाते हैं कि किस शहर में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध हुए. ये छह शहर सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुए.
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नंबर 6: दुर्ग-भिलाई, छत्तीसगढ़
दुर्ग और भिलाई दोनों नगरों को मिलाकर आंकड़े खतरनाक रहे. 10 लाख लोगों के इन शहरों में क्राइम रेट 16.4 रहा और रेप की दर रही 7.9.
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नंबर 5: नागपुर, महाराष्ट्र
राज्य की दूसरी राजधानी नागपुर में 2015 में रेप के 166 मामले दर्ज हुए और हिंसा 392. यानी रेप की दर रही 6.6 और हिंसक अपराधों की दर रही 15.7.
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नंबर 4: भोपाल, मध्य प्रदेश
राजधानी भोपाल में भी महिलाएं ज्यादा सुरक्षित नहीं हैं. 2015 में यहां 133 रेप हुए और हिंसा के 322 मामले दर्ज हुए. यानी रेप की दर 7.1 रही. हिंसक अपराधों की दर 17.1 रही.
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नंबर 3: ग्वालियर, मध्य प्रदेश
महिलाओं के खिलाफ रेप की दर यहां रही 10.4. हिंसक अपराधों की दर 17.1 रही. 2014 में भी यहां हालात कुछ अच्छे नहीं थे.
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नंबर 2: दिल्ली
भारत की राजधानी दिल्ली को कई बार लोग रेप कैपिटल भी बोलते हैं. आंकड़े भी खतरनाक हैं. यहां 1893 रेप केस हुए और हिंसा के 4563 मामले हुए. यहां रेप की दर रही 11.6 और हिंसा की 28.
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नंबर 1: जोधपुर
राजस्थान के किलों का शहर महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हुआ है. यहां रेप के 152 मामले सामने आए और हिंसा के 440 मामले दर्ज हुए जिनमें यौन हिंसा भी शामिल है. यानी रेप की दर रही 13.4 और हिंसा की 38.7.
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बेंगलुरु में 31 दिसंबर की रात हजारों लोगों की भीड़ ने दर्जनों महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया था. इस दौरान भारी संख्या में पुलिसबल मौजूद था लेकिन महिलाओं की सुरक्षा करने में नाकाम रहा. उसके बाद एक वीडियो आया जिसमें दो बाइक सवार एक युवती के साथ उसके घर के सामने ही छेड़खानी करते नजर आए जबकि कुछ लोग वहां उन्हें देख रहे थे. 31 दिसंबर की घटना पर कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं तो होती रहती हैं. एक अन्य नेता अबु आजमी ने इस घटना के लिए पश्चिमी संस्कृति पर चलतीं महिलाओं को ही दोषी ठहरा दिया. उन्होंने कहा कि छोटे छोटे कपड़े पहनना और देर रात घर से बाहर रहना ऐसी घटनाओं का कारण है.
इस पूरे नजरिये का विरोध करने के लिए 'द इंडिया प्रोटेस्ट' का आयोजन किया जा रहा है. एक ऑनलाइन प्रोजेक्ट सेफ सिटी की संस्थापक एल्सामारी डीसिल्वा कहती हैं, "बेंगलुरु जैसे शहर में भीड़भाड़ वाले इलाके ऐसा होना खौफनाक है. और फिर उन अधिकारियों की ओर से ऐसी प्रतिक्रियाएं तो और ज्यादा परेशान करती हैं जिन पर हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी है."
जानिए, रेप के लिए कहां कितनी सजा होती है
हाल ही में जर्मनी ने अपने बलात्कार विरोधी कानून को और सख्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं. जानिए, जर्मनी में और बाकी देशों में रेप के लिए क्या कानून है.
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जर्मनी
जर्मन कानून में अब तक रेप की कोशिश का विरोध न करने पर मामला रेप का नहीं बनता था. अब इस परिभाषा में बदलाव किया गया है. अब छूने, अंगों को टटोलने और दबोचने को भी यौन हिंसा के दायरे में लाया गया है.
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फ्रांस
फ्रांस में रेप का मतलब है ऐसी कोई भी यौन गतिविधि जिसमें दोनों की सहमति ना हो. वहां 20 साल तक की सजा हो सकती है. गाली-गलौज पर भी दो साल तक की सजा का प्रावधान है.
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इटली
1996 में इटली के रेप विरोधी कानून में व्यापक बदलाव किए गए. इसके बाद पत्नी के साथ जबर्दस्ती को भी रेप के दायरे में लाया गया. इसके लिए 10 साल तक की सजा हो सकती है.
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स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड में रेप तभी माना जाता है जब योनि संसर्ग हुआ हो. अन्य यौन हमलों को यौन हिंसा माना जाता है. इसके लिए 10 साल तक की जेल हो सकती है. 2014 के बाद शादी में भी रेप को अपराध माना गया है.
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स्वीडन
स्वीडन में जबरन किसी के कपड़े उतारने पर भी दो साल की कैद हो सकती है. मजबूर लोगों का यौन शोषण, मसलन सोते वक्त या नशे की हालत में या किसी तरह डरा कर सेक्स करने की कोशिश करना भी रेप है.
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अमेरिका
अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में रेप की परिभाषा अलग-अलग है. लेकिन वहां सेक्स में सहमति पर जोर दिया गया है. सेक्स से पहले स्पष्ट सहमति जरूरी है.
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सऊदी अरब
यहां रेप के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. हालांकि रेप को साबित करना बहुत मुश्किल है. जो महिलाएं रेप की शिकायत करती हैं अगर वे साबित ना कर पाईं तो उन्हें भी सजा हो सकती है.
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भारत
निर्भया कांड के बाद भारत में रेप विरोधी कानून में कई बदलाव किए गे हैं. अब रेप के लिए आमतौर पर सात साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. लेकिन विशेष परिस्थितियों में जैसे कि पुलिस हिरासत में रेप, रिश्तेदार या टीचर द्वारा रेप के मामले में 10 साल से उम्र कैद तक भी हो सकती है. अगर पीड़िता की मौत हो जाती है तो मौत की सजा भी हो सकती है.
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बेंगलुरु को दिल्ली के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. देश की राजधानी दिल्ली बलात्कार और अन्य महिला विरोधी अपराधों के मामले में सबसे ऊपर है. लेकिन यह सिर्फ शहरों की समस्या नहीं है. पूरा भारत बलात्कार नाम के इस महासंकट से गुजर रहा है. 2015 में देश में 34 हजार बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं. अधिकारी कहते हैं कि ज्यादातर मामले तो सामने ही नहीं आ पाते क्योंकि महिलाएं कथित अपमान के डर से चुप हो जाती हैं.
कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि 21 जनवरी को भारत के लगभग एक दर्जन शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर महिला अधिकारों पर बात करेंगे. मुंबई में इस प्रदर्शन को आयोजित कर रहीं डीसिल्वा कहती हैं, "इस देश में हम महिला विरोधी हिंसा पर उतनी भी बात नहीं करते जितनी जरूरी है. और इसे रोकने के लिए तो कार्रवाई तो बहुत ही कम करते हैं. हमें महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिष्ठानों पर दबाव बनाए रखना होगा."