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ईरान युद्ध में जेलेंस्की भेजेंगे मदद, लेकिन इन शर्तों पर

साहिबा खान एएफपी, रॉयटर्स
१५ मार्च २०२६

ईरान युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खाड़ी देशों और अमेरिका को मदद भेजने की पेशकश की, लेकिन बदले में उन्होंने वित्तीय मदद और तकनीक की मांग की है, जबकि ईरान ने इसे “मजाक” बताया है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की
तस्वीर: Leon Neal/Getty Images

ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को मदद देने की पेशकश की है. लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने साफ कह दिया है कि यह मदद बिना शर्त नहीं होगी. उन्होंने कहा है कि यूक्रेन ड्रोन पर अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे रूस से लड़ने के लिए आर्थिक सहायता और नई तकनीक की जरूरत है.

रूस के साथ चार साल से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ईरान के डिजाइन वाले "कामिकाजे” ड्रोन से लड़ने का बड़ा अनुभव हासिल किया है. यही अनुभव अब यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बना रहा है. दरअसल ‘शाहेद ड्रोन' कामिकाजे ड्रोन का ही एक प्रकार है जिसे ईरान और रूस इस्तेमाल करते हैं. इन्हें अमेरिका, भारत और यूक्रेन खुद भी इस्तेमाल करते हैं.

खाड़ी देशों में भेजे गए यूक्रेनी विशेषज्ञ

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने खाड़ी के चार देशों में अपने विशेषज्ञ भेजे हैं. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि हर टीम में कई दर्जन विशेषज्ञ शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये टीमें "स्थिति का विशेष आकलन करेंगी और दिखाएंगी कि ड्रोन-रोधी सुरक्षा प्रणाली कैसे काम करनी चाहिए.”

यूक्रेन का कहना है कि रूस के साथ युद्ध में उसने ईरान के "शाहेद” ड्रोन के खिलाफ काफी अनुभव हासिल किया है. रूस ने इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों में बड़े पैमाने पर किया है. इसलिए यूक्रेन का कहना है कि वह उन देशों की मदद करना चाहता है जो समान खतरे का सामना कर रहे हैं. यूक्रेन के मुताबिक उसके विशेषज्ञ कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में काम शुरू कर चुके हैं.

और फैलता जा रहा है ईरान और इस्राएल-अमेरिका के बीच युद्ध

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मदद के बदले पैसा और तकनीक की मांग

यूक्रेन का कहना है कि वह अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे सहयोगियों से मजबूत समर्थन चाहिए होगा. कीव लंबे समय से पश्चिमी देशों से वायु-रक्षा मिसाइलों और मॉडर्न तकनीक की मांग कर रहा है. यूक्रेन का मानना है कि रूस के लगातार हमलों के कारण उसे इन प्रणालियों की सख्त जरूरत है.

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर कई बार यूक्रेन से संपर्क किया है. लेकिन इस मामले में अलग-अलग बयान सामने आए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंपने फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि उनके देश को ड्रोन रक्षा के लिए 'यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है.' इसके बावजूद यूक्रेन अपनी विशेषज्ञता को एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर पेश कर रहा है, जिससे उसे आर्थिक सहायता और नई सैन्य तकनीक मिल सके.

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

यूक्रेन के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कीव में ईरान के दूत शाह्रियार अमूजेगर ने यूक्रेन की भूमिका को खारिज करते हुए कहा, "जहां तक खाड़ी देशों में ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन की कार्रवाइयों का सवाल है, हम इसे मूल रूप से मजाक और दिखावटी कदम से ज्यादा कुछ नहीं मानते.” उन्होंने यह भी कहा, "दुर्भाग्य से यूक्रेन अब प्रभावी रूप से हमारे साथ सीधे टकराव के चरण में प्रवेश कर चुका है; यानी उसने खुद को हमारे दुश्मनों के साथ खड़ा कर लिया है.”

अमूजेगर ने यह दावा भी किया कि ईरान रूस के आक्रमण में शामिल नहीं है और वह यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है. उनके मुताबिक कीव ने "पश्चिम से अधिक संसाधन हासिल करने के लिए ‘ईरान कार्ड' खेला है.”

ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब यूक्रेन ने "अपने पूरे क्षेत्र को ईरान के टारगेट में बदल दिया है.” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए इसे 'आत्मरक्षा' का अधिकार बताया. हालांकि यूक्रेन ने इस बयान को तुरंत खारिज कर दिया. यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉर्जी तिखी ने कहा कि यह दावा "बेतुका” है और यह "ऐसा है जैसे कोई सीरियल किलर अपने अपराधों को सही ठहराने के लिए आपराधिक संहिता का हवाला दे.”

साहिबा खान साहिबा 2023 से DW हिन्दी के लिए आप्रवासन, मानव-पशु संघर्ष, मानवाधिकार और भू-राजनीति पर लिखती हैं.https://x.com/jhansiserani
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